Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Usha Rani v. Project Category-Un-Register Ansal Landmark Townships Pvt. Ltd
Complaint No. NCR145/12/1202/2019
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2020-09-23
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
ae भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | पीठ-2 उपस्थिति:- श्री बलविन्दर कुमार, सदस्य क्रम शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण यूनिट to | धनराशि सं0 . टारा4502/202/209 | ऊषा रानी 8-000 2,67,383/- = NCRI45/0/274/209 | रोहताश सिंह | C-0050 | 4,3,575/- बनाम अंसल लैंडमार्क टाउनशिप्स प्रा.लि. (अपंजीकृत) शिकायतकर्ता wer रानी के साथ 4 अन्य शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन दोनों शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह दोनों शिकायतें विपक्षी की परियोजना से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत Ho ८ा२45/2/।202/209 ऊषा रानी अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के fag कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना में यूनिट सं०- B-000 बुक किया गया, जिसके लिए उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 24,67,383/- रूपये का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 23.02.2040 तक परियोजना पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, परन्तु अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि परियोजना में 40 वर्ष का विलम्ब है। | as स्थल पर कोई विकास कार्य नहीं हो रहा है। उनके द्वारा दिनां | |
23.02.2008 को प्लॉट बुक किया गया था और आवंटन पत्र दिनांक 8.07.2008 को हस्ताक्षरित किया गया, जिसमें विकासकर्ता द्वारा वादा किया गया था कि वह 24 माह में कब्जा दे देंगे, परन्तु अभी तक परियोजना में कोई विकास कार्य नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के flee कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में प्रतिउत्तर, प्लॉट ST अनुबन्ध, हस्तांतरण पत्र आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। विपक्षी की ओर से प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि विकासकर्ता कम्पनी राजस्व ग्राम डूण्डाहेड़ा जनपद गाजियाबाद की भूमि पर विकास कार्य कर रही है। शिकायतकर्ता को आवंटित wre संख्या B-0200 है जो कि रेरा प्राधिकरण में पंजीकृत नहीं है। उक्त प्लाट का विकास कार्य गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहित भूमि पर किया जाना था, जोकि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण नें दिनांक 04,/42,2043 को flea wos संख्या 40532 में विकासकर्ता कम्पनी को किया जा चुका है, तथा कम्पनी के द्वारा अंकन धनराशि रू0 22,62,42,426 //- भुगतान गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को पूर्व में किया था। दिनांक 30,/08 / 2043 के गाजियाबाद विकास
प्राधिकरण द्वारा भूमि पर भौतिक कब्जे हेतु पत्र प्रेषित किया गया। तदोपरान्त विकासकर्ता कम्पनी द्वारा लगभग विकासकार्यों को पूर्ण भी किया जा चुका है। दिनांक 44,/42,/2046 को माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा Re पिटीशन Wo 3354 / 2042 में यह आदेशित किया गया की उक्त भूमि अधिग्रहण निरस्त किया गया है, जिसके परिणाम स्वरूप शिकायतकर्ता के द्वारा उक्त प्लाट के परिप्रेक्ष्य में धनराशि का व्यय भूमि कय करने तथा विकासकार्यों में किया जा चुका है। उक्त प्लाट भू-सम्पदा (नियमन एवं विकास) नियमावली-2046 की धारा-2 की उपधारा-एच के अन्तर्गत होने के कारण भू-सम्पदा (नियमन एवं विकास) अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत नहीं है। इसके अतिरिक्त पीठ के Page 2 समक्ष सुनवाई के दौरान दिनांक 40.08.2020 को विपक्षी द्वारा कहा गया कि शिकायतकर्ता को वैकिल्पक यूनिट उपलब्ध करा दी जायेगी। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय किये गये :- 4... क्या शिकायतकर्ता कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु Gea शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 23.02.2040 तक परियोजना पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है।
दूसरी ओर विपक्षी का कहना है कि दिनांक 44,/42,/2046 को माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा Re पिटीशन Wo 3354/20i2 में यह आदेशित किया गया की vat भूमि अधिग्रहण निरस्त किया गया है, जिसके परिणाम स्वरूप शिकायतकर्ता के द्वारा vat प्लाट के परिप्रेक्ष्य में धनराशि का व्यय भूमि कय करने तथा विकासकार्यों में किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा पीठ के समक्ष कब्जा दिये गये के सम्बंध में यह कहा गया है कि शिकायतकर्ता को वैकिल्पक यूनिट उपलब्ध करा दी जायेगी। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा कब्जे का अनुतोष चाहा गया है। अतः यह उचित होगा कि विपक्षी, शिकायतकर्ता को अपनी किसी अन्य परियोजना में पूर्व में तय दरों पर समकक्ष इकाई का वैकिल्पक प्लॉट उपलब्ध कराकर शिकायतकर्ता को ओ. सी /सी.सी सहित कब्जा दें। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्लॉट केता अनुबन्ध 48. 07.2008 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जिसमें कब्जा दिये जाने के सम्बंध में कोई स्पष्ट प्राविधान नहीं है। मूल रूप से यह प्लॉट सुश्री नितिका कुमार को ai: s किया गया था, जिसके पश्चात दिनांक 44.40.2008 को Ww Page 3 हिं। ऊषा रानी के पक्ष में हस्तांतरित किया गया। यह we है कि ऊषा रानी से कोई अनुबन्ध निष्पादित नहीं किया गया है। ऐसे में प्लॉट केता अनुबन्ध दिनांक 48.07.2008 के अनुसार विलम्ब की गणना किया जाना उचित होगा, परन्तु उस अनुबन्ध में भी कब्जा दिये जाने के सम्बंध कोई स्पष्ट प्राविधान उललेखित नहीं है। ऐसे में यह कहना उचित नहीं होगा कि विपक्षी स्वेच्छानुसार शिकायतकर्ता को कब्जा देगें और कब्जे की तिथि अंतहीन होगी।
इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय के सिविल अपील संख्या 3533-3534 / 207 मैसर्स फार्च्यून इन्फास्ट्रक्चर्स एवं अन्य बनाम ट्रेवर डेलिमा एवं अन्य के प्रस्तर 45 में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि-: = 5.Moreover, a person cannot be made to wait indefinitely for the possession of the flats allotted to them and they are entitled to seek the refund of the amount paid by them, along with compensation. Although we are aware of the fact that when there was no delivery period stipulated in the agreement, a reasonable time has to be taken into consideration. In the facts and circumstances of this case, a time period of 3 years would have been reasonable for completion of the contract i.e., the possession was required to be given by last quarter of 204. Further there is no dispute as to the fact that until now there is no redevelopment of the property. Hence, in view of the above discussion, which draw us to an irresistible conclusion that there is deficiency of service on the part of the appellants and accordingly the issue is answered.
उपरोक्त माननीय उच्चतम न्यायालय के आर्ब्जैवेशन एवं विधि व्यवस्था के अनुसार फ्लैट के कब्जे हेतु किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय तक प्रतीक्षा नहीं करा सकता, जहाँ अनुबन्ध में कब्जे की तिथि नहीं दी गयी है वहाँ तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए 3 वर्ष का समयावधि इस कार्य को पूर्ण कराये जाने हेतु उचित समय माना है। प्रस्तुत प्रकरण में अनुबन्ध में निष्पादन की तिथि 48 07.2008 है। तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए इस प्रकरण में 4 वर्ष में hail’ को प्लाट का कब्जा दिया जाना उचित समयावधि था। Page 4 शिकायतकर्ता अपने प्लॉट का कब्जा दिनांक 48.07.2042 तक प्राप्त करने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा कब्जा नहीं दिया गया। यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसे में शिकायतकर्ता दिनांक 49.07.2042 से ओ.सी /सी.सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर विलंबित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि--
Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due _ to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह we है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Gar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। (५
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.0.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2 (ii) J प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः-- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील to 6649-50 /20I8 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
" the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent - Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ale. / MA. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो की तिथि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी. / सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि तक विलम्ब के लिए पाने के अधिकारी होगें। दिनांक 47.40.2048 को उ0प्र0 शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-740 / 8--3-48-65 विविध / 46 के द्वारा मॉडल wire की नियमावली के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है:- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"7.. Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों एवं परिस्थितियों के बाद उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी ae को पूर्ण करने हेतु दिनोक 25.03.2020 से 6 माह ( Page 7 अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही आवंटियों से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैः- आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की सहमति से पूर्व में तय दरों पर समकक्ष इकाई का वैकिल्पक प्लॉट अपनी परियोजना के | विकसित क्षेत्र में उपलब्ध कराकर दिनांक 34.42.2020 तक ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 49.07.2042 से ओ.सी /सी.सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाये। दूसरे शिकायतकर्ता के प्रकरण में अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। wifas—i9 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु देश में हुए लॉकडाउन एवं फोर्स मैज्योर को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25. 09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी। 3. विपक्षी ORI कब्जा ऑफर पत्र ओ.सी./सी.सी मिलने के उपरान्त जारी करना सुनिश्चित Hr | i विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2 (zai) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। राज्य सरकार अधिसूचित ब्याज @X¥MCLR+ प्रतिशत है।
5 इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस ओदश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी | इस आदेश का sorts 3उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण दिनांक:- 48,//09 / 2020