Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Saurabh Nath v. Rise Projects Pvt Ltd
Complaint No. NCR145/11/102621/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-07-04
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Order under [?]-34, Bench-2 (formerly Bench-[?]), under Section 34, Bench-2 (formerly Bench-[?]). Present: Shri T. Venkatesh, Member. Sr. No. | Complaint No. | Complainants | Unit No. | Amount deposited 1. | [?]702627/2022 | [?] Nath | T-2/702 | Rs. 58,35,903/- 2. | [?]2/025)9779095 | [?] Gupta | P-3/50 | Rs. 49,93,499/- 3. | [?]/02[?]7203 | Priti Goyal | T-5/704 | Rs. 37,23,362/- 4. | 81245/08/7676/2023 | Shilpi Singhal and Sandeep Singhal | P-3-60[?] | Rs. 42,28,9[?]/- Versus M/s Rise Projects Private Limited The complaints in question have been filed against the respondent by the complainants, along with 03 other complainants led by complainant Saurabh Nath. The facts of all these complaints are the same and they rest on the same evidence. All these complaints relate to one and the same project, RISE ORGANIC HOMES PHASE I. Therefore the complaints in question are being disposed of by a single decision. Complaint No. NCRI45//0262/2022, Saurabh Nath, shall be the lead case. The complaint petitions have been filed by the complainants against the respondent seeking possession of the units in question along with interest for the [?] period.
In brief, the complainant states that he booked a unit in the respondent's project RISE ORGANIC HOMES PHASE I, Tower No. 702 (Unit T-2/702). The total price of the unit was Rs. 65,55,000/-, against which he paid Rs. 58,35,903/- to the respondent from time to time in instalments. The complainant further states that, although he has paid 85 percent of the total sale price of the unit to the respondent, the respondent has not handed over possession of the unit, and has still not obtained all the necessary no-objection certificates from the competent authority in respect of the project. For this reason the complainant has filed this complaint against the respondent under Section 34 of the Real Estate Regulatory Authority Act, seeking possession of the unit along with interest for the delay period. In support of his statement, the complainant has filed photocopies of records, including a vakalatnama, rejoinder, flat buyer agreement dated 02.4.205, [?] plan, a statement of the amounts paid to the respondent, pre-cancellation letter dated 47.44.2022, cancellation letter dated 03.42.2022, the completion certificate of the project dated 49.08.2023, e-mail correspondence, the report dated 08.06.2022 of the site inspection of the project carried out by the [?] technical team, photographs of the project, loan letter, and other records.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत IRI-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-() अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-॥ ) उपस्थिति :- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य क्रम सं. शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण यूनिट संख्या | जमा घनराशि =. l. | टाराबडा702627/2022 wr | नाथ T-2/702 58,35,903 /— r 2. | पिटाराबड2/025)9779095 ow गुप्ता प-३/50 49,93,499 /- | | a | 3. | िटाराबडा/02झ7203 प्रीति गोय T-5/704 37,23,362 /— | | ८१२45/08/7676/2023 | शिल्पी सिंघत्र एवं संदीप प3-60॥ 42,28,9] /-. सिंघल L बनाम मैसर्स राइज़ प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड शिकायतकर्ता सौरभ नाथ के साथ 03 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साध्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना RISE ORGANIC HOMES PHASE । से सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से प्रश्ननत शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCRI45//0262/2022 सौरभ नाथ अग्रणी वाद रहेगा | प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्ननत यूनिट का कब्जा एवं afer अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किये गये हैं। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना RISE ORGANIC HOMES PHASE ® टॉवर-- संख्या-702 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य 65,55,000 जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के प-2 में यूनिट /- रुपये था, आधार पर
58,35,903 /— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी को यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 85 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किये जाने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं ?86 4 किया जा रहा है और न ही अभी तक सक्षम प्राधिकारी से परियोजना से सम्बन्धित सभी आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किये गये हैं। जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में वकालतनामा, प्रत्युत्तर, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 02.4.205, Ware प्लान, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि का विवरण, प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 47.44.2022, निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 03.42.2022, परियोजना का पूर्णता प्रमाण-पत्र दिनांकित 49.08.2023, ई-मेल पत्राचार, WI तकनीकी दल द्वारा किये गये परियोजना के स्थलीय निरीक्षण की आख्या दिनांकित 08.06.2022, परियोजना के फोटोग्राफ, ऋण पत्र आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी की ओर से लिखित जवाब दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना "RISE ORGANIC HOMES एप्ृ887-7 में यूनिट संख्या-प2-702, दिनांकित 02.:4.20i5 को बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 02.44.2045 को आंवटन पत्र जारी किया गया। यूनिट की कुल कीमत 66,i2,500 /— के सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 55,67,504 /- रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी का यह भी कहना है कि उनके द्वारा परियोजना पूर्ण कर शिकायतकर्ता को 42 माह तथा 06 माह की अनुग्रह अवधि के साथ नवम्बर, 2049 तक कब्जा उपलब्ध किया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु emer fees पेमेंट प्लान का चयन किया गया था एवं विपक्षी द्वारा अनुबन्ध के अनुसार भेजे गए मांग पत्र के सापेक्ष अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान वर्तमान समय तक नहीं किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा tear अधिनियम की धारा 96) का उल्लंघन किया गया है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को मांग पत्र प्रेषित किये गये, परंतु शिकायतकर्ता द्वारा मांग पत्र के अनुसार अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 40,94,377 /- रुपये की धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, जिसमें अतिरिक्त चार्ज सम्मिलित नहीं है, जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 77.4.2022 को यूनिट का प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया गया। जिसके पश्चात् भी शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके क्रम में विपक्षी द्वारा दिनांक 03.2.2022 को निरस्तीकरण पत्र प्रेषित कर यूनिट को निरस्त कर दिया गया तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से यह अनुरोध किया
| ~{— Page 2 गया कि वह अपनी जमा धनराशि 48,86,003,/- रुपये हेतु चेक प्राप्त कर सकते हैं, परंतु शिकायतकर्ता, चेक प्राप्त करने कभी नहीं आया। विपक्षी द्वारा किया गया यूनिट निरस्तीकरण वैधानिक है, क्योंकि विपक्षी द्वारा वर्तमान शिकायत की सूचना से पहले ही दिनांक 03.:2.2022 को निरस्तीकरण पत्र जारी कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त विपक्षी का यह कहना है कि उनके द्वारा प्रश्नगत परियोजना पूर्ण की जा चुकी है तथा परियोजना से सम्बन्धित समस्त एन.ओ.सी को प्राप्त करते हुए सक्षम विकास प्राधिकरण से दिनांक 9.08.2043 को परियोजना का ओ.सी प्राप्त किया जा चुका है। विपक्षी की परियोजना में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में यह कहा गया है कि प्रश्नगत परियोजना पूर्ण की जा चुकी है तथा परियोजना की समस्त सुविधाओं और ऐमेनिटीज के अंतिम चरण के विकास में सरकारी विमुद्रीकरण नीति दिनांक 08.44.20I6 तथा एन.जी.टी द्वारा पारित आदेश के कारण देरी हुई तथा कोविड-49 के कारण परियोजना में विलंब हुआ। उपर्युक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा wera शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है तथा शिकायतकर्ता को अपनी जमा धनराशि के सम्बन्ध में चेक प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित जवाब, परियोजना से सम्बन्धित चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र, परियोजना का पूर्णता प्रमाण-पत्र दिनांकित 49.08.2023, शिकायतकर्ता से प्राप्त धनराशि का विवरण, रेरा कार्यालय द्वारा पारित आदेश दिनांकित 06.06.2020 व १8.08.2024, रेरा प्राधिकरण की पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांकित 45.4.2022 एवं 46.42.2020, प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 7.44.2022, निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 03.42.2022, मांग पत्र दिनांकित 24.03.2023, प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 20.06.2023, अनुस्मारक पत्र दिनांकित 20.06.2023, निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 20.06.2023, प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 27.08.2023, निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 45.02.2024, अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रत्युत्तर दाखिल करते हुए कहा गया कि उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य नवम्बर, 2045 में अनुबन्ध निष्पादित किया गया था, जिसके अनुसार अनुबन्ध की तिथि से 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ नवम्बर, 2049 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी, निर्धारित अवधि में परियोजना को पूर्ण करने में असफल रहा है और न ही आज तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया गया है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त कर दी गयी थी। विपक्षी द्वारा दो बार प्री-निरस्तीकरण पत्र और निरस्तीकरण पत्र जारी किया गया, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा उक्त यूनिट के सापेक्ष विपक्षी को 58,35,904 / - Page 3 he
रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने लिखित जवाब में कहा गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य wifas—i9 महामारी के कारण बाधित हुआ, जिस कारण परियोजना विलम्बित हुई | विपक्षी का यह तर्क गलत है, क्योंकि विपक्षी को अनुबन्ध में निर्धारित अवधि के अनुसार दिसम्बर, 20:9 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण करना था, उसके उपरांत aifas—t9 अर्जित हुआ। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कथन किया गया है कि पक्षकारों के मध्य हुए अनुबन्ध पर रेरा अधिनियम, 20i6 के सभी प्रावधान लागू होंगे और बिल्डर बायर wit में अंकित नियमों एवं शर्तों को हस्ताक्षरित करते हुए शिकायतकर्ता द्वारा स्वीकार कर लिया गया है, क्योंकि उभयपक्षों के मध्य Ponta अनुबन्ध एकतरफा था। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को यूनिट Prefer को निरस्त करने तथा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा एवं रजिस्ट्री कराये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये गये हैं :- 4... क्या शिकायतकर्ता द्वारा re प्लान के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? 2 क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु to 4
बिन्दु संख्या ga आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? यह वाद बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी को यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 85 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किये जाने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया जा रहा है और न ही अभी तक सक्षम प्राधिकारी से परियोजना से सम्बन्धित सभी आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किये गये हैं। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को यूनिट निरस्तीकरण को निरस्त करने तथा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा एवं रजिस्ट्री कराये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध कियां गया है। Page 4 hb
इस पर विपक्षी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु amen fees पेमेंट प्लान का चयन किया गया था एवं विपक्षी द्वारा अनुबन्ध के अनुसार भेजे गए मांग पत्र के सापेक्ष अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान वर्तमान समय तक नहीं किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा रेर अधिनियम की धारा 496) का उल्लंघन किया गया है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को मांग पत्र प्रेषित किये गये, परंतु शिकायतकर्ता द्वारा मांग पत्र के अनुसार अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष t094,377/— रुपये की धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, जिसमें अतिरिक्त चार्ज सम्मिलित नहीं है, जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 47.4.2022 को यूनिट का प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया गया। जिसके पश्चात् भी शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके क्रम में विपक्षी द्वारा दिनांक 03.42.2022 को निरस्तीकरण पत्र प्रेषित कर यूनिट को निरस्त कर दिया गया तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से यह अनुरोध किया गया कि वह अपनी जमा धनराशि 48,86,003,/- रुपये हेतु चेक प्राप्त कर सकते हैं, परंतु शिकायतकर्ता, चेक प्राप्त करने कभी नहीं आया। ऐसे में विपक्षी द्वारा किया गया यूनिट निरस्तीकरण वैधानिक है। इसके अतिरिक्त विपक्षी का यह कहना है कि उनके द्वारा wed परियोजना पूर्ण की जा चुकी है तथा परियोजना से सम्बन्धित समस्त एन.ओ.सी प्राप्त करते हुए सक्षम विकास प्राधिकरण से दिनांक 9.08.203 को परियोजना का ओ.सी प्राप्त किया जा चुका है। उपरोक्त तथ्यों के आधार शिकायतकर्ता द्वारा योजित वर्तमान शिकायत को विपक्षी द्वारा खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय,/पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 की धारा-9.2 एवं धारा-9.3 निम्नलिखित उल्लेखित है — "In case of Default by Promoter under the conditions listed above a non defaulting Allottee is entitled to the following: i. Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest; or ii. The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any Page 5 धारा-9.3 : अनुबन्ध /आवंटन पत्र के नियम एवं शर्तों के अनुसार यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का. भुगतान पेमेन्ट प्लान के अनुसार किया जाना था, जिसमें बुकिंग पर 40 प्रतिशत 6,55,500 /— head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7% unless provided otherwise under the Rules. within Jorty-five days of receiving the termination notice:
Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due." "The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events: i. In case the Allottee fails to make payments for 2 (two) - consecutive demands made by the Promoter as per the Payment Plan annexed hereto, despite having been issued notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7% unless provided otherwise under the Rules. The Promoter must not be in default to take this benefit;
ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination." sa
रुपये की धनराशि, द्वितीय किश्त बुकिंग के 45 दिन के भीतर १0 प्रतिशत 6,55,500/— रुपये की धनराशि, तृतीय किश्त wee रखे जाने के समय 45 प्रतिशत 9,83,250/— रुपये की धनराशि, चतुर्थ किश्त बेसमेन्ट whe के समय 05 प्रतिशत 3,27,750/— रुपये की धनराशि, पंचम किश्त प्रथम फ्लोर wig के समय 7.50 प्रतिशत 4,9,625 //- रुपये की धनराशि, छठवीं किश्त चतुर्थ फ्लोर wig के समय 7.50 प्रतिशत 4,94,625 //- रुपये की धनराशि, सातवीं किश्त सातवें फ्लोर स्लैब के समय 7.5 प्रतिशत 4,94,625 //- रुपये की धनराशि, आठवीं किश्त नौवें फ्लोर ela के समय 7.5 प्रतिशत 4,94,625 //- रुपये की धनराशि, नौवीं किश्त ग्यारहवें फ्लोर wes के समय 7.5 प्रतिशत 4,94,625 /- रुपये की धनराशि, दसवीं किश्त चौदहवें फ्लोर wa के समय 7.5 प्रतिशत 4,94,625 /“/- रुपये की धनराशि, ग्यारहवीं feed अन्तिम फ्लोर We के समय 05 प्रतिशत 3,27,750,/- रुपये की धनराशि, बारहवीं किश्त ईंट के कार्य के समय 05 प्रतिशत 3,27,750/— रुपये की धनराशि, अंतिम किश्त कब्जा ऑफर किये जाने के समय os प्रतिशत 3,27,750/— रुपये की धनराशि अदा की जानी थी। इसी के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान किया जाना था।
प्रश्नगत प्रकरण में यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 65,55,000/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 58,35,903 /- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया, जोकि लगभग 85 प्रतिशत से अधिक है और उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध,/आवंटन पत्र दिनांकित 02.2:.205 के अनुसार विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर फ्लैट क्रेता अनुबन्ध की तिथि से 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 48 माह अर्थात दिनांक 02..20i9 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की मांग पर धनराशि का भुगतान समयानुसार किया गया, साथ ही यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 03.42.2022 को दिया गया था, जोकि अनुबन्धानुसार यूनिट का कब्जा दिये जाने की समयावधि के 3 वर्ष बाद दिया गया है। प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी द्वारा अपनी परियोजना को समय-समय पर निर्माण कार्य पूर्ण करते हुए शिकायतकर्ता से धनराशि प्राप्त किये जाने हेतु माँग पत्र /अनुस्मारक पत्र भेजे जाने थे और उसी के अनुरूप शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान किया जाना था, परन्तु इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य अथवा मांग पत्र/अनुस्मारक पत्र दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि विपक्षी द्वारा भुगतान पेमेन्ट प्लान के अनुसार Page 7 an समय-समय पर शिकायतकर्ता से उनकी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु कहा गया हो और भुगतान न किया गया हो।
यदि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को समय से देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, तो यह विपक्षी की जिम्मेदारी बनती है कि वह शिकायतकर्ता को समय-समय पर माँग पत्र भेजकर अवशेष धनराशि की माँग करते और शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने की स्थिति में पर्याप्त अवसर देकर उनकी यूनिट को निरस्त करते हुए उसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि ब्याज सहित उन्हें वापस कर देते, परन्तु शिकायतकर्ता की जमा धनराशि ब्याज सहित विपक्षी द्वारा वापस नहीं की गयी। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं अपनी यूनिट usr /निरस्त नहीं करायी गयी है। विपक्षी द्वारा ऐसा को साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके शिकायतकर्ता द्वारा बुक करायी गयी यूनिट को किसी अन्य क्रेता को विक्रय किया जा चुका हो और वर्तमान समय में शिकायतकर्ता की यूनिट उपलब्ध न हो। वर्णित परिस्थिति में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा किये गये शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया अवैधानिक /अपूर्ण है। चूंकि विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्तीकरण अनुबन्ध /आवंटन पत्र के अनुसार परियोजना पूर्ण कर कब्जा दिये जाने की तिथि 02.44.20I9 के बाद का है। रेरा अधिनियम की ais S अन्तर्गत पक्षकारों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार परियोजना पूर्ण किये जाने में हुए विलम्ब की स्थिति में शिकायतकर्ता जमा धनराशि मय ब्याज प्राप्त कर सकता है अथवा यदि शिकायतकर्ता अपनी यूनिट का कब्जा लेने के इच्छुक हैं, तो वह अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर कब्जा प्राप्त करें। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2
निस्तारण बिन्दु संख्या-2 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना में दिनांक 29.:020i5 को यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 02.44.20I5 को अनुबन्ध/आवंटन पत्र निष्पादित किया गया, जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर फ्लैट क्रेता अनुबन्ध की तिथि से 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 48 माह अर्थात दिनांक 02.44.2049 तक परियोजना का निर्माण CL कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है, जबकि यूनिट की कुल कीमत 65,55,000,//- रुपये के सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा अब तक 58,35,903 //- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया जा चुका है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने एवं रजिस्ट्री कराये जाने का अनुरोध किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 48 (॥) में प्राविधान है कि :- Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पत्र दिनांक 02.44.2045 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य Pena है, जिसके कब्जे वाले प्रस्तर में उललेखित है कि फ्लैट क्रेता अनुबन्ध की तिथि से 42 माह एवं 6 Page 9 Che
माह की अनुग्रह अवधि के साथ 48 माह में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर कब्जा प्रदान कर दिया जाएगा। ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 02.44.20:9 तक अपनी यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। यह स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण होने में विलम्ब हुआ है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 03.44.2049 से ओ.सी./सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील संख्या-6649-50 ,// 208 ”सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल” में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent ~ Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के "नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to or Page 0 withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 2(za) में प्राविधान है कि :-
(za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—For the purpose of this clause— (7) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.0.20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(0) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- ्न्न्नन्क Ch
"The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +i% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"' यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+H प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी McLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.0.20:8 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 / 8-3-48-65 विविध,/46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"४7,] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" Page 2 इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) @ प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। wager बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता की यूनिट को पुनर्स्थापित करते हुए, इस आदेश के अनुरूप माँग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र /अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी. /सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 03.4.209 से ओ.सी./सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+H प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब की अवधि एवं विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी एवं न ही शिकायतकर्ता से किसी अतिदेय (overdues) धनराशि के लिए इस अवधि का ब्याज लिया जाएगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में अनुबन्ध,/आवंटन पत्र के अनुरूप उपरोकतानुसार गणना की जायेगी। 3. विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(2४)(6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया Page 43 f जायेगा। अतः विलम्बित अवधि के भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी | MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा।
4. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि वह रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा सकेगें। 5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी। 6 इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। r hae / (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण SS ५०+भ५3भ०भ«५५७५७७«»- ०-५ <३०७८3र७७+७७भ++3भ७भ ७७७७७ <०++रमपमय ८ <०5आ%र | Page 4