Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Ruchi Agarwal v. Uppal Chadha Hi-Tech Developers Pvt. Ltd
Complaint No. NCR145/09/0924/2019
- Decision date
- 2019-12-10
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04ए श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष शिकायत संख्या-एन.सी.आर।45 / 09 / 0924 / 2049 रूचि अग्रवाल बनाम उप्पल चढढा हाई-टेक डेवलपर्स प्राएलि0 प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने और अतिरिक्त चार्जेज के मदों में ली गयी धनराशि वापस दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना UCHDPL See-4, Plots 4 प्लॉट नं०-779 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किस्तों के आधार पर 59,7,573/- रूपये का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 09.07. 2042 तक कब्जा दिया जाना था, किन्तु आज तक कब्जा नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि परियोजना 7 वर्ष से अधिक विलम्बित है। कुल धनराशि लिये जाने के बाद भी अभी तक रजिस्ट्री नहीं करायी गयी है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने और अत्तिरिकत चार्जेज के मदों में ली गयी धनराशि वापस दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में कब्जे हेतु सूचना पत्र दिनांक 30.0.208, ई-मेल, परियोजना का विवरण, अनुस्मारक पत्र, प्लॉट एलॉटी arte दिनांक 28.06.2044, हस्तांतरण हेतु आवेदन फार्म दिनाक 23. 05.2074 आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। of 2
विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र॒ दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता को उनकी नामित परियोजना वेवसिटी के सेक्टर-4 में प्लॉट संख्या-779 आवंटित गयी और फोर्स मैज्योर की परिस्थितियों में ले-आऊट में परिवर्तन होने के कारण पुनः वही यूनिट आवंटित की गयी। शिकायतकर्ता को कब्जे हेतु ऑफर दिनांक 30.20.20:8 को किया जा चुका है। परियोजना में किसानों के उग्र प्रर्दशन, भूमि अधिग्रहण एवं न्यायालयों प्रकरणों के कारण परियोजना में बाधा उत्पन्न हुई। परियेजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण विलम्बित हुई, जो कि उनके नियंत्रण में नहीं था। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये गये :- 4. शिकायतकर्ता से किस-किस मद में धनराशि बिल्डर द्वारा मांगी जा सकती है ? 2... परिभाषा के अनुसार क्या ”इन्टरनल डवलपमेन्ट” शिकायतकर्ता के प्लॉट के tide तक सीमित होगा अथवा क्या “एक्सटरनल व पेरिफरल डवलपमेन्ट” सिटी लेवल पर ही परिभाषित होगी ? 3, क्या विपक्षी द्वारा विभिन्न मदों में मांग की गयी चार्जेज उचित है ? 4... क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? 5 क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 4... शिकायतकर्ता से किस-किस मद में धनराशि बिल्डर द्वारा मांगी जा सकती है ? प्रकरण में उठायें गये बिन्दुओं का परीक्षण करने के कम में प्लॉट एलॉटीज़ अरेन्जमेन्ट में विभिन्न मदों में घनराशि लिए जाने के प्राविधानों, URES व इन्टरनल डवलपमेन्ट चार्जेज के सम्बन्ध में दोनों पक्षों की स्थिति व “इन्टरप्रटेशन”, चार्जेज का ब्रेकअप आदि के सम्बन्ध में दोनों पक्षों के दावे
कि एवं. न््यायोचित धनराशि अथवा सिद्धान्त की विवेचना शिकायत संख्या-6204842444, एम.एल. गुप्ता बनाम उप्पल चढ्ढा हाई-टेक डेवलपर्स प्राणलि0 में विस्तृत रूप से स्पष्टीकरण सहित निर्णीत किये गये है। प्रश्नगत प्रकरण में अनुबन्ध की प्रति दाखिल नहीं की गयी है, जिससे विदित हो सके कि समस्त मदों में क्या-क्या चार्जेज देय थी, परन्तु प्रस्तुत प्रकरण सेक्टर-4 प्लॉट से सम्बन्धित है। इस परियोजना से सम्बन्धित प्रकरण शिकायत संख्या-620484244, एम.एल. गुप्ता बनाम उप्पल Agel हाई-टेक डेवलपर्स प्राणलि० भी था, जिससे अवधारित किया जा सकता है कि एम.एल गुप्ता में किये गये अनुबन्ध इस प्रकरण में भी लागू होगें। एम.एल गुप्ता के अनुबन्ध में समस्त चार्जेज़ हेतु निम्नवत् उल्लेख किये गये थे। 4. CONSIDERATION FOR SALE OF 'PLOT' AND RIGHTS THERETO (c) ALLOTTEE(S) shall strictly follow the payment plan and pay the requisite amount by way of upfront or other payment plan opted — by him/her/them. ALLOTTEE(S) for such purpose should be guided by written notices of change of earlier mandate issued by DEVELOPER from time to time. DEVELOPER will record the details of all payments received by it from ALLOTTEE(S) in its records/system as well as in DEVELOPER's copy of this Arrangement. ALLOTTEE(s) is required to keep DEVELOPER'S acknowledgement receipts in safe custody for future references.
(d) That the cost of electric, sewer and water connection is not included in the aforesaid price of the ‘PLOT’ and shall be payable by the ALLOTTEE(s) in addition to price of ‘PLOT’. Further, the ALLOTTEE(S) shall pay on demand to the DEVELOPER the amount to be determined at the time of providing electric, sewer and water connection and any other connection of a service ‘yA which the DEVELOPER may provide from the main lane along the serving the 'PLOT'. (Emphasis added) उक्त के प्रस्तर-(१) में यह veo किया गया है कि प्लॉट की कीमत में बिजली, सीवर और पानी आदि कनेक्शन की धनराशि सम्मिलित नहीं है और यह विकासकर्ता की मांग पर कनेक्शन देते समय निर्धारित धनराशि देय होगी। .3 INTERNAL DEVELOPMENT That the above price of the residential 'PLOT' covers development of internal services such as laying of roads, development of parks and landscapes, laying of water lines, laying of sewer lines, laying of electrical HT/LT lines, laying of storm water drain lines and erection of electrical sub-station and to develop necessary civic services essential for a convenient living.(Emphasis added)
sr से यह we है कि अंदरूनी विकास कार्य (INTERNAL DEVELOPMENT) के सम्बन्ध उक्त प्लॉट की धनराशि में विकास की अंदरूनी सुविधायें जैसे कि रोड का निर्माण करना, पार्कों के विकास, पानी को संचलित करने हेतु लाईन बिछाया जाना, सीवर लाईन, बिजली के एच. टी /एल.टी wee, वाटर ड्रेन लाईन और बिजली सब-स्टेशन एवं मूल भूत सुविधायें जो कि सुविधाजनक जीवन यापन करने के लिए आवश्यक विकास कार्य कराये जाने हेतु सुविधायें var धनराशि में समाविष्ट एवं सम्मिलित है। .6 PERIPHERAL/ INFRASTRUCTURAL DEVELOPMENT CHARGES The ALLOTTEE(S) agrees to pay Peripheral/Infrastructural development charges@ Rs 06.6/-per Sq meter (Rs 850/- per Sq Yd). which are not included in the aforementioned sale price (Clause l.(b)). Further, ALLOTTEE(S) specifically agrees and understands that in case of any increase in Peripheral/ Infrastructural development charges or levy of any development charges or levy of an other charges by the Government or other Statutory other Statutor Authority(ies) in future, the same shall be paid on pro-rata basis by the ALLOTTEE(S). Allottee(s) herein also agrees to pay the proportionate External Electrification charges including but not limited to lying of cables, security deposits and /or any ancillary cost/charges for making the provision for for transmission of electricity from the main station to station to sub_station.These charges shall be paid by the Allottee(s) to the Developer on demand.(Emphasis added)
उक्तानुसार आवंटी द्वारा यह सहमति दी गयी है कि पेरिफेरल / अवस्थापना विकास कार्यों के चार्जेज़ (शुल्क) i066 रूपये प्रति वर्ग मीटर (850 प्रति वर्ग यार्ड) उपरोक्त विकय धनराशि में सम्मिलित नहीं है और विशेष रूप से यह स्वीकारा एवं समझा जाता है कि (क) यह कि पेरिफेरल / अवस्थापना के चार्जेज़ बढ़ने या (ख) सरकार अथवा अन्य किसी वैधानिक प्राधिकरण द्वारा भविष्य में अतिरिक्त चार्जेज लिये जाने पर वह प्रो-रेटा / अनुपातिक दर पर आवंटियों द्वारा देय होगा। आवंटी द्वारा यह भी सहमति दी गयी है कि अनुपातिक तौर पर बाहरी बिजली कार्य (External Electrification charges) जिसमें बिजली के संचालन हेतु मेन स्टेशन से सब-स्टेशन में उपयोग किये जाने वाले केवल्स, सिक्योरिटी डिपोजिट आदि की धनराशि सम्मिलित है देय होगी, और यह चार्जेज विकासकर्ता की मांग पर देय होगी ऐसे में यह स्पष्ट है कि पेरिफेरल /अवस्थापना विकास हेतु 066 रूपये प्रति वर्ग मीटर (850 प्रति वर्ग गज) आवंटियों द्वारा देय होगी, जो कि उक्त विकय धनराशि में सम्मिलित नहीं है और यदि इन चार्जेज़ में अथवा सरकार या किसी वैद्यानिक प्राधिकरण द्वारा अतिरिक्त धनराशि की मांग की जाती है, तो अनुपातिक दरों पर देय होगी। |.7 OTHER CHARGES AS PER HI-TECH TOWNSHIP POLICY ae
The terms and conditions contained in the MOU entered between the DEVELOPER and the Government of UP and other terms and conditions of Hi-Tech Township Scheme will be applicable on the 'PLOT' of land allotted to the ALLOTTEE(S) and it will be the responsibility of the DEVELOPER to develop this Hi- Tech Township and to hand over the developed land to the ALLOTTEE(S). However, in case of any charges which are chargeable as per the Hi-Tech Township Policy (if any) in the future for infrastructure or any other purpose, if any, then the same shall be proportionately charged to the ALLOTTEK(S) at the rates as may be decided by the Government. The ALLOTTEE(S) shall pay directly, or if paid by the DEVELOPER. then reimburse the DEVELOPER on demand the Government rates, taxes or cesses, taxes or cesses, taxes of all and any kind by whatever name called, levy of proportionate development charges with regard to, but not limited to state/national highvays, transport, irrigation facilities and power facilities, electricity facilities/requirement, electricity distribution network/system, metro cess etc., whether levied or leviable now or in future on the 'PLOT' forming a part of the overall development or the built up residential Complex/s and/or the Project(s) constructed within the "Wave City" and/or the said 'PLOT’ in isolation, as the case may be, as assessable/applicable from the date of application of the ALLOTTEE(S) and the same shall be borne and paid by the ALLOTTEE(S). (Emphasis added)
उपरोक्तानुसार यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार और विपक्षी के मध्य हुए एम.ओ. यू एवं हाई-टेक टाऊनशिप स्कीम के नियम एवं शर्तें जो कि आवंटी को आवंटित प्लॉट पर उक्त के अधीन नियमों के अनुसार विकसित की जायेगी। यदि हाई-टेक टाऊनशिप पॉलिसी के अनुसार भविष्य में आधारभूत ढाँचे अथवा अन्य प्रयोजनो के चार्जेज लगाये जाते निर्धारित दर पर अनुपातिक रूप से देय होगा। इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा कोई ऐसे अतिरिक्त नहीं प्रस्तुत किया गया है, जिससे कि विदित हो कि सरकार द्वारा कोई इस हैं, तो आवंटियों द्वारा सरकार द्वारा faked एवं अन्य चार्जेज का विवरण 4S प्राविधान के अधीन कोई चार्जेज निर्धारित किये गये हों और वह धनराशि विकासकर्ता द्वारा अभी तक भुगतान की गयी हो। अतः इस सम्बन्ध में विपक्षी अभी कोई अतिरिक्त धनराशि पाने का अधिकारी नहीं है। यदि विपक्षी भविष्य में इस मद कोई अन्य चार्ज सरकार या प्राधिकरण को देता है, तो प्रेंफ ऑफ पेमेन्ट व प्रो-रेटा शेयर बताकर केता से प्राप्त कर सकते हैं। .9 PAYMENT OF TAXES, CESSES BY THE PLOT OWNER
That the stamp duty and the registretion fee incurred in the registration process which is to be paid to the revenue authorities is to be borne by the ALLOTTEE(S) shall be liable to pay from the date of his/her application the house tax, water tax and sewerage tax and other such taxes or any other future tax or any other fees, cess or taxes of all any kind by whatever name called, levy of proportionate development charges as and when levied by the Local Authority/Body under the then prevailling law and rules of the land, when such maintenance services will be transferred to the Local Authority/Body. These taxes, fees, cesses etc., shall be paid by the ALLOTTEE(S) irrespective of the fact whether the maintenance is carried out by the DEVELOPER or its nominees or any other body or association of all or the ALLOTTEE(S) whether levied retrospective or prospective. उपरोकतानुसार टैक्सेज़, सेस के बारे में यह उल्लेख किया गया है कि स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क जो कि पंजीकरण की प्रकिया में राजस्व विभाग » प्राधिकरण को दी जायेगी। वह आवंटियों द्वारा विधि के अनुसार वहन किया जायेगा। इसी कम में आवंटियों द्वारा आवेदन की तिथि से गृहकर, पानीकर, सीवेज कर एवं अन्य cate जो कि स्थनीय निकाय द्वारा लागू विधि के अनुसार देय होगा वह आवंटियों द्वारा अनुपातिक दर पर दिया जायेगा। इस विषय में भी कोई विवाद नहीं उठाया गया है। 4 Maintenance Charges a. The ALLOTTEE(S) gives its consent to enter into a separate Maintenance Agreement with the DEVELOPER or its nominated maintenance agency as and when L ON
demanded by the DEVELOPER or its nominated agency and the ALLOTTEE(S) agrees to abide by all the terms and conditions as laid down in the said Maintenance Agreement. b. That the ALLOTTEE(S) of the 'Plot’ unconditionally agrees and undertakes to pay necessary charges, from the date when possession is offered to him/her/them, as determined by the DEVELOPER or its nominated Maintenance Agency towards maintenance of water supply, electricity, parks, open spaces, roads, cleaning and sweeping, street lights, sewr, storm drain etc. and for maintaining various value added services until the services are handed over to the respective government agency(ies) local body. The ALLOTTEE(S) shall deposit with the DEVELOPER a sum as decided by the DEVELOPER by way of interest free security to ensure timely payment of maintenance charges. The said amount shall be payable by the ALLOTTEE(S) and will be paid at the time when possession is offered or sale deed is executed, whichever is earlier. However the maintenance charges shall become payable from the date of offer of possession.
c. In terms of Hi-Tech Township Policy of Uttar Pradesh Government, the Installation of Solid Waste Management Plant [SWMP], Sewer Treatment Plant (STP) and 220 KVA_ power plants and destribution systems and other mechanical plants and machinery related to external services are being built and maintained by the DEVELOPER or its nominated agency. The ALLOTTEE(s) hereby agrees to pay the upkeep/running maintenance charges for these services and also if at some point of time these installations require replacement, the cost of the same will be proportionately paid by the ALLOTTEE(s) along with other allottees/ occupants with in the WAVE HITECH CITY township. उपरोकतानुसार मेटेनेन्स शुल्क के बारे में यह कहा गया है कि आवंटी, विकासकर्ता या उसके नामित मेटेनेन्स एजेन्सी से एक अलग मेटेनेन्स अनुबन्ध J ‘P निष्पादित करेगें और नियम एवं शर्तों का पालन करेगें। आवंटी प्रोसेशन ऑफर करते समय से ही मेटेनेन्स WAT को पानी सप्लाई, बिजली, पार्क आदि के रखरखाव कार्य हेतु भुगतान करेगा, जब तक वह किसी सरकारी निकाय अथवा स्थनीय निकाय को मेटेनेन्स हस्तांतरित न कर दें। इसी के अतिरिक्त हाई-टेक टाऊनशिप पॉलिसी के अधीन सौलिड वेस्ट मेनेजमेन्ट प्लॉन्ट, सीवर dete प्लॉन्ट 220 के.वी.ए पावर स्टेशन है के निर्माण व रखरखाव का उत्तरदायित्व बिल्डर को दिया गया है। उसके भी रखरखाव कार्य हेतु da हाई-टेक सिटी टाऊनशिप में निवास कर रहे आवंटियों द्वारा अनुपातिक दर पर देय होगी तथा यदि कभी उनके रिप्लेसमेन्ट की आवश्यकता हुई तो प्रो-रेटा शेयर आवंटियो द्वारा देय होगा। इस विषय में भी कोई विवाद नहीं उठाया गया है।
l0. RIGHTS OF DEVELOPER TO RECOVER INCREASED AMOUNT OF COMPENSATION AND /OR CHARGES LEVIED BY THE GOVERNMENT. i0. The DEVELOPER has acquired land directly from the farmers by paying the mardet price. However there might be certain pleces and parcel of land which may not have been bought by the DEVELOPER. In terms of the policy of the Government for the development of Hi- Tech Township, such piece or parcel of land falling with the approved Detailed Project Report and the sancitioned Detalled Layout Plan is to be acquired by the Government for the DEVELOPER and to be handed over to the DEVELOPER for the development of Hi- Tech Township. Allottee(s) however specifically understands and agrees that in case such land is not acquired for any reason whatsoevr either by negotiations or by State Government as stated above, DEVELOPER shall not be held liable on any account. DEVELOPER as such makes no commitment in respect of acquiring such land and ALLOTTEE(S) being fully aware has applied for alotment of the freehold Plot. उक्त प्रस्तर के सम्बन्ध में यह स्पष्ट किया गया है कि यह सम्भव है कि कुछ भूमि राज्य सरकार द्वारा Acquire की जाये तथा क्षतिपूर्ति के बढ़े हुए दर और अन्य चार्ज जो कि सरकार द्वारा लिये जायेगें, तो वे विकासकर्ता द्वारा अनुपातिक रूप से आवंटियों से प्राप्त किया जायेगा। डी.पी.आर के अनुसार a 0 अधिकृत यदि कोई भूमि किसी कारण वश Acquire नहीं की जा सके, तो उसके लिए विकासकर्ता जिम्मेदार नहीं होगा। तद्नुसार बिन्दु Ge निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2
2... परिभाषा के अनुसार क्या “इन्टरनल डवलपमेन्ट” शिकायतकर्ता के प्लॉट के पॉकेट तक सीमित होगा अथवा “एक्सटरनल/इन्फास्ट्रक्चरल व पेरिफरल sate” सिटी लेवल पर ही परिभाषित होगी ? इस सम्बन्ध में प्राधिकरण द्वारा शिकायत WeT-620782444, एम.एल. गुप्ता बनाम मैसर्स उप्पल ager डेवलपर्स प्राएलि0 में विस्तृत रूप से स्पष्टीकरण सहित निर्णीत किया गया है, जिसमें कि इन्टरनल डवलपमेन्ट और एक्सटरनल डवलपमेन्ट के मध्य अन्तर स्पष्ट किया गया है।
अंदरूनी विकास कार्य की विपक्षी की परिभाषा, शिकायतकर्ता का जहाँ प्लॉट है उसी पॉकेट तक सीमित है, किन्तु न तो प्लॉट आवंटी oRa में, न हाई-टेक पॉलिसी में, न उन सब परिभाषा सम्बन्धी उद्धरणों में जो विपक्षी द्वारा दिये गये है, व न ही रेरा अधिनियम में, कहीं भी “पॉकेट” परिभाषित नहीं है एवं स्पष्टयता यह एक “ऑफटर थॉट” है जो विपक्षी द्वारा अपने अंतिम उत्त्तर में “gare” किया है। स्वयं विपक्षी द्वारा उद्धरत की गयी परिभाषाओं में दो ही स्तर पर विकास परिभाषित 8 “ger व पेरिफेरल” तथा “आन्तरिक विकास कार्य। राज्य सरकार द्वारा हाई-टेक सिटी का लाईसेन्स दिया गया व उन्हीं सुविधाओं पर विचार कर शिकायतकर्ता द्वारा प्लॉट कय किया गया। यदि रेरा आ जाने के बाद विपक्षी द्वारा फेजवार विकास के सम्बन्ध में परियोजना के अलग-अलग भागों को पंजीकृत भी कराया गया हो, तो वह हाई-टेक सिटी के aed एवं आन्तरिक विकास की परिभाषाओं को प्रभावित नहीं करती। स्वयं विपक्षी का यह कहना है कि क्लब सिटी लेवल फेसिलिटी है तथा प्रत्येक सेक्टर (या पॉकेट) में नहीं दी जा सकती, इस बात की स्वीकारोक्ति है कि सेक्टर या पॉकेट को यूनिट मानकर area व आन्तरिक विकास परिभाषित नहीं किया जा सकता। अत: यह स्पष्ट है कि विपक्षी का यह दावा अनुचित है कि पॉकेट या सेक्टर के बाहर का विकास, अवस्थापना/बाहय विकास मद में सम्मिलित है। अतः अवस्थापना / पेरिफेरल विकास में वही मद सम्मिलित होगें, जो सिटी के arate विकास मदों के अलावा होगें। स्पष्टयता यदि वेवसिटी की बाउन्ड़ी को जोड़ने की बाहय /पेरिफरल सड़क बनायी जाती है, मेन पावर स्टेशन से सिटी लेवल सब-स्टेशन तक पावर लाईनस आदि पर व्यय किया जाता है, तो वह पेरिफेरल / अवस्थापना मद में होगा Lag Ld
यहाँ यह भी विचारणीय है कि अन्य राज्यों कि व्यवस्था में सामान्यतः सिटी लेवल डवलपमेन्ट के बाहर मेन सब-स्टेशन, सीवर ट्रीटमेन्ट, वाटर सप्लाई आदि की व्यवस्था लोकल अथॉरिटीज करती है एवं उसके लिए चार्जज लेते है। वर्तमान आवंटी अरेन््जमेन्ट के प्रस्तर-4.6 में भी यह प्राविधान है तथा यदि उक्त प्रस्तरानुसार कोई धनराशि शासन या किसी एजेन्सी को बाद में दी जाती है, तो प्रफ ऑफ पेमेन्ट व शिकायतकर्ता का प्रो-रेटा शेयर उसके द्वारा देय होगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-3 बिन्दु vo 3 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा विभिन्न acl में मांग की गयी चार्जेज उचित है? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी द्वारा अपने प्रतिवाद पत्र में चार्जेज के सम्बन्ध में कहा गया कि सभी चार्ज निष्पादित किये गये अनुबन्ध के अनुसार है।
एग्रीमेन्ट के प्रस्तर-4.3 के अनुसार आन्तरिक विकास कार्यों की परिभाषा में अन्दरूनी लाईन्स तथा सब-स्टेशन सम्मिलित हैं। यह सब-स्टेशन स्थानीय अर्थात् सिटी लेवल के आन्तरिक सब-स्टेशन हैं, किन्तु “एक्सटरनल इलैक्ट्रिफिकेशन” से सम्बन्धित सब-स्टेशन नहीं है। वर्तमान लोड की स्थिति देखते हुए व यह देखते हुए कि हाई-टेक टाऊनशिप के भविष्य के सम्बन्ध में प्रकरण अभी शासन स्तर पर विचाराधीन है व कई वर्ष अनुबन्ध के बाद बीत चुके हैं। वर्तमान समय में उचित होगा यदि 22069 के केवल एक सब-स्टेशन व मेन सब-स्टेशन से सिटी लेवल सब-स्टेशन की ट्रानमिशन लाईन व सिक्यूरिटी डिपोजिट का व्यय प्रोरेटा धनराशि शिकायतकर्ता से ली जाये व इस धनराशि की पृथक एकाउक्टिंग की जाये ताकि यदि इस मद में कोई धनराशि शेष रहती है, तो प्रो-रेटा आधार पर वापिस की जा सके। इलैक्ट्रिसिटी मीटर कनेक्शन asta, गैस कनेक्शन ato, सीवर एवं ee वाटर कनेक्शन चार्जेज, वाटर कनेक्शन चार्जेज, डाटा एवं वॉइस कनेक्शन चार्जेज़ के सम्बन्ध में स्पष्ट किया जाता है कि ये कनेक्शन लेते समय वास्तविक व्यय पर आधारित होगी व उक्त धनराशि किसी सक्षम प्राधिकरण या विभाग द्वारा लिये जाने पर उसका साक्ष्य आवंटियों को उपलब्ध कराने के उपरान्त यह धनराशि देय होगी और इसका एडमिन asta /सुपरविजन चार्ज माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 25 44 qa a 32 Re याचिका संख्या-940 / 2047 में एन.बी.सी.सी के लिए निर्धारित की गयी 8 प्रतिशत की दर से अधिक नहीं होगा। साथ ही प्रत्येक कनेक्शन का एस्टिमेट अलॉटी को उपलब्ध कराया जायेगा।
पेरीफेरल डेवलपमेन्ट चार्ज के सम्बन्ध में मूल्यांकन वर्तमान में प्रभावी दर निम्नानुसार गणना करते हुए निर्धारित किया जा रहा है। भारत सरकार के अधीन तत्कालीन योजना आयोग द्वारा “कन्सट्रक्शन इण्डसट्री डवलपमेन्ट काउन्सिल” स्थापित की गयी है, जो देश के विभिन्न शहरों के कन्सट्रक्शन are इण्डिसीज जारी करते हैं। दिल्ली के लिए वर्ष 2040 (जब Whe हस्ताक्षरित हुआ) सूचनांक नगरीय अवस्थापना के लिए 479.72 (बेस 20075 00) था, जो जुलाई 2049 में बढ़कर 442.89 हो गया। इस आधार पर इस इन्ड्रेक्स को मूल्य वृद्धि का “प्रोक्सी” मानते हुए रू. 350 (42/40 में) प्रति वर्ग मीटर के सापेक्ष धनराशि रूपये 447.74 [(850 xX742.89)+9.72] होते हैं। अतः यह देखते हुए कि विपक्षी 850 रूपये प्रति वर्ग गज़ मदवार ब्रेकअप देने की स्थिति में नहीं है उसके सापेक्ष “बेस्ट एस्टिमेट” रूपये 4044.50 अर्थात् 4045 रूपये प्रति वर्ग गज़ होता है। मेटेनेन्स के सम्बन्ध में विपक्षी को स्पष्ट किया जाता है कि शिकायतकर्ता द्वारा ली गयी मेटेनेन्स चार्ज कब्जा ऑफर की तिथि से लागू होगी। वाटर हारवेस्टिंग SER के सम्बन्ध में होने वाले व्यय व oa के प्रो-रेटा शेयर की सूचना उपलब्ध कराते हुए यह धनराशि ली जायेगी व सुपरविजन / एडमिनिस्ट्रेडिव चार्जेज़ 8 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। कनवेन्स Ss रजिस्ट्रेशन खर्च की धनराशि विधि के अनुरूप स्टाम्प ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क के अनुसार देय होगा। क्लब क्योंकि सिटी लेवल फेसिलिटी है। अतः उसकी कैपिटल वैल्यू का भुगतान शिकायतकर्ता करेगें व “सबस्किपशन” क्लब प्रारम्भ होने की तिथि से लागू होगा।
विपक्षी द्वारा किये जा रहे समस्त मांगों का निस्तारण उपरोक्तानुसार किया जाता है। इस सम्बन्ध में विपक्षी संशोधित मांग पत्र जारी करेगें। तद्नुसार बिन्दु संख्या-3 fae किया जाता है। निस्तारण बिन्दु do 4 DK 43 बिन्दु सं) 4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure events) (जैसे दंगा, आंदोलन, हडताल, औद्योगिक विवाद, परियोजना पर सेवाओं एवं आपूर्ति का बाधित होना, सरकार का नीति परिवर्तन, न्यायिक err आदेश, निर्णय व feat से कार्य बाधित होना, अनुज्ञप्ति व संस्तुतियों में होने वाला विलंब आदि) के कारण परियोजना विलंबित हुई, साथ ही यह भी कहा गया कि परियोजना किसानों के उग्र veers, राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नोट बंदी, के कारण परियोजना प्रभावित ee विपक्षी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया है, जिससे की विदित हो कि नामित परियोजना की भूमि पर कार्य बाधित था | 2I. FORCE MAJEURE
|. ALLOTTEE agrees that the Allotment of the ‘PLOT’ is subject to force majeure clause which inter-alia include delay on account of non-availability of steel, cement or any other materials for developing the area and implementation of the Scheme, or water supply or electric power or slow down strike or due to a dispute with the construction agency employed by the DEVELOPER, civil commotion or by reason of war, or enemy action or earthquake or any act of God, delay in certain decisions/clearances from statutory body(ies), or if non-delivery of possession is as a result of any notice, order, rules or notification of the Government and /or any other public or Compatant Authority or for any other reason(s) beyond the control of the DEVELOPER and for any of the aforesaid evet, the DEVELOPER shall be entitled to a reasonable corresponding extension of the time of delivery of possession of the said 'Plot' on account of force majeure circumatances and in such eventually the ALLOTTEE(S) will not claim any amount 2 १4
of money by way of refund/damages/compansation/interest, etc. from the DEVELOPER. In case fo DEVELOPER abandoning the scheme for any reason beyond its control then the DEVELOPER'S liability shall be limitd to the refund of the amount paid by the ALLOTTEE(S) as per the terms of Allotment Letter. It is further categorically understood by the Applicant(s) that the Developer as a result of any contingency including force majeure reserves its right to alter, add or vary the terms and conditions of the of the allotment or if the circumstances beyond Developer's control so warrant, the Developer may suspend the scheme for such priod as it may consider expedient and no compensation of any nature whatsoever can be claimed by the Applicant for the period of delay/suspension of scheme. उपरोकतानुसार फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में यह बताया गया है कि यदि विलम्ब, जैसे कि विकास हेतु समान उपलब्ध न होना, पानी और बिजली की सुविधायें उपलब्ध न होना, निर्माण wR एवं विकासकर्ता के मध्य विवाद होना, आदेश, सरकार की अधिसूचना, दंगा, भूकम्प, के कारण परियोजना में विकास नहीं किया जाता है, तो यह विकासकर्ता का दायित्व होगा कि आवंटन पत्र के नियम के अनुसार आवंटियों को पैसा लौटा दिया जायेगा। फोर्स मैज्योर कारकों की वजह से आवंटन के नियम एवं शर्तों में परिवर्तन किया जा सकता है और यदि उक्त फोर्स मैज्योर विकासकर्ता के नियंत्रण से परे पस्थितियों के कारण स्कीम को निरस्त कर सकता है, जिसके लिए कोई क्षतिपूर्ति देय नहीं होगी।
इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वार सिविल अपील संख्या-940 /20:7 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर 70 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया हैः- Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature. उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक Os ्छि आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। तदनुसार बिन्दु सं० 4 Paka किया जाता है। निस्तारण बिन्दु Wo 5 प्रश्नगत प्रकरण में प्लॉट आवंटी अरेन्जमेन्ट अनुबन्ध राजीव खुराना के नाम से आवंटित की गयी, जो कि बाद में दिनांक 23.05.20:4 को राजीव खुराना द्वारा रूचि अग्रवाल के नाम आवंटन करने एवं हस्तांतरण करने हेतु आवेदन किया गया, जो कि बाद में पूर्ण रूप से रूचि अग्रवाल के नाम हस्तांतरित कर दिया गया। कब्जे के सम्बन्ध में अनुबन्ध के प्रस्तर-3.3 के अनुसार विकास कार्य शुरू कराये जाने से 36 माह में कब्जा दिये जाने का उल्लेख है | रेरा में परियोजना की शुरू होने की तिथि 40.07.2009 दी गयी है। ऐसे में उपरोक्तानुसार कब्जे की तिथि 20.07.20:2 होती है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता दिनांक 44.07.2042 से ओ.सी / सी.सी सहित कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- Section 8(4)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has as 6 paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा Sat धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा YT (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय /पटटा के लिए करार) नियमावली core अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के TER 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें we 92 (ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wea 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४८,२+। प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। तद्नुसार बिन्दु संख्या-5 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश > ॥7 विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि 75 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता को ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें एंव देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त नियमानुसार रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित करें|
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह दिनांक 44.07.2042 से ओ. सी. / सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि के लिए शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+I प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर निमयानुसार वापस की जायेगी | विपक्षी द्वारा अनुबन्धानुसार यदि कोई धनराशि भविष्य में शासन या किसी स्टेच्यूटरी एजेन्सी को दी जाती है, तो प्रूफ ऑफ पेमेन्ट व शिकायतकर्ता का प्रो-रेटा शेयर उसके द्वारा देय होगा। पेरीफेरल / इन्फास्ट्रक्चरल Saar] चार्ज 405 रूपये प्रति वर्ग गज के अनुसार गणना की जायेगी। प्रीमियम चार्ज अनुबन्ध के प्रस्तर 4.4 में दी गयी है, जो कि 42 प्रतिशत विकय धनराशि की होगी और उसी के अनुसार देय होगी।
प्रस्तर 4.4 के अनुसार बिजली /वाटर /सीवर आदि के मेन लाईन से कनेक्शन देते समय निर्धारित किये गये चार्जेज़ का भुगतान शिकायतकर्ता करेगें। इस विषय में शिकायतकर्ता को कनेक्शन देते समय विशिष्ट (Specific) Estimate के साथ धनराशि विपक्षी मांग सकते हैं तथा शिकायतकर्ता उसके सापेक्ष कार्य पूरा होने के बाद ऑडिटिड. अकाउन्टस्._. मांग. सकते है। इन हाउस सुपरविज़न / एडिमिनिस्ट्रेडिव चार्जज की धनराशि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एन.बी.सी.सी को Re याचिका संख्या-940 // 2047 बिकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में अनुमन्य करायी है (अर्थात् 8 प्रतिशत) उससे अधिक धनराशि नहीं लेगें। यदि भविष्य में अन्य 220KVA या अधिक के सब-स्टेशन बनाने की आवश्यकता होती है, तो उसकी प्रो-रेटा धनराशि शिकायतकर्ता से प्राप्त करने का अधिकार विपक्षी को होगा तथा यह प्रस्तर-4.7 में भी प्राविधानित है। gy 40. 4 8 इसकी भी पूर्ववत पृथक अकाउटिंग होगी व इन हाऊस एडमिन्सिट्रेटिव या सुपर विजन चार्जेज 8 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगें। वाटर हारवेस्टिंग के सम्बन्ध में होने वाले व्यय के सम्बन्ध में यह स्पष्ट किया जाता है कि केता के प्रो-रेटा शेयर की सूचना उपलब्ध कराते हुए यह धनराशि ली जायेगी। क्लब का एस्टिमेट व प्रो-रेटा शेयर बताते हुए धनराशि मांगी जा सकती है। क्लब की रिकरिंग चार्जेज़, क्लब प्रारम्भ होने या प्लॉट का कब्जा ऑफर होने, जो भी बाद में हो, तभी से प्रारम्भ होगा। विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि उनके द्वारा शिकायतकर्ता से विभिन्न चार्जेज के मद ली गयी अतिरिक्त धनराशि conse समायोजित करते हुए 60 दिनों के अन्दर अवशेष धनराशि वापस करना सुनिश्चित करें। विपक्षी उपरोकतानुसार संशोधित कब्जा पत्र जारी करना सुनिश्चित करें |
इस आदेश का Veo उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक 0 $ ,//2;/ 2049 (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण