Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Prateek Garg v. Ansal Housing Limited
Complaint No. NCR145/07/1533/2019
- Decision date
- 2019-12-20
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-02 उपस्थिति:- श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष शिकायत संख्या:- NCR45/07/533/209 प्रतीक गर्ग Dayal Prenting Press-22 Chowk Bazar, Bulandshahr 'शिकायतकर्ता अंसल हाउसिंग feo 606, 6th Floor Indraprakash, 2] Barakhamba Road, New Delhi- 000] प्रस्तुत वाद शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिवादी के विरूद्ध go की गई यूनिट के सम्बन्ध में कब्जा मय विलम्बित अवधि का दण्ड ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षिप्त में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिवादी की परियोजना Ansal Sumangalam Corporate Suites # यूनिट ¥Wo-25 को बुक किया गया था, जिसके एवज में शिकायतकर्ता ने प्रतिवादी को रू. 20,36,596 /— भुगतान किया गया था। दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित आवंटन पत्र दिनांक i4.0:.20i5 के अनुसार यूनिट पर कब्जा आवंटन-पत्र हस्ताक्षरित होने की तिथि से 24 माह + 6 माह aque अवधि अर्थात् 43.07.2047 तक उपलब्ध कराया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि परियोजना में निर्माण कार्य पूर्ण करने में विलम्ब किया जा रहा है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा पीठ के समक्ष उपस्थित होकर यूनिट के सम्बन्ध में कब्जा Page l 6 मय विलम्बित अवधि का दण्ड ब्याज एवं एसक्लेशन चार्ज्स के सम्बन्ध में छूट दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित शिकायतपत्र, जमा की गयी धनराशि की रसीदें, आवंटन-पत्र आदि प्रपत्रों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
: प्रतिवादी को उपस्थिति हेतु नोटिस जारी किये गये। पत्रावली अवलोकन से विदित है कि प्रतिवादी की ओर से सुनवाई के दौरान कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ है। ऐसी दशा में प्रतिवादी के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही करते हुए आदेश पारित किया जाना विधि सम्वृत प्रतीत होता है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत तर्कों को सुना व पत्रावली का अवलोकन fear शिकायतकर्ता के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारित किये गये है:- 4. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज का दर क्या होगा ? 2. क्या शिकायतकर्ता एसक्लेशन चार्जस के सम्बन्ध में छूट प्राप्त करने का अधिकारी है ? निस्तारण बिन्दु सं0-॥ बिन्दु संट-। इस आशय का विचारित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्ब के लिए ब्याज दिलाया जा सकता है? यह वाद बिन्दु शिकायतकता के अभिकथनों के आधार पर विचारित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंधित अवधि में कब्जा नही दिया गया है, जिस कारण वह विलम्बित अवधि का दण्ड ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहने का इच्छुक है। यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में यूनिट बुक कराया गया था। इस तथ्य पर भी कोई विवाद नहीं है कि विपक्षी अनुबंधित अवधि में कब्जा प्रदान करने में असमर्थ रहा है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को अनुबन्धित अवधि के पश्चात् से ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा ऑफर किये जाने तक की अवधि पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित है।
पत्रावली अवलोकन से यह भी विदित है कि प्रश्नगत परियोजना रेरा अधिनियम पंजीकृत संख्या UPRERAPRJ2504 के अन्तर्गत पंजीकृत है। जिसके अनुसार परियोजना पूर्ण किये जाने की तिथि 34.42.20:9 अंकित की गयी है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable.
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा ved धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये Page 3 , विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of 0०६४४ परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.24i) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है।
जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील Wo 6649-50 // 2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- " the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser 6 ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने या कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी.,/सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर ब्याज पाने के अधिकारी होगें। तद्नुसार बिन्दु सं0-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु सं0-2 बिन्दु सं0-2 इस आशय का विचारित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता एसक्लेशन चार्जस के सम्बन्ध में छूट प्राप्त करने का अधिकारी है ? यह वाद बिन्दु भी शिकायतकर्ता के अभिकथनों के आधार पर विचारित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है।
यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को उक्त अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। अनुबन्ध-पत्र के प्रस्तर-46, WAR-77 के अनुसार प्रतिवादी एसक्लेशन चार्ज्स की मांग शिकायतकर्ता से कर सकता है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता एसक्लेशन ae की मांग के सम्बन्ध में छूट प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है| तद्नुसार बिन्दु सं0-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश 4-प्रतिवादी को आदेशित किया जाता है कि शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा (physical possession) आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर उपलब्ध कराये। 2- प्रतिवादी को यह भी आदेशित किया जाता है कि शिकायतकर्ता व प्रमोटर के बीच हुये हस्ताक्षरित आवंटन पत्र / Builders Buyers Agreement an Page 5 (BBA) के अनुसार विलम्बित अवधि ०४४०१ 9०१०० के सम्बंध में MCLR + I% की दर से occupation certificate WA SM A siiwx ऑफ पोजेशन जारी करने की तिथि, (जो भी बाद में हो) तक ब्याज अदा किया जाएगा। ब्याज की इस धनराशि को कब्जा दिये जाने के समय अंतिम देय धनराशि में समायोजित की जाएगी तथा शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि में ब्याज की धनराशि अधिक होने पर अन्तर वापिस किया जायेगा। 3-यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 206 की धारा 2 (ai) & अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा।
प्रतिवादी प्रमोटर द्वारा आदेश का अनुपालन न किये जाने पर शिकायतकर्ता / आवंटी को यह अधिकार होगा कि उ0.प्र0. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सके। इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक : $9 ,// 49,// 209 (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण