Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Shubhang Tyagi v. Prateek Realtors India Private Limited
Complaint No. NCR145/10/113753/2023
- Decision date
- 2026-01-20
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत ह पारित आदेश उपस्थित:- sto दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य , शिकायत संख्या | यूनिट न0 जमा धनराशि wo | आवंटन की | कब्जा दिये वांछित io तिथि जाने की ' अनुतोष है तिथि |] | ८६ 45/0/ |3753/2023_ | शुभांग त्यागी पी 9-2403 | wo'46,88,640 / | 04.08.2056 | मार्च 2079 यूनिट का व fast शर्मा तथा 06 माह | कब्जा व अनुग्रह विलम्बित अवधि के अवधि का साथ a दिलाये जाने का सिंतम्बर अनुरोध किया * & (५ गया है। बनाम प्रतीक रियलटर्स इंडिया प्रा.लि. शिकायतंकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह शिकायत संस्थित की गयी है। ै
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कंथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना. Grand Pande At Prateek Grand City 4 यूनिट ¥REM-P-9-203 बुक कराई गयी थी जिसके सापेक्ष “शिकायतकर्ता-द्वारा"विपक्षी को धनराशि रु0 46,88,640 ,/-का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित कथन दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा बुकिंग के समय यह आश्वासन दिया गया था कि यूनिट का कंब्जा मार्च 20i9 में उपलब्ध करा दिया जाएगा। शिकायतकर्ता द्वारा संवेंशन स्कीम के अन्तर्गत जुलाई 205 4 यूनिट संख्या 2403 बुक करायी गयी थी जिसमें विपक्षी द्वारा धनराशि डिस्बर्समेंट की तिथि से ऑफर ऑफ पजेशन तक प्री-ईएमआई का भुगतान किया जाना था। आंवंटित यूनिट के सम्बन्ध में दिनांक 04.08.20I5 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को यूनिट के सापेक्ष धनराशि wo 46,88,640 / का भुगतान किया जा चुका है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। ———_s व.< शिकायतकर्ता की ओर से शिकायत के समर्थन में लिखित कथन, आवंटन पत्र, कस्टमर लेजर, प्रतिउत्तर व लिखित बहस की छायाप्रतियाँ दाखिल की गई है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् a क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या _ » (रु0) 4 विपक्षी द्वारा जारी कस्टमर लेजर 26.05.2023 BO 46,88,640 /
विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति दाखिल की गई जिसमें यह उल्लिखित है कि शिकायतकर्ता को परियोजना ग्राण्ड पियोनिया में यूनिट संख्या पी-9 / 2403 आवंटित की गई थी। विपक्षी द्वारा Ves si के आधार पर दिनांक 08.05.2023 को शिकायतकर्ता को कब्जा हेतु प्रस्ताव भेजा जा चुका है। विपक्षी की परियोजना अप्रत्याशित घटनाओं के कारण विलम्बित हुई, जो विपक्षी की नियत्रंण से बाहर थी। विपक्षी द्वारा परियोजना में हुये विलम्ब के लिए यह कारण cata गये है कि परियोजना में अगस्त-सितम्बर 2004 में निर्माण कार्य प्रारम्भ होने के बाद माननीय उच्च. न्यायालय इलाहाबाद द्वारा Re संख्या सी-9857,/2045 उत्तर रेलवे दूर संचार व 43 अन्य बनाम स्टेट ऑफ यूपी व 47 अन्य में आदेश दिनांक 29.02.20i5 में Status 0७० होने का संदर्भ अंकिंत किया गया है। इस प्रकार परियोजना में निर्माण कार्य 44.07.206 तक बंद था। इसके अतिरिक्त aiffs—i9 महामारी, माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण होने के कारण निर्माण कार्य दिनांक 04.4.20I9 से 09.2.20I9 तक बंद किये जाने का आदेश पारित किया गया | इसके उपरांत माननीय न्यायालय द्वारा फरवरी 2020 तक निर्माण कार्य बंद किये जाने का आदेश पारित किया गया। इसके अतिरिक्त olfts—t9 महामारी, माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण होने के कारण निर्माण कार्य, दिनांक 04.4.2049 से 09.:220I9 तक बंद किये जाने का आदेश पारित किया गया। इसके उपरांत माननीय न्यायालय द्वारा फरवरी 2020 तक निर्माण कार्य बंद किये जाने का आदेश पारित किया गया। विपक्षी ने. यह भी उल्लिखित किया है 2 TSS कि शिकायतकर्ता को अनुबंध के क्लाज-49 के अनुसार सितम्बर 2020 में कब्जा
दिया जाना था। विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारां अपील संख्या 940/207 विक्रम चटर्जी व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य में पारित आदेश के प्रस्तर संख्या t40 व यूपी रेरा पीठ-4 द्वारा शिकायत संख्या wariises45 /05 ,/ 94974 /2022 में पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान प्रकरण को निरस्त किये जाने तथा शिकायतकर्ता को अवशेष देय धनराशि का भुगतान करके यूनिट का कब्जा लिये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। . शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिउत्तर- दाखिल की गयी जिसमें शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब के प्रत्येक प्रस्तर का खण्डन करते हुए यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा.लिखित बहस दाखिल की गयी है जिसमें शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल लिखित कथन की पुनवित्ति की गयी है। wre के तर्को को सुना गया। उभयपक्षो के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये :- i. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. कया शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न Wert: प्रश्न Wa इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? यह प्रश्न विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने wr भार विपक्षी पर है।
विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अपील संख्या 940 /20:7 विक्रम चटर्जी व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण होने के कारण निर्माण कार्य दिनांक 04.:4.209 से 09.:2.20I9 तक बंद किये जाने का आदेश पारित किया गया। इसके उपरांत माननीय न्यायालय द्वारा फरवरी 2020 तक निर्माण कार्य 3 = SS बंद किये जाने का आदेश पारित किया गया। तत्पश्चात् wifas—i9 महामारी के कारण निर्माण कार्य बाधित होने का तर्क अंकित कियागया है। फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- . ह ' प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर Uitte में कब्जा देने की areata: तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, M.C. Mehta Versus Union of India” में प्रारित आदेश, दिनांक 04--44-209 में निम्नलिखित निर्देश दिये ea
“With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as- the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall-be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” हु इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029,/4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-209 में निम्नलिखित निर्देश दिये हैः- “In the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:- i
"42. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time, (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. '” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (fei §=04—-2:-209 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-209 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक o4—4:-20:9 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 fea(66+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक सौॉँय 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गयां। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न्यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त-वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पानें*का अधिकारी है।
विपक्षी द्वारा यह तर्क लिया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा Re संख्या सी-9857 /205 उत्तर रेलवे दूर संचार व 73 अन्य बनाम स्टेट ऑफ यूपी व t4 अन्य में आदेश दिनांक 49.02.205 में Status Quo होने का संदर्भ अंकित किया गया है। इस प्रकार परियोजना में निर्माण कार्य 44.07.2046 तक बंद था। यहां यह स्पष्ट किया जाना उचित है कि उभयपक्षों B मध्य दिनांक 04.08. 20i5 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ है जिस कारण विपक्षी का उक्त तर्क संधारणीय नहीं है। इसक अतिरिक्त पत्रावली पर उपलब्ध कस्टमर लेजर से स्पष्ट है कि विपक्षी ने यथास्थिति आदेश के दौरान भी शिकायतकर्ता से धनराशि की मांग की गई जो शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि भुगतान की गई है। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी ने यथास्थिति के दौरान भी निर्माण कार्य किया है जिस कारण विपक्षी इस अवृधि का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। इसके अतिरिक्त कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09. 2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी aifrs—t9 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने
का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है' कि क्या शिकायतकर्ता को विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जा सकता है? यदि a तो ब्याज दर क्या होगी? शिकायतकर्ता का कहंना हैं कि-विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त vat यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य आवंटन पत्र दिनांक 0408205 को निष्पोंदित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा AR 20:9 तथा 06 माह .अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात सितम्बर 2049 में प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में यह तर्क प्रस्तुत. किया गया है fe शिकायतकर्ता .को डीम्ड ओ.सी के आधार -पर दिनांक 08.05.2023 को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिकायतकर्ता अवशेष देय धनराशि का भुगतान करके यूनिट का कब्जा प्राप्त कर सकते है। ह pact के अवलोकन से विदित हैं कि शिकायतकर्ता व विपक्षी के मध्य दिनांक 04.08.205 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा AI 2079 तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ 6 अलग कब." अर्थात सितम्बर 2079 में दिया जाना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया जा चुका है परन्तु विपक्षी द्वारा परियोजना के सापेक्ष ओ.सी /सी.सी प्राप्त होने का कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल नहीं किया गया है ह |
उपरोक्त से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 06 वर्ष से अधिक का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व fleet अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। ॥ जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 /208 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित fear गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was gbtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant Builder had obtained the Completion Certificate-as late‘as April 206. ‘The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. u है उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ gard वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section I8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from thé project he shall be paid by the promoter 7° V——_ SS interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the . Sat " apartment is handed over to him is not unreasonable. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि .प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम , 20I6 के अधीन दिनांक 7.40.2078 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली oor8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा
विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wee o2(i) Jute, के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice पु यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४८,२+।प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी McLR+l प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(०७)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी. है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता ae or कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज + पाने के अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। er 8. उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकौयतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण. कराकर कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। ह विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.0.2049 से ओ.सी /सी.सी प्राप्त होने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि wo 46,88,640,/ (रु० छियालिस लाख अटठासी हजार छ: सौ चालीस) पर MCLR+I प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की ys धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी॥ ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 4 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय--उच्चतम- न््यायालय--द्वारा सिविल अपील संख्या 43029 / 985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की . जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। * विपक्षी को यह निर्देशित किया,जाता है कि रेरा अधिनियम, 20i6 की धारा zai) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अत: विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी Mcie+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याजं॑ देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी
9 —S से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, ‘20t6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 5. विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण H माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। 6. आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। ee VQ. 0). 2DS2VG (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 0