Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Deepak Jyoti v. Project Category-Un-Register Ansal Landmark Townships Pvt. Ltd
Complaint No. NCR145/04/0873/2019
- Decision date
- 2019-12-24
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
==. | भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-02 उपस्थिति:- श्री बलविन्दर कुमार, सदस्य (xl) शिकायत संख्या : ९८१२45/04/0873/209 दीपक ज्योति C- 402, Swagatam Apartment, C-58/7, Sector-62, Noida aaa शिकायतकर्ता बनाम अंसल लैण्डमार्क टाउनशिप wo feo l. 8-98 Ashok Vihar, Phase-I, Delhi-0052 2. A-48 Hauz Khas New Delhi-!006 प्रतिवादी प्रस्तुत वाद शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिवादी के विरूद्ध बुक की गई यूनिट के सम्बन्ध में कब्जा मय विलम्बित अवधि का दण्ड ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। अधिसूचित अंसल इंटीग्रेटेड टाउनशिप Sushant Aquapolis राजस्व ग्राम डूण्डाहेडा जनपद में शिकायतकर्ता आगामी शिकायतकर्ता शिकायतकर्ता मय विलम्बित अवधि का दण्ड बुक की थी और जिसमें प्रतिवादी द्वारा यह बताया गया था कि उसे कब्जा संक्षिप्त में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिवादी की नपद गाजियाबाद मे यूनिट Wo-c-00i6 को बुक किया गया था, जिसके एवज शिकायतकर्ता ने प्रतिवादी को Gi5,362I9/- भुगतान किया था कायतकर्ता ने कथन किया है कि उसने दिनांक 06.07.2007 को उक्त यूनिट गामी 2 वर्षों में दे दिया जायेगा, परन्तु दोनों पक्षों के मध्य दिनांक 07.09.2074 को अनुबन्ध-पत्र हस्ताक्षरित किया गया था। शिकायतकर्ता ने अनुबन्ध-पत्र के अनुसार परियोजना के पूर्ण होने की तिथि 34.04.2009 अंकित की है। कायतकर्ता द्वारा यह भी कथन किया गया कि परियोजना में निर्माण कार्य पूर्ण करने में विलम्ब किया जा रहा है और कब्जा नहीं दिया जा रहा है। अतः कायतकर्ता द्वारा पीठ के समक्ष उपस्थित होकर बुक की गई यूनिट पर कब्जा आज Ra जाने का oes RAYA दिलाये जाने का अनुरोध किया ear fal CO
| भा ।+ | द्वारा वादपत्र के समर्थन में अनुबन्ध-पत्र, जमा की गयी धनराशि की रसीदें आदि प्रपत्रों की छायाप्रति दाखिल किये गये। प्राधिकरण की ओर से प्रतिवादी को नोटिस जारी किये गये और जिसकी तामील प्रतिवादी द्वारा सम्यक रूप से की प्रतिवाद पत्र दाखिल किया गया जिसमें यह कथन किया गया कि विकासकर्ता गयी। प्रतिवादी द्वारा नियत तिथि पर कम्पनी उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा (नियमन एवं विकास) नियमावली 2046 की धारा-2 के अधीन होने के कारण पंजीकृत नहीं है, द्वारा अधिसूचित अंसल इन्टीग्रेटेड टाउनशिप geist एक्वापॉलिस राजस्व ग्राम डूण्डाहेड़ा जनपद गाजियाबाद उत्तर प्रदेश में स्थित है प्रतिवाद-पत्र के प्रस्तर-4 में यह कथन किया गया कि- उक्त प्लाट का विकास कार्य गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहित भूमि पर किया जाना था, जोकि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने दिनांक 04.42.2043 को विक्रय प्रपत्र संख्या-40532 में विकासकर्ता कम्पनी को किया जा चुका है तथा कम्पनी के द्वारा अंकन धनराशि रु.22,62,42,426 /— भुगतान गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को पूर्व में किया था। प्रतिवाद-पत्र के प्रस्तर-5 में यह के x 20i3 के गाजियाबाद विकास प्राधिकरण विकासकर्ता कम्पनी उत्तर प्रदेश शासन कथन किया गया कि- दिनांक 30.08. द्वारा भूमि पर भौतिक कब्जे हेतु पत्र प्रेषित किया गया है। तदोपरांत विकासकर्ता कम्पनी द्वारा लगभग विकासकार्यो को पूर्ण भी किया जा चुका है। प्रतिवाद-पत्र के प्रस्तर-6 में यह कथन किया गया कि- दिनांक 24.22. 20i6 को माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा Re पिटीसन संख्या-- 335/20i2 में यह आदेशित किया गया कि उक्त भूमि अधिग्रहण निरस्त किया
गया है। जिसके परिणाम स्वरूप शिकायकर्ता के द्वारा उक्त प्लाट के परिप्रेक्ष्य में घनराशि का व्यय भूमि क्रय करने तथा विकासकार्यो में किया जा चुका है। प्रतिवाद-पत्र के प्रस्तर-7 में यह कथन किया गया कि- उक्त प्लाट भू-सम्पदा (नियमन एवं विकास) fraaraci—2zore की धारा-2 की उपधारा- H ae अन्तर्गत होने के कारण भू-सम्पदा (नियमन एवं विकास) अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत नहीं है। दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत तर्कों को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन किया पत्रावली अवलोकन से विदित है कि शिकायतकर्ता को अधिसूचित अंसल इंटीग्रेटेड टाउनशिप Sushant Aquapolis राजस्व ग्राम डृण्डाहेड़ा जनपद गाजियाबाद की यूनिट Wo-C-006 पर कब्जा अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। प्रतिवादी द्वारा अपने प्रतिवाद-पत्र में यह कथन किया गया है कि विकासकर्ता कम्पनी द्वारा लगभग विकासकार्यो को पूर्ण भी किया जा चुका है और शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि का उपभोग किया गया है। शिकायतकर्ता ने परियोजना में पूर्व में बुक की गयी यूनिट अथवा कोई समकक्ष यूनिट पूर्व में बुक की गयी यूनिट के रेट पर कब्जा देने हेतु अनुरोध किया गया है। इससे यह प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ता कब्जा प्राप्त करने का इच्छुक है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को कब्जा दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस संबंध में उललेखित है। इस सम्बन्ध में यह उल्लेखित है कि- रेरा अधिनियम की धारा 34 में रेरा के अन्य "HART! के साथ--साथ "(0 ensure compliance of the obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents under this Act and the rules and regulations made thereunder" का भी उल्लेख है |
इसी प्रकार धारा 32 में रियल gece सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्यों में निम्न भी सम्मिलित हैं :- “Section 32. The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion of a healthy, transparent, efficient and competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be, on,~ (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate (any other issue that the Authority may think necessary for the promotion of the real estate sector.” उक्त प्राविधानों से यह we है कि “रियल wee सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके सभी ea dest के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस ऑथरिटी का है। एलोटीज द्वारा धनराशि वापस किए जाने व परियोजना में बने रहने वाले एलोटीज किन कल गन टी हितों में ager के प्रसंग में “चित्रा शर्मा बनाम यूनियन ऑफ़ 4 | अमिता | /20i7) & निर्णय में मा. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय के प्रस्तर 40 में निम्न ऑबजरवेशन किया है —
40. As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers have earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund of monies deserves to be | considered with empathy. Yet. having given | our anxious consideration to the plea and on the balance, we are not inclined to accede to it for more than one reason. Firstly ............... Secondly, the figures which have been made available presently, following the opening of the Web portal by the amicus curiac, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monics while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would | also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund."
मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उक्त प्रस्तरों में उद्धरत “ऑबजरवेशनस्” एवं रेरा एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबजेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन", प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य “ea Host’, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पजेशन डेट” के विषय में “कन्सेन्सस्” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। ऐसे में यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता फ्लैट का कब्जा लेने पर te करें। Ral Page 4 अरमान | ही परियोजना शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना में निवेश फ्लैट के कब्जे हेतु किया गया है। में बने रहने की दशा में एलॉटीज़ को विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। जिससे की आवेदक को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा कुछ सिद्धान्त विनियमित किये गये हैं राहत के रूप में विलम्ब से कब्जे मिलने एवं न मिलने के सम्बंध में निर्णय दिया गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा “बैंगलोर डेवलपमेन्ट एथॉरिटी बनाम सिंडीकेट बैंक” 2007 सी.टी.जे. 689 (एस.सी.) प्रस्तुत किया गया है, जिसमें माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है " Where an alternative site is offered or delivered (at the agreed price) in view of its inabilily to deliver the
earlier allotted plot/flat/house, or where the delay in delivering possession of the allotted plot/Hat/house is for justifiable reasons, ordinarily the allottee will not be entit because value, " led to any interest or compensation. This is the buyer has the benefit of appreciation in उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि आवंटी को अन्य कोई विकल्प दिया जाता है अधिकारी नहीं है। इस मूल्य में अभिवृद्धि हुई है , तो वह अन्य किसी ब्याज अथवा क्षतिपूर्ति पाने का निर्णय की मूल अवधारणा है कि इस अवधि में सम्पत्ति के | जिसका लाभ क्रेता को प्राप्त हुआ होगा। यह निर्णय रेरा अधिनियम के लागू होने वैसे भी विगत वर्षों में रियल स्टेट की स्थिति देखते हुए प्रत्येक मामले में ऐसा अवधारित नहीं किया जा सकता कि प्रोपर्टी की दरों में अभिवृद्धि हुई होगी ऐसी दशा में तथ्यों एवं परिरि प्रश्नगत प्रकरण पर लागू से पूर्व का है एवं रेरा की धारा १8 के प्रावधान स्पष्ट है fea की भिन्नता के कारण उपरोक्त विधि व्यवस्था नहीं होती है। शिकायतकर्ता धनराशि पाने का अधिकारी है, रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है उसी दर से धनराशि देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :- For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. I have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 4, 38, 59, 60, 67, 63 and 64 is to be levied on
account of contravention of rape 20८20: of RERA, prospectively and not retrospectively. ee न + न नस -नननन+--। ee उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 04.05.2046) से पूर्व अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक 0.05.20I6 WR के प्राविधानों के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नही है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील Yio 6649-50 /20:8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल” में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent - Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent - Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent - Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession, "
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी. मिलने एवं कब्जा दिये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। जहां तक शिकायतकर्ता को मय ब्याज धनराशि वापस किये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के “नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि — Section I8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer — rie age 6 , का account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project. without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's. delay till handing over of the possession.. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable.
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा saa धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20i6 के अधीन दिनांक 47.:0.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय/पटटा के लिए करार) नियमावली 20:8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: 4) Qc Page 7 OO दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर धनराशि वापस दिलाये जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। आदेश
l- प्रतिवादी को आदेशित किया जाता है कि वह प्रश्नगत परियोजना में समस्त निर्माण कार्य पूर्ण करते हुए शिकायतकर्ता की सहमति से यूनिट संख्या- C-00I6 अथवा किसी समकक्ष इकाई पर पूर्व में बुक की गयी | यूनिट के रेट पर कब्जा आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 4 माह के अन्त तक प्राप्त कराना सुनश्चित करे ॥ 2. साथ ही शिकायतकर्ता व प्रमोटर के बीच हुये हस्ताक्षरित Builder Buyer Agreement (BBA) के अनुसार विलम्बित अवधि / delayed period के सम्बंध में दिनांक 30.04.20I6 तक BBA में उल्लिखित @s/penalty के अनुसार तथा दिनांक 07.05.20i6 (Real Estate Regulation & Development. Act 20I6 के लागू होने की तिथि) से MCLR + % की दर से प्रमोटर द्वारा दण्ड ब्याज occupation certificate/C.C, प्राप्त होने की तिथि तक अदा किया जाएगा। ब्याज की इस धनराशि को कब्जा दिये जाने के समय अंतिम देय धनराशि में समायोजित की जाएगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार वापस की जायेगी 3. यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 20i6 के धारा 2(2०)() के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित्त किया गया है कि यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रमोटर द्वारा डिफाल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा और यदि शिकायतकर्ता द्वारा कोई धनराशि का भुगतान करना शेष है तो उस विलम्बित अवधि का ब्याज प्रतिवादी प्राप्त करने का अधिकारी है, परन्तु ब्याज MCLR+I% की दर से अधिक देय नहीं होगा। 4. शिकायतकर्ता को प्रतिपूर्ति (compensation) YET करने का अधिकार नहीं होगा।
प्रतिवादी प्रमोटर द्वारा आदेश का अनुपालन न किये जाने पर शिकायतकर्ता /आवंटी को यह अधिकार होगा कि उ0.प्र0. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन करा सके | et CC या आदेश का उल्लघंन उ0प्र0/भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक:--46.42.2049 da (८६ (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 9