Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Shailesh Gupta v. Rise Projects Pvt Ltd
Complaint No. NCR145/11/102421/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-06-15
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddha Nagar. Order under Section 31 / धारा-34, Bench-2 formerly Bench-1 / पीठ-2 पूर्व (पीठ-4) Presence :-- Shri T. Venkatesh, Member Serial No. | Complaint Number | Complainants 1. | NCRI45/2/02945/2022 | Rakhi 2. | ... | Shailesh Gupta 3. | ॥7ट२45/ / 02423/2022 | Gaurav Upadhyay 4. | NCRI45//02426/2022 | Smt. Monika Verma 5. | पटरा457702490/2022 | Sugreev Dutt 6. | NCRI45/I/02830/2022 | Vidhu Sharma Versus Rise Projects Private Limited Suits have been instituted against the respondent by complainant Rakhi along with 05 other complainants. The facts of all these complaints are identical and evidence is identical. All these complaints relate to the respondent's project. Therefore, they are being disposed of by a single decision. Complaint Number- NCR45/2/402945/2022 / NCRI45/2/02945/2022 Rakhi shall be the lead case. The present complaint applications have been instituted by the complainants against the respondent for grant of possession along with interest for the delayed period.
In brief, the lead complainant states that unit number T6-208 was booked by them in the respondent's project "Rise Organic Homes Phase I", whose total price was Rs. 28,24500,//-, against which an amount of Rs. 25,20,486/- was paid by the complainant on an installment basis from time to time. The complainant also states that construction work of the respondent's project is progressing at a slow pace, and NOC as well as OC/CC against the unit in question have not been obtained by the respondent from the competent authority. Therefore, request has been made by the complainant for grant of possession along with interest for the delayed period. In support of their statement, copy of vakalatnama, copy of allotment letter dated 02.44.2045, receipts of deposited money, etc., photocopies of records have been filed by the complainant.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 पूर्व (पीठ-4) उपस्थिति :- श्री dio वेंकटेश, सदस्य क्रम सं0 शिकायत संख्या ea | NCRI45/2/02945/2022 राखी जी इलाब्ञाउएकाउ०2 शैलेश गुप्ता ]॥7ट२45/ / 02423/2022 गौरव उपाध्याय | NCRI45//02426/2022 श्रीमती मोनिका वर्मा पटरा457702490/2022 सुग्रीव दत्त NCRI45/I/02830/2022 विधु शर्मा बनाम राईज़ प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड शिकायतकर्ता राखी के साथ os अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें विपक्षी की परियोजना से सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCR45/2/402945/2022 राखी अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना " Rise Organic Homes Phase I" में यूनिट संख्या- T6-208 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 28,24500,//- रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 25,20,486 /— रूपये का भुगतान किया गया था। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी की परियोजना का निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है तथा विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष एन.ओ.सी तथा ओ.सी /सी.सी सक्षम प्राधिकरण से प्राप्त नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में वकालतनामा की प्रति, आवंटन पत्र दिनांक 02.44.2045 की प्रति, जमा धनराशि की रसीदें आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी की ओर से लिखित जवाब दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना “RISE ORGANIC HOMES PHASE.I" में यूनिट संख्या- r6-208, बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष दिनांक 0244.2045 को विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में आंवटन पत्र जारी किया गया | यूनिट की कुल कीमत 28,46,250/— के सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 2406.+ 6 /— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी का यह भी कहना है कि उनके द्वारा परियोजना पूर्ण कर शिकायतकर्ता को 42 माह तथा 06 माह की अनुग्रह अवधि के साथ नवम्बर 209 तक कब्जा उपलब्ध किया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि के संबंध में कंस्ट्रक्शन fies पेमेंट प्लान का चयन किया गया था एवं विपक्षी द्वारा अनुबंध अनुसार भेजे गए मांग पत्र के सापेक्ष अपनी बकाया जमा धनराशि का भुगतान वर्तमान समय तक नहीं किया गया है, परन्तु विपक्षी द्वारा दिनांक 45.09.2023 को कब्जा हेतु प्रस्ताव पत्र शिकायतकर्ता को प्रेषित किया गया तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को आमंत्रित किया गया, जिसमें वह 30 दिनों के अन्दर यूनिट के सापेक्ष अपनी बकाया धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करें। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा दिनांक 22.03.2023 को अंतिम मांग पत्र के साथ ऑफर फॉर फिटआउट भी प्रेषित किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा वर्तमान समय में भी अपनी बकाया धनराशि नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त विपक्षी का यह कहना है कि उनके द्वारा wend परियोजना पूर्ण की जा चुकी है तथा परियोजना से संबंधित समस्त एन.ओ.सी को प्राप्त करते हुए सक्षम प्राधिकरण से दिनांक को ओ.सी प्राप्त की जा चुकी है। विपक्षी का परियोजना में हुए विलंब के संबंध में यह कहना है कि प्रश्नगत परियोजना को पूर्ण की जा चुकी है तथा परियोजना की समस्त सुविधाओं के अंतिम चरण के विकास में भारत सरकार की विमुद्रीकरण नीति दिनांक 08.4t.20I6 तथा एन.जी.टी द्वारा पारित आदेश के कारण तथा कोविड-49 महामारी के कारण भी परियोजना में विलंब हुआ। विपक्षी द्वारा पीठ के समक्ष यह अनुरोध किया गया है कि उपरोक्त के आधार पर wed शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित जवाब दाखिल किया गया है। —_— | उभयपक्षों के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये जाते हैं :- L. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 बिन्दु wa इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी की परियोजना का निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है तथा विपक्षी द्वारा vera यूनिट के सापेक्ष एन. ओ.सी तथा ओ.सी /सी.सी सक्षम प्राधिकरण से प्राप्त नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन /अनुबन्ध पत्र दिनांक 02.44.2045 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जिसके पृष्ठ we के कब्जे वाले WER के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 48 माह में दिया जाना था। ऐसे में उपरोक्तानुसार कब्जे की तिथि 02.44.209 होती है। यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 03.44.2049 से ओ.सी./सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील to 6649-50 / 2048 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल” में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- " the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Go i as late as April 20!6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20]6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा | ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “"नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि —
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह we है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक आवंटन अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया
जा सकता है कि उभयपक्ष को vat आवंटन /अनुबन्ध की शर्तें स्वीकार हैं। आवंटन » अनुबन्ध में विलम्ब के लिए विलम्ब धनराशि दिये जाने का प्राविधान है। रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है उसी दर से धनराशि देने का प्राविधान है। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-48 दिनाक 07.05.20:7 को अधिसूचित हुई, जिसके सम्बन्ध में उ0प्र० आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-2 की अधिसूचना दिनांक 03.05.2047 से उ0प्र0 में रेगुलेटरी अथॉरिटी के रूप मे कार्य करने की स्वीकृति राज्यपाल, महोदय ने दिनांक 07.05.207 से प्रदान की अर्थात् दिनांक 04.05.2047 से भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 लागू हुआ है। इस अधिनियम का प्रवर्तन प्रोस्पेक्टिव है। अतः दिनांक 07.05.20:7 4 a की अवधि के लिए fers ब्याज की गणना अनुबन्ध के प्राविधानों के अन्तर्गत की जायेगी और दिनांक 04.05.2047 से आगे की अवधि के लिए विलम्ब ब्याज की गणना रेरा अधिनियम के प्रावधानों के अधीन की जायेगी। WT एक्ट की धारा 2(2) में प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—F or the purpose of this clause— (i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default. shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default;
(ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम oie के अधीन दिनांक १7.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय/पट्टा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफॉल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि :- = = Allottee shall have the option of | terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को धटाएफका प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना wera प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी |॥८[९+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ0प्र0 शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या--740 / 8-3-48-65 विविध /ie के द्वारा मॉडल Wit के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT: "7. Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be s
entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनोक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। dager बिन्दु den- Read किया जाता है। उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है आदेश 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्तागण की यूनिट्स को आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं।
2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 03.:.20i9 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+I प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब की अवधि एवं विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी एवं न ही शिकायतकर्ता से किसी अतिदेय (overdues) धनराशि के लिए इस अवधि का ब्याज लिया जाएगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में आवंटन पत्र/ अनुबन्ध पत्र के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। 3. विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2076 की धारा-2(2७)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया क्र जायेगा। अतः विलम्बित अवधि के भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्वान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी | इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि वह रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा Way | ar ) ॥४ [१० टी० वेंकटेश (सदस्य)
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण