Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Nidhi Rastogi v. Real anchors Developers Private Limited
Complaint No. NCR145/06/1297/2019
- Decision date
- 2019-11-18
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
Soyo भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04 श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य कम Xo | शिकायत to | शिकायतकर्ता 4 WAxi.3iei45 / 06 // 4297 / 2049 | निधि रस्तौगी 2 एन.सी.आर445 /05 ,/ 0478 /, 2049 | किरन बाला 3 [| एन.सी.आर।45 /06 ,/ 4289 / 2049 | धर्मपाल सिंह 4 एन.सी.आर445 /06 / 4269 / 2049 | सरिता रानी 5 | Wixftens4s / 06 / 4223 / 209 | रजत विश्नाई 6 | एन.सी.आर45 /06 // 439 ,/ 2049 | tard शर्मा बनाम रियल एंकर्स डेवलेपर्स प्रा.लि. शिकायतकर्ता निधि रस्तौगीव अन्य 05 शिकायकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन दोनों शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह दोनों शिकायतें WORLD RESIDENCY से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत wo एन.सी.आर।45 / 06 // 4297 // 2049 निधि रस्तौगी अग्रणी वाद रहेगा | प्रस्तुत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के fms felted अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाने जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना WORLD RESIDENCY में फ्लैट नं०- जे-4404 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 59,70,96/— रूपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है बिल्डर बायर Whe दिनांक 48.09.2043 के अनुसार कब्जा दिनांक 8.03.20I7 तक दिया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक कब्जा नहीं दिया गा 2 गया। जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विरूद्र विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाने जाने की याचना की गयी।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में जमा धनराशि wie, फ्लैट केता अनुबन्ध, डिमाड-प्रत्र दिनांक व अन्य प्रपत्रों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि उनकी परियोजना में फ्लैट नं०- जे-4404 बुक किया गया था। विपक्षी के द्वारा कथन किया गया कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के द्वारा दिनांक 03.02.208 को रिवाइस्ड प्लॉन जारी किया गया गया था। जिसके कारण परियोजना के कार्य में विलम्ब हुआ। विपक्षी द्वारा अवगत कराया गया कि परियोजना को रेरा में पंजीकृत करते समय पूर्णता की तिथि 34-03-2049 दी गयी थी। पंजीकरण में दी गयी तिथि तक परियोजना पूर्ण नहीं हो सकी है जिस कारण से परियोजना के पूर्णता की तिथि को Extend करने के लिए आंवेदन किया गया है, जोकि अभी तक विचाराधीन है। आवेदन-पत्र में अंकित किया गया है कि ए और बी मार्च 2020 तक दिये जाने में सक्षम है। टॉवर सी दिसम्बर 2022 में दिया जायेगा। विपक्षी द्वारा प्रतिवाद-पत्र में अंकित किया गया है कि टॉवर ए में कुल 450 फ्लैट है व टॉवर बी में कुल 487 फ्लैट है। दोनों टॉवरों का 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया जा चुका है। परियोजना में निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है। विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में प्रतिवादपत्र, मानचित्र स्वीकृति पत्र, अनुबंध पत्र अन्य प्रपत्रों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। Ye उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन fear | पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये गये :+- *. wear शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज का दर en होगा ? निस्तारण बिन्दु सं0 4
यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध में शिकायतकर्ता को अनुबन्ध निष्पादित करने से 36+6 माह Ge पीरियड) में कब्जा दिया जाना था। फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट दिनांक t8.09.20i3 को निष्पादित किया गया एवं अनुबन्ध के TER 20 के अनुसार विपक्षी को 8.03.20:7 तक कब्जा देना था, किन्तु विपक्षी आज तक कब्जा नहीं दिया गया है। विपक्षी द्वारा शपथ पत्र दाखिल करते हुए कहा गया कि परियोजना में फिनिशिंग कार्य चल रहा है और ऑफर ऑफ पोजेशन एवं सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी हेतु आवेदन की प्रकिया में है और टॉवर ए और बी मार्च 2020 तक पूर्ण कर कब्जा दे देगें। ऐसे में शिकायत॒कर्ता को यूनिट पर दिनांक 30.05.2047 से ओ.सी / सी.सी सहित कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक का विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाना न्यायोचित प्रतीत होता है| इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-- "Section 70072(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apriment due to discontinuance of his business as a developer on account of Suspension or QU a a ं---७७७७»+»« ५-००
z of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw Jrom the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession, The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." oe: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20r6 के अधीन दिनांक 7.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय / पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9 (ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- फल
liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर oii) F निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी McLRi प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील do 6649-50 ,/ 2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "the period of Interest should close on April 2076 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 2076, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 2076 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser we - जा 6 ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. "
उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने या कब्जा ऑफर होने, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। तदनुसार बिन्दु सं0- निस्तारित किया जाता है। जहां तक क्षतिपूर्ति (Compensation) देने का प्रश्न है, तो यह एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर के क्षेत्राधिकार में है। अतः इस बिन्दु पर पीठ द्वारा कोई आदेश पारित नही किया जा रहा है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह ओ.सी. /सी.सी. सहित 34.03.2020 तक, यदि कोई देय धनराशि बकाया है, तो उसे प्राप्त कर कब्जा देना सुनिश्चित करें और नियमानुसार स्टाम्पशुल्क प्राप्त कर पंजीयकरण कराना सुनिश्चित करें| विपक्षी, शिकायतकर्तागण को ग्रेस पीरियड के साथ धनराशि का ब्याज रेरा आने के पूर्व अनुबन्ध के अनुसार देय होगा एवं रेरा आने के उपरांत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित mere प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर पर देय होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्तागण को वापस की जाये। wo \ 7 जायेगी। यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्तागण को वापस की जाये। 3. यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2 (2a) के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है कि यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा।
4. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाये। इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र/भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। दिनांक (3/॥| /209 WIA (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण