Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mohd Waseem v. Sare Saamag Realty Private Limited
Complaint No. NCR145/040217/2019
- Decision date
- 2019-12-04
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर सुनवाई पीठ-3 श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष शिकायत सं०-एनसीआर445 / 040247 / 209 मौहम्मद वसीम बनाम सारे समग रियलटी प्राएलि0 प्रस्तुत मूल शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध बैंक को ईएमआई भुगतान कराये जाने व स्वयं द्वारा भुगतान की गयी ईएमआई की धनराशि एवं ब्याज सहित मूल धनराशि वापस दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Spring View प्लं8॥७ में फ्लैट नं० “सी” 203 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा रु 33,49,994/ का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता व विपक्षी के मध्य दिनांक 27.0i.20I6 को फ्लैट gay एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया गया, जिसके अनुसार यूनिट का अगस्त 2047 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ। अतः शिकायतकर्ता द्वारा बैंक को ईएमआई भुगतान कराये जाने व स्वयं द्वारा भुगतान की गयी ईएमआई की धनराशि वापस दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र, त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र, प्रतिउत्तर,, लिखित बहस, oo: परियोजना की फोटो व जमा की गयी धनराशि की रसीदें की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में प्रतिवाद पत्र, शपथ पत्र, अनुबंध पत्र, की प्रति प्रस्तुत की गयी।
विपक्षी ने अपने प्रतिवादपत्र के Reply to the complaint के प्रस्तर संख्या 2 में यह अंकित किया है कि “The development of the subject is under progress and construction of the project has been completed up to 53 percent which shows the bonafide of the Respondent. The project of the the respondent is registered with RERA beaing No UPRERAPRJ 3863. As per the registration certificate, the respondent has been allowed to complete the project till 3r.0.2020. 4 Reply to the Relief Sought के प्रस्तर संख्या 4 व 3 में यह अंकित है कि “The Respondent confirms the Pre-EMI interest Subvention Payment Scheme opted by the complainant. The scheme is valid till the date of offer of possession of the flat by the company. The Respondent shall be bearing the Pre-EMI interest on Home Loan till date of offer of the possession of the flat. The respondent will adjust the amount of Pre-EMI from the last balance which is to be paid by the complainant at the time of possession." विषक्षी द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र के प्रस्तर संख्या 5 में भी यह उल्लेख किया गया है कि / The development/construction of the subject project is under progress and the construction work has been completed unto 53 percent. The respondent is trying its best to complete the project as soon as possible till 3r.0r.2020. "’ शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत प्रतिउत्तर में यह कथन किया गया है कि विपक्षी की परियोजना में उक्त यूनिट संवेंशन प्लान के अन्तर्गत बुक की गयी थी। परियोजना लगभग दो साल से अधिक Ol 2
विलम्बित है। विपक्षी निर्धारित समय सीमा में यूनिट का कब्जा देने में असफल रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित निर्णय Bikram Chatterjee and Ors Vs Union of India, WP (C) No 940 of 2०7 का हवाला भी दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज, भुगतान की गयी ईएमआई की धनराशि दिलाये जाने व प्रतिपूर्ति दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत लिखित बहस दिनांक 04.20. 20i9 & WER संख्या 2, 7 व 9 में यह उल्लेख है कि विपक्षी ने स्वयं स्वीकार किया है कि परियोजना में केवल 53 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है और परियोजना पूर्ण नहीं है। इसलिए शिकायतकर्ता अंतहीन प्रतीक्षा नहीं कर सकता है जिसके संदर्भ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित निर्णय कोलकता वेस्ट इन्टरनेशनल सिटी प्रा.लि. बनाम देवाशीष war का संदर्भ प्रस्तुत किया है। प्रस्तर संख्या 7 "" that the respondent company is in contravention with section 7908) of RERA 2०6,५१९० respondent is liable and duty bound to pay all outgoings until he transfers the physical possession of the real estate project to the allottee or the associations of allottees,as the case may be,which he has collected from the allottees,for the payments of outgoings (including land cost,ground rent,municipal or other local taxes ,charges for water or electricity,maintenance charges, including mortgage loan and interest on mortgages or other encumbrances and such other liabilities payable to competent authorities,banks and financial
institutions which are related to the project.” UWI संख्या 9 में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित निर्णय विकम चटर्जी और y अन्य बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया, Re पिटीशन (सी) 940 / 2047 का संदर्भ अंकित है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये गये :- बिन्द् dens: क्या परियोजना विलम्बित है ? बिन्दु संख्या 2: क्या शिकायतकर्ता ईएमआई की धनराशि पाने का अधिकारी है? बिन्दु संख्या 3: क्या शिकायतकर्ता कब्जा के समय विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु संख्या 4 यहाँ यह अवगत कराना समीचीन है कि विचाराधीन यूनिट के सम्बंध में दिनांक 27.0i.20:6 को शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पर हस्ताक्षर किया गया था जिसके प्रस्तर 4.॥ के अनुसार शिकायतकर्ता को 34 अगस्त 2047 तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था तथा कब्जे में विलम्ब के मामलें में, 6 माह के अतिरिक्त अवधि का भी प्राविधान है। इस प्रकार 3 मार्च 208 के बाद से विलम्ब राशि दिये जाने का प्राविधान है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा अभी तक नहीं दिया गया। विपक्षी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवादपत्र व शपथ पत्र में परियोजना विलम्ब होने के सम्बंध में ऐसा कोई विस्तृत तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किन कारणों से परियोजना विलम्बित है। प्रस्तुत प्रतिवादपत्र में मात्र यह अंकित किया गया है कि 53 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और 4 शिकायतकर्ता को जनवरी 2020 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जायेगा। इससे स्पष्ट होता है कि विपक्षी की परियोजना विलम्बित है | Tega वाद बिन्दु संख्या 4 निर्णीत की जाती है।
निस्तारण बिन्दु संख्या 2 : पत्रावली पर उपलब्ध अनुबंध पत्र का परिशीलन किया गया जिसके प्रस्तर संख्या 3.7 के सब-क्लाज 3. 7.4 में यह अंकित है कि “Party of the second part understand that Pre EMI interest till आ5६ August २207 or date of offer of possession, whichever is earlier, is to the account of the Party of the First Part.” आवेदन पत्र के WR संख्या 5 के उप प्रस्तर “डी” में यह अंकित है कि “Intending Allottee understand that company shall directly pay to the Bank, interest accrued on the .disbursement, on behalf of the intending Allottee till आ5६ August 2०7 or the date of offer of Possession, whichever is earlier and no EMI or interest shall be payable by the intending Allottee till such date. “शिकायतकर्ता द्वारा अवगत कराया गया कि विपक्षी द्वारा ईएमआई का ब्याज भुगतान नहीं किया जा रहा है। sat से ऐसा प्रतीत होता है कि विपक्षी द्वारा 34.08.2047 तक ब्याज अथवा ई. एम.आई देने का अनुबंध किया था तथापि दिनांक 9.5.49 के उत्तर में बिल्डर की ओर से पुष्टि की गई कि प्री.ई.एम.आई ब्याज संवेंशन स्कीम कब्जे देने की तिथि तक लागू रहेगी तथा यह धनराशि बिल्डर शिकायतकर्ता द्वारा देय अंतिम भुगतान में समायोजित करेंगे क्योंकि रियल wee सेक्टर के वर्तमान संकट के कारण वे परियोजना पूर्ण होने तक परियोजना से धनराशि नहीं निकाल सकते अन्यथा परियोजना पूर्ण करने में कठिनाई होगी। इस प्रकार उपलब्ध प्रपत्रों से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता ईएमआई धनराशि -२८ पाने का अधिकारी है। तद्नुसार वाद बिन्दु संख्या 2 निर्णीत की जाती है। निस्तारण बिन्दु संख्या 3 पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य से स्पष्ट
है कि शिकायतकर्ता व विपक्षी के मध्य दिनांक 27.04.20:6 को आवंटन पत्र पर हस्ताक्षर किया गया था जिसके अनुसार 6 माह ta पीरिएड के साथ शिकायतकर्ता को 27 फरवरी 2048 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त हो जाना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवादपत्र व शपथ पत्र में परियोजना विलम्ब होने के सम्बंध में ऐसा कोई तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किन कारणों से परियोजना विलम्बित है। प्रस्तुत प्रतिवादपत्र में मात्र यह अंकित किया गया है कि 53 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और शिकायतकर्ता को जनवरी 2020 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध करा दिया जायेगा। इससे स्पष्ट होता है कि विपक्षी की परियोजना विलम्बित है और शिकायतकर्ता विलम्ब अवधि के लिए विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 787) (0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration OS
under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। इस सम्बंध में सिविल अपील wo 6649-50 2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "The period of Interest should close on April 2076 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 46) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 2076, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 4. 7
2046 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने व कब्जा ऑफर करने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में उक्त शिकायतकर्ता मात्र ओ.सी./सी.सी अथवा कब्जा किये जाने की तिथि तक, जो भी बाद में हो के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय ,/ पटटा के लिए करार) नियमावली 20:8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय //पटटा विलेख के प्रारूप के we 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9 (ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः-- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +/% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर g(iii) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को dI 8
MCLR+] प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि विलंबित है, तो विपक्षी भी MCLR+] प्रतिशत की दर से ही ब्याज पाने का अधिकारी होगा GTA वाद बिन्दु संख्या 3 निर्णीत की जाती है। विश्लेषण :- उपरोक्त विचारण बिन्दुओं के निस्तारण में प्रस्तुत हुये साक्ष्यों एवं तर्को से स्पष्ट होता है कि शिकायतकर्ता को अभी तक यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी ने प्रस्तुत प्रतिवादपत्र में यह उल्लेख किया है कि परियोजना में लगभग 53 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और परियोजना पूर्ण करके शिकायतकर्ता को जनवरी 2020 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध करा दिया जाएगा। पत्रावली पर उपलब्ध रेरा तकनीकी दल द्वारा प्रस्तुत wee जाँच आख्या में यह अंकित है कि मानचित्र के अनुसार कुल 6 टाँवर है, जो टॉवर A,C,D,E,F (8+$+74) है। स्थलीय निरीक्षण के दौरान देखा गया कि टॉवर A,C,D,E,F के wre कार्य (5+5+4) पूर्ण है एवं छ टॉवर में केवल 42 फ्लोर तक स्ट्रक््चर्ल कार्य किये गये है एवं 6 cat में लगभग 65 प्रतिशत ब्रिक वर्क किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत लिखित बहस में जमा धनराशि मय ब्याज, ईएमआई धनराशि व प्रतिपूर्ति दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। रेरा अधिनियम की धारा 44(4) प्राविधानित है कि:- (4) The promoter shall— (a) be responsible for all obligations, responsibilties and functions under the Provisions of this Act or the rules and regulations made thereunder or to the allottees as per the agreement for 9
sale, or to the association of allottees, as the case may be, till the conveyance of all the apartments, plots or buildings, as the case may be, to the allottees, or the common areas to the association of allottees or the competent authority, as the case may be: इसी प्रकार धारा 32 4 रियल see सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्यों में निम्न भी सम्मिलित हैं :- “32. The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion of a healthy, transparent, efficient and competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be, on,— (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate agent........ (@any other issue that the Authority may think necessary for the promotion of the real estate sector.” उक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि “रियल एस्टेट सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके सभी RH Breed के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस ऑथरिटी का है। इस सम्बन्ध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 744/20:7 चित्रा शर्मा आदिं बनाम यूनियन ऑफ इंडिया आंदि में किया गया आब्जरवेशन महत्वपूर्ण है कि :- "40. As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to YY ४
the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers have earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund of monies deserves to be considered with empathy. Yet, having given our anxious consideration to the plea and on the balance, we are not inclined to accede to it for more than one reason. Firstly ............... Secondly, the Sigures which have been made available presently, Sollowing the opening of the Web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund," उक्त प्रस्तरों में उद्धरत “ऑबजरवेशनस्” एवं रेरा एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबजेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम ॥ 44
लाईन”, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ We के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य “स्टेक होल्डर्स”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पज़ेशन डेट” के विषय में “कन्सेन्सस्” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। समस्त परिस्थितियों को देखते यदि विपक्षी द्वारा अपनी परियोजना में जिसके टॉवर पूर्ण हैं का प्रस्ताव दिया जा रहा है, तो ऐसे में यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता वैकल्पिक यूनिट का कब्जा प्राप्त करने में विचार करें। उसके बाद फ्लैट के भविष्य में उपयोग के सम्बन्ध में वे निर्णय ले सकते है। निश्चय ही परियोजना में बने रहने की दशा में एलॉटीज़ को विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि यदि शिकायतकर्ता को उसके द्वारा जमा की गयी धनराशि को वापस कर दिया जाता है तो उस स्थिति में अन्य केताओं के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जो यूनिट का कब्जा चाहते है। जहां तक शिकायतकर्ता द्वारा मानसिक उत्पीड़न व आर्थिक हानि के संदर्भ में प्रतिपूर्ति चाही गयी है वह रेरा अधिनियम की धारा 42, 44, 48 व 4१9 के अन्तर्गत नहीं आती जिस कारण प्रतिपूर्ति के सम्बंध में प्रस्तुत वाद न््यायनिर्णयक अधिकारी के समक्ष संदर्भित किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। J 2 आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि शिकायतकर्ता को आवंटित इकाई का कब्जा (physical possession) ait. सी /सी.सी के साथ जनवरी 2020 तक उपलब्ध करायें।
विपक्षी व शिकायतकर्ता के मध्य हुये हस्ताक्षारित आवंटन पत्र में उल्लेखित विलम्बित अवधि का ब्याज दिनांक 28.02. 20i8 से ओ.सीं प्राप्त होने की तिथि या ऑफर ऑफ पजेशन जो भी बाद में हो, तक meray की ब्याज भुगतान करेगा। इस धनराशि को कब्जा दिये जाने के समय अंतिम देय धनराशि में समायोजित (adjust) किया जायेगा। विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि कब्जा ऑफर करने की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा बैंक को भुगतान की गयी प्री.ईइएमआई की धनराशि अंतिम देय धनराशि में समायोजित करें। शिकायतकर्ता द्वारा यदि कोई धनराशि का भुगतान करना शेष है तो रेर अधिनियम की धारा 2(79)6) के अधीन उस विलम्बित अवधि का ब्याज विपक्षी प्राप्त करने का अधिकारी है परन्तु ब्याज meres की दर से अधिक देय नहीं होगा। यदि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को जनवरी 2020 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो ऐसी स्थिति में शिकातयकर्ता द्वारा जमा की गयी समस्त धनराशि 43 रु0 33,49,994,// जमा करने की तिथि से भुगतान करने की तिथि तक मय ब्याज McLRH% की दर से जनवरी 2020 के उपरांत 45 दिन के अन्दर विपक्षी भुगतान करेगा। यदि उक्त धनराशि के सम्बंध में बैंक से ऋण प्राप्त है तो बैंक की मूल धनराशि मय ब्याज बैंक को तथा अवशेष धनराशि शिकायतकर्ता को विपक्षी भुगतान करेगा। इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक 257 \) / 2049 (राजीव कुमार) अध्यक्ष उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण 44