Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Bhagwan Sarup Agarwal v. Project Category-Un-Register Uppal Chadha Hi-Tech Developers Pvt. Ltd
Complaint No. NCR145/05/0700/2019
- Decision date
- 2019-11-28
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
4 उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04ए श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य शिकायत संख्या-एन.सी.आर445 / 05 / 0700 // 2049 भगवान स्वरूप अग्रवाल बनाम उप्पल चढढा हाई-टेक डेवलपर्स प्राईवेट लिमिटेड प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा, चार्जेज़ के मद अतिरिक्त जमा धनराशि वापस, विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में फ्लैट नं०-554 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर feel के आधार पर 22,90,533//-रूपये का भुगतान किया गया, किन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक कब्जा नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि यूनिट का कब्जा ॥3 वर्ष से विलम्ब है। एक्सप्रेशन aie epee के तहत दिनांक 04.44.2005 को प्लॉट बुक कराया था। आवंटन 6 वर्ष विलम्ब से हुआ। विपक्षी की ओर से एक्सटरनल इलैक्ट्रिफिकेशन चार्जेज के मद में अनुचित मांगे की गयी, जिसका भुगतान दबाव में उनके द्वारा किया गया। अन्य चार्ज, सोशल Hes मेम्बशशिप चार्ज भी लिये गये, जो कि अनुबन्ध की परिक्षेत्र से बाहर है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा, चार्जेज़ के मद अतिरिक्त जमा धनराशि वापस, विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में एक्सप्रेशन ऑफ इन्द्रेस्ट, प्लॉट आवंटी अनुबन्ध, खाता विवरण, कब्जे हेतु सूचना पत्र, जमा धनराशि की wile, प्लॉट आवंटी अनुबन्ध आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत नहीं कराया गया, क्योंकि पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त हो आटा 2 चुका है और यह रेरा के क्षेत्राधिकार में नहीं है। स्थानीय किसानों द्वारा धरना प्रर्दशन के कारण कार्यों में बाधा उत्पन्न हुई। शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना Baers में प्लॉट संख्या-554 आवंटित किया गया था। शिकायतकर्ता को कब्जे हेतु ऑफर दिनांक 20.09.20:6 को किया जा चुका है। सभी चार्जेज़ अनुबन्ध के अनुसार हैं, जिसकी नियम एवं शर्तें शिकायतकर्ता द्वारा अनुबन्ध में स्वीकार किये गये थे। शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि नहीं दी जा रही है। विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में कब्जे हेतु सूचना पत्र दिनांक 20.07.206 की छायाप्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय किये गये :- 4. क्या प्रश्नगत परियोजना का रेरा में पंजीकृत कराया जाना अपेक्षित है ? 2 शिकायतकर्ता से किस-किस मद में धनराशि बिल्डर द्वारा मांगी जा सकती है ? 3... परिभाषा के अनुसार क्या “इन्टरनल डवलपमेन्ट” शिकायतकर्ता के प्लॉट के पॉकेट तक सीमित होगा अथवा क्या “एक्सटरनल व पेरिफरल डवलपमेन्ट” सिटी लेवल पर ही परिभाषित होगी ? 4. क्या विपक्षी द्वारा विभिन्न मदों में मांग की गयी चार्जेज उचित है ? 5... क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? 6. क्या अनुबन्ध में आरबीट्रैशन क्लॉज होने के कारण वाद की सुनवाई का क्षेत्राधिकार इस पीठ को है ? 7. कया शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? निस्तारण बिन्दु do 4
बिन्दु to 4 के अन्तर्गत इस तथ्य का निर्धारण किया जाना है कि क क्या प्रश्नाधीन प्रोजेक्ट का पंजीकरण विपक्षी द्वारा रेरा में कराया गया है ? यह बिन्दु विपक्षी के अभिवचनों पर आधारित है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। ae शिकायतकर्ता द्वारा अवगत कराया गया कि विपक्षी द्वारा इस परियोजना का रेरा में पंजीकरण नहीं कराया गया है, जिसके कम में विपक्षी की परियोजना Sector- 5 की विवेचना एवं रेरा पोर्टल पर जाँच करायी गयी, जिसमें यह पाया गया कि विपक्षी की परियाजन रेरा में पंजीकृत नहीं करायी गयी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि परियोजना की सुविधायें पूर्ण नहीं और परियोजना विलम्बित है। ऐसे में यह परियोजना ऑनगोईंग की श्रेणी में आता है। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि उ0प्र0 भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली, 2046 के नियम 20) में रेरा के अन्तर्गत ऑनगोईंग परियोजना को परिभाषित करते हुए चार अपवाद भी दिये गये हैं, जो कि निम्नवत हैः- (h) "ongoing project" means a project where development is going on and for which completion certificate has not been issued but excludes such projects which fulfill any of the following criteria on the date of notification of these rules: (i) where services have been handed over to the Local Authority for maintenance. (ii) where common areas and facilities have been handed over to the Association for the Residents' Welfare Association for maintenance. (iii) where all development work have been completed and sale/lease deeds of sixty percent of the apartment/houses/plots have been executed.
(iv) where all development works have been completed and application has been filed with the competent authority for issue of completion certificate. उक्त नियम 2(h)(iv) where all development works have been completed and application has been filed with the competent authority for issue of completion certificate. के अन्तर्गत प्रश्ननत परियोजना के सभी विकास कार्य अभी पूर्ण नहीं किये गये है और न ही परियोजना पूर्ण है। ऐसे में प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराये जाना अपेक्षित है। उपरोक्तानुसार परियोजना ऑनगोईंग की श्रेणी में है, जिसका रेरा में पंजीकरण कराया जाना आवश्यक है| यह भी स्पष्ट है कि परियोजना के अभी विकास कार्य कराये जाने अवशेष हैं और विपक्षी द्वारा पूर्णता के सम्बन्ध में विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं की गयी है। Ne अतः प्रश्नगत परियोजना रेरा के क्षेत्राधिकार में है। wage से स्पष्ट होता है कि परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया जाना आवश्यक है और विपक्षी द्वारा रेश अधिनियम की धारा-3 का उल्लंघन किया गया है। चूंकि प्रश्नगत परियोजना ऑनगाईंग परियोजना की श्रेणी में आता है। इस सम्बंध में भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-03 को पढ़ा जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल््लेखित है कि:- REGISTRATION OF REAL ESTATE PROJECT AND REGISTRATION OF REAL ESTATE AGENTS.
3. (l) No promoter shall advertise, market, book, sell or offer for sale, or invite persons to purchase in any manner any plot, apartment or building, as the case may be, in any real estate project or part of it, in any planning area, without registering the real estate project with the Real Estate Regulatory Authority established under this Act: Provided that projects that are ongoing on the date of commencement of this Act and for which the completion certificate has not been issued, the promoter shall make an application to the Authority for registration of the said project within a period of three months from the date of commencement of this Act: Provided further that if the Authority thinks necessary, in the interest of allottees, for projects which are developed beyond the planning area but with the requisite permission of the local authority, it may, by order, direct the promoter of such project to register with the Authority, and the provisions of this Act or the rules and regulations made thereunder, shall apply to such projects from that stage of registration. (2) Notwithstanding anything contained in sub-section (L), no registration of the real estate project shall be required—
(a) where the area of land proposed to be developed does not exceed five hundred square meters or the number of apartments proposed to be developed does not exceed eight inclusive of all phases: Provided that, if the appropriate Government considers it necessary, it may, reduce the threshold below five hundred square meters or eight apartments, as the case may be, inclusive of all phases, for exemption from registration under this Act; (b) where the promoter has received completion certificate for a real estate project prior to commencement of this Act; (c) for the purpose of renovation or repair or re-development which does not involve marketing, advertising selling or new allotment of any apartment, plot or building, as the case may be, under the real estate project. Explanation—For the purpose of this section, where the real estate project is to be developed in phases, every such phase shall be considered a stand alone real estate project, and the promoter shall obtain registration under this Act for each phase separately.
इसमें रेरा में रजिस्ट्रेशन किये बिना रियल स्टेट प्रोजेक्ट भू-खण्ड या अपार्टमेन्ट की बुकिंग, विकय व विज्ञापन आदि न करने सम्बंधी प्राविधान है और ऑनगोईंग प्रोजेक्ट्स के रजिस्ट्रेशन हेतु स्पष्ट प्राविधान वर्णित है। अधिनियम के प्राविधानों के अनुसार ऐसे सभी प्रोजेक्ट्स ऑनगाईग परियोजना की श्रेणी में सम्मलित हैं, जिन्हें रेरा आने से पूर्व सक्षम प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी को प्रश्नाधीन प्रोजेक्ट के सम्बंध में सक्षम प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाण पत्र अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में प्रश्नाधीन प्रोजेक्ट, ऑनगोईग परियोजना होने के कारण इस पर अधिनियम के सभी प्राविधान लागू होगें। Peete: अधिनियम की धारा-3 में वर्णित प्राविधानों के अनुसार प्रश्नाधीन प्रोजेक्ट रेरा की परिधि में आने से रजिस्ट्रेशन होने योग्य है। विपक्षी अपनी परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराना सुनिश्चित करें| साथ ही विपक्षी को धारा-3 के अधीन रजिस्ट्रीकरण न किये जाने के कारण अधिनियम की धारा-59 के अन्तर्गत दण्ड का भागी है। अधिनियम की धारा-59 में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है किः- 59. () If any promoter contravenes the provisions of section 3, he shall be liable to a penalty which may extend up to ten per cent. of the estimated cost of the real estate project as determined by the Authority.
(2) If any promoter does not comply with the orders, decisions or directions issued under sub-section () or continues to violate the provisions of section 3, he shall be punishable with imprisonment for a term which may extend up to three years or with fine which may extend up to a further ten per cent. of the estimated cost of the real estate project, or with both. उपरोक्त से यह स्पष्ट है कि यदि कोई सम्प्रवर्तक धारा-3 के उपबन्धों का उल्लंघन करता है, तो वह ऐसी किसी शास्ति के लिए जो प्राधिकरण द्वारा यथा अवधारित we 6 भू-सम्पदा परियोजना की अनुमानित लागत के 40 प्रतिशत तक की हो सकेगी, दायी होगा। सचिव, रेरा इस सम्बन्ध में विपक्षी के विरूद्द दण्डात्मक कार्यवाही करते हुए अग्रेस्तर परियोजना को रेरा में पंजीकृत करायें, साथ ही तकनीकी सलाहाकार परियोजना के पंजीकरण के सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही करें। माननीय उच्च न्यायालय, बाम्बे ने रिट पिटीशन कमांक 908 /20:8 “मोहम्मद जैन खान विरूद्ध महाराष्ट्र रियल एस्टेट अथॉरिटी व अन्य” के प्रकरण में सुनवाई उपरान्त अपने पारित आदेश दिनांक 3.07.20i8 में यह भी स्पष्ट किया गया है कि रेरा में अपंजीकृत रियल wee प्रोजेक्ट्स के विरूद्द भी प्राधिकरण द्वारा सुनवाई की जा सकती है। स्पष्ट है कि प्रश्नाधीन प्रोजेक्टस के विरूद्द भी प्राधिकरण द्वारा सुनवाई की जा सकती है। अतः प्रश्नाधीन प्रोजेक्ट के विरूद्ध प्रस्तुत शिकायत रेरा में सुनवाई योग्य है। तदनुसार बिन्दु to 4 Pena किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 2 remand से किस-किस मद में धनराशि बिल्डर द्वारा मांगी जा सकती है ?
प्रकरण में उठायें गये बिन्दुओं का परीक्षण करने के कम में प्लॉट एलॉटीज़ sure में विभिन्न मदों में धनराशि लिए जाने के प्राविधानों, एक्सटरनल व SCM डवलपमेन्ट चार्जज के सम्बन्ध में दोनों पक्षों की स्थिति व “इन्टरप्रटेशन”, चार्जेज का ब्रेकअप आदि के सम्बन्ध में दोनों पक्षों के दावे एवं wf धनराशि अथवा सिद्धान्त की विवेचना शिकायत संख्या-6204842444, एम.एल. गुप्ता बनाम उप्पल चढ्ढा हाई-टेक डेवलपर्स प्राणलि0 में विस्तृत रूप से स्पष्टीकरण सहित निर्णीत किये गये है। प्रश्नगत प्रकरण में अनुबन्ध की प्रति दाखिल नहीं की गयी है, जिससे विदित हो सके कि समस्त मदों में क्या-क्या चार्जेज देय थी, परन्तु प्रस्तुत प्रकरण सेक्टर-5 प्लॉट से सम्बन्धित है। इस परियोजना से सम्बन्धित प्रकरण शिकायत We—62082444, एम.एल. गुप्ता बनाम उप्पल चढ्ढा हाई-टेक डेवलपर्स प्राणलि0 भी था, जिससे अवधारित किया जा सकता है कि एम.एल गुप्ता में किये गये अनुबन्ध इस प्रकरण में भी लागू होगें। एम.एल गुप्ता के अनुबन्ध में समस्त चार्जेज़ हेतु निम्नवत् उल्लेख किये गये थे। दा 7. CONSIDERATION FOR SALE OF 'PLOT' AND RIGHTS THERE TO
(c) ALLOTTEE(S) shall strictly follow the payment plan and pay the requisite amount by way of upfront or other payment plan opted by him/her/them. ALLOTTEE(S) for such purpose should be guided by written notices of change of earlier mandate issued by DEVELOPER from time to time. DEVELOPER will record the details of all payments received by it from ALLOTTEE(S) in its records/system as well as in DEVELOPER's copy of __ this Arrangement. ALLOTTEE(s) is required to keep DEVELOPER'S acknowledgement receipts in safe custody for future references. (d) That the cost of electric, sewer and water connection is not included in the aforesaid price of the ‘PLOT’ and shall be payable by the ALLOTTEE(s) in addition to price of 'PLOT'. Further, the ALLOTTEE(S) shall pay on demand to the DEVELOPER the amount to be determined at the time of providing electric, sewer and water connection and any other connection of a service which the DEVELOPER may provide from the main lane along the serving the "PLOT". (Emphasis added) उक्त के प्रस्तर-(6) में यह उल्लेख किया गया है कि प्लॉट की कीमत में बिजली, सीवर और पानी आदि कनेक्शन की धनराशि सम्मिलित नहीं है और यह विकासकर्ता की मांग पर कनेक्शन देते रामय निर्धारित धनराशि देय होगी | .3 INTERNAL DEVELOPMENT That the above price of the residential PLOT’ covers development of internal services such as laying of roads, development of parks and landscapes, laying of water lines, laying of sewer lines, laying of electrical Yo न उक्त से
HT/LT lines, laying of storm water drain lines and erection of electrical sub-station and to develop necessary civic services essential for a convenient living.(Emphasis added) यह we है कि अंदरूनी विकास कार्य (INTERNAL DEVELOPMENT) के सम्बन्ध उक्त प्लॉट की धनराशि में विकास की अंदरूनी सुविधायें जैसे कि रोड का निर्माण करना, पार्कों के विकास, पानी को संचलित करने हेतु लाईन बिछाया जाना, सीवर लाईन, बिजली के एच. टी/एल.टी casa, वाटर ड्रेन लाईन और बिजली सब-स्टेशन एवं मूल भूत सुविधायें जो कि सुविधाजनक जीवन यापन करने के लिए आवश्यक विकास कार्य कराये जाने हेतु सुविधायें wart धनराशि में समाविष्ट एवं सम्मिलित है। oe .6 PERIPHERAL/ INFRASTRUCTURAL DEVELOPMENT CHARGES The ALLOTTEE(S) agrees to pay Peripheral/Infrastructural development charges@ Rs 06.60/-per Sq meter (Rs 850/- per Sq Yd). which are not included in the aforementioned sale price (Clause .(b)). Further, ALLOTTEE(S) specifically agrees and understands that in case of any increase in Peripheral/ Infrastructural development charges or levy of any other charges by the Government or other Statutory Authority(ies) in future, the same shall be paid on pro-rata basis by the ALLOTTEE(S). Allottee(s) herein also agrees to pay the proportionate External Electrification charges including but not limited to lying of cables, security deposits and /or any ancillary cost/charges for making the provision for transmission of electricity from the main station to sub _station.These charges shall be paid by the
Allottee(s) to the Developer on demand.(Emphasis added) उक्तानुसार आवंटी द्वारा यह सहमति दी गयी है कि पेरिफेरल / अवस्थापना विकास कार्यों के चार्जेज़ (शुल्क) 4046.60 रूपये प्रति वर्ग मीटर (850 प्रति वर्ग यार्ड) उपरोक्त विकय धनराशि में सम्मिलित नहीं है और विशेष रूप से यह स्वीकारा एवं समझा जाता है कि (क) यह कि पेरिफेरल /अवस्थापना के चार्जेज़ बढ़ने या (ख) सरकार अथवा अन्य किसी वैधानिक प्राधिकरण द्वारा भविष्य में अतिरिक्त चार्जेज़ लिये जाने पर वह प्रो-रेटा /अनुपातिक दर पर आवंटियों द्वारा देय होगा। आवंटी द्वारा यह भी सहमति दी गयी है कि अनुपातिक तौर पर बाहरी बिजली कार्य (External Electrification charges) जिसमें बिजली के संचालन हेतु मेन स्टेशन से सब-स्टेशन में उपयोग किये जाने वाले dace, सिक्योरिटी डिपोजिट आदि की धनराशि सम्मिलित है देय होगी, और यह चार्जेज़ विकासकर्ता की मांग पर देय होगी। ऐसे में यह स्पष्ट है कि पेरिफेरल,/अवस्थापना विकास हेतु 406.60 रूपये प्रति वर्ग मीटर (850 प्रति वर्ग गज) आवंटियों द्वारा देय होगी, जो कि उक्त विकय धनराशि में सम्मिलित नहीं है और यदि इन ante में अथवा सरकार या किसी वैद्यानिक प्राधिकरण द्वारा अतिरिक्त धनराशि की मांग की जाती है, तो अनुपातिक दरों पर देय होगी। .7 OTHER CHARGES AS PER HI-TECH TOWNSHIP POLICY
The terms and conditions contained in the MOU entered between the DEVELOPER and the Government of UP and other terms and conditions of Hi-Tech Township Scheme will be applicable on the 'PLOT' of land allotted to the ALLOTTEE(S) and it will be the responsibility of the DEVELOPER to develop this Hi- Tech Township and to hand over the developed land to the ALLOTTEE(S). However, in case of any charges which are chargeable as per the Hi-Tech Township Policy (if any) in the future for infrastructure or any other purpose, if any, then the same shall be proportionately charged to the ALLOTTEK(S) at the oe १0
rates as may be decided by the Government. The ALLOTTEE(S) shall pay directly, or if paid by the DEVELOPER. then reimburse the DEVELOPER on demand the Government rates, taxes or cesses, taxes or cesses, taxes of all and any kind by whatever name called, levy of proportionate development charges with regard to, but not limited to state/national highvays, transport, irrigation facilities and power facilities, electricity facilities/requirement, electricity distribution network/system, metro cess etc., whether levied or leviable now or in future on the 'PLOT' forming a part of the overall development or the built up residential Complex/s and/or the Project(s) constructed within the "Wave City" and/or the said 'PLOT' in isolation, as the case may be, as assessable/applicable from the date of application of the ALLOTTEE(S) and the same shall be borne and paid by the ALLOTTEE(S). (Emphasis added) TRIGA यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार और विपक्षी के मध्य हुए एम.ओ. यू एवं हाई-टेक टाऊनशिप स्कीम के नियम एवं शर्तें जो कि आवंटी को आवंटित प्लॉट पर उक्त के अधीन नियमों के अनुसार विकसित की जायेगी। यदि हाई-टेक टाऊनशिप पॉलिसी के अनुसार भविष्य में आधारभूत ढाँचे अथवा अन्य प्रयोजनो के चार्जेज लगाये जाते हैं, तो आवंटियों द्वारा सरकार द्वारा निर्धारित दर पर अनुपातिक रूप से देय होगा।
इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा कोई ऐसे अतिरिक्त एवं अन्य चार्जेज का विवरण नहीं प्रस्तुत किया गया है, जिससे कि विदित हो कि सरकार द्वारा कोई इस प्राविधान के अधीन कोई aoe निर्धारित किये गये हों और वह धनराशि विकासकर्ता द्वारा अभी तक भुगतान की गयी हो। अतः इस सम्बन्ध में विपक्षी अभी कोई अतिरिक्त धनराशि पाने का अधिकारी नहीं है। यदि विपक्षी भविष्य में इस मद कोई अन्य चार्ज सरकार या प्राधिकरण को देता है, तो YH aw We व प्रो-रेटा शेयर बताकर केता से प्राप्त कर सकते हैं। .9 PAYMENT OF TAXES, CESSES BY THE PLOT OWNER That the stamp duty and the registretion fee incurred in the registration process which is to be paid to the revenue authorities is to be borne by the ALLOTTEE(S) shall be SO i2 liable to pay from the date of his/her application the house tax, water tax and sewerage tax and other such taxes or any other future tax or any other fees, cess or taxes of all any kind by whatever name called, levy of proportionate development charges as and when levied by the Local Authority/Body under the then prevailling law and rules of the land, when such maintenance services will be transferred to the Local Authority/Body. These taxes, fees, cesses etc., shall be paid by the ALLOTTEE(S) irrespective of the fact whether the maintenance is carried out by the DEVELOPER or its nominees or any other body or association of all or the ALLOTTEE(S) whether levied retrospective or prospective.
उपरोकतानुसार टैक्सेज, सेस के बारे में यह उल्लेख किया गया है कि स्टाम्प डयूटी और पंजीयन शुल्क जो कि पंजीकरण की प्रकिया में राजस्व विभाग / प्राधिकरण को दी जायेगी। वह आवंटियों द्वारा विधि के अनुसार वहन किया जायेगा। इसी कम में आवंटियों द्वारा आवेदन की तिथि से गृहकर, पानीकर, सीवेज कर एवं अन्य टैक्सेस जो कि write निकाय द्वारा लागू विधि के अनुसार देय होगा वह आवंटियों द्वारा अनुपातिक दर पर दिया जायेगा। इस विषय में भी कोई विवाद नहीं उठाया गया है। 4 Maintenance Charges a. The ALLOTTEE(S) gives its consent to enter into a separate Maintenance Agreement with the DEVELOPER or its nominated maintenance agency as and when demanded by the DEVELOPER or its nominated agency and the ALLOTTEE(S) agrees to abide by all the terms and conditions as laid down in the said Maintenance Agreement. b. That the ALLOTTEE(S) of the 'Plot' unconditionally agrees and undertakes to pay necessary charges, from the date when possession is offered to him/her/them, as determined by the DEVELOPER or its nominated Maintenance Agency towards maintenance of water supply, electricity, parks, open spaces, roads, cleaning and sweeping, street lights, sewr, storm drain etc. and for Ge १2
maintaining various value added services until the services are handed over to the respective government agency(ies) local body. The ALLOTTEE(S) shall deposit with the DEVELOPER a sum as decided by the DEVELOPER by way of interest free security to ensure timely payment of maintenance charges. The said amount shall be payable by the ALLOTTEE(S) and will be paid at the time when possession is offered or sale deed is executed, whichever is earlier. However the maintenance charges shall become payable from the date of offer of possession. c. In terms of Hi-Tech Township Policy of Uttar Pradesh Government, the Installation of Solid Waste Management Plant [SWMP], Sewer Treatment Plant (STP) and 220 KVA power plants and destribution systems and other mechanical plants and machinery related to external services are being built and maintained by the DEVELOPER or its nominated agency. The ALLOTTEE(s) hereby agrees to pay the upkeep/running maintenance charges for these services and also if at some point of time these installations require replacement, the cost of the same will be proportionately paid by the ALLOTTEE(s) along with other allottees/ occupants with in the WAVE HITECH CITY township.
उपरोक्तानुसार AAT शुल्क के बारे में यह कहा गया है कि आवंटी, विकासकर्ता या उसके नामित मेटेनेन्स एजेन्सी से एक अलग मेटेनेन्स अनुबन्ध निष्पादित करेगें और नियम एवं शर्तों का पालन करेगें। आवंटी प्रोसेशन ऑफर करते समय से ही मेटेनेन्स एजेन्सी को पानी सप्लाई, बिजली, पार्क आदि के रखरखाव कार्य हेतु भुगतान करेगा, जब तक वह किसी सरकारी निकाय अथवा wri निकाय को मेटेनेन्स हस्तांतरित न कर दें। इसी के अतिरिक्त हाई-टेक टाऊनशिप पॉलिसी के अधीन सौलिड वेस्ट मेनेजमेन्ट प्लॉन्ट, सीवर टीटमेन्ट wire 220 के.वी.ए पावर स्टेशन है के निर्माण व रखरखाव का उत्तरदायित्व बिल्डर को दिया गया है। उसके भी रखरखाव कार्य हेतु वेव हाई-टेक सिटी टाऊनशिप में निवास कर रहे आवंटियों द्वारा अनुपातिक दर पर देय होगी तथा यदि कभी उनके रिप्लेसमेन्ट की आवश्यकता हुई तो प्रो-रेटा शेयर आवंटियो द्वारा देय होगा। इस विषय में भी कोई विवाद नहीं उठाया गया है। Ge 43 0. RIGHTS OF DEVELOPER TO RECOVER INCREASED AMOUNT OF COMPENSATION AND /OR CHARGES LEVIED BY THE GOVERNMENT.
0.] The DEVELOPER has acquired land directly from the farmers by paying the mardet price. However there might be certain pleces and parcel of land which may not have been bought by the DEVELOPER. In terms of the policy of the Government for the development of Hi- Tech Township, such piece or parcel of land falling with the approved Detailed Project Report and the sancitioned Detalled Layout Plan is to be acquired by the Government for the DEVELOPER and to be handed over to the DEVELOPER for the development of Hi- Tech Township. Allottee(s) however specifically understands and agrees that in case such land is not acquired for any reason whatsoevr either by negotiations or by State Government as stated above, DEVELOPER shall not be held liable on any account. DEVELOPER as such makes no cominitment in respect of acquiring such land and ALLOTTEE(S) being fully aware has applied for alotment of the freehold Plot. उक्त प्रस्तर के सम्बन्ध में यह स्पष्ट किया गया है कि यह सम्भव है कि कुछ भूमि राज्य सरकार द्वारा Acquire की जाये तथा क्षतिपूर्ति के बढ़े हुए दर और अन्य चार्ज जो कि सरकार द्वारा लिये जायेगें, तो वे विकासकर्ता द्वारा अनुपातिक रूप से आवंटियों से प्राप्त किया जायेगा। डी.पी.आर के अनुसार अधिकृत यदि कोई भूमि किसी कारण वश Acquire नहीं की जा सके, तो उसके लिए विकासकर्ता जिम्मेदार नहीं होगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-3
3... परिभाषा के अनुसार क्या “इन्टरनल डवलपमेन्ट” शिकायतकर्ता के प्लॉट के पॉकेट तक सीमित होगा अथवा “wea /इन्फास्ट्रक्चरल व पेरिफरल डवलपमेन्ट” सिटी लेवल पर ही परिभाषित होगी ? इस सम्बन्ध में प्राधिकरण द्वारा शिकायत संख्या-6204842444, एम.एल. गुप्ता बनाम मैसर्स उप्पल ager डेवलपर्स प्राएलि0 में विस्तृत रूप से ee 34 स्पष्टीकरण सहित निर्णीत किया गया है, जिसमें कि इन्टरनल डवलपमेन्ट और एक्सटरनल डवलपमेन्ट के मध्य अन्तर स्पष्ट किया गया है।
अंदरूनी विकास कार्य की विपक्षी की परिभाषा, शिकायतकर्ता का जहाँ प्लॉट है उसी पॉकेट तक सीमित है, किन्तु न तो प्लॉट आवंटी skate में, न हाई-टेक पॉलिसी में, न उन सब परिभाषा सम्बन्धी उद्धरणों में जो विपक्षी द्वारा दिये गये है, व न ही रेरा अधिनियम में, कहीं भी “aide” परिभाषित नहीं है एवं स्पष्टयता यह एक “ऑफटर ate” है जो विपक्षी द्वारा अपने अंतिम var में “sre” किया है। स्वयं विपक्षी द्वारा उद्धरत की गयी परिभाषाओं में दो ही स्तर पर विकास परिभाषित है- “बाह्य व पेरिफेरल” तथा “आन्तरिक विकास कार्य। राज्य सरकार द्वारा हाई-टेक सिटी का लाईसेन्स दिया गया व उन्हीं सुविधाओं पर विचार कर शिकायतकर्ता द्वारा प्लॉट कय किया गया। यदि रेरा आ जाने के बाद विपक्षी द्वारा फेज़वार विकास के सम्बन्ध में परियोजना के अलग-अलग भागों को पंजीकृत भी कराया गया हो, तो वह हाई-टेक सिटी के बाहय एवं आन्तरिक विकास की परिमभाषाओं को प्रभावित नहीं करती। स्वयं विपक्षी का यह कहना है कि क्लब सिटी लेवल फेसिलिटी है तथा प्रत्येक सेक्टर (या पॉकेट) में नहीं दी जा सकती, इस बात की स्वीकारोक्ति है कि सेक्टर या पॉकेट को यूनिट मानकर बाहय व ara विकास परिभाषित नहीं किया जा सकता। अतः: यह स्पष्ट है कि विपक्षी का यह दावा अनुचित है कि पॉकेट या सेक्टर के बाहर का विकास, अवस्थापना /बाहूय विकास मद में सम्मिलित है। अतः अवस्थापना / पेरिफेरल विकास में वही मद सम्मिलित होगें, जो सिटी के आन्तरिक विकास मदों के अलावा होगें। स्पष्टयता यदि वेवसिटी की arash को जोड़ने की बाहय /पेरिफरल सड़क बनायी जाती है, मेन पावर स्टेशन से सिटी लेवल सब-स्टेशन तक पावर लाईनस आदि पर व्यय किया जाता है, तो वह पेरिफेरल / अवस्थापना मद में होगा। यहाँ यह भी विचारणीय है कि अन्य राज्यों कि व्यवस्था में सामान्यतः: सिटी लेवल डवलपमेन्ट के बाहर मेन सब-स्टेशन, सीवर ट्रीटमेन्ट, वाटर सप्लाई आदि की व्यवस्था लोकल अथॉरिटीज़ करती है एवं उसके लिए चार्जेज लेते है। वर्तमान आवंटी अरेन्जमेन्ट के प्रस्तर-4.6 में भी यह प्राविधान है तथा यदि उक्त प्रस्तरानुसार कोई धनराशि शासन या किसी wart को बाद में दी जाती है, तो प्रूफ ऑफ पेमेन्ट व शिकायतकर्ता का प्रो-रेटा शेयर उसके द्वारा देय होगा। Tega बिन्दु संख्या-3 निस्तारित किया जाता है।
निस्तारण बिन्दु संख्या-4 बिन्दु सं? 4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा विभिन्न मदों में मांग की गयी चार्जेज उचित है? यह बिन्दु विपक्षी के ed 45 अभिकथनों पर fraRa किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी द्वारा अपने प्रतिवाद पत्र में चार्जेज के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार का उल्लेख नहीं किया गया है।
एग्रीमेन्ट के प्रस्तर 4.3 के अनुसार आन्तरिक विकास कार्यों की परिभाषा में अन्दरूनी लाईन्स तथा सब-स्टेशन सम्मिलित हैं। यह सब-स्टेशन स्थानीय अर्थात् सिटी लेवल के आन्तरिक सब-स्टेशन हैं, किन्तु “एक्सटरनल इलैक्ट्रिफिकेशन” से सम्बन्धित सब-स्टेशन नहीं है। वर्तमान लोड की स्थिति देखते हुए व यह देखते हुए कि हाई-टेक टाऊनशिप के भविष्य के सम्बन्ध में प्रकरण अभी शासन स्तर पर विचाराधीन है व कई वर्ष अनुबन्ध के बाद बीत चुके हैं। वर्तमान समय में उचित होगा यदि 2207५ के केवल एक सब-स्टेशन व मेन सब-स्टेशन से सिटी लेवल सब-स्टेशन की ट्रानमिशन लाईन व सिक््यूरिटी डिपोजिट का व्यय प्रोरेटा धनराशि शिकायतकर्ता से ली जाये व इस धनराशि की पृथक एकाउक्टिंग की जाये ताकि यदि इस मद में कोई धनराशि शेष रहती है, तो प्रो-रेटा आधार पर वापिस की जा सके। इलैक्ट्रिसिटी मीटर कनेक्शन चार्जेज़, गैस कनेक्शन चार्जेज़, सीवर एवं ee वाटर कनेक्शन चार्जेज, वाटर कनेक्शन चार्जेज, डाटा एवं वॉइस कनेक्शन चार्जेज़ के सम्बन्ध में स्पष्ट किया जाता है कि ये कनेक्शन लेते समय वास्तविक व्यय पर आधारित होगी व vad धनराशि किसी सक्षम प्राधिकरण या विभाग द्वारा लिये जाने पर उसका साक्ष्य आवंटियों को उपलब्ध कराने के उपरान्त यह धनराशि देय होगी और इसका एडमिन चार्जेज़,//सुपरविजन चार्ज माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा Re याचिका संख्या-940,/ 2047 में एन.बी.सी.सी के लिए निर्धारित की गयी 8 प्रतिशत की दर से अधिक नहीं होगा। साथ ही प्रत्येक कनेक्शन का एस्टिमेट अलॉटी को उपलब्ध कराया जायेगा।
मेटेनेन्स के सम्बन्ध में विपक्षी को स्पष्ट किया जाता है कि शिकायतकर्ता द्वारा ली गयी मेटेनेन्स चार्ज कब्जा ऑफर की तिथि से लागू होगी। वाटर हारवेस्टिंग RR के सम्बन्ध में होने वाले व्यय व क़ेता के प्रो-रेटा शेयर की सूचना उपलब्ध कराते हुए यह धनराशि ली जायेगी व सुपरविजन,/ एडमिनिस्ट्रेडिव चार्जेज़ 8 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। कनवेन्स Sts रजिस्ट्रेशन खर्च की धनराशि विधि के अनुरूप स्टाम्प ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क के अनुसार देय होगा। पल 6 क्लब क्योंकि सिटी लेवल फेसिलिटी है। अतः उसकी कैपिटल वैल्यू का भुगतान शिकायतकर्ता करेगें व “सबस्किपशन” क्लब प्रारम्भ होने की तिथि से लागू होगा। विपक्षी द्वारा किये जा रहे समस्त मांगों का निस्तारण उपरोकतानुसार किया जाता है। इस सम्बन्ध में विपक्षी संशोधित मांग पत्र जारी करेगें। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु do 5 बिन्दु do 5 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। 22. FORCE MAJEURE
l. ALLOTTEE agrees that the Allotment of the 'PLOT' is subject to force majeure clause which inter-alia include delay on account of non-availability of steel, cement or any other materials for developing the area and implementation of the Scheme, or water supply or electric power or slow down strike or due to a dispute with the construction agency employed by the DEVELOPER, civil commotion or by reason of war, or enemy action or earthquake or any act of God, delay in certain decisions/clearances from statutory body(ies), or if non-delivery of possession is as a result of any notice, order, rules or notification of the Government and /or any other public or Compatant Authority or for any other reason(s) beyond the control of the DEVELOPER and for any of the aforesaid evet, the DEVELOPER shall be entitled to a reasonable corresponding extension of the time of delivery of possession of the said ‘Plot’ on account of force majeure circumatances and in such eventually the ALLOTTEE(S) will not claim any amount of money by way of refund/damages/compansation/interest, etc. from the DEVELOPER. In case fo DEVELOPER abandoning the scheme for any reason beyond its control then the aa 7
DEVELOPER'S liability shall be limitd to the refund of the amount paid by the ALLOTTEE(S) as per the terms of Allotment Letter. It is further categorically understood by the Applicant(s) that the Developer as a result of any contingency including force majeure reserves its right to alter, add or vary the terms and conditions of the of the allotment or if the circumstances beyond Developer's control so warrant, the Developer may suspend the scheme for such priod as it may consider expedient and no compensation of any nature whatsoever can be claimed by the Applicant for the period of delay/suspension of scheme. उपरोकक्तानुसार फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में यह बताया गया है कि यदि विलम्ब, जैसे कि विकास हेतु समान उपलब्ध न होना, पानी और बिजली की सुविधायें उपलब्ध न होना, निर्माण एजेन्सी एवं विकासकर्ता के मध्य विवाद होना, आदेश, सरकार की अधिसूचना, दंगा, भूकम्प, के कारण परियोजना में विकास नहीं किया जाता है, तो यह विकासकर्ता का दायित्व होगा कि आवंटन पत्र के नियम के अनुसार आवंटियों को पैसा लौटा दिया जायेगा। फोर्स मैज्योर कारकों की वजह से आवंटन के नियम एवं शर्तों में परिवर्तन किया जा सकता है और यदि उक्त फोर्स मैज्योर विकासकर्ता के नियंत्रण से परे पस्थितियों के कारण स्कीम को निरस्त कर सकता है, जिसके लिए कोई क्षतिपूर्ति देय नहीं होगी।
विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure events) (जैसे दंगा, आंदोलन, हडताल, औद्योगिक विवाद, परियोजना पर सेवाओं एवं आपूर्ति का बाधित होना, सरकार का नीति परिवर्तन, न्यायिक wr आदेश, निर्णय व fat से कार्य बाधित होना, अनुज्ञप्ति व संस्तुतियों में होने वाला विलंब आदि) के कारण परियोजना विलंबित हुई, साथ ही यह भी कहा गया कि परियोजना किसानों के उग्र ude, राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नोट बंदी, के कारण परियोजना प्रभावित हुई। विपक्षी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया है, जिससे की विदित हो कि नामित परियोजना की भूमि पर कार्य बाधित था | इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 ,// 2047 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं oa 8 अन्य के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर 0 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया हैः- Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature. उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। तदनुसार बिन्दु to 5 Pena किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 6
विपक्षी की ओर से यह भी तर्क प्रस्तुत किया गया है कि ages में आर्बट्रेशन का क्लाज है, जिस कारण शिकायतकर्ता व विपक्षी के मध्य किसी भी विवाद को केवल आर्बीट्रेटर के माध्यम से ही fren किया जा सकता है और इस पीठ को इस शिकायत को सुने जाने की क्षेत्राधिकारिता प्राप्त नही है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा एमआर एम.जी.एफ. बनाम आफताब सिंह में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- (i) the disputes which are to be adjudicated and governed by statutory enactments, established for specific public purpose to sub-serve a particular public policy are not arbitrable; (ii) there are vast domains of the legal universe that are non-arbitrable and kept at a distance from private dispute resolution; (iii) the subject amendment was meant for a completely different purpose, leaving status quo ante unaltered and subsequently reaffirmed and restated by the Hon'ble Supreme Court; माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित उपरोक्त विधि व्यवस्थाओ के आलोक में यह स्पष्ट है कि कुछ विवादों का निराकरण आर्बिट्रिटर द्वारा आर्बिट्रेशन अनुबन्ध के पश्चात् भी नहीं की जा सकती है। विशेष रूप से गठित प्राधिकरणों का क्षेत्राधिकार मात्र आर्बिट्रेशन ait के आवरण से बेदखल नही किया जा सकता है। ऐसे सभी विवाद जिसके लिए विधि द्वारा विशेष निकाय बनाये गये है और इसका क्षेत्राधिकार दिया गया है, इस प्रकार विवाद को निस्तारित करने के लिए ww i9
आर्बट्रेटर सक्षम नही है। Golan विधि व्यवस्थाओं के प्रकाश में यह स्पष्ट है कि भू-सम्पदा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम 2076 की धारा 79, आर्बिट्रेशन एक्ट पर अभिभूत होगा। एन.सी.डी.आर.सी. ने ए.अय्यास्वामी में दिए तर्क को लागू करने के लिए यह निष्कर्ष निकाला है कि एक ही सिद्धांत रियल एस्टेट अधिनियम के तहत उक्त मामलों में लागू हो सकता है, जो कि गृहकेताओं एवं बिल्डरों के बीच विवादों के समाधान के लिए एक विशेष तंत्र प्रदान करता है। उपरोक्त प्रतिपादित सिद्धांतों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा आर्बिट्रेटर को संदर्भित करने का प्रश्न स्वतः समाप्त हो जाता है। तदनुसार बिन्दु to 6 Prana किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 7 शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी आज तक कब्जा नहीं दिया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्लॉट आवंटी अनुबन्ध दिनांक 22.09.2044 की प्रति दाखिल की गयी है, जिसके wars के अनुसार कब्जे हेतु सूचना दिये जाने की तिथि से 3 वर्ष में कब्जा दिये जाने का उल्लेख है। प्रश्नगत प्रकरण में कब्जे हेतु सूचना दिनांक 20.07.2046 को दी गयी है। ऐसे में यह कहना उचित नहीं होगा कि विपक्षी स्वेच्छानुसार कब्जा देगें। इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय के सिविल अपील संख्या 3533-3534 / 2047 मैसर्स फार्च्यून इन्फास्ट्रक्चर्स एवं अन्य बनाम ट्रेवर डेलिमा एवं अन्य के प्रस्तर 45 में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है fH
5.Moreover, a person cannot be made to wait indefinitely for the possession of the flats allotted to them and they are entitled to seek the refund of the amount paid by them, along with compensation. Although we are aware of the fact that when there was no delivery period stipulated in the agreement, a reasonable time has to be taken into consideration. In the facts and circumstances of this case, a time period of 3 years would have been reasonable for completion of the contract ie., the possession was required to be given by last quarter of 204. ष्स्टा 20 Further there is no dispute as to the fact that until now there is no redevelopment of the property. Hence, in view of the above discussion, which draw us to an irresistible conclusion that there is deficiency of service on the part of the appellants and accordingly the issue is answered. उपरोक्त माननीय उच्चतम न्यायालय के आर्ब्जवेशन एवं विधि व्यवस्था के अनुसार फ्लैट के कब्जे हेतु किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय तक प्रतीक्षा नहीं करा सकता, जहाँ अनुबन्ध में कब्जे की तिथि नहीं दी गयी है वहाँ तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए 3 वर्ष का समयावधि कार्य को पूर्ण कराये जाने हेतु उचित समय माना है। अनुबन्ध दिनांक 22.09.200 को निष्पादित कराया गया। ऐसे में उपरोक्तानुसार तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए 4 वर्ष की अवधि माना उचित होगा। उपरोकतानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 22.09.205 तक कब्जा पाने का अधिकारी है।
ऐसे में शिकायतकर्ता दिनांक 23.09.205 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की तिथि तक विलंबित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apriment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light Ye “a 274 of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable.
अतः: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20r6 के अधीन दिनांक 47.40.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wer 9.2 (ii) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +/% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wea 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ॥४टा7स्+] प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्ब के ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि विलंबित है, तो विपक्षी भी McLR+H प्रतिशत की दर से ही ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। wT 22 इस सम्बंध में सिविल अपील Wo 6649-50 // 2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- " the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent - Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी./सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो की तिथि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी.,/सी.सी मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये, जो भी बाद में हो तक अवधि पर ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। तद्नुसार बिन्दु सं०-7 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता को ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें एंव देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त नियमानुसार रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित करें।
2. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह दिनांक 23.09.205 से ओ. सी.,/ सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि के लिए शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर निमयानुसार वापस की जायेगी। oa 23 विपक्षी द्वारा अनुबन्धानुसार यदि कोई धनराशि भविष्य में शासन या किसी स्टेच्यूटरी wat को दी जाती है, तो प्रूफ ऑफ पेमेन्ट व शिकायतकर्ता का प्रो-रेटा शेयर उसके द्वारा देय होगा। पेरीफेरल / इन्फास्ट्रक्चरल डवलपमेन्ट चार्ज 4044 रूपये प्रति वर्ग गज़ के अनुसार गणना की जायेगी। कन्वर्जन चार्ज अनुबन्ध के प्रस्तर 4.4 में दी गयी है, जो कि 42 प्रतिशत विकय धनराशि की होगी और उसी के अनुसार देय होगी।
TER 44 के अनुसार बिजली /वाटर /सीवर आदि के मेन लाईन से कनेक्शन देते समय निर्धारित किये गये aso का भुगतान शिकायतकर्ता करेगें। इस विषय में शिकायतकर्ता को कनेक्शन देते समय विशिष्ट (Specific) Estimate के साथ धनराशि विपक्षी मांग सकते हैं तथा शिकायतकर्ता उसके सापेक्ष कार्य पूरा होने के बाद ऑडिटिड अकाउन्टस् मांग सकते है। इन हाउस सुपरविजन / एडिमिनिस्ट्रेडिव चार्जेज की धनराशि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एन.बी.सी.सी को fe याचिका संख्या-940 // 2047 बिकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में agra करायी है (अर्थात् 8 प्रतिशत) उससे अधिक धनराशि नहीं लेगें। यदि भविष्य में अन्य 220KVA या अधिक के सब-स्टेशन बनाने की आवश्यकता होती है, तो उसकी प्रो-रेटा धनराशि शिकायतकर्ता से प्राप्त करने का अधिकार विपक्षी को होगा तथा ge wer-4+7 में भी प्राविधानित है। इसकी भी पूर्ववत पृथक अकाउटिंग होगी व इन हाऊस एडमिन्सिट्रेटिव या सुपर विजन चार्जज 8 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगें। वाटर हारवेस्टिंग के सम्बन्ध में होने वाले व्यय के सम्बन्ध में यह स्पष्ट किया जाता है कि केता के प्रो-रेटा शेयर की सूचना उपलब्ध कराते हुए यह धनराशि ली जायेगी। क्लब का एस्टिमेट व प्रो-रेटा शेयर बताते हुए धनराशि मांगी जा सकती है। क्लब की रिकरिंग चार्जेज़, क्लब प्रारम्भ होने या प्लॉट का कब्जा ऑफर होने, जो भी बाद में हो, तभी से प्रारम्भ होगा। ww 24 9... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि उनके द्वारा शिकायतकर्ता से विभिन्न चार्जेज के मद ली गयी अतिरिक्त धनराशि उपरोकक्तानुसार समायोजित करते हुए 60 दिनों के अन्दर वापस करना सुनिश्चित करें। 40. विपक्षी उपरोक्तानुसार संशोधित कब्जा पत्र जारी करना सुनिश्चित करें।
44. विपक्षी द्वारा परियोजना को रेरा में पंजीकृत न कराये जाने पर सचिव, रेरा इस सम्बन्ध में विपक्षी के foes नियमानुसार कार्यवाही कराते हुए परियोजना को रेरा में पंजीकृत करायें। इस आदेश की एक प्रति सचिव, रेरा को अग्रेस्तर कार्यवाही हेतु प्रेषित की जाये। 42. इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र/भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक २४ / ॥ /2049 oo San \A (कल्पना मिश्रा) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण