Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rakesh Sood Yuvraj Sood v. Project Category-Un-Register Uppal Chadha Hi-Tech Developers Pvt. Ltd
Complaint No. NCR145/06/96085/2022
- Decision date
- 2026-07-03
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 / 40/63 सपठित नियम-24 24-शिकायत WEIM—NCRI45/06/96085/2022 राकेश सूद युवराज सूद बनाम उप्पल चड्ढा हाई-टेक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 03.07.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से उनके विद्वान अधिवक्ता श्री योगेन्द्र सिंह उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से उनके विद्वान अधिवक्ता श्री असित कुमार उपस्थित हुए। उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। प्रश्नगत शकायत में माननीय Ge-ow द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 2.06.2023 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता के प्लॉट की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.07.2023 तक ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें।
2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 42.07.2047 से ओ.सी/सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो बाद में हो, तक शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। अन्य शिकायतकर्ता के प्रकरण में ब्याज गणना अनुबन्धानुसार की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। डे
3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा 2(2४)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से व्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+H प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4. विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को प्लॉट का कब्जा देते समय सभी चार्जेज अनुबन्ध के अनुरूप अधिरोपित करेंगे। 5. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 6. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है. तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। विपक्षी द्वांरा आदेश दिनांक 42.06.2023 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38/40,/63 के अन्तर्गत var आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-04 (पूर्व पीठ-04) द्वारा दिनांक 27.0:.2026 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:-
अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों के दृष्टिगत पत्रावली नियम-24 में निहित शक्तियों के अधीन पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश दिनांक 42.06. 2023 के प्रस्तर-04 के अनुसार प्लॉट के भौतिक कब्जे एवं रजिस्ट्री की कार्यवाही हेतु मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सुनवाई के लिए दिनांक 40.04.2026 को संदर्भित की जाती है। जहाँ तक विपक्षी कम्पनी के कथनानुसार उनके द्वारा प्रश्नगत प्रकरण के सम्बन्ध गौतमबुद्धनगरम मा. अपीलीय अधिकरण, लखनऊ के समक्ष अपील संख्या: 9 :/2024 योजित की गयी थी, परन्तु उक्त अपील मा. अपीलीय अधिकरण, लखनऊ द्वारा अपने अंतिम आदेश, 'दिनांक 02-42-2024 के माध्यम से खारिज की जा चुकी है। अतः उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में प्रश्नगत प्रकरण को वर्तमान में Abeyance में रखे जाने का कोई विधिक आधार एवं औचित्य नहीं है। अतः सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 42-06-2023 के प्रस्तर-02 के अनुसार दिनांक 34-03-2026 से पूर्व विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की गणना कराकर निम्नानुसार कार्यवाही करें:- ee (क) यदि मा. अपीलीय अधिकरण से उपर्युक्त अपील संख्या: 9 /2024 के क्रम में रेरा प्राधिकरण के सम्बन्धित खाते में कोई धनराशि प्राप्त हुई है, तो उसे तत्काल प्रार्थी / शिकायतकर्ता के खाते में स्थानांतरित कर, पीठ द्वारा ars के अन्तर्गत पारित आदेश के प्रस्तर-02 के अनुसार विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि में घटाते हुए, अवशेष धनराशि की वसूली हेतु, नियमानुसार वसूली प्रमाण-पत्र जारी करायें।
(ख) यदि मा. अपीलीय अधिकरण से उपर्युक्त अपील संख्या: क 4 / 2024 के क्रम में रेरा प्राधिकरण के सम्बन्धित खाते में कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई है, तो ऐसी स्थिति में पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश के प्रस्तर-02 के अनुसार विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि. के ब्याज की समस्त धनराशि की वसूली हेतु, नियमानुसार वसूली प्रमाण-पत्र जारी करायें। तदोपरान्त पत्रावली को सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। यदि मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी नियम-24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत धारा-34, दिनांक 42-06--2023 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा 63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं। अन्तर्गत धारा-38,/40,/63 की निष्पादन की कार्यवाही के दौरान माननीय सम्बन्धित रेरा पीठ द्वारा अपने आदेश का निष्पादन कराते हुए शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा सका और न ही शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराई जा सकी। तदोपरान्त मा. te-or (पूर्व theory) द्वारा पारित आदेश दिनांक 27.0.2026 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई |
विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वह माननीय रेरा पीठ के आदेश के अनुपालन में कब्जा प्रस्ताव-पत्र वैध ओ.सी.//सी.सी. सहित बकाया देयों की मांग सहित (यदि कोई हो तो) शिकायतकर्ता को दो माह के अन्दर प्रेषित करना सुनिश्चित करें तथा रेरा पोर्टल पर भी अपलोड करना सुनिश्चित करें। शिकायतकर्ता द्वारा बकाया देयों के अदा करने पर विपक्षी शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित करें। शिकायतकर्ता को यदि कोई आपत्ति हो, तो वह अपनी आपत्ति दाखिल कर सकता। पत्रावली अग्रिम सुनवाई हेतु दिनांक 28.09.2026 को पेश हो। —= आर. पी. = (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण