Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
E.arumugarajan v. Project Category-Un-Register Promoter Other - M/S MAHADEV HOUSING PROJECTS PVT LTD
Complaint No. NCR145/06/110143/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-03-14
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the complainant)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
See: भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी :- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य क्रम सं. शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण | यूनिट संख्या कुल मूल्य जमा धनराशि | | पटार45/060084/2023 अंशु पुरी FF-4, Plot No. | 40,90,000/— | 4,0,000 /- 22 2. | इटारा45700॥2256/2024 कोमल alae | Flat no-4, Plot | 38,00,000/— | 25,00,000 /— No. 24 3. | NCRI45/06/043/2023 | ई. अरुमुगराजन| SF,PlotNo. | 40,50,000/— | 0,20,000 /— 22 |“ इटारा45/060067/2023 free सिंह SF-4 Plot No. | 34,00,000/— | 7,00,000 /- /6॥। 5... पिटारा45/060072/2023 के.एन. IRS 2 ए45, ।._| ,05,00,000 /- | 35,00,000 /— Shop 575 6... एटारा45/060078/2023 आरएस. शर्मा FF-4, Plot No. | 44,50,000 /- | 8,50,000 /- ॥£3॥। बनाम मैसर्स महादेव हाउसिंग प्रोजेक्ट प्रा. लि. (अपंजीकृत) एवं मैसर्स केशवाना इस्पात प्रा. लि. (अपंजीकृत) शिकायतकर्ता अंशु पुरी के साथ 05 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना SHAKTI KHAND ना, INDIRAPURAM, GHAZIABAD से सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से प्रश्नगत शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या-४८7२45/06/084/2023 अंशु पुरी अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध समस्त जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने हेतु संस्थित किये गये ?988 4
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 22.0.20i2 को विपक्षी की परियोजना “SHAKTI KHAND या, INDIRAPURAM, GHAZIABAD" में यूनिट संख्या-77-4, Plot No. 22 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 40,90,000,/- रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 4,0,000/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा af 20:5 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है और न ही अभी तक परियोजना से सम्बन्धित सभी अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के पश्चात् सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किया गया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कहा गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य स्थगित एवं अपूर्ण है तथा विपक्षी, यूनिट का कब्जा प्रदान करने की स्थिति में नहीं है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत जमा धनराशि वापस दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में बिक्री अनुबन्ध दिनांकित 22.40.2042, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि की रसीद एवं खाता विवरण, सहभागिता अनुबन्ध, रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत प्रत्युत्तर सह आवेदन, रेरा प्राधिकरण की पीठ द्वारा पूर्व में पारित आदेश दिनांक 08.06.2022, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं ।
meat शिकायतों के सम्बन्ध में विपक्षी की ओर से अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा अपनी परियोजना की शुरूआत विधि अनुसार की गयी थी तथा प्रश्नगत परियोजना रेरा में पंजीकृत होने योग्य नहीं है, क्योंकि प्रश्नगत परियोजना की भूमि का क्षेत्रफल 500 वर्गगीटर से कम अथवा os तल से नीचा है, जिसे ww के अन्तर्गत पंजीकृत कराये जाने की आवश्यकता नहीं हैं। रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-03 की उपधारा-2(9) में स्पष्ट रूप से निम्नलिखित प्रावधान है fH 3.(2) Notwithstanding anything contained in sub-section (I), no registration of the realestate project shall be required— (a) where the area of land proposed to be developed does not exceed five hundredsquare meters or the number of apartments proposed to be developed does not exceedeight inclusive of all phases: Provided that, if the appropriate Government considers it necessary, it may,reduce the threshold below five hundred square meters or eight apartments, as thecase may be, inclusive of all phases, for exemption from registration under this Act;
उपरोक्त प्रावधानों से यह स्पष्ट है. कि यदि किसी परियोजना को विकसित किये जाने के लिए प्रस्तावित भूमि का क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर से कम है अथवा सभी चरणों को मिलाकर अपार्टमेंटों की संख्या आठ से अधिक नहीं है, तो वह इस अधिनियम के अन्तर्गत उस परियोजना का पंजीकरण कराये जाने की आवश्यकता नहीं है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि समस्त शिकायतकर्तागण द्वारा पूर्व में भी रेरा प्राधिकरण के समक्ष शिकायतें योजित की गईं थी, जोकि निम्नलिखित हैं- (3) शिकायत संख्या- NCR45/07/7795/202 शिकायतकर्ता- अंशु पुरी, (2) शिकायत संख्या- २८२45/05/037/209 शिकायतकर्ता- कोमल चावला, (3) शिकायत संख्या- NCR45/07/78034/202 शिकायतकर्ता- आर.एस. शर्मा, (4) शिकायत संख्या- NCR45/07/78008/202 शिकायतकर्ता- के.एन. अरोड़ा, (5) शिकायत संख्या- NCRI45/07/77999/202 शिकायतकर्ता- गिरघर सिंह, (6) शिकायत संख्या- NCRI45/07/78030/202! शिकायतकर्ता- ई. अरुमुगराजन। उपरोक्त प्रश्नगत शिकायतों में रेरा प्राधिकरण की पीठ द्वारा गुण-दोष के आधार पर दिनांक 08.06.2022 को आदेश पारित कर निस्तारण किया जा चुका है, जिसके पश्चात् समस्त शिकायतकर्तागण द्वारा समान तथ्यों एवं समान अनुतोष हेतु प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि उक्त परियोजना के सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा प्रस्तुत शमन प्रार्थना-पत्र दिनांक 49.03.202 पर सक्षम अधिकारी के शमन आदेश दिनांक 44.04.2042 के अनुसार शमन धनराशि दिनांक 20.04.20:2 को जमा करने के उपरान्त मा. उच्च न्यायालय द्वारा याचिका संख्या-43362 / 2004 एस.पी. बनर्जी व अन्य बनाम उ.प्र. सरकार व अन्य में पारित आदेश दिनांक 48.:2.200i एवं याचिका संख्या-2435 / एम.बी. // 2004.. निशांतगंज, लखनऊ Wise . वैलफेयर एसोसिएशन बनाम उ.प्र. सरकार एवं अन्य में पारित आदेश दिनांक 20.02.2004 के अनुसार प्रभावी भवन निर्माण उपविधि, शमन उपविधि एवं शपथ पत्र के क्रम में अनुपालन सुनिश्चित करते हुए कथित शर्तों के साथ प्राधिकरण द्वारा उक्त परियोजना का मानचित्र जारी किया गया था, जिसमें उक्त परियोजना का निर्माण मात्र दो मंजिल व क्षेत्रफल 406 वर्गमीटर में विकसित किया जाना त था। ऐसे में उपरोक्तानुसार मैसर्स महादेव हाउसिंग प्रोजेक्ट प्रा. लि. विकसित की जाने वाली ved परियोजना wr अधिनियम, 2046 की --03 की उपधारा-2(8) के अन्तर्गत आती है। रेरा अधिनियम के प्रावधान सिर्फ उन परियोजनाओं पर लागू हैं, जो परियोजना रेरा में पंजीकृत हैं तथा
Page 3 कै होने योग्य हैं। उपरोक्त वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए प्रश्नगत परियोजना रेरा में पंजीकृत होने योग्य नहीं है। अतः शिकायतकर्तागण द्वारा दायर की गयी प्रश्नगत शिकायतों को विपक्षी द्वारा खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित जवाब, शिकायतकर्तागण द्वारा पूर्व में रेरा प्राधिकरण के समक्ष योजित शिकायतों में पीठ द्वारा पूर्व में पारित आदेश दिनांक 08.06.2022 की प्रति, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में प्रत्युत्तर दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्तागण द्वारा पूर्व में रेरा प्राधिकरण के समक्ष योजित शिकायत संख्या- NCRI45/07/7795/202, NCR45/07/77906/202l, | NCR45/07/77892/202l, | NCR45/07/78034/202I, NCR45/07/78008/202l, | NCRI45/07/77999/202l, | NCR45/07/78030/202I, NCR45/05/037/209, 4 मा. पीठ द्वारा दिनांक 08.06.2022 को आदेश पारित किया गया था, जिसमें प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराये जाने हेतु विपक्षी को निर्देशित किया गया al प्रश्नगत परियोजना प्लॉट संख्या-424 / 422, सब रजिस्ट्रार ऑफिस, गाजियाबाद में स्थित मैसर्स केशवाना इस्पात प्रा. लि. के नाम से डायेक्टर साकेत अग्रवाल Soo हरीश चंद अग्रवाल, Ro. 2862 बाजार सिरकीवालान हौज काजी, नई दिल्ली, पंजीकृत है। परियोजना की भूमि के प्रमोटर,“मालिक द्वारा लेआउट प्लान और मैप dea पत्र भी दिनांक 07.09.2040, 3.0.20i0, 30.09.20i0 को प्राप्त किया गया है। प्रमोटर / डेवलपर को प्लॉट संख्या-$बत् Khand-Il 2॥/22, इंदिरापुरम गाजियाबाद में स्थित परियोजना के सम्बन्ध में दिनांक 04.05.2047 तक समस्त अनापत्ति प्रमाण-पत्र एवं ओ.सी./सी.सी. प्राप्त नहीं हुए हैं। रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-3 की उपधारा-2(8) में यह प्रावधान है कि जहाँ विकसित की जाने वाली परियोजना की भूमि का क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर से ज्यादा नहीं है अथवा सभी चरणों को मिलाकर अपार्टमेंटों की संख्या आठ से अधिक नहीं है, तो वह इस अधिनियम के अन्तर्गत उस परियोजना का पंजीकरण कराये जाने की आवश्यकता नहीं है, परन्तु विपक्षी द्वारा 08 से ज्यादा यूनिट बनायी गयी हैं और 35 से ज्यादा यूनिट विक्रय की गयी हैं, जिसका साक्ष्य अनुलग्नक-9 के रूप में संलग्न है। विपक्षी द्वारा परियोजना में 08 से ज्यादा अपार्टमेन्ट बनाये गये हैं, जिस कारण प्रश्नगत परियोजना ऑनगोईंग परियोजना की श्रेणी में आती है, जोकि रेरा में पंजीकरण होने योग्य है। मा. पीठ द्वारा शिकायत संख्या- NCRI45/09/I772/20I9 “कृष्णा गोयल बनाम महादेव हाउसिंग प्रा. लि.” में दिनांक 27.04.2024 को आदेश पारित कर परियोजना को “Ss रजिस्टर्ड” में मानते हुए विपक्षी को भुगतान की गयी समस्त धनराशि को MCLR+I% वार्षिक
8९ 4 EES | के साथ वापस करने का निर्देश दिया गया। इसके अतिरिक्त प्रश्नगत प्रकरण में मा. पीठ द्वारा रेरा तकनीकी टीम द्वारा परियोना का स्थलीय निरीक्षण निरीक्षण कराया गया तथा निरीक्षण आख्या में स्पष्ट रूप से यह अंकित है कि प्रश्नगत परियोजना दिनांक 04.05.2047 तक ऑनगोईंग परियोजना की श्रेणी में थी और रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-3 के अन्तर्गत पंजीकरण होने योग्य है। परियोजना की भूमि के मालिक श्री साकेत अग्रवाल ने दिनांक 09.09.2040 को श्रीमती संगीता शर्मा पत्नी श्री राजेश शर्मा डेवलपर के साथ मिलकर परियोजना का निर्माण करने के लिए अनुबन्ध हस्ताक्षरित किया और इस तरह डेवलपर को कुछ निर्धारित शर्तों पर उस भूमि पर कंस्ट्रक्शन करने के अधिकार देने क॑ लिए सहमत हुए। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णिति परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-3 के अन्तर्गत पंजीकृत कराये जाने हेतु निर्देशित किये जाने व परियोजना को पंजीकृत न कराये जाने के सम्बन्ध में धारा-3 का उल्लंघन किये जाने हेतु धारा-59 के अनुसार पैनल्टी लगाये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्नलिखित बिन्दु विचरित किया गया है :- 4... क्या प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में सुनवाई करने का क्षेत्राधिकार रेरा को है एवं an शिकायतकर्ता याचित अनुतोष प्राप्त करने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु संख्या-04
निस्तारण बिन्दु संख्या-04, इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में सुनवाई करने का क्षेत्राधिकार रेरा को है एवं क्या शिकायतकर्ता याचित अनुतोष प्राप्त करने का अधिकारी है ? यह बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा at 20:5 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है और न ही अभी तक परियोजना से सम्बन्धित सभी अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के पश्चात् सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. / सी. ae सी. प्राप्त किया गया है, साथ ही यह भी कहा गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य स्थगित एवं अपूर्ण है तथा विपक्षी, यूनिट का कब्जा प्रदान करने की स्थिति में नहीं है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की ‘2 Page 5 गयी समस्त जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इस पर विपक्षी द्वारा अपना जवाब दाखिल करते हुए कहा गया है कि werd परियोजना रेरा में पंजीकृत होने योग्य नहीं है, क्योंकि प्रश्नगत परियोजना की भूमि का क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर से कम अथवा 08 तल से नीचा है, जिसे रेरा के अन्तर्गत पंजीकृत कराये जाने की आवश्यकता नहीं हैं। रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-03 की उपधारा-2(8) में स्पष्ट रूप से निम्नलिखित प्रावधान है किः- 3.(2) Notwithstanding anything contained in sub-section (I), no registration of the realestate project shall be required—
(a) where the area of land proposed to be developed does not exceed five hundredsquare meters or the number of apartments proposed to be developed does not exceedeight inclusive of all phases: Provided that, if the appropriate Government considers it necessary, it may,reduce the threshold below five hundred square meters or eight apartments, as thecase may be, inclusive of all phases, for exemption from registration under this Act: उपरोक्त प्रावधानों से यह स्पष्ट है कि यदि किसी परियोजना को विकसित किये जाने के लिए प्रस्तावित भूमि का क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर से कम है अथवा सभी चरणों को मिलाकर अपार्टमेंटों की संख्या आठ से अधिक नहीं है, तो वह इस अधिनियम के अन्तर्गत उस परियोजना का पंजीकरण कराये जाने की आवश्यकता नहीं है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि समस्त शिकायतकर्तागण द्वारा पूर्व में भी रेरा प्राधिकरण के समक्ष शिकायतें योजित की गईं थी, जोकि निम्नलिखित हैं- (4) शिकायत संख्या- NCR45/07/7795/202l शिकायतकर्ता- अंशु पुरी, (2) शिकायत संख्या- ४८२ 45/05/037/209 शिकायतकर्ता- कोमल चावला, (3) शिकायत संख्या- ९८२।45/07/78034/202। शिकाय॑तकर्ता- आर.एस. शर्मा, (4) शिकायत संख्या- NCR45/07/78008/202I शिकायतकर्ता- के.एन. अरोड़ा, (5) शिकायत dee NCRI45/07/77999/202 शिकायतकर्ता- गिरधर सिंह, (6) शिकायत संख्या- NCRI45/07/78030/202 शिकायतकर्ता- ई. अरुमुगराजन। उपरोक्त प्रश्नगत शिकायतों में रेरा प्राधिकरण की पीठ द्वारा गुण-दोष के आधार पर दिनांक 08.06.2022 को आदेश पारित कर निस्तारण किया जा चुका है, जिसके पश्चात् समस्त शिकायतकर्तागण द्वारा समान तथ्यों एवं समान अनुतोष हेतु प्रश्नगत Pag
|... शिकायतें योजित की गयी हैं। ऐसे में उपरोक्तानुसार मैसर्स महादेव er योजित की गयी हैं। ऐसे में उपरोक्तानुसार मैसर्स महादेव a प्रोजेक्ट प्रा. लि. द्वारा विकसित की जाने वाली उक्त परियोजना रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-03 की उपधारा-2(७) के अन्तर्गत आती है। wr अधिनियम के प्रावधान सिर्फ उन परियोजनाओं पर लागू हैं, जो परियोजना रेरा में पंजीकृत हैं तथा पंजीकृत होने योग्य हैं। उपरोक्त वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए प्रश्नगत परियोजना रेरा में पंजीकृत होने योग्य नहीं है। अतः शिकायतकर्तागण द्वारा दायर की गयी प्रश्नगत शिकायतों को विपक्षी द्वारा खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा फ्लैट आवंटन/अनुबन्ध पत्र दिनांकित 22.0.202 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो शिकायतकर्ता एवं मैसर्स महादेव हाउसिंग प्रोजेक्ट प्रा. लि. के मध्य हस्ताक्षरित व निष्पादित है और पत्रावली पर दाखिल जमा धनराशि की रसीदों एवं खाता विवरण के अवलोकन से भी यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा समस्त धनराशि का भुगतान मैसर्स महादेव हाउसिंग प्रोजेक्ट प्रा. लि. को किया गया है, परन्तु शिकायतकर्तागण द्वारा योजित प्रश्नगत शिकायतों में मैसर्स केशवाना इस्पात प्रा. लि. को भी विपक्षी संख्या-2 के रूप में पक्षकार बनाया गया है, जोकि उनके एवं शिकायतकर्तागण के मध्य कोई सम्बन्ध नहीं है और न ही शिकायतकर्तागण द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है, जिससे यह विदित हो सके कि मैसर्स केशवाना इस्पात प्रा. लि. एवं शिकायतकर्तागण के मध्य कोई सम्बन्ध है। ऐसी स्थिति में शिकायतकर्तागण द्वारा योजित प्रश्नगत शिकायतों में मैसर्स केशवाना इस्पात प्रा. लि. को विपक्षी संख्या-2 के रूप में पक्षकार बनाया जाना न्यायोचित नहीं है।
पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन से यह भी स्पष्ट है कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा मैसर्स महादेव हाउसिंग प्रोजेक्ट प्रा. लि. को आवंटित परियोजना की भूमि का क्षेत्रफल 406 वर्ग मीटर है अर्थात 500 वर्गमीटर से कम है, के अनुसार परियोजना रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-03 की उपधारा-2(9) के अन्तर्गत है, जोकि पंजीकृत कराये जाने योग्य नही हैं, परन्तु परियोजना में कुल कितने अपार्टमेन्ट /यूनिट हैं, इस सम्बन्ध में कोई साक्ष्य / प्रमाण पत्रावली पर उपलब्ध नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यदि विपक्षी द्वारा परियोजना में 08 से अधिक अपार्टमेन्ट / यूनिट विक्रय की गईं हो और वह पंजीकृत कराये जाने योग्य हो। पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्यों एवं अभिलेखों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि उपर्युक्त सारणी में अंकित समस्त शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी / प्रमोटर मैसर्स महादेव हाउसिंग प्रोजेक्ट प्रा. लि. के विरुद्ध रेरा प्राधिकरण के समक्ष पूर्व में शिकायतें योजित की गईं थी, जिनकी शिकायत pe जम Page 7
| हूँ NCRI45/07/7795/202I, (2) + NCR45/05/I037/20i9, (3) NCR45/07/78034/202 (4) NCR45/07/78008/202, (5) NCR45/07/77999/202, (6) NCRI45/07/78030/202l @ | इन प्रश्नगत शिकायतों में रेरा प्राधिषण की मा. e+ द्वारा ora के अन्तर्गत दिनांक 08.06.2022 को आदेश पारित किया जा चुका है, उसके पश्चात् उपर्युक्त सारणी में अंकित समस्त शिकायतकर्तागण द्वारा पुनः समान तथ्यों के आधार पर एवं समान अनुतोष हेतु रेरा प्राधिकरण के समक्ष प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं, जोकि उन्हीं पक्षकारों के मध्य हैं, जिनके मध्य पूर्व में दायर की गयी शिकायतों, जिनका निस्तारण मा. पीठ द्वारा दिनांक 08.06.2022 को किया गया था तथा उपरोक्त सभी मामलों के विषय वस्तु तथा विवादित बिन्दु एक ही हैं, जिन पर गुण-दोष के आधार पर पूर्व में ही मा. पीठ द्वारा आदेश पारित किया जा चुका है। अतः प्रश्नगत शिकायतें सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा-44 के अन्तर्गत "Res Judicata" के सिद्धान्त से बाधित है। अतः समान तथ्यों के आधार पर पीठ के समक्ष पुनः शिकायतें योजित नहीं की जा सकती हैं। अतः प्रश्नगत शिकायतें "Res Judicata" के सिद्धान्त से बाधित होने के कारण खारिज किये जाने योग्य हैं। प्रश्नगत प्रकरण में adel पर उपलब्ध समस्त साक्ष्यों के परिशीलन से यह पाया गया कि विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना “SHAKTI KHAND -ा, INDIRAPURAM, GHAZIABAD” उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण में पंजीकृत नहीं है। इस सम्बन्ध में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745--6749 /202 “ef न्यूटेक प्रमोटर्स एण्ड डेवलपर्स प्रा. लि. बनाम उ.प्र. राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है कि:-
“...54. From the scheme of the Act 206, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206.” gape ee विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि wa अधिनियम के प्रावधान सिर्फ उन परियोजनाओं पर लागू हैं जो रेरा अधिनियम के प्रावधान लागू होने के उपरान्त, जो परियोजनाएं रेरा में पंजीकृत हैं। प्रश्नगत परियोजना रेरा में अपंजीकृत है तथा रेरा को अपंजीकृत परियोजनाओं के सम्बन्ध में आदेश पारित करने का कोई अधिकार नहीं है। वहाँ शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम की धारा-48 के अन्तर्गत किसी भी प्रकार के याचित अनुतोष को प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है। उपरोक्त वर्णित स्थिति में प्रश्नगत शिकायतें “रेरा” के क्षेत्राधिकार में न होने तथा सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा-44 के अन्तर्गत "Res Judicata" के सिद्धान्त से बाधित होने के कारण खारिज किये जाने योग्य हैं। अतः शिकायतकर्तागण की प्रश्नगत शिकायतें उपरोक्तानुसार खारिज किये जाने योग्य हैं। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश : शिकायतकर्तागण की प्रश्नगत शिकायतें उपरोक्तानुसार खारिज की जाती हैं। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तद्नुसार पत्रावलियाँ दाखिल दफ्तर हो।
इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाए। Gea ॥/2+ (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 9