Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Namrata Singh v. Rise Projects Pvt Ltd
Complaint No. NCR145/11/114711/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-03-14
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) पीठासीन अधिकारी:- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य क्र.सं. शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण यूनिट संख्या कुल मूल्य जमा धनराशि | नल NCR45/03/8527/2024 | & एवं ईश्वर दत्त T-7, 805 28,54,70 /— | 22,56,080 /— वत्स 2. NCRI45/4/I47/2023 | नम्नता सिंह एवं आशीष T-4, 403 37,04,250 /- | 37,04,250 /- कुमार बनाम मैसर्स use प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड शिकायतकर्ता स्नेहलता एवं ईश्वर दत्त वत्स के साथ 04 अन्य शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं। इन दोनों शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह दोनों शिकायतें एक ही परियोजना RISE ORGANIC HOMES एप्र&520 4 से सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से प्रश्नगत शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या-घटार45/03/8527/2024, स्नेहलता एवं ईश्वर दत्त वत्स अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किये गये हैं।
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना RISE ORGANIC HOMES PHASE 4 के टॉवर-ग-7 में हा 27.04.205 को isdt मंजिल पर यूनिट Weat-i805 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य 28,54,70,//- रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 22,56,080 /— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा अपने लिखित अभिकथन प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा बुकिंग “आवेदन फॉर्म दिनांक 27.04.2045 के माध्यम से उक्त यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य ए86 = 23.07.2045 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसका कुल मूल्य 28,54,70/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 22,56,080 /— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है। फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 23.07.20i5 के अनुसार विपक्षी द्वारा मार्च, 2049 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु 5 वर्ष का विलम्ब होने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा लगभग 79.04% की धनराशि का भुगतान पहले ही विपक्षी को किया जा चुका है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा बुक करायी गयी यूनिट का भौतिक कब्जा एवं रेरा अधिनियम, 20i6 के अनुसार विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने तथा सेल डीड निष्पादित कराये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करायी गयी है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में लिखित शिकायत, प्रत्युत्त, आवंटन कम फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 23.09.2045, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि की रसीदें, Ware प्लान, विपक्षी द्वारा प्रेषित मांग पत्र, ere sith अकाउंट, विपक्षी को प्रेषित ई-मेल, रेरा प्राधिकरण की तकनीकी टीम द्वारा दिनांक 08.06.2022 को किये गये परियोजना के स्थलीय निरीक्षण की आख्या आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
vend शिकायत के सम्बन्ध में विपक्षी की ओर से लिखित जवाब दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना "RISE ORGANIC HOMES PHASE-I" में CLP प्लान के अन्तर्गत यूनिट WI-T7-805 बुक करायी गयी थी, जिसका कुल मूल्य 27,65,070/— रुपये था, जिसमें सर्विस car एवं अन्य शुल्क सम्मिलित नहीं थे। उभयपक्षों के मध्य निष्पादित फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 23.09.2045 के प्रस्तर-& के अनुसार अनुसार शिकायतकर्ता को sat यूनिट का कब्जा दिनांक 23.09.2049 को उपलब्ध कराया जाना था। विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु दिनांक 25.09.2022 एवं 04.44.2023 को मांग पत्र व अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा आज तक अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा चयनित भुगतान योजना के अनुसार var यूनिट के सापेक्ष अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट के विरुद्ध प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांक 29.40.2023 को प्रेषित किया गया। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि वर्ष 2048-2024 की अवधि के मध्य पर्यावरण प्रदूषण के कारण मा. राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा दिल्ली एन.सी.आर. में समय-समय पर निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगा दिया था,
जिससे परियोजना की प्रगति पर प्रतिकूल 5 पड़ा। साथ ही यह भी कहा गया है कि भारत सरकार ने कोविड-49 महामारी के प्रसार को रोकने के लिए विश्व में कुछ सबसे कठोर कार्यवाइयों का सहारा लिया और सम्पूर्ण देश में 24 मार्च, 2020 से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन घोषित किया गया, जिसे विभिन्न अधिसूचनाओं द्वारा बढ़ाया गया था, जिस कारण निर्माण की सामग्री उपलब्ध न होने के कारण 446 दिनों से अधिक निर्माण गतिविधियां पूर्ण रूप से बाधित रहीं, जिस कारण परियोजना को पूर्ण किये जाने में विलम्ब हुआ। विपक्षी का कहना है कि परियोजना में विलम्ब का कारण शिकायतकर्ता सहित कई अन्य आवंटियों द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का समय पर भुगतान न किया जाना है, जिससे परियोजना की प्रगति पूर्ण रूप से प्रभावित हुई। उपर्युक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा प्रश्नगत शिकायत में शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। _ विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित जवाब, आवंटन कम फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 23.09.2045, मांग पत्र एवं अनुस्मारक पत्र, प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 29.40.2023, रेरा प्राधिकरण के कार्यालय आदेश दिनांक 06.06.2020 एवं 48.08.2024, ora शिकायतों में रेरा प्राधिकरण की पीठ-4ए द्वारा पारित आदेश दिनांकित 46.42.2020, सक्षम विकास प्राधिकरण से प्राप्त परियोजना के टॉवर-2, 3, 4, 5, 6 & 9 का आंशिक पूर्णता प्रमाण-पत्र दिनांक 49.08.2023 एवं परियोजना -के cia, 7 & 8 का आंशिक पूर्णता प्रमाण-पत्र दिनांक 24.44:2025 आदि अभिलेखों ot छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रत्युत्तर दाखिल करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा बुक करायी गयी यूनिट का विपक्षी द्वारा अभी तक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही विपक्षी द्वारा समय पर परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने लिखित जवाब में कहा गया है कि उनके द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु मांग पत्र दिनांक 04.44.2023 प्रेषित किया गया है, जिसके पश्चात् यूनिट प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांक 29.40.2023 को प्रेषित किया गया है, परन्तु शिकायतकर्ता को न तो मांग पत्र दिनांकित 04.44.2023 प्राप्त हुआ है और न ही प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांक 29.40.2023 प्राप्त हुआ है। इन पत्रों की तामील की कोई डिलीवरी रिपोर्ट भी संलग्न नहीं की गई है और न ही विपक्षी द्वारा किसी ई-मेल की प्रति प्रस्तुत की गई है। इसलिए, ये मांग ५), en tee हे हैं है हल gern) >) पत्र शून्य और sara हैं। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को मांग hele s/f पत्र भेजा गया था, परन्तु परियोजना के निर्माण कार्य की कोई स्थिति का प्रमाण ५65 fat, yS —_ Page 3 | नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 06.42.2022 एवं 08.08.2023 के ई-मेल के माध्यम से मांग पत्र की प्रति और बैंक द्वारा संवितरण हेतु आर्किटेक्ट प्रमाण-पत्र की प्रति की मांग की थी। विपक्षी द्वारा लगभग t4 माह के विलम्ब के बाद दिनांक 05.02.2024 को ये प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराएं | अतः भुगतान में विलम्ब के लिए शिकायतकर्ता उत्तरदायी नहीं है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा बुक करायी गयी यूनिट का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने तथा सेल डीड निष्पादित कराये जाने का अनुरोध किया गया है।
उभयपक्ष के dal को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये गये हैं :- 4. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या- 4 निस्तारण बिन्दु संख्या-4, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उनके द्वारा बुकिंग /आवेदन फॉर्म दिनांक 27.04.20i5 के माध्यम से vat यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 23.07.2045 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसका कुल मूल्य 28,54,70/- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 22,56,080,/- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है। फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 23.07.20i5 के अनुसार विपक्षी द्वारा मार्च, 209 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु 5 वर्ष का विलम्ब होने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा लगभग 79.04% की धनराशि का भुगतान पहले ही विपक्षी को किया जा चुका है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा बुक करायी गयी यूनिट का भौतिक कब्जा एवं रेरा अधिनियम, 2046 के अनुसार विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने तथा सेल डीड निष्पादित कराये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना "RISE ORGANIC HOMES PHASE-I" में CLP प्लान के अन्तर्गत यूनिट WeN-T7-805 बुक करायी गयी थी, जिसका कूल मूल्य 27,65,070/— रुपये था, जिसमें सर्विस cra एवं अन्य शुल्क सम्मिलित नहीं थे। उभयपक्षों के मध्य निष्पादित फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 23.09.2045 के प्रस्तर-» के अनुसार अनुसार शिकायतकर्ता को sat यूनिट का कब्जा दिनांक 23.09.20I9 को उपलब्ध कराया जाना था। विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु दिनांक 25.09.2022 एवं 04.44.2023 को मांग पत्र व अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा आज तक अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा चयनित भुगतान योजना के अनुसार उक्त यूनिट के सापेक्ष अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट के विरुद्ध प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांक 29.0.2023 को प्रेषित किया गया। उपर्युक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा प्रश्गगत शिकायत में शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। Rr एक्ट की धारा is () में प्राविधान है कि :- Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. Page 5 इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के = E नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की ae—s4(4)(b) में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि प्रमोटर का यह दायित्व होगा कि वह परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त कर, उसे आवंटी को उपलब्ध करायें। उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय/पट्टा के लिए करार / अनुबन्ध) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-7.2 में कब्जा ऑफर किये जाने के सम्बन्ध में यह उललेखित है कि परियोजना का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त ही प्रमोटर, शिकायतकर्ता (आवंटी) को लिखित में यूनिट का कब्जा ऑफर करेंगे। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन कम फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 23.09.2045 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य निष्पादित है, जिसके कब्जे वाले प्रस्तर-४() के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादन की तिथि से 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 48 माह में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को कब्जा उपलब्ध कराया जाना था। ऐसे में उपरोकतानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 22.09.209 तक अपनी यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बन्ध में सिविल अपील संख्या-6649-50 /208 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल“ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not जर्सी be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना को अनुबन्धानुसार पूर्ण नहीं किया गया है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 23.09.2049 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। ह इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्रावधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के मध्य किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त (eh EN Page 7 SS "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—For the purpose of this clause—
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के- प्रारूप के प्रस्तर-9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण vents of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर-9.2(8) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:''
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर-9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी McLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है, जिसे मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका कोड या nam a smear | 920 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित एवं विधिपूर्ण माना गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भूनसम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय // पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर MciR+ प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से | प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। इसके अतिरिक्त दिनांक i7.:0.20:8 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 / 8--3-48-65 विविध, 46 के द्वारा मॉडल white के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"प् ] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की > अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि ; aver की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से Page 9 |... कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। dager बिन्दु desi निस्तारित किया जाता है। हैं :-
उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्तागण की यूनिट्स को आवंटन /अनुबन्ध पत्र के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्तागण से देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्तागण के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें | - विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता (स्नेहलता एवं ईश्वर दत्त वत्स) को दिनांक 23.09.2049 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने की तिथि अथवा विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की-तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। कोविड-49 के दृष्टिगत दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। द्वितीय शिकायतकर्ता (aa सिंह एवं आशीष कुमार) के प्रकरण में फ्लैट क्रेता अनुबन्ध//आवंटन पत्र के अनुरूप उपरोकतानुसार विलम्ब ब्याज की गणना की जायेगी।
विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(2४)6) के अनुसार यदि -रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। aa: विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी | इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित tne पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की द्वितीय मामले में गणना की जाएगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-38, 40(2) एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। शिकायतकर्तागण को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त: आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण ear पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तदनुसार पत्रावलियाँ दाखिल-दफ्तर हों। (सदस्य) . उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page हे