Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Newton Singh v. Rise Projects Pvt Ltd
Complaint No. NCR145/11/102370/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2023-09-22
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddha Nagar. Order under Section 31 / धारा-34, Bench-II Presence — Shri T. Venkatesh, Member Serial No. | Complaint Number | Complainants | Unit Number 1. | NCRI45/I/02579/2022 | Smt. Rama | Unit-T8-907 2. | NCRI45/4/02634/2022 | Prem Singh Rawat | Unit-T6-806 3. | NCRI45/I/02370/2022 | Nutan Singh | Unit-T5-504 4. | NCRI45//02546/2022 | Amit Vashishta | Unit- T5-402 Versus M/s Rise Projects Pvt. Ltd. Complaints have been instituted against the respondent by complainant Smt. Rama along with 03 other complainants. The facts and evidence of all these complaints are identical. All these complaints relate to the respondent's project "RISE ORGANIC GHAR PHASE 1 / PHASE i". Therefore, the complaints in question are being disposed of by a single decision. Complaint No.-NCRI45/I4/02579/2022 Smt. Rama shall be the lead case. The present complaint applications have been instituted by the complainants against the respondent for grant of possession along with interest for the delayed period.
In brief, the lead complainant states that unit number Unit-907 / Unit-T8-907 was booked by them in the respondent's project "RISE ORGANIC GHAR PHASE i", whose total price was Rs. 27,99,720/-, against which an amount of Rs. 27,85,800/- has been paid by the complainant on an installment basis from time to time. The complainant also states that the respondent's project is delayed and construction work is also proceeding at a slow pace, and possession of the unit along with OC/CC has not been made available by the respondent till now. The respondent has not obtained necessary certificates related to the project from the competent authority either, and despite having received 85 percent / 65 percent of the amount against the unit, possession of the unit has not been given by the respondent. Therefore, request has been made by the complainant for refund of deposited money along with interest. In support of their statement, photocopies of documents like vakalatnama, allotment letter dated 30.0:20:6 / 30.0:.20I6, receipts of deposited money, etc., have been filed by the complainant.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-॥ उपस्थिति — श्री dio वेंकटेश, सदस्य | क्रम सं0 शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण यूनिट संख्या l. NCRI45/I/02579/2022 श्रीमती रमा Unit-T8-907 | 2. NCRI45/4/02634/2022 प्रेम सिंह arid Unit-T6-806 3. NCRI45/I/02370/2022 नूतन सिंह एन्ा5-504 |“ | NCRI45//02546/2022 अमित वशिष्ठ Unit- T5-402 —E——————————s बनाम मैसर्स wg प्रोजेक्ट्स प्रा० लि० शिकायतकर्ता श्रीमती रमा के साथ 03 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध vera शिकायतें योजित की गयी है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें विपक्षी की परियोजना " RISE ORGANIC GHAR PHASE i" से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से प्रश्नगत शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत PeI-NCRI45/I4/02579/2022 श्रीमती रमा अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है।
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना "RISE ORGANIC GHAR PHASE i" में यूनिट संख्या- Unit -907 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 27,99,720/— रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 27,85,800,//- रूपये का भुगतान किया गया था। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी की परियोजना में देरी हो रही है तथा निर्माण कार्य भी धीमी गति से चल रहा है और विपक्षी अभी तक ओ.सी /सी.सी के साथ यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। विपक्षी ने सक्षम प्राधिकरण से परियोजना से सम्बंधित आवश्यक प्रमाण-पत्र भी प्राप्त नहीं किया है और उनके द्वारा यूनिट के सापेक्ष 65 प्रतिशत की धनराशि प्राप्त ढ&- करने के बावजूद विपक्षी ने यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में वकालतनामा, आवंटन पत्र दिनांक 30.0:20:6, जमा धनराशि की wie आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना टॉवर-78 में यूनिट संख्या-907 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 27,99,720/— रुपये का भुगतान किया गया था। उभयपक्षों पक्षों के मध्य दिनांक 30.0:.20I6 को बिल्डर बायर एग्रीमेन्ट निष्पादित किया गया था। अनुबन्ध पत्र के अनुसार विपक्षी को 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ यूनिट का कब्जा दिया जाना था। विपक्षी द्वारा अवगत कराया गया है कि उनके द्वारा आवश्यक एन.ओ.सी के लिए सक्षम प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा चुका है। शिकायतकर्ता को दिसम्बर 2023 को फिटआउट पोजेशन देंगे और यूनिट का कब्जा मार्च 2024 तक उपलब्ध करा देंगे। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि पर्यावरण प्रदूषण के कारण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली एन.सी.आर. में किसी भी प्रकार की निर्माण गतिविधि पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगा दिया था, जिससे परियोजना की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। साथ ही यह भी कहा गया है कि भारत सरकार ने कोविड-49 वायरस के प्रसार को रोकने के लिए विश्व में कुछ सबसे कठोर कार्यवाइयों का सहारा लिया और सम्पूर्ण देश में 24 मार्च, 2020 से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन घोषित किया गया, जिसे विभिन्न अधिसूचनाओं द्वारा बढ़ाया गया था, जिस कारण निर्माण सामग्री की उपलब्ध न होने के कारण निर्माण गतिविधियां पूर्ण रूप से बाधित रहीं, जिस कारण परियोजना को पूर्ण किये जाने में विलम्ब हुआ। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा कहा गया है कि शिकायतकर्ता को परियोजना से सम्बन्धित आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्रों सहित उनकी यूनिट का भौतिक कब्जा मार्च, 2024 तक सौंप दिया जाएगा।
दूसरी ओर शिकायतकर्ता द्वारा प्रत्युत्तर पत्र दाखिल करते हुए अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता एवं विपक्षी के मध्य दिनांक 30.0:.20I6 को आवंटन पत्र का निष्पादित किया गया, जिसके अनुसार विपक्षी को जनवरी 2020 तक अनुग्रह अवधि के साथ यूनिट का कब्जा दिया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना टॉवर-78 में यूनिट संख्या-907 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 27,74,970/- रुपये थी, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा 27,85,800,//- रूपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 23.44.2022 को शिकायत दर्ज करायी गयी है। उभयपक्ष के del को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये जाते हैं :- cm , L क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 बिन्दु dee इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी की परियोजना में देरी हो रही है तथा निर्माण कार्य भी धीमी गति से चल रहा है और विपक्षी अभी तक ओ.सी /सी. सी के साथ यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। विपक्षी ने सक्षम प्राधिकरण से परियोजना से सम्बंधित आवश्यक प्रमाण-पत्र भी प्राप्त नहीं किया है और उनके द्वारा यूनिट के सापेक्ष 85 प्रतिशत की धनराशि प्राप्त करने के बावजूद विपक्षी ने यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
दूसरी ओर विपक्षी द्वारा अपने जवाब में अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता को परियोजना से सम्बन्धित आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्रों सहित उनकी यूनिट का भौतिक कब्जा मार्च, 2024 तक सौंप दिया जाएगा। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पत्र दिनांक 30.0.20I6 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जिसके पृष्ठ Ue के प्रस्तर- & 6) के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 48 माह में उपलब्ध कराया जाना था। इस प्रकार कब्जा देने की तिथि 29.0:.2020 हो जाती है, परन्तु विपक्षी द्वारा उक्त निर्धारित अवधि में यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50/20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " | उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. /सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 30.07.2020 से ओ.सी. / सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section ]8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. "
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व SoH बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20:6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2() में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में
निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४८ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(28)0) में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 Peake किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश \, विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिट्स की समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 30.44.2023 तक ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय tera शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 30.04.2020 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक शिकायततकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत qe रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 के बीच यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र/अनुबन्ध पत्र के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी।
विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा Azali) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा | यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी। यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा सकेगें। टॉक [शी bs © वेंकटेश (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण