Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Abhay Kumar v. Scc Builders Pvt. Ltd
Complaint No. NCR145/07/111502/2023
- Decision date
- 2026-05-08
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | रेक्टिफिकेशन आदेश पीठ-02 उपस्थिति — टी० वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या — Sect-39/I/NCRI45/07/502/2023 एस.सी.सी बिल्डर्स प्रा.लि. (प्रमोटर) बनाम अभय कुमार (आवंटी) प्रस्तुत पत्रावली भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-39 के अन्तर्गत प्रस्तुत की गयी है। शिकायतकर्ता GAR) का प्रार्थना पत्र धारा-39 के अन्तर्गत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पुकार पर शिकायतकर्ता (प्रमोटर) की ओर से उनकी विद्वान अधिवक्ता सुश्री ऊर्जा जैन उपस्थित हुईं एवं विपक्षी (आवंटी) अनुपस्थित हुए, जिसमें उभयपक्ष यदि चाहे तो अपनी-अपनी लिखित बहस 02 सप्ताह के अन्दर रेरा प्राधिकरण के समक्ष दाखिल कर सकते है। शिकायतकर्ता (प्रमोटर) का प्रार्थना पत्र धारा-39 के अन्तर्गत इस आशय से दाखिल किया गया है कि विपक्षी (आवंटी) द्वारा विपक्षी कंपनी को प्रश्ननत शिकायत के सम्बन्ध में कुल 30,72,022,/- रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है, जबकि उनके द्वारा शिकायत योजित करते समय 45,46,000 //-रूपये की धनराशि अंकित की गयी है, जिससे सुधार किये जाने का अनुरोध माननीय पीठ द्वारा किया गया है, परन्तु विपक्षी द्वारा कोई ऐसा साक्ष्य रेरा पोर्टल पर या माननीय पीठ के समक्ष दाखिल नहीं किया गया है।
दूसरी ओर विपक्षी (आवंटी) द्वारा यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता (प्रमोटर) को निर्देश दिया जाए कि वह विपक्षी (आवंटी) को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा प्रदान करें एवं साथ ही उनके द्वारा भुगतान की गयी धनराशि 45,45,000,/- रुपये पर विलम्ब ब्याज तथा मानसिक उत्पीड़न के लिए 5,00,000 /— रुपये तथा वाद व्यय के लिए 4,00,000,/- रुपये की धनराशि दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के Tel को सुना गया। पत्रावली का अवलोकन किया गया । ce । रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-39 में यह प्राविधान्वित है कि :- आधिकरण aaa से प्रकट किसी Ter को gered की दृष्टि से इस अधिनियम की अधीन किये यये आदेश की तारीख से दो वर्ष की अवधि के भीतर किसी समय उसके द्वारा पारित किसी आदेश को संशोधित कर सकेगा और यदि पश्षकारों द्वारा उसके ध्यान में गलती लायी जाती है तो ऐसा संशोधन करेगा। weg ऐसा ale संशोधन किसी आदेश के war में fore विरुद्ध इस अधिनियम के अधीन अपील rgd की गयी है नहीं किया array] Wy यह कि प्राधिकरण अभिलेख से प्रकट किसी गलती का छुघार करते समय इस अधिनियम को उपबन्ध के अधीन WRT आदेश के साखान् APT का संशोधन नहीं करेया।
पत्रावली पर दाखिल समस्त अभिलेखों एवं प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश दिनांक 09.05.2025 गुण-दोष के आधार पर पारित किया गया है। समस्त तथ्यों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता (प्रमोटर) द्वारा दिया गया संशोधन हेतु प्रार्थना पत्र रेश अधिनियम की धारा-39 की परिधि के अन्तर्गत नहीं आता है। ऐसी दशा में प्रश्नगत प्रकरण में पारित आदेश में कोई संशोधन किया जाना उचित नहीं होगा। अतः शिकायतकर्ता (प्रमोटर) का प्रार्थना पत्र स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। वर्णित तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता (प्रमोटर) द्वारा दिया गया संशोधन हेतु प्रार्थना पत्र खारिज किया जाता S| तद्नुसार पत्रावली दाखिल दफ्तर हो। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण