Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Sonika Yadav v. Uppal Chadha Hi-Tech Developers Pvt. Ltd
Complaint No. NCR145/09/62064/2020
- Decision date
- 2026-07-01
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 / 40/63 सपठित नियम-24 46-शिकायत PEA—NCR45/09/62064/2020 सोनिका यादव बनाम उप्पल चड्ढा हाई-टेक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 04.07.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से की ओर से उनके प्रतिनिधि श्री सी.ए योगेश गोयल उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री असित उपस्थित हुए। उभयपक्षों . को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। प्रश्नगत शकायत में माननीय पीठ-0।ए द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 03.07.2024 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिट की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 30.04.20200 तक ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें।
2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 40.02.208 से ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLRH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही इस अवधि में शिकायतकर्ता द्वारा यदि कोई होल्डिंग चार्जेज़ अनुबन्धानुसार देय न होगा तथा यदि कोई — — अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्ता & प्रकरण में उपरोक्तानुसार अनुबन्ध के अनुरूप गणना की जायेगी। 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(za)(i) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी |
5. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 6. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 03.07.202 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38/40,/63 के अन्तर्गत vat आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-04 (पूर्व में पीठ-04ए) द्वारा दिनांक 27.03.2025 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:- अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों के दृष्टिगत पत्रावली नियम-24 में निहित शक्तियों के अधीन पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 03--03-202 के प्रस्तर-04 के अनुसार प्रश्नगत यूनिट के भौतिक कब्जे एवं रजिस्ट्री की कार्यवाही हेतु मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी क॑ समक्ष सुनवाई के लिए, दिनांक 45—05—2025 को संदर्भित की जाती है। सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 03-03-2024 के प्रस्तर-02 के अनुसार दिनांक 40-05-2025 से पूर्व विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि हेतु वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही कर, पत्रावली को सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। यदि मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी नियम-24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत arr—si, दिनांक 03-03-202 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक
टी अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं। अन्तर्गत धारा-38 /40,/63 की निष्पादन की कार्यवाही के दौरान माननीय सम्बन्धित रेरा पीठ द्वारा अपने आदेश का निष्पादन कराते हुए शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा सका और यूनिट की रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकी। तदोपरान्त मा. पीठ-04 (पूर्व में पीठ-04ए) द्वारा दिनांक 27.03.2025 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई। पिछली तिथि 28.40.2025 को शिकायतकर्ता की ओर से उपस्थित प्रतिनिधि श्री सी. ए योगेश गोयल द्वारा यह कहा गया कि विपक्षी के पास वैध ओ.सी./सी.सी. नहीं है, इसलिए वह यूनिट का कब्जा नहीं लेना चाहता है। पिछली तिथि 28.40.2025 को शिकायतकर्ता को निर्देशित किया गया था कि:- “शिकायतकर्ता को यदि उक्त ओ.सी./ सी.सी. पर कोई आपत्ति है, तो वह अपनी आपत्ति रेरा पोर्टल पर अपलोड कर सकता है। अन्यथा उक्त ओ.सी. / सी.सी के आधार पर बकाया धनराशि का भुगतान करते हुए आवंटित यूनिट का कब्जा प्राप्त कर सकता है|” विपक्षी द्वारा अपनी आपत्ति एवं गणना शीट के साथ में आंशिक ओ.सी. / सी.सी. दिनांक 47.0.206 दाखिल की गई है, इसके अलावा कोई ओ.सी. / सी.सी. दाखिल नहीं की गई है। आज सुनवाई के दौरान भी शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया कि विपक्षी के पास उक्त परियोजना यूनिट का ओ.सी./सी.सी प्राप्त नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कहा गया कि वैध ओ.सी. /सी.सी. के सम्बन्ध में विपक्षी को निर्देशित किया जाये कि वह वैध ओ.सी. / सी.सी. रेरा पोर्टल पर अपलोड करें |
अतः विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वह उक्त परियोजना / यूनिट के सम्बन्ध में वैध ओ.सी.,/ सी.सी. सम्बन्धित प्राधिकरण से प्राप्त कर रेरा पोर्टल पर अपलोड करें और स्पष्ट रूप से बताये कि उनके पास वैध ओ.सी./ सी.सी. है अथवा नहीं | यदि है, तो उसको किस तिथि का वैध ओ.सी./सी.सी प्राप्त है, उसको 45 दिनों के अन्दर रेरा पोर्टल पर अपलोड करें। शिकायतकर्ता को यदि विपक्षी द्वारा दाखिल गणना शीट के विरुद्ध कोई आपत्ति हो, तो वह अपनी आपत्ति गणना शीट सहित t5 दिनों के अन्दर Wr पोर्टल पर अपलोड करें, ताकि बकाया देयों का निस्तारण किया जा सके। पत्रावली अग्रिम सुनवाई हेतु दिनांक 20.08.2026 को पेश हो। आई kis आर. पी. सिंह (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण