Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Amit Jain and Soni Jain v. Sunshine Infraheights Private Limited
Complaint No. NCR169/04/118683/2024
- Decision date
- 2026-09-21
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 / 40/63 सपठित नियम-24 सपठित नियम-24 33-शिकायत संख्या:-]002२69/04/ 8683/2024 अमित जैन एवं सोनी जैन बनाम सनशाइन इंफ्राहाइट्स प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 24.09.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के मांध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री मालिनी उपस्थित हुई। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री विकास वर्मा उपस्थित Ey | उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। विपक्षी द्वारा अपना जवाब दिनांकित 07.09.2026 डाक के माध्यम से दाखिल किया गया है, तो रेरा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया है। विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वह अपना जवाब एक सप्ताह के अन्दर रेरा पोर्टल पर भी अपलोड करना सुनिश्चित करें। विपक्षी द्वारा अपने जवाब में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया है कि अभी यूनिट तैयार नहीं है और न ही अभी vat यूनिट / परियोजना का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त है। शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया गया कि विपक्षी द्वारा आज तक माननीय रेरा पीठ-03 द्वारा पारित आदेश दिनांक 02.09.2025 का अनुपालन नहीं किया गया है और न ही यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया गया है और न ही यूनिट की रजिस्ट्री कराई गई है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना-अएछ Lune Urbe मेरठ में यूनिट संख्या-डी-042 बुक कराई थी, जिसकी कुल कीमत के सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि रु.७,0,000 /- का विपक्षी का भुगतान किया गया है।
विपक्षी द्वारा समय से आवंटित यूनिट का कब्जा न दिये जाने और यूनिट की रजिस्ट्री न कराये जाने के कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत कब्जा एवं रजिस्ट्री हेतु माननीय रेरा पीठ-03 के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें माननीय पीठ-03 द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 02.09.2025 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- रा 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्तागण से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्तागण की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प Yow प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं | 2. विपक्षी शिकायतकर्तागण को दिनांक 04.04.2020 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि रु0 6,40,000,/ पर MCLRH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्तागण को वापस की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्तागण को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 4 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029// 4985 के अनुसार) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्तागण का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा।
2. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(za)(i) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी धटा॥रका प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 3. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 4... विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 02.09.2025 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38,/40,/63 के अन्तर्गत vat आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्था-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-03 द्वारा दिनांक 34.07. 2026 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:- उपरोक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए पत्रावली रेरा नियमावली 20I6 के नियम-24 में निहित शक्तियों के अन्तर्गत आदेश दिनांक 02.09.2025 के क्रम संख्या 4 के अनुसार Ww यूनिट के भौतिक कब्जा व रजिस्ट्री की कार्यवाही हेतु न््यायनिणयिक अधिकारी के समक्ष सुनवाई हेतु दिनांक 24.09.2026 के लिए संदर्भित की जाती है।
सचिव, उ.प्ररेरा, को निर्देशित किया जाता है कि पीठ द्वारा दिनांक 02.09.2025 को m3 के अन्तर्गत पारित आदेश के क्रम संख्या 2 के अनुसार जमा धनराशि रू. 6,40,000,//- पर विलम्बित अवधि का ब्याज हेतु वसूली प्रमाण पत्र जारी करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही कर, पत्रावली को सुनवाई की तिथि 2.09.2026 से पूर्व न्यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें| विपक्षी द्वारा आदेश का अनुपालन न किये जाने के कारण भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20r6 की धारा-63 के अन्तर्गत यथोचित अर्थदण्ड अधिरोपित किये जाने हेतु पत्रावली प्राधिकरण के समक्ष पेश की जाए। अन्तर्गत धारा-38,/40,63 की निष्पादन की कार्यवाही के दौरान माननीय सम्बन्धित रेरा पीठ द्वारा अपने आदेश का निष्पादन कराते हुए शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही यूनिट की रजिस्ट्री कराई जा सकी। यहाँ तक अकाउण्ट सेटल नहीं कराया गया और न ही विपक्षी द्वारा बकाया देयों का समायोजन किया गया और वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु श्रीमान सचिव, उ.प्र. रेरा को लिखा गया। तद्पश्चात मा. पीठ-03 द्वारा दिनांक 37.07.2026 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई। प्रश्नगत पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु प्रथम बार इस पीठ के समक्ष पेश हुई। विपक्षी द्वारा अपना जवाब डाक के माध्यम से दाखिल किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना,यूनिट को पूर्ण नहीं किया गया है और न ही विपक्षी के पास उक्त यूनिट /परियोजना का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त है।
क्योंकि विपक्षी द्वारा आज तक माननीय रेरा पीठ-03 द्वारा पारित आदेश दिनांक 02.09.2025 का अनुपालन नहीं किया गया है और विपक्षी के जवाब के अनुसार न तो परियोजना तैयार है और न ही यूनिट तैयार है और न ही विपक्षी के पास उक्त परियोजना / यूनिट का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त है। ऐसी स्थिति में विपक्षी द्वारा माननीय रेरा पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 02.09. 2025 का अनुपालन न करने के कारण धारा-63 भूनसम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम-2046 के अन्तर्गत अर्थदण्ड / पेनल्टी अधिरोपित किया जाना आवश्यक होगा। माननीय रेरा पीठ-03 द्वारा पारित आदेश दिनांक 02.09.2025 के क्रम में प्रस्तुत पत्रावली पीठ के आदेश के उल्लंघन की बाबत भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम-2046 की धारा-63 के अन्तर्गत अर्थदण्ड अधिरोपित हेतु प्राधिकरण के समक्ष पेश हो। आदेश की एक प्रति श्रीमान सचिव, रेरा को इस आशय से प्रेषित की जाये कि बा ऑन ¥ विपक्षी के विरुद्ध धारा-63 के अन्तर्गत अर्थदण्ड / पेनल्टी अधिरोपित करने हेतु प्रश्नगत प्रकरण प्राधिकरण के समक्ष पेश करें। शिकायतकर्ता यदि चाहे, तो विपक्षी द्वारा दाखिल जवाब के विरुद्ध अपनी आपत्ति एक सप्ताह के अन्दर रेरा पोर्टल पर अपलोड एवं भौतिक रूप से रेरा कार्यालय में दाखिल कर सकता है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रार्थना-पत्र आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत इस आशय का प्रस्तुत किया गया है कि यूनिट al ae कर, रिसीवर नियुक्त कर यूनिट का कब्जा दिलाया जाये तथा कम्पनी / विपक्षी के डायरेक्टर को गिरफ्तार कर सिविल कारागार में निरुद्ध कर आदेश का निष्पादन कराया जाये। उक्त प्रार्थना-पत्र के साथ में कोई शपथ-पत्र शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल नहीं किया गया है।
शिकायतकर्ता को निर्देशित किया जाता है कि वह स्पष्ट रूप से प्रार्थना-पत्र शपथ-पत्र के साथ प्रस्तुत करें, जिसमें इस बात का उल्लेख करें कि वह विपक्षी / कम्पनी के किस डायरेक्टर को और कितने दिनों के लिए सिविल कारागार में निरुद्ध कराकर आदेश का निष्पादन कराना चाहता है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रार्थना-पत्र में विपक्षी कम्पनी के प्रोजक्ट ऑफिस /» कॉर्पोरेट ऑफिस को भी कार्क कराने की प्रार्थना की गई है, लेकिन उनका कोई पता उल्लेख नहीं किया है। इस सम्बन्ध में शिकायतकर्ता स्पष्ट रूप से प्रार्थना-पत्र, शपथ-पत्र के साथ प्रस्तुत करें और उसमें प्रोजक्ट ऑफिस / कॉर्पोरेट ऑफिस का पता प्रमाण सहित उल्लेख करें | विपक्षी यदि चाहे, तो शिकायतकर्ता द्वारा आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत दाखिल प्रार्थना-पत्र के विरुद्ध अपनी आपत्ति एक सप्ताह के अन्दर रेरा पोर्टल पर अपलोड एवं भौतिक रूप से रेरा कार्यालय में दाखिल कर सकता है। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि यदि यूनिट को कुर्क नहीं किया जाता है, तो विपक्षी आवंटित यूनिट किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित » हस्तांतरित कर सकता है। अतः न्यायहित में यह आदेश पारित किया जाता है किः- “विपक्षी, शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट संख्या-डी-042 परियोजना-झआएश- Lune Urbe मेरठ के सम्बन्ध में नियम-24 की कार्यवाही के दौरान यथास्थिति बनाये रखेंगे और शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट को किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित,/आवंटित नहीं करेंगे और न ही किसी तृतीय पक्ष का हित सर्जित करेंगे |” पत्रावली अग्रिम सुनवाई हेतु दिनांक 42.40.2026 को पेश हो। Sala आर. पी. Rig | SS mt (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण