Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Abhinav Maheshwari v. Uppal Chadha Hi-Tech Developers Pvt. Ltd
Complaint No. NCR145/09/82195/2021
- Decision date
- 2026-08-24
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 / 40 ,/63 सपठित नियम-24 20-शिकायत संख्या:--0८ट7]45/09/82]95/202] अभिनव महेश्वरी बनाम उप्पल चड्ढा हाई-टेक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 24.08.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो oR के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री मानेन्द्र कुमार उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री असित कुमार उपस्थित हुए। उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। प्रस्तुत पत्रावली माननीय रेरा पीठ-0१ द्वारा पारित आदेश दिनांक 29.07.2026 के क्रम मं पुनः इस पीठ को प्राप्त हुई कि धारा-3 के अन्तर्गत पारित आदेश का क्रियान्वयन नियम-24, आदेश-2॥ सिविल प्रक्रिया संहित के प्रावधानों के अन्तर्गत कराया जाये।
शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में बुक किया गया प्लॉट का कब्जा एवं रजिस्ट्री न कराये जाने के कारण शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं रजिस्ट्री हेतु अपनी शिकायत ara की गई, vera शिकायत में माननीय पीठ-0ए द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 30.08.2022 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता के प्लॉट की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.40.2022 तक ओ.सी. / सी.सी. ai कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। > विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 30.0.2006 से ओ.सी./ सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLRH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25. 09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही इस अवधि में शिकायतकर्ता द्वारा यदि कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा।
3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2za(i) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी धटा॥रता प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4... पक्षकारों को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने के 45 दिनों के अन्दर उ०प्र० शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 /e—3-t8-65 विविध ,/ 46 के दिनांक 27.0.20I8 को जारी किये गये Gite टू सेल के प्रारूप पर aged निष्पादित कराना सुनिश्चित करें 5... विपक्षी द्वारा er अधिनियम की धारा-43 (3) के उल्लंघन के सम्बन्ध में सचिव, रेरा विपक्षी के ऊपर दण्डात्मक कार्यवाही करते हुए अर्थदंड अधिरोपित करना सुनिश्चित करें। 6. इस आदेश का उल्लंघन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 7. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का fara करा सकेगें।
विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 30.08.2022 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38/40,/63 के अन्तर्गत var आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-04 (पूर्व में पीठ-0ए) द्वारा दिनांक 24.02.2025 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित .किया गया है कि:- अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों @ दृष्टिगत पत्रावली नियम-24 में निहित शक्तियों के अधीन पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 30-08-2022 के प्रस्तर-04 के अनुसार प्रश्नगत प्लॉट के भौतिक कब्जे एवं रजिस्ट्री की कार्यवाही हेतु मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सुनवाई के लिए, दिनांक 03-04-2025 को संदर्भित की जाती है। जहाँ तक विपक्षी कम्पनी का कथन कि उनके द्वारा प्रश्नगत प्रकरण के सम्बन्ध में मा. अपीलीय अधिकरण, लखनऊ के समक्ष अपील संख्या 244,/2024 योजित की गयी जिसके क्रम में विपक्षी कम्पनी द्वारा रेश अधिनियम, 2046 की धारा-43(5) के अनुपालन में डिमाण्ड ड्राफ्ट के माध्यम से W.,86,86 ,/- की धनराशि जमा करायी गयी। इन आधारों पर विपक्षी कम्पनी द्वारा मा. अपीलीय अधिकरण, लखनऊ के समक्ष प्रस्तुत अपील के लम्बित रहने तक, प्रश्नगत प्रकरण को Abeyance में रखे जाने का अनुरोध किया गया है. परन्तु उक्त अपील मा अपीलीय अधिकरण, लखनऊ द्वारा अपने अंतिम आदेश, दिनांक 03--04-2025 के माध्यम से खारिज की जा चुकी है। अतः उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में प्रश्नगत प्रकरण को वर्तमान Ff Abeyance में रखे जाने का कोई विधिक आधार एव औचित्य नहीं है।
अतः सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 30-08-2022 के प्रस्तर-02 के अनुसार दिनांक 25-03-2025 से पूर्व विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के व्याज की गणना कराकर निम्नानुसार कार्यवाही करें- (क) यदि मा. अपीलीय अधिकरण से उपर्युक्त अपील के क्रम में रेरा प्राधिकरण के सम्बन्धित खाते में कोई धनराशि प्राप्त हुई है. तो उसे तत्काल प्रार्थी / शिकायतकर्ता के खाते में स्थानांतरित कर, पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश के प्रस्तर-02 के अनुसार विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि में घटाते हुए, अवशेष धनराशि (यदि कोई अवशेष रहे) की वसूली हेतु, नियमानुसार वसूली प्रमाण-पत्र जारी करायें। (ख) यदि मा. अपीलीय अधिकरण से उपर्युक्त अपील के क्रम में रेरा प्राधिकरण के सम्बन्धित खाते में कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई है, तो ऐसी स्थिति में पीठ द्वारा ast के अन्तर्गत पारित आदेश के प्रस्तर-02 के अनुसार विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की समस्त धनराशि की वसूली हेतु, नियमानुसार वसूली प्रमाण-पत्र जारी कराये। तदोपरान्त पत्रावली को सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। * यदि मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी नियम-24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत धारा-34, दिनांक 30--08--2022 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं।
लेकिन प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी द्वारा माननीय रेरा पीठ द्वारा पारित आदेश का अनुपालन नहीं किया गया और न ही सम्बन्धित पीठ द्वारा आदेश का अनुपालन कराया गया और प्रश्नगत पत्रावली नियम-24 के अन्तर्गत कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई। इस पीठ द्वारा बार-बार विपक्षी को निर्देशित किये जाने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा माननीय रेरा पीठ द्वारा पारित आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। - शिकायतकर्ता द्वारा प्रार्थना-पत्र इस आशय का दाखिल किया गया कि विपक्षी / कम्पनी के डायरेक्ट को गिरफ्तार कर, यूनिट का कब्जा दिलाया जाये। इस सम्बन्ध में आदेश दिनांक i2.032026 4 इस पीठ द्वारा स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा सिविल गिरफ्तारी हेतु कोई अधिकारी / कर्मचारी / अमीन / बेलिफ नियुक्त नहीं किया गया है। अतः ऐसी स्थिति में विपक्षी / कम्पनी के डायरेक्टर को सिविल कारागार में निरुद्ध किये जाने का आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। इस पीठ द्वारा आदेश दिनांक 42.03.2026 में स्पष्ट रूप से उल्लेख करते हुए कि विपक्षी द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है और विपक्षी द्वारा माननीय रेरा पीठ द्वारा पारित आदेश का अनुपालन न करने के कारण विपक्षी के विरुद्ध अर्थदण्ड / पेनल्टी अधिरोपित की जाये, लेकिन सम्बन्धित पीठ द्वारा कोई आदेश इस सम्बन्ध में पारित नहीं किया गया है और न ही विपक्षी के विरुद्ध धारा-63 के अन्तर्गत पेनल्टी / अर्थदण्ड अधिरोपित करने का कोई आदेश / अभिलेख पत्रावली पर है और नहीं सम्बन्धित पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 29.07.2026 में कोई उल्लेख है।
माननीय रेरा पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 30.08.2022 के प्रस्तर-4 में यह व्यवस्था दी गई है किः- पक्षकारों को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने के 45 दिनों के अन्दर उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-03 की अधिसूचना संख्या-4740 /8—3i8-65 fafar/ie के दिनांक 7.0.208 को जारी किये गये एग्रीमेन्ट टू सेल के प्रारूप पर अनुबन्ध निष्पादित कराना सुनिश्चित करें। लेकिन विपक्षी द्वारा उक्त आदेश का आज तक अनुपालन नहीं किया गया है। विपक्षी को पुनः निर्देशित किया जाता है कि वह एक माह के अन्दर शिकायतकर्ता के पक्ष में माननीय रेरा पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 30.08.2022 के प्रस्तर-04 में दी गई व्यवस्था के अनुसार witre ¢ सेल /अनुबन्ध निष्पादित कराना सुनिश्चित करें। शिकायतकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि उसका प्रार्थना-पत्र दिनांकित 28.07.2025 इस आशय का दाखिल है कि विपक्षी के प्रोजेक्ट ऑफिस एवं अन्य सम्पत्ति की कुर्की कर आदेश का निष्पादन कराया जाये। | विपक्षी यदि चाहे, तो शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल प्रार्थना-पत्र दिनांकित 28.07.2025 के विरुद्ध अपनी आपत्ति एक माह के अन्दर रेरा पोर्टल पर अपलोड एवं भौतिक रूप से रेरा कार्यालय में दाखिल कर सकता है, ताकि उभयपक्षों को सुनकर उक्त प्रार्थना-पत्र का निस्तारण किया जा सके | पत्रावली अग्रिम सुनवाई हेतु दिनांक t6.44.2026 को पेश हो। —sei~ SNe आर. पी. Rig (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण