Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Sanjay Kalra and Bharat Bhushan v. Mahaluxmi Buildtech Limited
Complaint No. NCR145/07/96570/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the complainant)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddha Nagar. Hearing Bench-04A Order under Section 31 / omi—3t Shri Rajive Kumar, Hon'ble Chairman Serial No. | Complaint Number | Complainant 1 | NCR 45/07/96577/2022 | Sanjay Kalra and Bharat Bhushan 2 | NCR45/07/96570/2020 | Sanjay Kalra and Bharat Bhushan Versus Mahalakshmi Buildtech Limited A suit has been instituted against the respondent by the complainant Sanjay Kalra and Bharat Bhushan along with 04 other complainants. The facts of these two complaints are identical and the evidence is identical. Both these complaints relate to the respondent's project Migsun Green Mansion. Therefore, they are being disposed of by a single decision. Complaint Number :- NCRI45/07/96577/2022 Sanjay Kalra and Bharat Bhushan shall be the lead case.
In brief, the lead complainant states that unit number 4-0302 was booked by them in the respondent's project Migsun Green Mansion, whose total price is Rs. 37,65,975/-, against which an amount of Rs. 37.76,000/- has been paid by the complainant. The complainant also states that possession of the unit in question was to be given by the respondent by date 29.03.2049, but possession of the unit in question has not been given by the respondent by the said stipulated period or till date, and a delay of more than 3 years has been caused by the respondent in giving possession, whereas all payable amounts had been paid by the complainant by July, 2008 / 208. Therefore, request has been made by the complainant for early possession of the unit in question and interest for the delayed period. In support of their statement on behalf of the complainant, copy of allotment letter dated 29.03.2049, receipt of deposited money, and photocopies of customer statement have been filed.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04ए आदेश अन्तर्गत omi—3t श्री राजीव कुमार, माननीय अध्यक्ष कम संख्या शिकायत संख्या Pe] | _ | NCR 45/07/96577/2022 संजय कालरा एवं भरत भूषण 2 NCR45/07/96570/2020 संजय कालरा एवं भरत भूषण बनाम महालक्ष्मी बिल्डटेक लिमिटेड शिकायतकर्ता संजय कालरा एवं भरत भूषण के साथ 04 अन्य शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन दोनों शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह दोनों शिकायतें विपक्षी की परियोजना Migsun Green Mansion से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या :- NCRI45/07/96577/2022 संजय कालरा एवं भरत भूषण अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्द कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Migsun Green Mansion में यूनिट संख्या--4-0302 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 37,65,975,/- रूपये है, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 37.76,000 /- रूपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा yea यूनिट का कब्जा दिनांक 29.03.2049 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा उक्त निर्धारित अवधि अथवा अब तक प्रश्नगत यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है और विपक्षी द्वारा कब्जा दिये जाने में 3 वर्ष से 9- 2
अधिक का विलम्ब किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा जुलाई, 208 तक समस्त देय धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा शीघ्र प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज fear जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र दिनांकित 29.03.2049 की प्रति, जमा धनराशि की रसीद, कस्टमर स्टेटमेन्ट की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है।
विपक्षी की ओर से जवाब दिनांकित 44.0.2022 दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा तथ्यों छिपाते हुए wera शिकायत योजित की गयी है। इसलिए प्रश्नगत शिकायत पोषणीय नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना Migsun Green Mansion में यूनिट संख्या-&-302 बुक करायी गयी, जिसके कम में अनुबन्ध दिनांक 23.09.2049 को निष्पादित कराया गया, जिसके TRR-0.4 के अनुसार यूनिट का कब्जा अनुबन्ध की तिथि 3 माह अर्थात् दिनांक 23.42.209 तक दिया जाना था। प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत 36,65,975 /- रूपये (कर रहित) थी। शिकायतकर्ता द्वारा क्रेडिट नोट दिनांकित 08.05.2048, जिसकी कीमत 37,65,000/— रूपये थी, विपक्षी को उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही अंसल हाई टेक टाऊनशिप लिमिटेड द्वारा प्राप्त हुआ। ऐसी स्थिति में उपलब्ध क्रेडिट नोट विपक्षी के किसी भी काम नहीं था। दिनाक 08.05.20I8 को अंसल हाईटेक टाऊनशिप से 37,65,000,/- रूपये का क्रेडिट नोट जारी किया गया, परन्तु उनके द्वारा पूर्व में ही एक अनुबन्ध निष्पादित हो चुका था, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं यूनिट WEN-3A/08 को निरस्त करने हेतु प्रार्थना की गयी और क्रेडिट नोट 4,00,90,974 /- रूपये का जारी कराया गया, जिसे आगे विपक्षी की परियोजना में “greene” किया गया। विपक्षी द्वारा पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु दिनाक 28.4420I6 को सक्षम प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया गया और प्राधिकरण द्वारा कोई भी आपत्ति दर्ज नहीं की गयी है। अतः दिनांक 06.42.2046 से डीम्ड श्रेणी का पूर्णता प्राप्त हो चुका है। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा शिंकायतकर्ता की wed शिकायत खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में Year मेगापॉलिस द्वारा विपक्षी को जारी क्रेडिट नोट दिनांकित 08.05.2048 की प्रति, सैटेलमेन्ट एग्रीमेन्ट दिनांकित 08.05.2048 की प्रति, पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु दिये गये आवेदन पत्र दिनांकित 28.44.2046 की प्रति, इसी पीठ द्वारा अन्य शिकायतों में पारित आदेशों की प्रतियाँ दाखिल की गयी है। उभय पक्ष के Tel को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये जाते है :- 4. क्या विपक्षी द्वारा wera परियोजना के सम्बन्ध में ओ.सी.,/ सी.सी. अथवा डीम्ड ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किया जा चुका है ? 22] क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु een बिन्दु संख्या-4 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में ओ.सी.//सी.सी. अथवा Ses ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किया जा चुका है ? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी द्वारा दाखिल जवाब में यह कहा गया है कि उनके द्वारा पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु दिनाक 28.4.20I6 को सक्षम प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया गया और प्राधिकरण द्वारा कोई भी आपत्ति दर्ज नहीं की गयी है। अतः दिनांक 06.:2.20I6 से Ses श्रेणी का पूर्णता प्राप्त हो चुका है। इस सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश अपार्टमेन्ट (निर्माण, स्वामित्व और अनुरक्षण का संवर्धन) अधिनियम, 2040 की धारा-4;5द्ध निम्नलिखित उल्लेखित है :-
An apartment may be transferred by the promoter to any person only after obtaining the completion certificate from the prescribed sanctioning authority concerned as per building bye-laws. The completion certificate shall be obtained by promoter from prescribed authority within the period of two years from the date of sale agreement. Provided that if the construction work is not completed within the stipulated period, with the permission of the prescribed authority; Provided further that if the completion certificate is not issued by the prescribed sanctioning authority within three months of submission of the application by the promoter complete with all certificates and other documents required, the same shall be deemed to have been issued after the expiry of three months. Explanation: For the purposes of this sub-section ‘completion" means the completion of the construction works of a building as a whole or the completion of an independent block of such building, as the case may be. उपरोक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि यदि विकासकर्ता द्वारा परियोजना से सम्बन्धित सभी प्रमाण पत्र प्राप्त किये जा चुके है और सी.सी. प्राप्त करने हेतु सक्षम प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा चुका है, परन्तु आवेदन किये जाने की तिथि से 3 माह के भीतर यदि सक्षम प्राधिकरण द्वारा विकासकर्ता को सी.सी. जारी नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में 3 माह की समयावधि समाप्त हो जाने के उपरान्त सक्षम प्राधिकरण द्वारा विकासकर्ता को सी.सी. जारी किया हुआ माना जायेगा।
प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी द्वारा यूपी.एस.आई.डी.सी के समक्ष ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये जाने हेतु प्रेषित आवेदन दिनांक 28.44.206 की प्रतिलिपि दाखिल की गयी है, परन्तु विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना से सम्बन्धित वांछित प्रमाण पत्रों की छायाप्रतियाँ दाखिल नहीं की गयी हैं। ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट नहीं है कि क्या विपक्षी द्वारा पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु दिये गये आवेदन के साथ परियोजना से सम्बन्धित सभी वांछित प्रमाण पत्र प्रस्तुत किये गये अथवा नहीं। वर्णित स्थिति में विपक्षी का यह तर्क कि प्रश्नगत परियोजना डीम्ड कम्पलीशन की श्रेणी में आती है, उक्त तथ्य साक्ष्यों के अभाव में स्वीकार्य किये जाने योग्य नहीं है। अतः उक्तानुसार विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना यू0पी0 अपार्टमेन्ट एक्ट, 20i0 की धारा-4(5) एवं उत्तर प्रदेश रेरा के परिपत्र दिनांक 46.09.2049 में इंगित प्राविधानों के अधीन “डीम्ड कम्पलीशन” की परिभाषा में नहीं आयेगी। तद्नुसार बिन्दु den-i Peake किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 बिन्दु संख्या-2 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्तागण के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्तागण पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा दिनाक 29.03.2049 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा उक्त निर्धारित श्र
अवधि अथवा अब तक प्रश्नगत यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है और विपक्षी द्वारा कब्जा दिये जाने में 3 वर्ष से अधिक का विलम्ब किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा जुलाई, 2008 तक समस्त देय धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा शीघ्र wera यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इस पर विपक्षी की ओर से जवाब दिनांकित 44.40.2022 दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत 36,65,975 //- रूपये (कर रहित) थी। शिकायतकर्ता द्वारा क्रेडिट नोट दिनांकित 08.05.2048, जिसकी कीमत 37,65,000/— रूपये थी, विपक्षी को उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही अंसल हाई टेक टाऊनशिप लिमिटेड द्वारा प्राप्त हुआ। ऐसी स्थिति में उपलब्ध क्रेडिट नोट विपक्षी के किसी भी काम नहीं था। दिनांक 08.0520i8 को अंसल हाईटेक टाऊनशिप से 37,65,000/— रूपये का क्रेडिट नोट जारी किया गया, परन्तु उनके द्वारा पूर्व में ही एक अनुबन्ध निष्पादित हो चुका था, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं यूनिट PeT-3A/08 को निरस्त करने हेतु प्रार्थना की गयी और क्रेडिट नोट 4,00,90,974,//- रूपये का जारी कराया गया, जिसे आगे विपक्षी की परियोजना में “ट्रान्सफर” किया गया। RTI एक्ट की धारा 48 (4) F प्राविधान है कि :- Section 76 (7) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: 2) Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार Sa को ue अधिकार है कि यदि उन्हें Gite के अनुरूप कब्जा नही मिलता तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
प्रश्नगत प्रकरणों में विपक्षी का कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा क्रेडिट नोट दिनांकित 08.05.2048, जिसकी कीमत 37,65,000/— रूपये थी, विपक्षी को उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही अंसल हाई टेक टाऊनशिप लिमिटेड द्वारा प्राप्त हुआ। ऐसी स्थिति में उपलब्ध क्रेडिट नोट विपक्षी के किसी भी काम नहीं था। दिनाक 08.05.2048 को अंसल हाईटेक टाऊनशिप से 37,65,000/— रूपये का क्रेडिट नोट जारी किया गया, परन्तु उनके द्वारा पूर्व में ही एक अनुबन्ध निष्पादित हो चुका था, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं यूनिट Pe-34/08 को निरस्त करने हेतु welt की गयी और क्रेडिट नोट 4,00,90,974 //- रूपये का जारी कराया गया, जिसे आगे विपक्षी की परियोजना में “ट्रान्सफर” किया गया। पत्रावली पर उपलब्ध Yet मेगापॉलिस द्वारा विपक्षी को जारी क्रेडिट नोट दिनांकित 08.05.20i8 के अवलोकन से यह विदित है कि विपक्षी द्वारा उक्त क्रेडिट नोट के माध्यम से 37,65,000,/- रूपये की धनराशि प्राप्त की गयी। इसके अतिरिक्त पत्रावली पर उपलब्ध विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में जारी जमा धनराशि की रसीद के अवलोकन से यह विदित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को 37,65,000/— रूपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। अतः ऐसे में विपक्षी यह तर्क कि शिकायतकर्ता द्वारा क्रेडिट नोट दिनांकित 08.05.208, जिसकी कीमत 37,65,000/— रूपये थी, विपक्षी को उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही अंसल हाई टेक टाऊनशिप लिमिटेड द्वारा प्राप्त हुआ। ऐसी स्थिति में उपलब्ध क्रेडिट नोट विपक्षी के किसी भी काम नहीं था, उक्त तथ्य स्वीकार्य किये जाने योग्य नहीं है।
प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध पक्षकारों के मध्य हस्ताक्षरित आवंटन पत्र दिनांक 29.03.209 & WR-0.4 के अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा अनुबन्ध की तिथि 29.03.2049 से 3 माह अर्थात् दिनोक 29.06.2049 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा उक्त निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया। ») ‘~ जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील सं0 6649-50 /20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल" में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. / सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 30.06.2049 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में तक की अवधि के लिए विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है। माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in 05 nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व So के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 2za) में प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be.
Explanation.—F or the purpose of this clause— (i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (afer एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें wea 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में od हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable है
to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India + % unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। var प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी McLR+H प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0) में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या-सी-3289 /2020 “war बिल्डवेल कस्ट्रक्शन्स UL. बनाम पूनम सूद एवं अन्य” में दिनांक 06.02.2020 को पारित निर्णय में यह उललेखित किया गया है कि:-
Coming to the next ground of challenge to the impugned order by the petitioner's counsel that the interest awarded by respondent no.l (MCLR+I) is excessive, is also without any merit. It is an admitted fact to the petitioner that respondent 70.] had booked a flat and till the filing of the writ petition, the possession of the flat has not been given to him. The interest had been awarded in terms of Clause 9.2(ii) of the form of agreement contained in the U.P. Real Estate (Regulation and Development) (Agreement for Sale/Lease) Rules, 208. The respondent no.2 has given cogent reasons in the impugned order. Respondent no.2 has rightly placed reliance on Clause 9 sub-clause(ii) of the Rules, 20i8 which provides that in the event of default on the part of the promotor, the allottee shall have the option of terminating the agreement in which case the promoter shall be liable to refund the entire money paid by the allottee under any head whatsoever, towards the purchase of the flat at the rate of MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India + % unless provided otherwise under the Rules within forty-five days of 0 receiving the termination notice. Learned counsel for the petitioner has failed to bring to our notice any Rule in the Rules, 206, providing otherwise. तत्पश्चात् रिट याचिका wen-x-oi20/2020 “हैबीटेक इंफास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाम उ0प्र0 राज्य सरकार एवं अन्य“ में दिनांक 06.07.2020 को महत्वपूर्ण ऑब्जर्वेशन देते हुए यह उललेखित किया है कि:-
On 2.09.20l9 the respondent authority directed the petitioner to refund the entire amount alongwith interest @ MCLR + % from the date of deposit till the date of order. Thereafter, recovery certificate and citation was issued on 07.02.2020.........................---०- and only on complaint under Section 8 authority proceeded to direct for the refund of the money alongwith payment of interest @ MCLR + %, which was in view of Real Estate (Regulation & Development) (Agreement to Sale) Regulations, 208 ..Thus power of refund of amount along with interest which has been provided under Section 8, with the authority was rightly exercised by it in the interest of justice. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी रेरा प्राधिकरण के पीठ द्वारा नियमावली के अन्तर्गत MCLR + % की वार्षिक ब्याज दर से दिये गये आदेश को उचित एवं सही माना है। अतः उपरोक्तानुसार माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय से यह अवधारित किया जा सकता है कि राज्य सरकार द्वारा नियमावली के अन्तर्गत निर्धारित की गयी ब्याज दर उचित एवं सही है। ब्याज दर को स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया के MCLR+ प्रतिशत से सम्बद्ध करने के सिद्धान्त को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भी Mont गया है और न्यायोचित ठहराया है।
ऐसे में उ0प्र0 राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विकय,/पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर MCLR+ प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से i प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। तदनुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। yA 4 उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश . विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिटस् की अनुबन्ध/ आवंटन पत्र के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर कब्जा दिनाक 34.03.2023 तक ओ.सी /सी.सी. सहित देना सुनिश्चित करें और देय RT शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। - विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 30.06.20:9 से ओ.सी.,सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLRtH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि' का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्ता के प्रकरण में आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार विलम्ब ब्याज की गणना की जायेगी।
- विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(2०)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। . इस आदेश की एक प्रति सम्बन्धित पत्रावली पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की अन्य मामले में गणना की जायेगी। BS; १2 5. इस आदेश का Verda भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। 6. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करां सकेगें। दिनांक — Ob 62/2023 Shee chee बल eee" (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण