Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Kapil Kumar Goyal v. Saya Homes Pvt Ltd
Complaint No. NCR145/12/103749/2022
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- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
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Judgment text
wo yo भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04 आदेश अन्तर्गत धारा-3॥ उपस्थिति:-- टी० वेंकटेश, सदस्य | कम संख्या शिकायत संख्या ... शिकायतकर्तागण ] उटराब॥आ॥07492022 कपिल कुमार गोयल D पट्राबचा आ605748/2022 पंकज कुमार भारती बनाम साया होम्स प्राइवेट लिमिटेड शिकायतकर्ता कपिल कुमार गोयल के साथ or अन्य शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन दोनों शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह दोनों शिकायतें Saya Gold Avenue Phase 2 से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है।शिकायत संख्या :-]02२45/2/ 03749/2022, कपिल कुमार गोयल अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है।
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Saya Gold Aveune Phase 2 में यूनिट संख्या-- SG-02/705 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 75,68,525,/- रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 72,96,569/— रूपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना के निर्माण कार्य में जानबूझकर विलम्ब किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा माननीय न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष शिकायत संख्या- ADI/NCRI45/0/68605/202I योजित की गयी थी, जिसमें उनके द्वारा दिनांक 26.4:.202i को आदेश पारित करते हुए ब्याज /क्षतिपूर्ति दिये जाने हेतु विपक्षी को निर्देशित किया गया था, परन्तु विपक्षी द्वारा वर्तमान समय तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही ब्याज / क्षतिपूर्ति की धनराशि का भुगतान किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। a शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में पंजीकरण फॉर्म की प्रति, ई-मेल की प्रति, अनुबन्ध पत्र दिनांक 42.07.2045 की प्रति, मेंटेनेंस अनुबन्ध दिनांक 42.07.2045 की प्रति, खाता विवरण, ऋण पत्र, त्रिपक्षीय अनुबन्ध पत्र, माननीय न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेश की प्रति, वसूली प्रमाण पत्र दिनांक 08. 04.2022 की प्रति, एम.ओ-यू की प्रति, आंशिक पूर्णता प्रमाण पत्र दिनांक 23.07.2022 आदि की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी।
विपक्षी की ओर से ज़वाब दाखिल करते हुए अंकित किया गया है कि उनकी परियोजना Wr के अन्तर्गत पंजीकृत है। शिकायतकर्ता द्वारा war यूनिट वर्ष 2045 में बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उभयपक्ष के मध्य अनुबन्ध पत्र जुलाई 2045 निष्पादित किया गया। अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-42 के अनुसार यूनिट का कब्जा 06 माह के फिटआउट अवधि के साथ दिनांक 34.42.20i8 तक उपलब्ध कराया जाना था। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को सभी जरूरी प्रमाण पत्र प्राप्त करने के उपरान्त दिनांक 07.08.202 को ऑफर ऑफ पोजेशन पत्र जारी किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा पूर्व में माननीय न््यायनिर्णायक अधिकारी के संमक्ष शिकायत संख्या-- ADI/NCRI45/0/68605/202 योजित की गयी थी, जिसमें. सुनवाई करते हुए दिनांक 26.44.2024 को आदेश पारित किया गया तथा वसूली प्रमाण पत्र दिनांक 08.04.2022 को जारी किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 69,24,334 /-रूपये का भुगतान किया गया है। विपक्षी की परियोजना का निर्माण कार्य वायुप्रदूषण के कारण विभिन्न अवधियों में निर्माण कार्य पर लगे प्रतिबंध, कोविड--49 महामारी के कारण एवं विद्युत से सम्बंधित समस्याओं के कारण निर्माण कार्य बाधित रहा है। विपक्षी द्वारा विभिन्न तिथियों पर वांछित प्रमाण पत्र प्राप्त करते हुए ओसी हेतु दिनांक 24.09.2020 को आवेदन किया जा चुका है। रेरा कार्यालय आदेश दिनांक 6.09209 के अनुसार उनका ओ.सी आवेदन पत्र डीग्ड की श्रेणी में है। विपक्षी द्वारा दिनांक 3.04.2022 को सक्षम प्राधिकरण से ओसी प्राप्त किया जा चुका है। फोर्स गैज्योर अवधि दिनांक 5.06.20:8 से दिनांक 32.:2.20:9 तक शूज्य अवधि प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में Rr प्राधिकरण के अध्यक्ष महोदय को पत्र प्रेषित किया जा चुका है, जो अभी लम्बित है। रेरा प्राधिकरण द्वारा जारी कार्यालय आदेश दिनांक 2.2.2020 के. अनुसार विपक्षी की परियोजना की समयाविध का विस्तार किया गया है। विपक्षी द्वारा उक्त कथनों के समर्थन में विभिन्न न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों का भी उल्लेख किया गया है। wad कथन के आधार पर genre शिकायत को खारिज किये जाने, शिकायतकर्ता को कब्जा उपलब्ध कराये जाने हेतु 90 दिन की समयाविध प्रदान किये जाने तथा शिकायतकर्ता को निर्देशित किये जाने की वह अपनी बकाया धनराशि 29,47,274 /-रूपये का भुगतान करते हुए यूनिट का कब्जा प्राप्त करना सुनिश्चित करें।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में आंशिक पूर्णता प्रमाण पत्र दिनांक 43.04.2022, खाता विवरण, ऑफर ऑफ पोजेशन दिनांक 07.08.2024, रेरा कार्यालय आदेश की प्रति, ई-मेल की प्रति, न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेश की प्रति, वसूली प्रमाण पत्र दिनांक 08.04.2022 की प्रति, वांछित प्रमाण पत्र की छायाप्रतियां आदि दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये जाते हैं — 4. क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु ee बिन्दु vert इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टंस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनीं पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण विपरीत प्रभाव पड़ा है। इस सम्बन्ध में अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-39 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में उल्लेख किया गया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 04.:4.20i9 को सिविल Re पिटीशन संख्या--43029 / 4985 “एम.सी. मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य” में निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया।मार्च 2020 में aifas—i9 फैलने के कारण भी परियोजना के निर्माण कार्य में बुरा प्रभाव पड़ा। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-43029 / 4985 “एम. सी. मेहता बनाम भारत सरकार“ में पारित आदेश दिनांक 04.44.20:9 में निम्नलिखित निर्देश दिये है :-
With respect to demolition and construction activities wedirect that no demolition and construction activities take place inDelhi and NCR region. In case it is found that such activity isdone, the local administration as well as the municipalauthoritiesincluding the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissionersshallbe personally held responsible for all such activities. They haveto act in furtherance of the Court’s order and to ensure that nosuch activity takes place. We direct that construction, demolition and activities bestopped forthwith as well as garbage burning. In case, any personis found in construction and demolition activity and garbageburning in Delhi and NCR region, he/she shall be penalized. Anyperson is doing construction and demolition activity in violationof this order, shall be penalized with रि5.] Lac for such activity.For garbage burning he/she shall be penalized with Rs.5,000/- andbesides liable for violation of theorder passed by this Court tobe dealt with in accordance with law. इसके अतिरिक्त उपरोक्त सिविल अपील संख्या-3029 / 985 में पारित आदेश दिनांक 09.42.2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है :- In the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"{2. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon ‘Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in _ severe+/emergency category for 48 hours or more. i Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04.::.20i9 से दिनांक 44.02.2020) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक o9.i220I9 4 पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04.:4.20:9 से दिनांक 09.42.2049) एवं 33 दिन (6652) (दिनांक 40.2. 2049 से दिनांक 44.02.2020 तक Wa 6 बजे से सुबह 6 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। विपक्षी ऐसी दशा में कुल 35+33 = 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण लाभ पाने का अधिकारी है। समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त Goo Wr अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको. दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-4 निस््तारित किया जाता है। निस्तारण' बिन्दु संख्या-2 बिन्दु संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी?
अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना के निर्माण कार्य में जानबूझकर विलम्ब किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा माननीय न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष शिकायत संख्या- ADIJ/NCR45/0/68605/202 ara की गयी थी, जिसमें उनके द्वारा दिनांक 26.4.2024 को आदेश पारित करते हुए ब्याज/क्षतिपूर्ति दिये जाने हेतु विपक्षी को निर्देशित किया गया था, परन्तु विपक्षी द्वारा वर्तमान समय तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही ब्याज /क्षतिपूर्ति की धनराशि का भुगतान किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है दूसरी ओर विपक्षी द्वारा अपने जवाब में अंकित किया गया है कि विपक्षी द्वारा [कायतकर्ता को सभी जरूरी प्रमाण पत्र प्राप्त करने के उपरान्त दिनांक 07.08.2024 को ऑफर ऑफ पोजेशन पत्र जारी किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा पूर्व में 29 j
माननीय न््यायनिर्णयक अधिकारी के समक्ष शिकायत संख्या- ADI/NCR45/0/68605/202 योजित की गयी थी, जिसमें सुनवाई करते हुए दिनांक 26.44.2024 को आदेश पारित किया गया तथा वसूली प्रमाण पत्र दिनांक 08. 04.2022 को जारी किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 69,24,334 /-रूपये का भुगतान किया गया है। विपक्षी की परियोजना का निर्माण कार्य वायुप्रदूषण के कारण विभिन्न अवधियों में निर्माण कार्य पर लगे प्रतिबंध, कोविड-49 महामारी के कारण एवं विद्युत से सम्बंधित समस्याओं के कारण निर्माण कार्य बाधित रहा है। विपक्षी द्वारा विभिन्न तिथियों पर वांछित प्रमाण पत्र प्राप्त करते हुए ओ.सी हेतु दिनांक 24.09.2020 को आवेदन किया जा चुका है। रेरा कार्यालय आदेश दिनांक t6.0920I9 के अनुसार उनका ओ.सी आवेदन पत्र डीम्ड की श्रेणी में है। विपक्षी द्वारा दिनांक 43.0:.2022 को सक्षम प्राधिकरण से ओ.सी प्राप्त किया जा चुका है। फोर्स गैज्योर अवधि दिनांक 75.06.20:8 से दिनांक 34.72.20I9 तक शून्य अवधि प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में रेरा प्राधिकरण के अध्यक्ष महोदय को va प्रेषित किया जा चुका है, जो अभी लम्बित है। रेरा प्राधिकरण द्वारा जारी कार्यालय आदेश दिनांक 72.:2.2020 के अनुसार विपक्षी की परियोजना की समयाविध का विस्तार किया गया है। विपक्षी द्वारा उक्त कथनों के समर्थन में विभिन्न न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों का भी उल्लेख किया गया है। उक्त कथन के आधार पर genre शिकायत को खारिज किये जाने, शिकायतकर्ता को कब्जा उपलब्ध कराये जाने हेतु 90 दिन की समयाविंध प्रदान किये जाने तथा शिकायतकर्ता को निर्देशित किये जाने की वह अपनी बकाया धनराशि 79,47,24 /-रूपये का भुगतान करते हुए यूनिट का कब्णा प्राप्त करना सुनिश्चित करें।
पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल अनुबन्ध पत्र दिनांक 42.07.205 के प्रस्तर-]2 में प्राविधान दिये गये है, जिसके अनुसार दिनांक 30.06.2048 एवं 06 गाह की अनुग्रह अवधि अर्थात् 30.42.20:8 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा vat समयाविध में यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके अतिरिक्त फोर्स tele के मद में विपक्षी कुल os दिन की अवधि के लिए लाभ पाने का अधिकारी है। (जैसा कि निस्तारण बिन्दु संख्या- में वर्णित है|) जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50 /208 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent -- Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer श्र Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent ~ Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 30.:2.20:8 +68 दिन अर्थात् दिनांक 08.03.2049 से ओ.सी / सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय diva उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. "
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। प्रश्नगत प्रकरणों में शिकायतकर्तागण का मुख्य अनुत्तोष कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज वापस दिलाये जाने के सम्बन्ध में है। क्र के PIT) —ADI/NCRI45/0/68605/202I te कुमार गोयल बनाम मैसर्स साया प्रश्नगत प्रकरणों में शिकायतकर्ता (कपिल कुमार गोयल) द्वारा प्रश्नगत यूनिट सम्बन्ध में एक अन्य शिकायत (शिकायत होम्स wo fo” न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष योजित की थी, जिसमें न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा दिनांक 26.44.2024 को निम्न आदेश पारित किये गये # शिकायतकर्ता, विपक्षी से दिनाक 07.07.20- से ओ.सी /सी.सी के सा कब्जा ऑफर पत्र oI) होने के दिनांक तक अदा की गयी कुल धनराशि 72,0,372 /-रूपये में से (यदि कोई टैक्स लिया गया हो, तो उसे घटाकर अवशेष धनराशि) पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ब्याज दराशटा॥र२+ प्रतिशत की वार्षिक की दर पर प्रतिकर प्राप्त करेगा, क्योंकि ओ.सी /सी.सी के साथ विधिक कब्जा ऑफर पत्र जारी करने की तिथि अनिश्चित है। इसलिए इस आदेश के दिनांक तक का प्रतिकर विपक्षी 45 दिन में अदा करेंगे कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 aH परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज / प्रतिकर की गणना. नहीं की जायेगी। ओ.सी./सी.सी. के साथ कब्जा ऑफर पत्र जारी करने की तिथि अनिश्चित है (S| =>
विपक्षी आदेश के दिनांक के बाद से shah. /सी.सी. के साथ विधिक Hoar ऑफर पत्र जारी होने की तिथि तक का प्रतिकर, शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दिये जाने के समय अंतिम भुगतान में समायोजित करना सुनिश्चित करेगा। यदि उपरोक्त अवधि में प्रतिकर की धनराशि देय धनराशि से अधिक हो या शिकायतकर्ता द्वारा कोई धनराशि देय न हो तो विपक्षी प्रतिकर की घनराशि शिकायतकर्ता को कब्जा दिये जाने के दिनांक से 30 दिवस में वापस करेगा। यदि विपक्षी उस धनराशि को वापस न करें या अंतिम भुगतान में समायोजित न करें, तो शिकायतकर्ता को अधिकार होगा कि वह ओी. JOR के साथ कब्जा ऑफर पत्र की प्रतिलिपि उपरोक्त मद में प्रतिकर को प्राप्त करने हेतु अनुरोध पत्र के साथ प्राधिकरण में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें, जिससे आदेश की तिथि के बाद से ahah. / सी.सी. के साथ कब्जा ऑफर पत्र जारी होने की तिथि तक की अवधि पर उसे suse का प्रतिकर दिलाया जा सके। x) विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि Wi अधिनियम, 2076 की धारा Ai) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भीउसी दर से गणना की जायेगी। यदि विपक्षी द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि वह vo yo भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण में निष्पादन प्रकिया के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा way |"
शिकायतकर्ता (पंकज कुमार भारती) द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में एक अन्य शिकायत (शिकायत Wear)—ADI/NCRI45/0/6878/202" भारती बनाम मैसर्स साया होम्स प्रा.लि.” न््यायनिर्णायक अधिकारी के की थी, जिसमें न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा दिनांक 26.::.202 को निम्न आदेश पारित किये गये :- पंकज कुमार समक्ष योजित #” शिकायतकर्ता, विपक्षी से दिनाक 0.07.20I8 से ओ.सी /सी.सी के साथ कब्जा ऑफर पत्र जारी होने के दिनांक तक अदा की गयी कुल धनराशि 67,84,882 /-रूपये में से (यदि कोई टैक्स लिया गया हो, तो उसे घटाकर अवशेष धनराशि) पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ब्याज दराधटा॥२+ प्रतिशत की वार्षिक की दर पर प्रतिकर प्राप्त करेगा, क्योंकि ओ.सी /सी.सी के साथ विधिक कब्जा ऑफर पत्र जारी करने की तिथि अनिश्चित है| इसलिए इस आदेश के दिनांक तक का प्रतिकर विपक्षी 45 दिन में अदा करेंगे कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज / प्रतिकर की गणना नहीं की जायेगी। ओ.सी. / सी.सी. के साथ कब्जा ऑफर पत्र जारी करने की तिथि अनिश्चित है। विपक्षी आदेश के दिनांक के बाद से ओसी. /सी.सी. के साथ विधिक कब्जा ऑफर पत्र जारी होने की तिथि तक का प्रतिकर, शिकायतकर्ता को यूनिट
का कब्जा दिये जाने के समय अंतिम भुगतान में समायोजित करना सुनिश्चित करेगा। यदि उपरोक्त अवधि में प्रतिकर की धनराशि देय धनराशि से अधिक हो या शिकायतकर्ता द्वारा कोई धनराशि देय न हो तो विपक्षी प्रतिकर की धनराशि शिकायतकर्ता को कब्जा दिये जाने के दिनांक से 30 दिवस में वापस करेगा। यदि विपक्षी उस धनराशि को वापस न करें या अंतिम भुगतान में समायोजित न करें, तो शिकायतकर्ता को अधिकार होगा कि वह sie. JOM. के साथ कब्जा ऑफर पत्र की प्रतिलिपि उपरोक्त मद में प्रतिकर को प्राप्त करने हेतु अनुरोध पत्र के साथ प्राधिकरण में प्रस्तुत करना oa 0 सुनिश्चित करें, जिससे आदेश की तिथि के बाद से ओ.सी. /सी.सी. के साथ कब्जा ऑफर पत्र जारी होने की तिथि तक की अवधि पर उसे उपरोक्तमद का प्रतिकर दिलाया जा Wa | विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा Aza) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा MCLR+i प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलग्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भीउसी दर से गणना की जायेगी |” 02
उपरोक्त से यह स्पष्ट है कि नन््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा शिकायतकर्तागण् को विलम्बित अवधि के सम्बन्ध में ब्याज/क्षतिपूर्ति प्रदान की जा चुकी है और शिकायतकर्तागण द्वारा प्रश्वगत शिकायतों में भी कब्जा देने में हुए विलम्ब के आधार पर विलग्बित अवधि के सम्बन्ध में ब्याज दिलाये जाने का भी अनुरोध किया गया है वर्णित स्थिति यें Rata अवधि के were में ga als आदेश पारित किया जाना न्यायोबित न होगा। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पद (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 206 के अधीन दिनांक 47.40.20i8 को गू-सम्पदा (विनियगमन और विकास) (विकय /पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये flea sucer विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wee 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत 4
की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+I प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2०)0) में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 Peake किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश l. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.40.2023 तक ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय vero शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये। vo इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2076 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। 4. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। _ ba : ofA ID # 5 (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण