Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Vimal Kumar Sharma v. Pavitra Conbuild Private limited
Complaint No. NCR145/06/120405/2024
- Decision date
- 2026-03-17
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:ः- Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या al यूनिट न0 | जमा धनराशि bo न्मेंट फार | अनुबंधानुसार वांछित सं० सेल की कब्जा दिये अनुतोष तिथि जाने की तिथि I, | NCRI45/06/20405/2024 | विमल कुमार | पी-4602 | Bo 78,47,75/ | 4.03.2023 | 30 सितम्बर यूनिट का शर्मा व 2023 तथा कब्जा व राजेश्वरी 06 माह विलम्बित शर्मा अनुग्रह अवधि | अवधि का के साथ ब्याज अर्थात मार्च | दिलाये जाने 2024 का अनुरोध किया गया है। बनाम पवित्रा कॉनबिल्ड- प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध-यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतुं यह शिकायत संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना The Sapphire 4 यूनिट" संख्या “पी-4602 बुक “करायी गयी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि wo 73,47,75/—ar भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में आवंटन पत्र, एग्रीमेंट wR सेल, वेलकम लेटर, वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई घनराशि | संख्या (रु0) 4 विपक्षे द्वारा जारी रसीद संख्या 4454 49.02.2023 BO 75,000 / रसीद संख्या 4455 49.02.2023 रु0 ,00,000 / रसीद संख्या 4456 49.02.2023 BO 2,25,000 / रसीद संख्या 4496 04.03.2023 %O 2,67,000 /
OT | संख्या 4244 4.03.2023 BO 53,650 / रसीद संख्या 4249 42.03.2023 %0 50,000 / रसीद संख्या 7244 03.04.2023 BO 2,50,000 / रसीद संख्या 4245 03.04.2023 रु०0 4,00,000/ रसीद संख्या 246 03.04.2023 BO 2,2,000 / रसीद संख्या 7247 03.04.2023 %O 5,99,000 / रसीद संख्या 249 05.04.2023 रु०0. 000 / रसीद संख्या 4255 09.04.2023 BO 44,4,954 / रसीद संख्या 708 28.03.2024 BO 6,50,000 / रसीद संख्या 4734 02.04.2024 BO 4,46,048 / रसीद संख्या 4735 02.04.2024 रु0 ,50,000 / रसीद संख्या 4737 02.04.2024 WO 73,396 / रसीद संख्या 4738 02.04.2024 BO ,50,000 / रसीद संख्या 764 05.04.2024 %O 3,667/ कुल योग : रु0 78,47,75 /
विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को यूनिट संख्या th-t602 आवंटित की गयी eft | विपक्षी द्वारा दिनांक 40.03.2023 को आवंटन पत्र जारी किया गया। उभयपक्षों के मध्य दिनांक 44.03.2023 को एग्रीमेंट oR सेल निष्पादित हुआ जिसके पैरा 7G अनुसार 30.09.2023 तथा 06.माह अनुग्रह-अवधि के साथ व कोविड के कारण रेरा आदेश दिनांक 06.06.2020-के अनुसार 06 माह का परियोजना पूर्ण किये जाने हेतु समय विस्तार किया गया। इस प्रकार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा सितम्बर 2024 में दिया जाना था...शिकायतकर्ता' द्वारा. WO..78,47,75 / का भुगतान किया गया है। विपक्षी को 44.03.2024 को डीम्ड सी.सी प्राप्त है। इसके अतिरिक्त विपक्षी को दिनांक 28.44.2024 को फाइनल सी सी प्राप्त हो चुका है। विपक्षी द्वारा दिनांक 25.02.2024 को शिकायतकर्ता के पक्ष में डिमांड लेटर जारी किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा लेने में असफल रहा है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा दिये जाने की तिथि से पूर्व दिनांक 02.06. 2024 को शिकायत संस्थित की गयी है जो प्री-मैच्योर की श्रेणी में है। अतः विपक्षी द्वारा शिकायत प्री-मैच्योर होने के कारण निरस्त किये जाने तथा शिकायतकर्ता को यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि का भुगतान करके यूनिट का कब्जा लिये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब के प्रत्येक प्रस्तर का खण्डन करते हुए यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्षों के तर्कों को सुना गया। उभयपक्ष के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. gar शिकायत प्री-मैच्योर की श्रेणी में है? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या 4 :-. प्रश्न संख्या se आशय का विरचित किया गया है कि gar शिकायत प्री- मैच्योर की श्रेणी में है? विपक्षी की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिकायत प्री-मैच्योर की श्रेणी में है क्योंकि परियोजना पूर्ण किये जाने की समय अवधि 30.09.2024 थी और शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 02.06.2024 को ही. शिकायत संस्थित कर दी गयी है। पत्रावली पर उपलब्ध -एग्रीमेंट -फार सेल दिनांक 4.03.2023 का अवलोकन किया। अनुबंध पत्र के We संख्या 7.4 ae अंकित है कि ” the promoter asures to offer hand over of possession of the apartment along with ready and complete common Areas with all specification amenities and facilities of the Project in place on 307 September 2023 respectively with a grace period of six months. /* यहां यह स्पष्ट किया जाता है कि विपक्षी द्वारा हस्ताक्षारित अनुबंध पत्र में 30 सितम्बर 2023 तथा 06 माह अनुग्रह अवधि में यूनिट का कब्जा दिये जाने का तथ्य अंकित की गई है जिस कारण विपक्षी द्वारा जो यह तर्क लिया जा रहा है कि कब्जा दिये की तिथि 30 सितम्बर 2024 है जो आधारहीन हैं।
इस सम्बंध में Re याचिका संख्या 2737,//2047 नीलकमल Raced was प्रालि. बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के उद्धरत प्रकरण में माननीय gag उच्च न्यायालय द्वारा कहा गया है कि :- " The provisions of RERA, however, do not rewrite the clause of completion or handing over possession 3 Se in reement for sale, Section 4(2)(4)(0) enables the promoter to give fresh time line independent of the time period stipulated in the agreements for sale entered into between him and the allottees so that he is not visited with penal consequences laid down under RERA. In other words, by giving opportunity to the promoter to prescribe fresh time line under Section 4(2)()(C) he is not absolved of the liability under the agreement for sale" उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधान के अनुसार अनुबंध में दिये गये पूर्णता एवं कब्जे देने के WER का पुनर्लेखन नहीं किया जा सकता और किसी आवंटी विशेष के प्रकरण में समय सीमा की गणना बी.बी.ए के प्राविधानुसार होगी। रेरा पंजीकरण के समय दी गई नई समय-सीमा केवल रेरा अधिनियम के अधीन “पीनल कॉन्सीक्वेसिज'-सें ही. बचा सकती है। स्पष्टतया समय सीमा की गणना अनुबंध पत्र के अधीन होगी एवं यह प्राविधान रेरा में दी गई Fresh Time Line की तिथि से “ओवररिटिन' नहीं होगी। अत: पत्रावली पर उपलब्ध अनुबंध पत्र से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता के पक्ष में अनुबंध पत्र दिनांक 44.03.2023 को निष्पादित हुआ जिसके अनुसार यूनिट का कब्जा 30 सितम्बर 2023 तथा 06 अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात मार्च 2024 में
दिया जाना था और शिकायतकर्ता द्वारा वर्तमान शिकायत 02.06.2024 को संस्थित की गयी है जिस कारण शिकायत प्री-मैच्योर की श्रेणी में नहीं है। तद्नुसार वाद प्रश्न संख्या-4 Peake किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 25.02.2024 को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया है तथा विपक्षी 4 5 छा आ को परियोजना के सापेक्ष गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 28.44.2024 को जारी आंशिक पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त हो चुका है। पत्रावली के अवलोकन से विदित है कि उभयपक्षों के मध्य दिनांक ॥4.03. 2023 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा सितम्बर 2023 तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ मार्च 2024 में दिया जाना था। विपक्षी को दिनांक 28.44.2024 को आंशिक पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना 08 माह विलम्बित रही है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। यहां यह भी स्पष्ट किया जाता है कि विपक्षी aifas—i9 महामारी का फोर्स मैज्योर 06 माह का लाभ नहीं पा सकता है क्योंकि कोविड-49 महामारी के उपरांत
उभयपक्षों के मध्य दिनांक 44.03.2023 को अनुबंधपत्र निष्पादित हुआ है। जहाँ तक किस अवधि तक-कां ब्यांज दिलाये जाने. का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50 /20:8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी Way माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा-अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20!6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20!6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his aaa, गौतमबुद्धनगर FE) ¥ 5 ———=S—
business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. "
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भून्सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2076 के अधीन दिनांक 7.0.20i8 को भू-सम्पदा (वैिनियमन और विकास) (विकय /पटटा के लिए करार) नियमावली core अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक awe में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में-प्रमो्ट्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें way oli) a प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +|% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination . al notice. यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४८,९+ [प्रतिशत
की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(»४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित बचाया वाउ- 6 अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। TEAR प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं | 2. विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2024 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि Wo 78,47,745/ TR MCLR+I प्रतिशत ब्याज अदा करना Ua oe) ब्याज की ae अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने...पर नियमानुसार. .शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी।
3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा zai). के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी Mcir+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। है en el 4. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 206 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 5. विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा Ua | 6. आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। A nas 5 God 2026 (डा०दीपक स्वरूप WR) सदस्य उ.प्रभू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर