Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rajiv Kumar Chauhan and Malti Devi v. Saya Homes Pvt Ltd
Complaint No. NCR145/09/81882/2021
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- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
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Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddha Nagar. Bench-02 Order under Section 31 / धारा-34 Presence:-- Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member T. Venkatesh, Member Complaint Number :- NCR45/09/8882/202I Rajeev Kumar Chauhan and Malti Devi Versus Saya Homes Pvt. Ltd. The present complaint application has been instituted by the complainants against the respondent for grant of possession and interest for the delayed period. In brief, the complainants state that unit number SG-2/2607, 26TH FLR was booked by them in the respondent's project Saya Gold Avenue (Phase-2), whose total price was Rs. 70,0,404/-, against which an amount of Rs. 67,85,407/- was paid by the complainants on an installment basis from time to time. The complainants state that possession of the unit was to be provided by the respondent in July 2049, but the respondent sent an offer of possession dated 07.08.2024 without obtaining OC/CC from the competent authority, and the respondent has not completed the construction work of the project either. Possession of the unit is not being made available by the respondent and money is being demanded illegally. Therefore, request has been made by the complainants for grant of possession of the unit in question and interest for the delayed period.
The respondent filed a reply stating that all required certificates related to the project have been obtained and application was made before the competent authority on date 24.07.2024 for completion certificate along with all required certificates, and as per order dated 46.09.2049 / 46.09.20:9 / 46.09.209 issued by the Authority, if the application is not rejected by the authority within 7 days / 90 days of applying for OC/CC, from the said date the application in question shall be considered under deemed approved category. Offer of possession letter dated 07.08.2024 / 07.08.202 has already been issued to the complainant by the respondent. Arguments of both parties were heard and the record was perused, on the basis of which the following issues are framed: - 1. Whether the respondent's project was delayed due to force majeure events? If yes, its effect? 2. Whether the project in question falls under the category of deemed approved or not? 3. Whether the complainant should be granted possession and interest for the delayed period? If yes, what will be the rate of interest? Points of Determination: Point of Determination No. 1: Point No. 1 has been framed to the effect whether the respondent's project was delayed due to force majeure events? If yes, its effect? This point has been framed on the averments of the respondent, the burden of proving which is on the respondent.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। पीठ-02 आदेश अन्तर्गत धारा-34 उपस्थिति:-- Slo दीपक स्वरूप GRA, सदस्य टी० वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या :- NCR45/09/8882/202I राजीव कुमार चौहान एवं मालती देवी बनाम साया होम्स प्रा.लि. प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Saya Gold Avenue (Phase-2) में यूनिट संख्या- SG-2/2607, 26TH FLR बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 70,0,404/— रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 67,85,407 /- रूपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा जुलाई 2049 में प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी ने बिना समक्ष प्राधिकरण से ओ.सी /सी.सी प्राप्त किये कब्जा ऑफर दिनांक 07.08.2024 को भेजा है और विपक्षी ने परियोजना का निर्माण कार्य भी पूर्ण नहीं किया है। विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है और अवैधानिक तरीके से धनराशि की मांग की जा रही है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में ऑफर ऑफ पजेशन दिनांक 07.08.2024, मांग पत्र, अपार्टमेंट बायर्स एग्रीमेंट दिनांकित 30.09.206 की प्रति, गृह ऋण स्वीकृति पत्र दिनांकित 43.09.20:6 आदि की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है।
विपक्षी द्वारा जवाब दिनांकित 45.44.2022 दाखिल किया गया है जिसमें उनके द्वारा अंकित किया गया है कि उनकी परियोजना रेरा के अंतर्गत पंजीकृत है, जिसका पंजीकरण क्रमांक UPRERAPRIO678 है। विपक्षी की परियोजना का निर्माण कार्य इसलिए विलम्ब हुआ क्योकि कुछ आवंटियों द्वारा अपनी देयता का भुगतान समय से नहीं किया गया और कोविड-49, Ho सर्वोच्च न्यायालय, HO एन.जी.टी. के द्वारा विभिन्न अवधियों में निर्माण कार्य पर लगाये गये प्रतिबंध के कारण भी विलम्बित रहा है। be — 2
विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को वर्ष 20i6 में यूनिट संख्या-2607 टॉवर- $6-2 में आवंटित की गयी थी, जिसकी कुल कीमत 73,28,595 //- रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 63,73,063/— का भुगतान किया गया है। उभयपक्षों द्वारा हस्ताक्षरित अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-42(89) के अनुसार यूनिट का कब्जा दिनांक 34. 07.2049 एवं 06 माह के ग्रेस पीरियड के साथ कब्जा प्रदान करना था। विपक्षी द्वारा परियोजना से सम्बन्धित सभी वांछित प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा चुका है और दिनांक 24.07.2024 को सभी वांछित प्रमाण पत्रों सहित सक्षम प्राधिकरण के समक्ष पूर्णता प्रमाण पत्र हेतु आवेदन किया जा चुका है और प्राधिकरण द्वारा जारी आदेश दिनांक 46.09.2049 के अनुसार यदि ओ.सी /सी.सी. आवेदन किये जाने के 7 दिनों के अन्दर प्राधिकरण द्वारा प्रार्थना पत्र खारिज नहीं किया जाता है तो 8वें दिन से प्रश्नगत प्रार्थना पत्र डीम्ड wes की श्रेणी में माना जायेगा। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 07.08.202 को ऑफर ऑफ पजेशन पत्र जारी किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा मांग पत्रों के अनुसार अपनी देयता का भुगतान नहीं किया जा रहा है। विपक्षी द्वारा उक्त कथन के समर्थन में विभिन्न न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों का भी उल्लेख किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में सक्षम प्राधिकरण से प्राप्त सभी एन.ओ. सी की प्रति, शिकायतकर्ता को प्रेषित मांग पत्र की प्रति, शिकायतकर्ता को प्रेषित ऑफर ऑफ पोजेशन दिनांकित 07.08.2024, ओ.सी. हेतु आवेदन प्रार्थना पत्र आदि की छायाप्रति दाखिल की है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये जाते हैं :-
l. क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? 2. क्या प्रश्नगत परियोजना Ss अप्रूब्ड की श्रेणी के अन्तर्गत है अथवा नहीं? 3. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 बिन्दु ven- इस आशय का विचरित किया गया. है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई ? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य कोविड-49, मा० सर्वोच्च न्यायालय, Ao एन.जी.टी. के द्वारा विभिन्न अवधियों लगाये गये प्रतिबंध के कारण भी विलम्बित रहा है। oy — 3 विपक्षी द्वारा पत्रावली पर कोई प्रपत्र पत्रावली पर दाखिल किया गया है जिससे विदित हो सके कि परियोजना का निर्माण कार्य फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण बाधित रहा था। इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 /20i7 flex चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर 440 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- Force majeure shall mean a case of war. flood, drought. fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature. उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है।
समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 बिन्दु संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या प्रश्नगत परियोजना डीम्ड ayes की श्रेणी के अन्तर्गत है अथवा नही ? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी द्वारा अपने जवाब में अंकित किया गया कि परियोजना से सम्बन्धित सभी वांछित प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा चुका है और दिनांक 24.07.2024 को सभी वांछित प्रमाण पत्रों सहित सक्षम प्राधिकरण के समक्ष पूर्णता प्रमाण पत्र हेतु आवेदन किया जा चुका है और प्राधिकरण द्वारा जारी आदेश दिनांक 46.09.209 के अनुसार यदि ओ.सी /सी.सी. आवेदन किये जाने के 7 दिनों के अन्दर प्राधिकरण द्वारा प्रार्थना पत्र खारिज नहीं किया जाता है तो ed दिन से प्रश्नगत प्रार्थना पत्र डीम्ड अप्रूव्ड की श्रेणी में माना जायेगा। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 07.08.202 को ऑफर ऑफ पजेशन पत्र जारी किया जा चुका है। Sa ——- 4
पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन से विदित है कि प्रश्नगत शिकायत आवासीय परियोजना से सम्बन्धित है एवं रेरा प्राधिकरण को आवासीय परियोजना के सम्बन्ध में सुनवाई का क्षेत्राधिकर प्राप्त है, जिसके सम्बन्ध में रेरा अधिनियम की धारा-2(०) का उल्लेख किया जाना महत्वपूर्ण होगा, जो कि निम्नवत् है :- (e) "करवाफाश्ा/ whether called block, chamber, dwelling unit, flat, office, showroom, shop, godown, premises, suit, tenement, unit or by any other name, means a separate and self-contained part of any immovable property, including one or more rooms or enclosed spaces, located on one or more floors or any part thereof, in a building or on a plot of land, used or intended to be used for any residential or commercial use such as residence, office, shop, showroom or godown or for carrying on any business, occupation, profession or trade, or for any other type of use ancillary to the purpose specified; उक्त धारा के अवलोकन से विदित है कि ww प्राधिकरण को आवासीय परियोजना से सम्बन्धित प्रकरण की सुनवाई का क्षेत्राधिकार है। प्रश्नगत परियोजना प्राधिकरण के समक्ष दिनांक ना के सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा ओसी./सी.सी हेतु सक्षम के 24.07.2024 को आवेदन किया जा चुका है एवं वर्तमान समय में भी सम्बंधित प्राधिकरण घिकरण द्वारा विपक्षी कि प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में ओ.सी. / सी.सी प्रदान नहीं किया गया है। जहाँ तक प्राधिकरण द्वारा ओ.सी. /सी.सी प्रदान नहीं किये जाने का प्रश्न है उक्त के सम्बन्ध में उ0 yo अर्बन प्लानिंग एवं डेवलपमेंट एक्ट 4973 की धारा-45(५)
का उल्लेख किया जाना महत्वपूर्ण होगा, जो कि निम्नवत है :- 45-4 Completion Certificate:-(]) Every person or body having been granted permission under sub-section (3) of section :र, shall complete the development according to the approved plan and send a notice in writing of such completion to the Authority, and obtain a completion certificate from the Authority in the manner prescribed or provided in the bye-laws of the Authority. Provided that if completion certificate is not granted and refusal to grant it is not intimated within three months after receipt of the notice of completion, it shall be deemed that the Completion certificate has been granted: by the Authority. (2) No person shall occupy or permit to be occupied any commercial building or use are permit to be used such building or part thereof affected building or work until- completion certificate has been issued by the Authority, or 5 Authority has failed for three months after the receipt of notice of completion to intimate its refusal of grant of the said certificate. vat अधिनियम की धारा के अवलोकन से विदित है कि यदि सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी.,/सी.सी. हेतु आवेदन किये जाने के 3 माह के अंतर्गत यदि सम्प्रवर्तक के आवेदन पर यदि कोई अनुमोदन प्रदान नहीं किया जाता है और न ही सम्प्रवर्तत के vad आवेदन पर कोई आपत्ति व्यक्त नहीं की जाती है, तो ऐसी स्थिति में समप्रवर्तक के उक्त आवेदन को SS WES) माना जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
yeti परियोजना के सम्बन्ध में ओ.सी.सी.सी हेतु विपक्षी द्वारा दिनांक 24.07.2024 को सक्षम प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा चुका है वर्तमान समय में सक्षम प्राधिकरण द्वारा ओसी./सी.सी प्रदान नही किया गया है। ऐसी स्थिति में रेरा कार्यालय आदेश दिनांक 46.09.20I9 का उल्लेख किया जाना भी महत्वपूर्ण होगा, जो कि fread: है:- उ0प्र0 अर्बन प्लानिंग एवं डेवलपमेंट एक्ट के चैप्टर-५, धारा-45 (A) में प्राविधान है कि 5-A Completion Certificate:-(7) Every person or body having been granted permission under sub-section (3) of section 5, shall complete the development according to the approved plan and send a notice in writing of such completion to the Authority, and obtain a completion certificate from the Authority in the mamner prescribed or provided in the bye-laws of the A uthority. Provided that if completion certificate is not granted and refusal to grant it is not intimated within three months after receipt of the notice of completion, it shall be deemed that the Completion certificate has been granted by the Authority. प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी द्वारा परियोजना से सम्बन्धित सभी वांछित प्रमाण
पत्र (विद्युत आपूर्ति, इलेक्ट्रीकल एवं लिफ्ट सेफ्टी सर्टिफिकेट, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट) एवं सक्षम प्राधिकरण को ओ-सी. प्राप्त किये जाने हेतु आवेदन की प्रतिलिपि दिनांक 24.07.2024 दाखिल की गयी है। प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को न ही ओ.सी./सी.सी प्रदान किया गया है और न ही विपक्षी के उक्त आवेदन, को निरस्त किया। स्पष्टतया ऐसी स्थिति में विपक्षी की परियोजना रेरा कार्यालय आदेश दिनांक 46.09.20:9 के अधीन ओ.सी.//सी.सी हेतु आवेदन किये जाने की तिथि 24.07.2024 से 3 माह अर्थात् दिनांक 24.0.2024 से Ss एप्रूब्ड की श्रेणी के अंतर्गत माना जाना उचित है। तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। he a निस्तारण बिन्दु संख्या-3 बिन्दु संख्या-3 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा जुलाई 2049 में प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी ने बिना समक्ष प्राधिकरण से ओ.सी / सीसी प्राप्त किये कब्जा ऑफर दिनांक 07.08.2024 को भेजा है और विपक्षी ने परियोजना का निर्माण कार्य भी पूर्ण नहीं किया है। विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है और अवैधानिक तरीके से धनराशि की मांग की जा रही है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
दूसरी ओर विपक्षी द्वारा अपने जवाब में अंकित किया गया है कि डीम्ड एप्रूव्ड के आधार पर शिकायतकर्ता को दिनांक 07.08.2024 को ऑफर ऑफ पजेशन पत्र प्रेषित किया जा चुका है, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा मांग पत्र के अनुसार अपनी देय धनराशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। पत्रावली पर उभयपक्षों द्वारा हस्ताक्षरित अपार्टमेंट बायर्स एग्रीमेंट दिनांकित 30.09.2046 के प्रस्तर-42(9) के अनुसार यूनिट का कब्जा दिनांक 34.04.2049 एवं 06 माह की फिट आउट अवधि के साथ अर्थात् दिनांक 37.07.20:9 तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50 / 2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी Maes माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20!6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as. late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। a मन, 7
ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 04.08.2049 से ओ.सी Mt (Ses एय्रूब्ड दिनांकित 27.70.2227/ अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ gard वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. "
अतः: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 474020I8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के VER 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under Cee जज 8
any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+I प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0) में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। तद्नुसार बिन्दु संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश . विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट को अनुबन्ध पत्र के अनुसार पूर्ण कराकर आदेश अपलोड किये जाने की तिथि से 90 दिनों में ओ.सी /सी.सी (rs एय्रूब्ड दिनांकित 27.70.2027/ सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें |
2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.08.2049 से ओ.सी. /सी.सी. (es yer दिनांकित 27.70.2227/ अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि पर MCLR+H प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20I6 की धारा Aza) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान 9 पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+H प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2076 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। 5. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें।
, ro 2 ce aaael ee 0)05 2923 टी० वेंकटेश Slo दीपक स्वरूप सक्सेना (सदस्य) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण