Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Nikhil Jain v. Rise Projects Pvt Ltd
Complaint No. Sect-39/1/NCR144/10/133762/2025
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-09-12
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश पीठ-2 आदेश अन्तर्गत धारा-39 पीठासीन अधिकारी st हरीश त्रिपाठी न्यायनिर्णायक अधिकारी / प्रत्यायोजित अधिकारी शिकायत संख्या- 5०८-३9॥/४८ारा 44/0/033762/2025 निखिल जैन (आवंटी) बनाम राइज प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (प्रमोटर) yw (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2076 की IR-8t में WET शक्तियों का अयोग करते हुए प्राधिकरण ERT ग्रतिनिधायन के सम्बन्ध में लिये गये निर्णय के आधार पर जारी कार्यालय ज्ञान WT-6304 /U.P.RERA/Admin./Del. /S- $7/2026-27 दिनाक 79.06.2026 के द्वारा ग्रतिनिधानित शक्तियों का TAT करते हुए अश्नयत शिकायत का निस्तारण किया जा रहा & |” प्रस्तुत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता (आवंटी) द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-39 के अधीन इस पीठ द्वारा उपर्युक्त शिकायत में पारित आदेश दिनांक 05.06.2026 में सुधार /संशोधन की प्रार्थना के साथ प्रस्तुत किया गया है। शिकायतकर्ता (आवंटी) की प्रार्थना को धारा-39 के अन्तर्गत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पुकार पर शिकायतकर्ता अनुपस्थित एवं प्रमोटर की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री पुनीत जैन उपस्थित हुए। शिकायतकर्ता (आवंटी) द्वारा कब्जा प्रदान किए जाने की तिथि में आवश्यक संशोधन किये जाने की प्रार्थना की गयी है। उक्त प्रार्थना के संबंध में विपक्षी की ओर से उक्त संशोधन का विरोध करते हुए कोई जवाब दाखिल एवं रेरा पोर्टल पर अलपोड नहीं किया गया है।
पत्रावली के अवलोकन से प्रकट होता है कि पीठ द्वारा उभयपक्षों को सुनने के पश्चात् आदेश दिनांक 05--06-2026 पारित किया गया है। पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 05-06-2026 के yadda भाग में कब्जे की तिथि दिनांक 48-05-2024 उभयपक्षों के मध्य निष्पादित पूरक विकय अनुबंध (Supplementary Agreement for Sale) में निर्धारित अवधि के आधार पर अंकित की गई है। उभयपक्षों के मध्य निष्पादित निष्पादित पूरक विकय अनुबंध (Supplementary Agreement for Sale) में कब्जे की निर्धारित तिथि 3.-42-2028 अंकित है। आदेश में दिनांक 33-42--2028 की तिथि अंकित किया जाना टंकण की त्रुटि का परिणाम नहीं है बल्कि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित विक्रय अनुबंध में सहमत निबंधनों एवं शर्तों के eee पर यह तिथि अंकित की गई है। विचारणीय प्रश्न vat aa Ve fh क्या Paget आदेश दिनांक 05-06-2026 में आवेदन के माध्यम से वांछित संशोधन किया जा सकता है। आदेश में संशोधन /परिर्वतन के सम्बन्ध में रेश अधिनियम, 2046 की धारा-39 में प्रावधान दिया गया है। धारा-39 के प्रावधानों को उद्धरत किया जाना समीचीन प्रतीत होता है। धारा-39 के प्रावधान निम्नवत् हैं:- धारा-39 प्राधिकरण aes से wee किसी यलती को छुधारने की gfe से इस अधिनियम को अधीन किये Te आदेश की तारीख से दो वर्ष की अवधि को भीतर किसी समय उसके द्वारा पारित किसी आदेश को PM कर सकेया और यदि पक्षकारों द्वारा उसके ध्यान में गलती लायी जाती है तो ऐसा संथोधन करेया। परन्तु ऐसा कोई संशोधन किसी आदेश को सम्बंध में जिसके विरुद्ध इस अधिनियम के अधीन अपील mega की गयी है. नहीं किया जायेया।
परन्तु यह और कि ग्राधिकरण आगिलेख से अकट किसी यलती का उधार करते समय इस अधिनियम B उपबन्धों के अधीन WRT TIP आदेश के साखान् APT का सशोधन नहीं करेया। उपरोक्त आदेश उभयपक्षों को सुनकर गुण-दोष के आधार पर पारित किया गया है। रेरा अधिनियम के अन्तर्गत प्राधिकरण को अपने आदेशों के पुनर्विलोकन का अधिकार प्राप्त नहीं है। धारा-39 के अन्तर्गत अभिलेख से प्रकट त्रुटियों को ही सुधारने / संशोधित करने का प्रावधान किया गया है। धारा-39 में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस धारा में प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए आदेश का कोई सारवान् भाग संशोधित / परिवर्तित नहीं किया जा सकता। उपर्युक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों से यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता (आवंटी) सुधार / संशोधन हेतु प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के माध्यम से गुण-दोष पर पारित आदेश के सारवान् भाग में परिवर्तन कराना चाहता है, जो रेरा अधिनियम की धारा-39 की परिधि के अन्तर्गत नहीं आता है। ऐसी दशा में प्रश्नगत प्रकरण में पारित आदेश दिनांक 05-06-2026 में संशोधन ,/सुधार किये जाने का कोई समुचित आधार नहीं है। वर्णित तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता (आवंटी) का प्रार्थना पत्र स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। अतः शिकायतकर्ता (आवंटी) द्वारा दिया गया संशोधन प्रार्थना पत्र खारिज किया जाता है। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। "AL it दाखिल दफ्तर हों। Zh; पट हरीश त्रिपाठी | (्यायनिर्णायक अधिकारी / प्रत्यायोजित अधिकारी) ७४५ उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण