Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Pradeep Tahiliani and Poonam Jagtiani v. Real anchors Developers Private Limited
Complaint No. NCR145/06/1218/2019
- Decision date
- 2019-11-18
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई tis—o7 श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य शिकायत सं0 एन.सी.आर।45 // 07 /0584/20i9 | संजय GHAR मेहरा | एन.सी.आर445 // 06 // 428 / 2049 | प्रदीप तिल्हानी WATS 45 / 06 // 434 / 2049 | बी.एम. शम एन.सी.आर।45 /07 /0228/20i9 | कैलाश कुमार | एन.सी.आर।45 /06/479/20I9 [सुनील शर्मा | एन.सी.आर445 / 06 / 466/20i9 | संजय BAR एन.सी.आर445 /06/449/20i9 | अनिल कमार गुप्त एन.सी.आर445 / 06 /220/2049 | चन्द्र प्रकाश छाबरा COIN | ०0 | ० | + | ७० ७ |-+ बनाम रियल एंकर्स डेवलेपर्स प्रा.लि. शिकायतकर्ता संजय कुमार मेहरा व अन्य 06 शिकायकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन दोनों शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह दोनों शिकायतें WORLD RESIDENCY से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत Go एन.सी.आर445 ,//07 / 0584 // 2049 संजय कुमार मेहरा अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्द विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाने अथवा समस्त धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना WORLD RESIDENCY में फ्लैट नं०- एफ-905 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर
66,699,00 /- रूपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है बिल्डर बायर एग्रीमेन्ट दिनांक 30.44.20I3 के अनुसार कब्जा दिनांक 30.05.2047 तक दिया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक कब्जा नहीं दिया गया। जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भूनसम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विरूद्द विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाने अथवा समस्त धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने की याचना की गयी। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में जमा धनराशि wre, फ्लैट da अनुबन्ध, डिमाड-प्रत्र दिनांक 9.07.208 व अन्य प्रपत्रों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि उनकी परियोजना में फ्लैट नं०- एफ-905 बुक किया गया था। विपक्षी के द्वारा कथन किया गया कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के द्वारा दिनांक 03.02.2078 को रिवाइस्ड प्लॉन जारी किया गया गया था। जिसके कारण परियोजना के कार्य में विलम्ब हुआ। विपक्षी द्वारा अवगत कराया गया कि परियोजना को रेरा में पंजीकृत करते समय पूर्णता की तिथि 34-03-2079 दी गयी थी। पंजीकरण में दी गयी तिथि तक परियोजना पूर्ण नहीं हो सकी है जिस कारण से परियोजना के पूर्णता की तिथि को Extend करने के लिए आवेदन किया गया है, जोकि अभी तक विचाराधीन है। आवेदन-पत्र में अंकित किया गया है कि ए और बी मार्च 2020 तक दिये जाने में सक्षम है। टॉवर सी दिसम्बर 2022 में दिया जायेगा | विपक्षी द्वारा प्रतिवाद-पत्र में अंकित किया गया है कि टॉवर ए में कुल 450 फ्लैट है व टॉवर बी में कुल t87 फ्लैट है। दोनों टॉवरों का 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया जा चुका है। परियोजना में निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है। 3
विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में प्रतिवादपत्र, मानचित्र स्वीकृति पत्र, अनुबंध पत्र अन्य प्रपत्रों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया | पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये गये :- 4. क्या शिकायतकर्तागण की TART जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलायी जा सकती है ? 2... कया शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज का दर क्या होगा ? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? यह वाद बिन्दु भी शिकायतकर्ता के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंधित अवधि में कब्जा नही दिया गया है, जिस कारण वह परियोजना के साथ नही रहना चाहता है और उसकी जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलायी जाये, जिस पर विपक्षी द्वारा कहा गया है कि कि ए और बी मार्च 2020 तक दिये जाने में सक्षम है। टॉवर सी दिसम्बर 2022 तक पूर्ण कर कब्जा दे दिया जायेगा। यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना फ्लैट बुक कराया था s \w— a a ee ———— पत्रावली के अवलोकन से विदित है कि दिनांक 30.44.2043 को फ्लैट oo अनुबन्ध निष्पादित किया गया उक्त अनुबन्ध के प्रस्तर 20 के अनुसार कब्जा 36 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ दिनांक 30.05.2047 तक
दिया जाना था। विपक्षी के अधिवक्ता द्वारा कथन प्रस्तुत किया गया कि परियोजना में फिनिशिंग कार्य चल रहा है और ऑफर ऑफ पोजेशन एवं सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी हेतु आवेदन की प्रकिया में है और टॉवर ए और बी मार्च 2020 तक पूर्ण कर कब्जा दे देगें, तथा टॉवर सी दिसम्बर 2022 तक पूर्ण कर कब्जा दे देगें। जहाँ तक कंता द्वारा रिफण्ड के अनुरोध का प्रश्न है, इस विषय में रेरा ८| अधिनियम के प्राविधानों को समग्र रूप से पढा जाना आवश्यक है ताकि सभी पक्षों के मत को दृष्टिगत रखते हुए एक संतुलित निर्णय लिया जा सकें। रेरा एक्ट की धारा ig (॥) में प्राविधान है कि :- "Section 76 (2) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building, in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other ioe remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act:
Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed." इस प्रकार Sa को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नही मिलता तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा मासिक दर से ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें। रेरा अधिनियम की धारा 34(0 में रेरा के अन्य “फंग्शन्स” के साथ-साथ " to ensure compliance of the obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents under this Act and the rules and regulations made thereunder " का भी Geers है। इसी प्रकार धारा 32 में Rua sete सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्वों में निम्न भी सम्मिलित हैं :- “32. The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion of a healthy, transparent, efficient and Ou competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be, on,— (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate agent,....... (pany other issue that the Authority may think necessary for the promotion of the real estate sector.” उक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि “रियल एस्टेट सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके सभी Ra होल्डर्स के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस ऑथरिटी का है।
इस कम में मा. मुम्बई उच्च न्यायालय द्वारा नीलकमल रियलटर्स सबअरबन प्रा.लि. बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया, जिसमें tr अधिनियम की वैद्यानिकता के सम्बंध में निर्णय दिया गया था, के प्रस्तर i24 में मा. उच्च न्यायालय द्वारा निम्न संवीक्षण किया :- #[24, The entire scheme of the RERA is required to be kept in mind. It is already submitted during the course of hearing that in many cases helpless allottees had approached consumer forum, High Courts, Apex Court in a given fact situation of the case. The courts have been passing orders by moulding reliefs by granting interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of we project, transit accommodation during completion of project, so on and so Sorth. Under RERA now this function is assigned to the authority, tribunal. An appeal lies to the High Court. Under one umbrella, under one regulation and one law all the issues are tried to be resolved. Provisions of Section 77 refers to power to adjudicate. A District Judge is conferred with the power to adjudicate compensation under Sections 72, /4, ॥8 and 49. A promoter could very well put up his case before the adjudicator who deals with the issues in the light of the fact situation of each case. Therefore, there should not be any apprehension that mechanically compensation would be awarded against a promoter on Jailure to complete the development work.”
उक्त से स्पष्ट है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद, यद्यपि समय से इकाई न मिलने की दशा में आवंटी का अपनी धनराशि ब्याज सहित मांगने का अधिकार है, तथापि उक्त वर्णित संवीक्षा को देखते हुए अथॉरिटी, प्रकरण के समस्त तथ्यों, के आधार पर “by moulding reliefs by granting interest, moulding reliefs by grantin interest compensation to_the_allottees, to_the_allottees, and issuing directions for timely issuing directions for timel completion of project, transit of project, transit accommodation during completion of during completion ० project, so on and so forth 50 on and so forth’ के अनुरूप आदेश पारित किए जा सकते हैं। एलोटीज द्वारा धनराशि वापस किए जाने व परियोजना में बने रहने वाले एलोटीज के हितों में सन्तुलन के प्रसंग में “चित्रा शर्मा बनाम यूनियन ऑफ ६... a (744 / 207) के निर्णय में मा. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय के प्रस्तर 40 में निम्न ऑबजरवेशन किया है —
"40. As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers have earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund of monies deserves to be considered with empathy. Yet, having given our anxious consideration to the plea and on the balance, we are not inclined to accede to it for more than one reason. Firstly ..............- Secondly, the figures which have been made available presently, following the opening of the Web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores \O— 9 (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund."
मी. Seq न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उक्त प्रस्तरों में उद्धरत “ऑबजरवेशनस्” एवं रेरा एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबजेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन”, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “pete” की स्थिति, अन्य “स्टेक होल्डर्स”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, "प्रस्तावित पज़ेशन डेट” के विषय में “कन्सेन्सस आदि पर विचार किया जाना arated में होगा। चूंकि विपक्षी द्वारा शपथ पत्र दाखिल करते हुए कहा गया कि टॉवर ए और बी मार्च 2020 तक पूर्ण कर कब्जा दे देगें, तथा टॉवर सी दिसम्बर 2022 तक को पूर्ण कर कब्जा दे दिया जायेगा। निश्चय ही परियोजना में बने रहने की दशा में एलॉटीज़ को विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। फ्लैट के पूर्णता के लिए प्रतीक्षारत फ्लैट बायर्स व धनराशि वापिस प्राप्त करने की अपेक्षा करने वाले एलॉटीज़ के हितों सांमजस्य स्थापित करते हुए रिफण्ड के आदेश टॉवर्स AB&C) की पूर्णता तिथि अर्थात् मार्च 2020 के 45 दिन के भीतर आदेशित करना उचित होगा। निस्तारण बिन्दु to-7 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 2 यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध में शिकायतकर्ता को अनुबन्ध निष्पादित करने से 36+6 माह (ग्रेस पीरियड) में कब्जा दिया जाना था | फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट दिनांक 30.:4.20i3 को निष्पादित किया गया एवं अनुबन्ध के \w 0
प्रस्तर 20 के अनुसार विपक्षी को 30.05.20i7 तक कब्जा देना था, किन्तु विपक्षी आज तक कब्जा नहीं दिया गया है। विपक्षी द्वारा शप्थ पत्र दाखिल करते हुए कहा गया कि परियोजना में फिनिशिंग कार्य चल रहा है और ऑफर ऑफ पोजेशन एवं सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी हेतु आवेदन की प्रकिया में है और टॉवर ए और बी मार्च 2020 तक पूर्ण कर कब्जा दे देगें। ऐसे में शिकायतकर्ता को यूनिट पर दिनांक 30.05.2047 से ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक का विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-- "Section 78(7)(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession, The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received
possession of it. The obligation imposed on the ae व् promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व dar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय »पटटा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9 (ii) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर o(iii) 4 निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४८टा॥+ प्रतिशत की we a 2
ब्याज दर पर ब्याज विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी Mcir+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील to 6649-50 / 2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "the period of Interest should close on April 2076 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent - Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 2076, The Respondent - Purchaser could not have any further grievance after April 2076 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने या कब्जा ऑफर होने, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। तद्नुसार बिन्दु सं०-2 निस्तारित किया जाता है। जहां तक क्षतिपूर्ति (Compensation) 4 का प्रश्न है, तो यह एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर के क्षेत्राधिकार में है। अतः इस बिन्दु पर पीठ द्वारा कोई आदेश पारित नही किया जा रहा है। र् 73) उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह ओ.सी. /सी.सी. सहित 34.03.2020 तक, यदि कोई देय धनराशि बकाया है, तो उसे प्राप्त कर कब्जा देना सुनिश्चित करें और नियमानुसार स्टाम्पशुल्क प्राप्त कर पंजीयकरण कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी, शिकायतकर्तागण को ग्रेस पीरियड के साथ धनराशि का ब्याज रेरा आने के पूर्व अनुबन्ध के अनुसार देय होगा एवं रेरा आने के उपरांत we बैंक ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित mare प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर पर देय होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्तागण को वापस की जाये। यदि विपक्षी अनुतोष Ho 4 देने में असफल रहता है, तो दिनांक 34.03.2020 के पश्चात 45 दिन के अन्दर शिकायतकर्तागण की धनराशि जमा करने की तिथि से वास्तविक भुगतान की तिथि तक MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करना सुनिश्चित करे। यदि इस इकाई हेतु बैंक से ऋण लिया हो, तो इस धनराशि का उपयोग पहले बैंक का ऋण व देय ब्याज लौटाने के बाद शेष धनराशि शिकायतकर्तागण को दी जायेगी। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2 (2०)() के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है कि यदि कोई ब्याज दर आवंटी के पक 4 डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाये।
इस आदेश का vets उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये | यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। दिनांक।3,/ ॥| / 2049 Ku ana (कल्पना मिश्रा) SVU (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण