Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Prithipal Singh Sikka v. ATS Grand Realtors Private Limited
Complaint No. NCR145/10/123584/2024
- Decision date
- 2026-05-12
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 20:6 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थितः- slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम | शिकायत संख्या — यूनि जमा धनराशि GO | एग्रीमेंट फार | कब्जा दिये | वांछि सं० न0 सेल की [जाने की | अनुतोष तिथि तिथि I. | एएा२45/0/23584/2024 | पृथीपाल सिंह | GF-0IB | रु0 36,96,697/ | 07.08.2049 | 3 दिसम्बर | यूनिट का सिक्का 2023 कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम एटीएस ग्राण्ड रियलदर्स प्रा. लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट कौं«कब्जा व विलम्बित अवधि का
ब्याज दिलाये जाने हेतु ae rere here की*गयी है| संक्षेप में शिकायतकर्त्नी का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS Khyber Range 4 ape ier GF-028 “TH ar गई, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि wo 36,96,697,/ का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित कथन दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायततकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना ATS Khyber Range में यूनिट संख्या vige—orst बुक करायी गयी थी। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि पूर्व में उनके द्वारा यूनिट संख्या जीएफ 02बी विपक्षी की परियोजना में बुक करायी गयी थी। विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट को परिवर्तित करते हुए vad यूनिट के सापेक्ष भुगतान की गयी धनराशि Go 2,24,375/ यूनिट संख्या जीएफ-04बी वर्तमान यूनिट में समायोजित कर दिया गया जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य सेप्लीमेंट्री एग्रीमेंट फार एडजस्टमेंट ऑफ wos दिनांक 07.09.2020 को निष्पादित हुआ जिसमें यह उल्लिखित है कि यह एग्रीमेंट केवल धनराशि के एडजस्टमेंट हेतु है अन्य नियम व शर्ते पूर्व में निष्पादित एग्रीमेंट फार सेल दिनांकित 07.08.20:9 की लागू होगी। 4 ——
आवंटित यूनिट की कुल कीमत bo 40,74,250/ जो कि 80 :20 पेमेंट प्लान के अन्तर्गत बुक करायी गयी थी। शिकायतकर्ता द्वारा आवंटित यूनिट की कुल कीमत BO 40,74,250/ के सापेक्ष Go 32,57,000 / का भुगतान किया गया है। उभयपक्षों के मध्य दिनांक 07.08.20i9 को एग्रीमेंट wR सेल निष्पादित हुआ। विपक्षी द्वारा अनुबंध के Foret 7.4 के अनुसार निर्धारित अवधि 34.42.2023 तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु विपक्षी निर्धारित अवधि में कब्जा देने में असफल रहा है। शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम की धारा ia(i) के तहत विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि उनके द्वारा पेमेंट प्लान के अनुसार 80 प्रतिशत धनराशि की अदायगी विपक्षी को की जा चुकी है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में एग्रीमेंट फॉर सेल व कस्टमर लेजर की छाया प्रतियाँ दाखिल की गयी हैं |,शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् ,हैः- : क्रम विवरण् Bh दिनाक मुगतान की गई घनराशि रु0 36,96,697 / विपक्षी के अधिवक्ता दिनांक 05.42.2024 को पीठ के समक्ष उपस्थित हुए । विपक्षी को लिखित जवाब दाखिल किये जाने हेतु पर्याप्त अवसर दिये गये परन्तु विपक्षी द्वारा प्रकरण में लिखित जवाब दाखिल नहीं किया गया जिस कारण पीठ द्वारा दिनांक 43.08.2025 को विपक्षी का लिखित जवाब दाखिल करने का अवसर समाप्त करते हुए विपक्षी को लिखित बहस दाखिल करने का समय प्रदान किया गया।
विपक्षी द्वारा प्रकरण में लिखित बहस दाखिल की गयी है जिसमें यह \ उल्लिखित है कि शिकायतकर्ता द्वारा गलत तथ्यों के आधार पर वर्तमान शिकायत (= योजित की गयी है जिस कारण से शिकायतकर्ता की शिकायत निरस्त किये जाने योग्य है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि रेरा अधिनियम की धारा ia के अनुसार विपक्षी की लाइबिल्टी कब्जा दिये जाने की तिथि निकल जाने के पश्चात लागू होती है परन्तु वर्तमान प्रकरण में रेरा द्वारा परियोजना पूर्ण किये जाने की ee
समय अवधि 08.09.2025 तक विस्तारित कर दी गयी है जिस कारण से विपक्षी को परियोजना को पूर्ण किये जाने की समय अवधि 08.09.2025 होने के कारण विपक्षी की शिकायत प्री-मैच्योर की श्रेणी में है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि उन्हें परियोजना के सापेक्ष दिनांक 06.08.2025 को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा जिस यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु वर्तमान शिकायत योजित की गयी है वह यूनिट विपक्षी द्वारा दिनांक 49.44.2025 को निरस्त करते हुए तृतीय पक्ष को आवंटित की जा चुकी है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा रेर अधिनियम की धारा i96) के अनुसार देय धनराशि का भुगतान नही किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लेखित किया गया कि कोविड-49 व देश में हुए लॉकडाउन के चलते विपक्षी की परियोजना विलम्बित हुई है। विपक्षी द्वारा उललेखित किया गया है कि उनके द्वारा शिकायतकर्ता को 46.06.2025, 30.06.2025 व 74.08.2025 को अनुसरण पत्र भेजे गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि क़ा*भुगतान नही किया गया है। इसके पश्चात् विपक्षी द्वारा शिकायततैकर्ता को अँतिम नोटिस दिनांक 26.09.2025 को प्रेषित किया गया है जिसके पश्चात् देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण विपक्षी द्वारा दिनांक 07.47.2025 को अंतिम रूप से शिकाग्रतकर्ता की यूनिट निरस्त की गयी। यूनिट निरस्त किये जानें के पश्चात विपक्षी कम्पनी द्वारा रू 25,69,926 /— का रिफन्ड शिकायतकर्ता को किये जाने हेतु चेक बना दिया गया तथा शिकायतकर्ता से अनुरोध किया कि वह आकर चेक प्राप्त कर लें। विपक्षी द्वारा उललेखित किया गया है कि उनके द्वारा Wire के क्लॉज 9.3 के अनुसार शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त की गयी है। विपक्षी द्वारा उललेखित किया गया है कि उनके द्वारा दिनांक 05.:2.2025 को शिकायतकर्ता के खाते में धनराशि रू 25,69,926 /— स्थानान्तरित की जा चुकी है। विपक्षी द्वारा उललेखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा रू 25,69,926/— वापस विपक्षी के खाते में स्थानान्तरित किये जाने का तर्क किया गया है परन्तु उक्त धनराशि उन्हें अपने खाते में प्रदर्शित नही हो रही है। अतः विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की वर्तमान शिकायत निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है।
— 3 उपरोक्त के अतिरिक्त उभयपक्ष द्वारा दिनांक 46.03.2026 को पीठ के समक्ष बहस प्रस्तुत् की गयी। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया कि विपक्षी द्वारा उनकी यूनिट का werd बन्द कर दिया गया है। विपक्षी द्वारा तर्क किया गया कि शिकायतकर्ता को दो यूनिट संख्या 4६ व 48 एक साथ आवंटित की गयी है और प्रश्नगत दोनो यूनिट में प्रवेश का मार्ग यूनिट Mea से है। इसलिए पृथक से किसी और मार्ग की आवश्यकता नही है। उभयपक्ष के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किया जाता हैं :- शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत प्रपत्रों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न विरचित किये गये :- 4. क्या परिवाद प्री-मैच्योर की श्रेणी में है? 2. क्या विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नहीं? 3. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 4. कया शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विल्म्बित् अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर.होंगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या 4 aes संख्या ge आशय का विरचित किया गया है कि an परिवाद प्री-मैच्योर की श्रेणी FS sera नहीं? इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि रेरा अधिनियम की धारा ia के अनुसार विपक्षी की लाइबिल्टी कब्जा दिये जाने की तिथि निकल जाने के पश्चात् लागू होती है परन्तु वर्तमान प्रकरण में रेरा द्वारा परियोजना पूर्ण किये जाने की समय अवधि 08.09.2025 तक विस्तारित कर दी गयी है जिस कारण से विपक्षी को परियोजना को पूर्ण किये जाने की समय अवधि 08.09.2025 होने क॑ कारण विपक्षी की शिकायत प्री-मैच्योर की श्रेणी में है। पत्रावली पर उपलब्ध Ware फोर सेल दिनाकित 07.08.20:9 का अवलोकन
किया। अनुबंध पत्र के प्रस्तर संख्या 7.4 में यह अंकित है कि ” The promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the commercial space to the allottee/s and the handover of the common areas to the association of owners, is the essence of the agreement. The Promoter assures to handover possession of the commercial space along >>: a 4 with ready and complete common areas with all specifications, amenities and facilities of the project in place on or before 3l‘* December, 2023 unless there is occurrence of any force
majure event, then the allottee/s agree/s that the promoter shall be entitled to the extension of time for delivert of possession..." यहां यह स्पष्ट किया जाता है कि विपक्षी द्वारा हस्ताक्षारित अनुबंध पत्र में यूनिट का कब्जा देने की तिथि 34 दिसम्बर 2023 अंकित की गई है जिस कारण विपक्षी द्वारा जो यह तर्क लिया जा रहा है कि परियोजना पूर्ण होने की तिथि 08 सितम्बर 2025 है, संधार्णीय नही हैं। इस सम्बंध में Re याचिका संख्या 237,/2047 नीलकमल Raced wads wife. बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के उद्धरत प्रकरण में माननीय बम्बई उच्च न्यायालय द्वारा कहा गया है कि :- " The provisions of RERA, however, do not rewrite the clause of completion or handing over possession in reement for sale, Section 4(2)()(C) enables the promoter to give fresh time line independent, of the time period stipulated inwthe agreement’ for sa .entered into between him.and. the’ lotiec $0 that he is not visited with penal consequences Laifliowh under RERA, In other words, by 8शाह ह/007707 to the promoter to prescribe fresh timeline’under™ , sections "4(2)(2)(C)” te is not absolved of the liability under the agreement for sale" उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधान के अनुसार अनुबंध में दिये गये wit एवं कब्जे देने के TER का पुनर्लेखन नहीं किया जा सकता और किसी आवंटी विशेष के प्रकरण में समय सीमा की गणना बी.बी.ए के प्राविधानुसार होगी। रेरा पंजीकरण के समय दी गई नई समय-सीमा केवल रेरा अधिनियम के अधीन “पीनल कॉन्सीक्वेसिज' से ही बचा सकती है। स्पष्टतया समय सीमा की गणना अनुबंध पत्र के अधीन होगी एवं यह प्राविधान रेरा में दी गई छा Time Line की तिथि से “ओवररिटिन' नहीं होगी। पत्रावली पर उपलब्ध अनुबंध पत्र से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता के पक्ष में अनुबंध पत्र दिनांक 07.08.209 को निष्पादित हुआ जिसके अनुसार यूनिट का कब्जा 3 दिसम्बर, 2023 तक दिया जाना था जो अभी तक नहीं दिया गया है।
—— आबखक 5 उक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण करने की तिथि एवं आवंटियों को निष्पादित अनुबंध के अनुसार कब्जा दिये जाने की तिथि भिन्न है ऐसे में उक्त आदेश का आधार लेते हुये निष्पादित अनुबंध पत्र को प्राथमिकता दिया जाना न्यायोचित होगा। इस प्रकार परिवाद प्री-मैच्योर की श्रेणी में नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 -: प्रश्न संख्या 2 इस आशय का विरचित किया गया है कि gar विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नही? इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि उन्हें परियोजना के सापेक्ष दिनांक 06.08.2025 को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया है तथा शिकायतकर्ता द्वारा जिस यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु वर्तमान शिकायत योजित की गयी है वह यूनिट विपक्षी द्वारा दिनांक 49.4.2025 को निरस्त करते हुए तृतीय पक्ष को आवंटित की जा चुकी है तथा शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट..कें*सापेक्ष जमा धनराशि शिकायतकर्ता के खाते में स्थानान्तरित की or gat sf विप्रक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त किये जाने के सम्बन्ध में समय से देय धनराशि का भुगतान न किये जाने का तर्क प्रस्तुत् किया गया है। ४इसके अतिरिक्त. विपक्षी द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि शिकायतकर्ता द्वारा जो धनराशि वापस उनके एकाउंट में लौटायी गयी है वह उन्हें प्रदर्शित नहीं हो रही है।
शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट निरस्तीकरण के सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है जिसमें यह उल्लिखित है कि उनके द्वारा अक्टूबर 2024 में पीठ के समक्ष शिकायत योजित की गयी तथा विपक्षी द्वारा वाद पीठ के समक्ष लम्बित रहने के दौरान दिनांक 07.44.2025 को मनमाने तरीके से शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त कर दी गयी है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी द्वारा जारी यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 07.44.2025 को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त यह भी उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता द्वारा पुनः जो धनराशि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के खाते में स्थानान्तारित की गयी है वह धनराशि वापस विपक्षी के खाते में दिनांक 40.42.2025 को स्थानान्तारित कर दी गयी है जिसका बैंक द्वारा oo 6 जारी प्रमाण पत्र के रूप में साक्ष्य शिकायतकर्ता द्वारा पत्रावली पर दाखिल किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के सम्बन्ध में भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 की धारा 9.3 (2) में यह प्राविधानित है कि :- धारा 9.3
ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination. उपरोक्त प्राविधानों के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष बकाया धनराशि का भुगतान Aa जानें “पर मांग पत्र अनुस्मरण पत्र तथा प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किये जाने का प्राविधान है। wera शिकायत में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनाँक, 6.062025 F 30.06.2025 को अनुसरण पत्र प्रेषित कर अवशेष देय धनराशि“कॉ "भुगतान fet जानें eg सूचित किया गया जिसके पश्चात् विपक्षी द्वारा दिनांक 44.08.2025 को शिकायतकर्ता को अंतिम अनुसरण पत्र प्रेषित किया गया तथा दिनांक 26.09.2025 को अंतिम नोटिस प्रेषित कर यूनिट के सापेक्ष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु सूचित किया गया तथा दिनांक 07. 47.2025 को विपक्षी द्वारा अंतिम रूप से शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त करते हुए यूनिट के सापेक्ष जमा धनराशि में से कटौती करते हुए रू 25,69,926 /- शिकायतकर्ता के खाते मे स्थानान्तरित किये गये है।
पत्रावली के अवलोकन से विदित है कि एग्रीमेंट फोर सेल दिनांक 07.08. 2049 से स्पष्ट है कि आवंटित यूनिट की कुल कीमत धनराशि रु0 40,7,250/ है / जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा vo 36,96,697,/ का भुगतान किया गया है जो कि यूनिट की कुल कीमत का लगभग 92 प्रतिशत से अधिक है। विपक्षी द्वारा अनुबंध पत्र के अनुसार परियोजना पूर्ण करते हुए शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दिसम्बर 2023 में दिया जाना था। विपक्षी द्वारा परियोजना के सापेक्ष सक्षम प्राधिकरण से अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 06.08.2025 को प्राप्त किया गया है जिससे यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में परियोजना पूर्ण कर शिकायतकर्ता को कब्जा उपलब्ध नही कराया गया है जिस कारण से विपक्षी द्वारा समय से परियोजना पूर्ण न किये जाने का दोष है। शिकायतकर्ता द्वारा पेमेंट प्लान के अनुसार यूनिट की कुल कीमत Bo 40,7,250/ के सापेक्ष रु० 36,96,697/ का भुगतान किया जा चुका है जो कि यूनिट की कुल कीमत का लगभग 92 प्रतिशत से अधिक है। विपक्षी द्वारा लिखित बहस में यह तथ्य अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा समय से देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण उनके द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त की गयी है। ऐसी स्थिति में जब शिकायतकर्ता 92 प्रतिशत धनराशि का भुगतान विपक्षी को कर चुके है तब विपक्षी द्वारा किया गया यह तर्क कि शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान.समय से नहीं किया गया है संधारणीय नहीं है। a
यहाँ यह भी उल्लिखित किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत शिकायत दिनांक 03.0.2024. को योजित की गयी थी तथा विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट पीठ के समक्ष विचारणीय रहने के दौरान दिनांक 07.44.2025 को निरस्त की गयी है तथा विपक्षी द्वारा लिखित बहस मे यह तथ्य अंकित किया गया है कि उनके द्वारा प्रश्नगत यूनिट पर तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित कर दिये गये है परन्तु विपक्षी पर्याप्त अवसर दिये जाने के पश्चात भी उक्त के सम्बन्ध में कोई साक्ष्य पीठ के समक्ष प्रस्तुत करने में असमर्थ रहे। इस सम्बन्ध में माननीय अपीलीय अधिकरण द्वारा अपील संख्या 485,/ 2023 अलका ढींगरा एव der ढींगरा बनाम there रियलटेक प्रा.लि. में दिनांक 48.02. 2025 को पारित आदेश का उल्लेख किया जाना महत्वपूर्ण प्रतीत होता है। माननीय अपीलीय अधिकरण द्वारा GAT आदेश के प्रस्तर 28 व 29 में यह उल्लिखित किया गया है कि :- 28- It was held that lis pendens commences at the stage of institution of the petition and not at the stage when the notice is issued by the court. Thus, taking Review Petition pending, though 8 —_— SS
defective, it was held that Section 52 of the Transfer of Property Act would apply to the third-party purchases, once the sale was executed after the review petition was instituted before the Court. In other words, the transfer of property that is made during the pendency of the suit/proceedings is subject to the final decision of the litigation. Paragraph 47 and 49 is extracted: “47. ॥ short, the doctrine of lis pendens that Section 52 of the Transfer of Property Act encapsulates, bars the transfer of a suit property during the pendency of litigation. The only exception to the principle is when it is transferred under the authority of the court and on terms imposed by it. Where one of the parties to the suit transfers the suit property (or part of it) to a third-party, the latter is bound by the result of the proceedings even if he did not have notice of the suit or proceedings...” “ 49. The purpose of lis pendens is to ensure that the process of the courtyis not subverted and, rendered infructuous. In the absence» of the doctrine of lis pendens, a defendant could defeatythe purpose of the suit by alienating the suit property. This purpose of the Biovision is dlearly elucidated in the explanation clause to Section’ 82 which defines “pendency”. Amending Act 20 of 929 substituted the word “pendency” in place of “active prosecution”. The amending Act also included the Explanation defining the expression “pendency of suit or proceeding”. “Pendency” is defined to commence from the “date of institution” until the “disposal”. The argument of the respondents that the doctrine of lis pendens does not apply because the petition for review was lying in the registry in a defective state cannot be accepted. The review proceedings were “instituted” within the period of limitation of thirty days. The doctrine of lis pendens kicks in at the stage of
“institution” and not at the stage when notice is issued by this Court. Thus, Section 52 of the Transfer of Property Act would apply to the third-party purchases once the sale was executed after the review petition was instituted before this Court. Any transfer that is made during the pendency is subject to the final result of litigation.” [vide M/s. Siddamsetty Infra (supra)] 29. aecesessteeees It is categorical and specific case of respondent that the unit came to be deemed cancelled on 02.09.209 during pendency of the complaint. Further, during pendency of the complaint, third party right was created by the respondent deliberately and willfully. Therefore, sale deed executed in favour of third party by the respondent is in the teeth of the principle of lis pendens. Sale deed in favour of third party would be subject to the outcome of this appeal, which is continuation of the complaint. The allotment/sale deed of the unit made to a third party during subsistence of the agreement and pendency of the complaint would be hit by Section 4(4)(h) and Section (5) of Act, 2046 id उपरोक्त न्याय नजीर*के अवलोकन Gewese कि वाद पीठ के समक्ष
विचाराधीन होने के दौरान शिकायतकर्ता की शिकायत रेरा अधिनियम की धारा 47 (4)(va) तथा धारा 44(6) में उल्लिखित प्राविधान उभयपक्षों पर बाध्य है तथा पीठ द्वारा शिकायत का निस्तौरँण “करते समय oT fra दिया जाएगा वह निर्णय उभयपक्षों के साथ-साथ तृतीय पक्ष पर भी बाध्यकारी होगा। यह भी उल्लेखनीय है कि विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में परियोजना पूर्ण नही की गयी है जिस कारण से विपक्षी अपने दोष का लाभ नही ले सकता है। उपरोक्त वर्णित तथ्यों के अवलोकन से यह विदित होता है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष यूनिट की कीमत की लगभग 92 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया गया है तथा विपक्षी द्वारा बिना किसी आधार के तथा उपरोक्त उल्लिखित प्राविधानों के विपरीत शिकायतकर्ता की यूनिट वर्तमान शिकायत पीठ में लम्बित रहने के दौरान निरस्त की गयी है जोकि विधि सम्मत तथा उपरोक्त न्याय नजीर एवं प्राविधानों के विपरीत है। अतः विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक नहीं है। तदनुसार प्रश्न संख्या 2 निस्तारित किया जाता है। इज: i0 a निस्तारण प्रश्न संख्या-3 प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :-
” प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर Witte में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना OTT |" पत्रावली पर दाखिल बिल्डर बायर एग्रीमेंट दिनांकित 04.40.2045 के प्रस्तर 24 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्नलिखित उल्लेख है कि :- The completion date is subject to force majeureé:conditions and/or subject to any other reasons beyond the ‘control ofthe Developer, No claim by way of damages/compensation:shalljlie againstthe:developer in case of delay in handing over the possession on accountiof any ofthe aforesaid reasons and the developer shall be entitled to a reasonable extension of ‘time for the delivery of possession of the said Flat/Villa to the Allottee “es माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 // 4985, “MC Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04--44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:-
“With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके afakat उपर्युक्त सिविल अपील dem: 43029,/4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “in the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:- Ti _ <
॥१2, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-209 में पूर्ण प्रतिबन्ध को gerd हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लग्राया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिज्ञांक 04--4॥#2049. से festa 09-42-2049) एवं 33 दिन(66+2) (दिनांक 40-42+2049 Sefeaareta=02-2020 तक wie 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अव॑धि के लिएँ निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट-हैंकि-उक्तत अवधि-विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित तीनों अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल- 35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 4--: प्रश्न संख्या-4 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? आया अऊ.- हा A a Sia Jar alta Co) हि
पत्रावली पर उपलब्ध एग्रीमेन्ट फोर सेल दिनांक 07.08.20I9 के अनुसार शिकायतकर्ता को दिसम्बर 2023 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था परन्तु विपक्षी ant निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 06.08.2025 को पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। इस प्रकार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 4.5 वर्ष से अधिक का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Ho 6649-50 /20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close.on’April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtairied as pef the admission of the Respondent — Purchaser herself.in, Para 4(j)of the Consumer Complaint, wherein:she has admitted:that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to délay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought.not to,be allowed,to.reap the benefits of her own delay in taking possession. "
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी.// सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the ह 2. | — SS light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. "
अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि vouo रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Gat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2oi6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय »/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(॥) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall havethe option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along withsinterest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate)-on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty- five days of receiving the termination notice:
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+9faera की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी |(ट.2+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(28)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश अपलोड होने की तिथि से 45 दिन में शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट को पुर्नस्थापित करते हुए, शिकायतकर्ता से यूनिट के सापेक्ष बिल्डर बायर एग्रीमेंट के अनुसार अवशेष देय धनराशि प्राप्त कर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प Yow प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री Here |
विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2024 से ओ.सी/सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि GO 36,96,697/ पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगते*रखते हुए 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक, परियोजना, में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की ज़ायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो os ध्प्र भी डैस. अवधि का ब्याज़ देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(2०)()के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। ged शिकायत में इस पीठ द्वारा यथास्थिति बनाये रखने हेतु पारित आदेश एवं स्थगन आदेश को तदूनुसार समाप्त किया जाता है। od 45 5. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा।
6. विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। aS OS: 2DD2G6 (sto दीपक स्वरूप सक्सेना) We सदस्य उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण 6