Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Pooja Bansal v. Rise Projects Pvt Ltd
Complaint No. NCR145/05/93964/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2023-01-04
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Budh Nagar | Order under Section 34, Bench-II Present: Smt. Kalpana Mishra, Member Complaint No.: NCRI45/05/93964/2022 Puja Bansal Versus Rise Projects Pvt. Ltd. The complaint petition has been filed by the complainant against the respondent seeking possession and interest for the delayed period. In brief, the complainant states that she booked Unit Wo-T6-505 [?] in the respondent's project Rise Organic Homes Phase-I. The total price of the unit was Rs. 33,66,540/-, against which she has paid Rs. 26,52,363/- to the respondent from time to time in instalments. The complainant states that the respondent was to hand over possession of the unit by 22.02.2020, but the respondent has still not handed over possession, and no completion certificate or other certificates for the project have been obtained from the competent authority. For this reason the complainant has requested possession and interest for the delayed period. In support of her statement, the complainant has filed copies of the allotment / agreement letter dated 25.02.2076 [?] and the statement of account.
In its reply, the respondent stated that the project is registered with RERA and was started in 2045. The complainant applied for the respondent's project Rise Organic Homes [?], and in pursuance of this an agreement letter dated 25.02.206 was executed between the parties. According to the possession clause of the agreement, the respondent was to hand over possession of the unit within 42 months with a grace period of 6 months. The construction of the project was delayed by force majeure events, which were beyond its control. In view of the rising pollution in Delhi NCR, the Hon'ble Supreme Court and the National Green Tribunal (NGT) had stayed construction work from October 20:9 to January 2020. Due to [?] and from time to time, construction work was affected by bans imposed by the National Green Tribunal. The respondent states that, on the same facts, the complainant had filed a complaint No. ADJ/NCRI45/05/93970/2022 before the Adjudicating Officer, and the Adjudicating Officer has already passed an order directing that the complainant be compensated at MCLR+ per cent for the delay in the project, from 26.02.2020 until the date of physical possession and receipt of O.C. / C.C. The respondent states that possession of the unit will be given to the complainant by June 2023. The respondent therefore requests that the present complaint be dismissed. The arguments of both sides were heard and the record examined, on the basis of which the following points have been framed:
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-॥ उपस्थिति::- श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य शिकायत संख्या :- NCRI45/05/93964/2022 पूजा बंसल बनाम राइज प्रोजेक्ट्स wo feo प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Rise Organic Homes Phase-l में यूनिट Wo-T6-505 बुक की गई थी। जिसकी कुल कीमत 33,66,540 ,/- रूपये थी, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 26,52,363,//- रूपये का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 22.02.2020 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु अभी तक विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है और न ही प्रश्नगत परियोजना के संबंध मे कोई पूर्णता प्रमाण पत्र एवं अन्य प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकरण से प्राप्त नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आंवटन/»अनुबन्ध पत्र दिनांकित 25.02.2076, खाता विवरण की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन मे जवाब दाखिल करते हुए कहा गया है कि प्रश्नगत परियोजना रेरा मे पंजीकृत है और वर्ष 2045 में प्रारम्भ की गई थी। शिकायतकर्ता द्वारा उनकी प्रश्नगत परियोजना Rise Organic Homes ?॥98९०- में आवेदन किया गया था, जिसके अनुक्रम में उभयपक्षों के मध्य अनुबंध-पत्र दिनांक 25.02.206 को निष्पादित किया गया। अनुबन्ध के कब्जा सम्बन्धी WA के अनुसार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा 42 एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के अनुसार प्रदान किया जाना था। परियोजना का निर्माण कार्य फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण विलम्बित हुआ, जो कि उनके नियंत्रण में नहीं था। दिल्ली NCR में बढ़ते हुए प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं एन.जी.टी. द्वारा अक्टूबर 20:9 से जनवरी 2020 तक निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गयी थी। aifas—i9 के कारण एवं समय-समय पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाये है 286 7 जाने पर निर्माण कार्य प्रभावी रहा। विपक्षी का कहना है कि समान तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा मा0 न््यायनिर्णायक अधिकरी के समक्ष 4 शिकायत संख्या- ADJ/NCRI45/05/93970/2022 योजित की गई थी, जिसमें mo न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा दिनांक 26.02.2020 से यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने एवं ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता को परियोजना में हुए विलम्ब हेतु MCLR+ प्रतिशत की दर से क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का आदेश पारित किया जा चुका है। शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा जून 2023 तक प्रदान कर दिया जाएगा। अतः विपक्षी द्वारा प्रश्गगत शिकायत खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये गये हैं :- . कया रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? व क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या शिकायतकर्ता कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु eae बिन्दु deri इस तथ्य पर विचरित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा कया पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745--6749 / 2024 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स oo feo बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि — "54. From the scheme of the Act 206, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206."
उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि L Page 2 “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में ऑनगोईग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्द् संख्या-2 शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 22.02.2020 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु अभी तक विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है और न ही प्रश्नगत परियोजना के संबंध मे कोई पूर्णता प्रमाण पत्र एवं अन्य प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकरण से प्राप्त नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
जिस पर विपक्षी द्वारा कहा गया है कि समान तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा मा0 न्यायनिर्णायक -अधिकरी के समक्ष 4 शिकायत संख्या- ADJ/NCR45/05/93970/2022 योजित की गई थी, जिसमें ao न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा दिनांक 26.02.2020 से यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने एवं ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता को परियोजना में हुए विलम्ब हेतु MCLR+ प्रतिशत की दर से क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का आदेश पारित किया जा चुका है। शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा जून 2023 तक प्रदान कर दिया जाएगा। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल आवंटन »अनुबन्ध पत्र दिनाकित 25.02.2046 के प्रस्तर-७() में veers किया गया है कि विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के अधीन 42 एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि अर्थात् दिनांक 25.02.2020 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय के नीलकमल Raced सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the ee a Page 3
under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व dar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन से विदित है कि शिकायतकर्ता द्वारा समान तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा मा0 न््यायनिर्णायक अधिकरी के समक्ष 4 शिकायत संख्या- ADJ/NCR45/05/93970/2022 योजित की गई थी, जिसमें मा0 न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा दिनांक: 26.02.2020 से यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने एवं ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता को परियोजना में हुए विलम्ब हेतु MCLR+ प्रतिशत की दर से क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का आदेश पारित किया जा चुका है और विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा जून 2023 तक प्रदान किये जाने की बात कही गई है। ऐसे में प्रश्नगत प्रकरण में विलम्बित अवधि के ब्याज के सम्बन्ध में आदेश पारित किये जाने का कोई औचित्य नहीं है। तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं। आदेश l. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र/अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 30.06. 2023 तक ओ.सी. /सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और cy wry शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 206 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। Page 4 3. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। दिनांक :-- 26/42/2022 (कल्पना मिश्रा) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण