Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Suresh Chand Sharma v. Rise Projects Pvt Ltd
Complaint No. NCR145/07/111181/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-10-22
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Order under Section 34, Bench-2 (formerly Bench-[?]), under [?], Bench-2. Present: Shri T. Venkatesh, Member. Complaint No. | Complainants | Unit | Amount deposited - NCR45/07/I50/2023 | Dinesh Chandra Sharma | T3-I2A0I | Rs. 28,00,000/- - NCR45/07/252/2023 | Kalpana Sharma and Dinesh Chandra Sharma | [?]3-002 | Rs. 38,58,536/- - NCR45/07/I82/2023 | [?] Chandra Sharma [?] | [?]3-00 | Rs. 44,56,876/- Versus Rise Projects Private Limited The complainant Dinesh Chandra Sharma, along with 02 other complainants, has filed the complaints in question against the respondent. The facts of all these complaints are the same and they rest on the same evidence. All these complaints relate to one and the same project, RISE ORGANIC HOMES [?]. Therefore the complaints are being disposed of by a single decision. Complaint No. NCR45/07/I50/2023, Dinesh Chandra Sharma, shall be the lead case. The complaint petition has been filed by the complainants against the respondent seeking possession of the unit in question along with interest for the period of delay.
In brief, the lead complainant states that on 20.44.2048 he booked Unit No. 73-42A0i in the respondent's project RISE ORGANIC HOMES [?]. The total price of the unit was Rs. 29,36,24/-, against which the complainant paid Rs. 28,00,000/- to the respondent from time to time in instalments. The complainant further states that the respondent is not giving physical possession of the unit in question, although there is a delay of more than 04 years in the project, and that information is being given about obtaining OC/CC for the project in question, whereas the complainant has paid the amounts due against the unit in question on time. The complainant further states that a cancellation letter dated 20.06.2023 was sent in respect of the complainant's unit in question without obtaining all the no-objection certificates for the project from the competent development authority. For this reason the complainant has filed this complaint against the respondent under Section [?] of the Real Estate Regulatory Authority Act, seeking possession of the unit. In support of the complainant's statement, photocopies of records have been filed, including a copy of the flat buyer agreement dated 20.4.208, receipts for the deposited amounts paid to the respondent, a copy of the pre-cancellation letter dated 20.06.2023, and other records.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 पूर्व (पीठ-) अन्तर्गत asi, पीठ-2 --) उपस्थिति :- श्री टी० वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण ‘| यूनिट to जमा धनराशि T NCR45/07/I50/2023 दिनेश चंद्र शर्मा T3-I2A0I | 28,00,000 /-रूपये कल्पना शर्मा एवं दिनेश चंद्र | ॥3-002 38,58,536 /-रूपये NCR45/07/252/2023 शर्मा शर्म NCR45/07/I82/2023 | | ee] चंद शम प3-00 | 44,56,876/-रूपये | | बनाम राइज प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड शिकायतकर्ता दिनेश चंद्र शर्मा के साथ 02 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना RISE ORGANIC HOMES एप्र450 | से सम्बन्धित हैं। अत: एक ही निर्णय से geri शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCRI45/07/I50/2023 दिनेश चंद्र शर्मा अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है।
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना RISE ORGANIC HOMES एप्त488 | में दिनांक 20.44.2048 को यूनिट संख्या- 73-42A0i बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य 29,36,24 /“- रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 28,00,000/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा नहीं दिया जा रहा है, जबकि परियोजना में 04 साल से अधिक का विलम्ब है तथा प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा ओ.सी /सी.सी प्राप्त किये जाने के सम्बन्ध में सूचना उपलब्ध करायी जा रही है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष समय से अपनी देय धनराशि का भुगतान किया गया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि werd परियोजना के सापेक्ष समस्त अनापत्ति प्रमाण पत्र सक्षम विकास प्राधिकरण से प्राप्त किये बिना ही शिकायतकर्ता की प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में निरस्तीकरण पत्र दिनांक 20.06.2023 को प्रेषित किया गया है। जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की ass के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत कब्जा दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में फ्लैट केता अनुबन्ध पत्र दिनांकित 20.4.208 की प्रति, विपक्षी को भुगतान की गयी जमा धनराशि की रसीदें, प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांक 20.06.2023 की प्रति, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी की ओर से लिखित जवाब दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना RISE ORGANIC HOMES PHASE | में यूनिट संख्या- 73-2/0] दिनांकित 20.44.2048 को बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक. 20..208 को आवंटन पत्र जारी किया गया। यूनिट की कुल कीमत 29,36,24/— रुपये के सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 28,00,000,/- रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। विपक्षी का यह भी कहना है कि प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में सक्षम विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 49.08.2023 को टावर संख्या-2,3,4,5,6 तथा 09 के सम्बन्ध में पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा चुका है। विपक्षी का यह भी कहना है कि प्रश्नगत्त परियोजना को समय से पूर्ण किया गया है। उभयपक्ष के मध्य हस्ताक्षरित अनुबन्ध दिनाक 20.44.2048 के अनुसार परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नवम्बर 2022 तक कब्जा दिया जाना था। विपक्षी द्वारा wert परियोजना के सम्बन्ध में आवेदन पत्र दिनांक 5.03.2023 को समस्त अनापत्ति प्रमाण पत्रों को प्राप्त करते हुए सक्षम विकास प्राधिकरण के ओ.सी हेतु आवेदन किया गया है तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट के सापेक्ष दिनांक 24.03.2023 को ऑफर ऑफ फिटआउट प्रेषित किया गया। सक्षम विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 79.08.2023 को परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसके कम में विपक्षी द्वारा दिनांक 45.09.2023 को कब्जा हेतु प्रस्ताव पत्र प्रेषित किया गया। प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत 40,36,424/-way है, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता 30,36,424 //-रूपये धनराशि का भुगतान किया गया तथा वर्तमान समय में भी यूनिट के सापेक्ष 40,55,974 ,/-रूपये की धनराशि अवशेष है। a
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा न््यायनिर्णायक अधिकारी के सक्षम भी शिकायत संख्या- ए.डी.जे/ एन.सी.आर445 /42 // 403642 /2022 योजित की गयी थी, जिससे पीठ द्वारा खारिज कर दिया गया। शिकायतकर्ता द्वारा wd यूनिट के सापेक्ष अनुबन्धानुसार अपनी देय धनराशि भुगतान समयानुसार नहीं किये जाने के कम में दिनांक 20.06.2023 को प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया, जिसके उपरान्त विपक्षी द्वारा दिनांक 48.07.2023 को निरस्तीकरण प्रेषित कर प्रश्नगत यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया। उपरोक्त कथन के आधार पर प्रश्नगत शिकायत को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित जवाब, परियोजना से सम्बंधित चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र, परियोजना का पूर्णता प्रमाण-पत्र, दिनांकित 79.08.2023 की प्रति, शिकायतकर्ता से प्राप्त धनराशि का विवरण, प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांक 20.06.2023 की प्रति, अनुस्मारक पत्र एवं मांग पत्र की प्रतियां, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के cel को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये जाते हैं :-- . wat शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 बिन्दु weri इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ?
शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा नहीं दिया जा रहा है, जबकि परियोजना में 04 साल से अधिक का विलम्ब है तथा प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा ओ.सी सी. सी प्राप्त किये जाने के सम्बन्ध में सूचना उपलब्ध करायी जा रही है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष समय से अपनी देय धनराशि का भुगतान किया गया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि प्रश्गगत परियोजना के सापेक्ष समस्त अनापत्ति प्रमाण पत्र सक्षम विकास प्राधिकरण से प्राप्त किये बिना ही शिकायतकर्ता की प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में Prefer पत्र दिनांक 20.06.2023 को प्रेषित किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। क्र
दूसरी ओर विपक्षी द्वारा अपने जवाब में अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना RISE ORGANIC HOMES PHASE | में यूनिट संख्या- 73-2A0] दिनांकित 20.4.2048 को बुक करायी गयी थी, जिसके ' सापेक्ष विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक. 20.4.208 को आवंटन पत्र जारी किया गया। यूनिट की कुल कीमत 29,36,24/~ रुपये के सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 28,00,000/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। विपक्षी का यह भी कहना है कि प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में सक्षम विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 49.08.2023 को टावर संख्या-2,3,4,5,6 तथा 09 के सम्बन्ध में पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा चुका है। विपक्षी का यह भी कहना है कि प्रश्नगत परियोजना को समय से पूर्ण किया गया है। उभयपक्ष के मध्य हस्ताक्षरित अनुबन्ध दिनाक 20.44.2048 के अनुसार परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नवम्बर 2022 तक कब्जा दिया जाना था। विपक्षी द्वारा wea परियोजना के सम्बन्ध में आवेदन पत्र दिनांक 45.03.2023 को समस्त अनापत्ति प्रमाण पत्रों को प्राप्त करते हुए सक्षम विकास प्राधिकरण के ओ.सी हेतु आवेदन किया गया है तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट के सापेक्ष दिनांक 24.03.20203 को ऑफर ऑफ फिटआउट प्रेषित किया गया। सक्षम विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 49.08.2023 को परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसके कम में विपक्षी द्वारा दिनांक 45.09.2023 को कब्जा हेतु प्रस्ताव पत्र प्रेषित किया गया। प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत 40,36,।24/-रूपये है, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता 30,36,424 //-रूपये धनराशि का भुगतान किया गया तथा वर्तमान समय में भी यूनिट के सापेक्ष 40,55,974 ,//-रूपये की धनराशि अवशेष है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा न््यायनिर्णायक अधिकारी के सक्षम भी शिकायत संख्या- ए.डी.जे / एन.सी.आर445 // 42 / 403642 // 2022 योजित की गयी थी, जिससे पीठ द्वारा खारिज कर दिया गया। शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्गगत यूनिट के सापेक्ष अनुबन्धानुसार अपनी देय धनराशि भुगतान समयानुसार नहीं किये जाने के कम में दिनांक 20.06.2023 को प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया, जिसके उपरान्त विपक्षी द्वारा दिनांक 8.07.2023 को Prefer प्रेषित कर प्रश्नगत यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया। उपरोक्त कथन के आधार पर प्रश्नगत शिकायत को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है। पत्रावली के अवलोकन से यह विदित है कि उभयपक्ष के मध्य आवंटन पत्र का निष्पादन दिनांकित 20.44.20I8 को किया गया, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु कंस्ट्रक्शन लिंक पेमेंट प्लान का चयन किया गया तथा आवंटन पत्र के व कब्जा Tel TER के अनुसार परियोजना का पूर्ण कर 42 माह एवं ०6 में प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था। दूसरी ओर प्रश्नगत यूनिट का निरस्तीकरण किये जाने के सम्बन्ध में शिकायतकर्ता द्वारा agen लिंक पेमेंट प्लान का चयन किया गया था, परन्तु अपनी देय धनराशि का समय से भुगतान न किये जाने के कम में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को निरस्तीकरण पत्र दिनांक t8.07.2023 को प्रेषित किया गया।
पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट को निरस्त किये जाने से पूर्व 02 मांग पत्र प्रेषित नहीं किया गया, 02 अनुस्मारक पत्र के मध्य पर्याप्त समयावधि प्रदान नहीं की गयी तथा शिकायतकर्ता को यूनिट के सापेक्ष प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांक... को प्रेषित किया गया है तथा अंतिम निरस्तीकरण पत्र दिनांक 48.07.2023 को प्रेषित कर प्रश्नगत यूनिट को निरस्त कर दिया गया, जो कि यूनिट निरस्तीकरण के सम्बन्ध AR नियमावली का उल्लंघन करते हुए प्रश्नगत यूनिट को निरस्त किया गया है।इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट के सापेक्ष ऑफर ऑफ फिटआउट दिनांक 27.03.2023 को प्रेषित किया, जबकि विपक्षी द्वारा सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष आवेदन दिनांक 45.03.2023 को किया गया है, जबकि सक्षम विकास प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाण पत्र दिनोक t9.08. 2023 को प्राप्त किया गया है तथा प्रश्नगत यूनिट का निरस्तीकरण दिनांक 48.07.2023 को किया गया है। अतः यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट को निरस्त किये जाने के सम्बन्ध में रेरा नियमावली का उल्लंघन किया गया है, जोकि अवैधानिक है। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल आवंटन पत्र दिनांक 20.44.2048 के पृष्ठ संख्या-4 के कब्जे वाले WER के अनुसार प्रश्नगत यूनिट का कब्जा 42 माह एवं 06 माह की अनुग्रह के साथ 48 माह में दिया जाना था। ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 20.4.2022 तक कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है।
यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 24.44.2022 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील wo 6649-50 /20:8 “Auta 4 लिमिटेड बनाम रजनी गोयल” में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- " the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent - Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent ~ Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के "नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." = अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 ws प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 2(za) F प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—F or the purpose of this clause—
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee Shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय,पट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(9) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः-- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of गा Lending Rate) on home loan of State Bank of India +I% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४टाए+] प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना waa प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी MciRi प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.0.20:8 को उ0प्र0 शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 / 8--3-48-65 विविध »46 के द्वारा मॉडल Wr के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT: "7.. Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on
, unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद vouo Rr अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि — फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। a उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्तागण की यूनिट्स को पुनर््थापित करते हुए, इस आदेश के अनुरूप माँग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी.,/ सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं।
विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 24.44.2022 से ओ.सी /सी.सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR4I प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब की अवधि एवं विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी एवं न ही शिकायतकर्ता से किसी अतिदेय (overdues) धनराशि के लिए इस अवधि का ब्याज लिया जाएगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में अनुबन्ध पत्र के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(2७)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी -के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित अवधि के भुगतान पर शिकांयतकर्ता द्वारा भी MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। yoo —— — यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा Way | इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। bape टी० वेंकटेश (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण