Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Vikas Agarwal v. Uppal Chadha Hi-Tech Developers Pvt. Ltd
Complaint No. NCR145/03/72116/2021
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
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- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the complainant)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority Regional Office, H-469, Gamma-2, Greater Noida, Gautam Buddha Nagar-204308. Hearing Bench-04 (formerly Bench-04-A) Mr. Sanjay R. Bhoosreddy, Hon'ble Chairman Complaint Number: NCR45/03/7216/2021 Vikas Agarwal versus Uppal Chadha Hi-Tech Developers Pvt. Ltd. Order under Section-38, 40 and 63 The complaint of the applicant / complainant was presented for final arguments through video conferencing on 22-05-2026. On call, proxy advocate Mr. Puneet Jain appeared on behalf of learned advocate Mr. Manendra Kumar for the applicant / complainant and learned advocate Mr. Asit Kumar appeared on behalf of the respondent. Thereupon, hearing the arguments of the learned advocates of both parties in detail, the Bench reserved the file for orders on 22--05--2026 itself. The main objective of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 20:6 is to protect the interests of consumers in the real estate sector and to ensure speedy disposal of disputes. For fulfilling this objective, duties and powers have been conferred on the Authority under the RERA Act. Section-34(8) of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2046 mentions the functions of the Authority. Section-34(8) contains the following provision:- "34(g) - to ensure compliance of its regulations or orders or directions made in exercise of its powers under this Act;"
According to the provision of Section-38 of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2046, the Authority has been given the power that if the promoter violates the obligations cast upon it, the Authority may impose penalty or interest under the rules and regulations made thereunder. Section-38 of the RERA Act is as follows:- Page | of 6 E-Court "38. (7) The Authority shall have powers to impose penalty or interest, in regard to any contravention of obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents, under this Act or the rules and the regulations made thereunder. (2) The Authority shall be guided by the principles of natural justice and, subject to the other provisions of this Act and the rules made thereunder, the Authority shall have powers to regulate its own procedure. (3) Where an issue is raised relating to agreement, action, omission, practice or procedure that— (a) has an appreciable prevention, restriction or distortion of competition in connection with the development of a real estate project; or (b) has effect of market power of monopoly situation being abused for affecting interest of allottees adversely, then the Authority, may suo motu, make reference in respect of such issue to the Competition Commission of India." Section-40 of the RERA Act is as follows:-
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, एच-469, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गोौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई पीठ-04 (पूर्व में पीठ--04-ए) श्री संजय आर. भूसरेड्डी, माननीय अध्यक्ष शिकायत संख्या: |२९॥२।45/03/72] 6/202| विकास अग्रवाल बनाम उप्पल चडढा हाई-टेक डेवलपर्स प्रा. लि. आदेश अन्तर्गत धारा-38, 40 एवं 63 ः /शिकायतकर्ता का परिवाद अंतिम बहस हेतु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग क॑ माध्यम से दिनांक 22-05-2026 को प्रस्तुत किया गया। पुकार पर प्रार्थी / शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री मनेन्द्र कुमार के प्रॉक्सी अधिवक्ता श्री पुनीत जैन उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री असित कुमार उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा sua पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के तर्को को विस्तार से सुनते हुए, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 22--05--2026 को ही सुरक्षित की गयी। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 का मुख्य उद्देश्य यह है कि भू-सम्पदा सेक्टर में उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण किया जाए तथा विवादों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। इस उददेश्य की पूर्ति हेतु प्राधिकरण को रेरा अधिनियम के | अन्तर्गत दायित्व तथा शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं। धारा-34(8), भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 में प्राधिकरण के कृत्यों का उल्लेख किया गया है। धारा-34(४) में निम्नलिखित प्राविधान हैः- "34(g) - to ensure compliance of its regulations or orders or directions made in exercise of its powers under this Act;"
धारा-38, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 के कह के अनुसार प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि प्रोमोटर द्वारा उस पर डाली गयी बाध्यताओं का उल्लंघन किया जाता है, तो प्राधिकरण इस अधिनियम और उसके अधीन Page | of 6 E-Court | बनाए गए नियमों एवं विनियमों के अधीन dared) या ब्याज अधिरोपित कर सकता है। धारा-38, रेरा अधिनियम निम्नवत् है:- "38. (7) The Authority shall have powers to impose penalty or interest, in regard to any contravention of obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents, under this Act or the rules and the regulations made thereunder. (2) The Authority shall be guided by the principles of natural justice and, subject to the other provisions of this Act and the rules made thereunder, the Authority shall have powers to regulate its own procedure. (3) Where an issue is raised relating to agreement, action, omission, practice or procedure that— (a) has an appreciable prevention, restriction or distortion of competition in connection with the development of a real estate project; or (b) has effect of market power of monopoly situation being abused for affecting interest of allottees adversely, then the Authority, may suo motu, make reference in respect of such issue to the Competition Commission of India." रेरा अधिनियम की धारा-40 निम्नवत् है:-
40, (/) If a promoter or an allottee or a real estate agent, as the case may be, fails to pay any interest or penalty or compensation imposed on him, by the adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate Authority, as the case may be, under this Act or the rules and regulations made thereunder, it shall be recoverable from such promoter or allottee or real estate agent, in such manner as may be prescribed as an arrears of land revenue. (2) If any adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate Tribunal, as the case may be, issues any order or directs any person to do any act, or refrain from doing any act, which it is empowered to do under this Act or the rules or regulations made thereunder, then in case of failure by any person to comply with such order or direction, the same shall be enforced, in such manner as may be prescribed. धारा--63, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 में प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि यदि प्रोमोटर प्राधिकरण के आदेश का अनुपालन करने में असमर्थ रहता है, तो प्राधिकरण प्रोमोटर के विरूद्ध प्रोमोटर की भू-सम्पदा परियोजना की अनुमानित लागत का 05 प्रतिशत तक taredt लगा सकता है। धारा-63 निम्नवत है:- “63. If any promoter, who fails to comply with, or contravenes any of the orders or directions of the Authority, he shall be liable to a penalty for every is Page 2 of 6 Pe || Ee; | बम... "4.2 शक अली कफ कल अल तन कान during which such default continues, which may cumulatively extend
up to five per cent., of the estimated cost of the real estate project as determined by the Authority.” यहाँ यह उल्लेखनीय है कि धारा-40, भू-सम्पदा (विनियमन एवं है अधिनियम, 20I6 के अध्याय-5 के अन्तर्गत आता है, जो कि भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण से सम्बन्धित है तथा धारा-63, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, | 2046 के अध्याय-8 के अन्तर्गत आता है, जोकि अपराध, शास्तियाँ और न्यायनिर्णयन से. सम्बन्धित है। उपरोक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम के अन्तर्गत प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि प्राधिकरण प्रोमोटर द्वारा आदेशों का अनुपालन न करने पर धारा-40 के अन्तर्गत अपने आदेशों का क्रियान्वयन कराए तथा धारा--63 के अन्तर्गत प्रोमोटर पर अर्थदण्ड लगाए। प्राधिकरण दोनों कार्यवाही एक साथ कर सकता | है। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा रेरा पोर्टल के माध्यम से आदेश क्रियान्वयन कराये जाने हेतु आवेदन किया गया, जिस पर प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को नोटिस जारी करते हुए दिनांक 30-09-2022 तक पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 25-05-2022 का अनुपालन कर, “अनुपालन ARAM" प्रस्तुत करने हेतु निर्देश दिये गये, परन्तु विपक्षी द्वारा “अनुपालन आख्या” उपलब्ध नहीं करायी गयी। प्राधिकरण द्वारा कारण दर्शाओं नोटिस, दिनांक 07-40-2022 को जारी करते हुए विपक्षी को निर्देशित किया गया है कि वह दिनांक 25-40-2022 तक उक्त आदेश का अनुपालन कर, अनुपालन ARM प्रस्तुत करने हेतु निर्देश दिये गये, परन्तु विपक्षी द्वारा कोई “अनुपालन आख्या” दाखिल नहीं किया गया हे।
चूंकि विपक्षी कम्पनी द्वारा मा. अपीलीय अधिकरण, लखनऊ के समक्ष अपील संख्या: 400/2023 योजित की गयी थी, जिसका निस्तारण मा. अपीलीय अधिकरण द्वारा अपने आदेश, दिनांक 02-42-2024 को किया गया, तत्पश्चात् प्रार्थी / शिकायतकर्ता द्वारा प्रार्थना-पत्र, दिनांक 04--06-2025 दाखिल करते हुए प्रश्नगत प्रकरण में धारा-38, 40 एवं 63 के अन्तर्गत अग्रिम कार्यवाही किये जाने का अनुरोध किया गया, जिसके क्रम में पीठ द्वारा उक्त प्रकरण को धारा-38, 40 एवं 63 के अन्तर्गत पुनर्स्थापित किया गया और दिनांक 30-07-2025, दिनांक 24--0--2025, दिनांक 26-44-2025, दिनांक 44--03--2026 एवं दिनांक 22--05-2026 को की गयी। प्रकरण में प्रार्थी / शिकायतकर्ता द्वारा अपना लिखित जवाब, दिनांक 49--05--2026 दाखिल करते हुए, विपक्षी द्वारा प्रस्तुत अनुपालन आख्या में किये गये समस्त तथ्यों / अभिकथनों का पूर्ण रूप से खण्डन कर, अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों अभिकथनों का उल्लेख करते हुए, पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 25-05-2022 का पूर्ण रूप से अनुपालन कराये जाने का अनुरोध किया गया हे। Page 3 of 6 E-Court पा Se | WT उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के cat को विस्तार से सुना तथा अभिलेख WN उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं सामग्री का सम्यक परिशीलन किया । wd शिकायत के सम्बन्ध में पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत दिनाक 25--05--2022 को निम्नवत् आदेश पारित किये गये:-- 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता & कि वह शिकायतकर्ता के प्लॉट की समस्त glans को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 37-08-2029 तक MASA Blea कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टास्प शुल्क WT कर नियमानुसार रजिस्ट्री Bers |
2 विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनाक 27-/0-.2074 से ओसी सी सी प्राप्त किये जाने की fay अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो थी are में ह) तक Pl अवधि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLR+I प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करना छुनिश्वित Be) ब्याज की यह धनराधि अंतिम भुगतान की धनराशि में wad की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से ae होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स Acar पीरियड को GRETT रखते हुए | दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलस्ब eg ब्याज की यणना नहीं की जायेगी/ साथ ही यदि थिक्रायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) & तो उस पर थी इस अवधि का ब्याज देय न BT) 3. विपक्षी at यह निर्देशित fear जाता है कि er अधिनियय 2046 की धारा-26०)(9 को अनुसार Ae रेरा लागू होने के are कोर्ड ब्याज दर आवंटी के selec से ग्रोग्रोटर द्वारा लिया जाता है तो उसी दर से ब्याज ग्रोग्रेटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा/ अतः विलगम्बित भुगतान पर थिकायतकर्ता द्वारा भी ॥07.0+7 ग्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय BT) यदि इससे अधिक दर से ald धनराशि eer ary होने के बाद आवंटी से Row हेतु ली गयी हे; तो विलस्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की थी उसी दर से गणना की जायेगी | 4. इस आदेश का Gordy थू-सम्पद्ा (विनिययन तथा विकास) अधिनियम 2076 की धार-63 तथा अन्य Bard ग्राविधानों के अन्तर्गत दण्डनीय shar) आदेश Wed पर अपलोड fear ae | 5. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता & तो शिकायतकर्ता * cS, को यह अधिकार होगा कि रेस प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा WPT |”
उपर्युक्त पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 25-05-2022 के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि पीठ द्वारा विपक्षी कम्पनी को प्रस्तर-04 एवं 02 के अनुसार Page 4 of 6 (Ye { AV SI 7९५ E-Court दिनांक 34—-08—2022 तक प्रार्थी » शिकायतकर्ता के प्लॉट की समस्त सुविधाओं को ४ कराकर, ओ.सी. / सी.सी. सहित भौतिक कब्जा देते हुए, रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने तथा देय विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करने हेतु आदेशित किया गया था, परन्तु विपक्षी कम्पनी द्वारा दाखिल एवं पोर्टल पर अपलोडेड लिखित अनुपालन आख्या, दिनांक 09-03-2026 के साथ ऐसा कोई साक्ष्य / प्रमाण रेरा कम्प्लेन्ट पेज पर अपलोड एवं प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि पीठ द्वारा ats के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 25-05-2022 के अनुपालन में विपक्षी कम्पनी द्वारा वर्तमान समय में veil /“ शिकायतकर्ता को प्रश्नगत प्लॉट का भौतिक कब्जा देते हुए, अंतिम अकाउन्ट सैटेल कर, रजिस्ट्री निष्पादित करा दी गयी हो। अत: उपर्युक्त समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों के आलोक में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा अभी तक पीठ द्वारा पारित आदेश, दिनांक 25-05-2022 के किसी भी Tea का कोई अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया गया है। चूंकि रेरा नियमावली, 20i6 के नियम-24 सपठित सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश-24 में प्राधिकरण के आदेशों एवं निर्देशों को क्रियान्चित करने की रीति दी gg है।
अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों क॑ दृष्टिगत पत्रावली नियम-24 सपठित सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश-24 में निहित शक्तियों क॑ अधीन पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 25-05-2022 के प्रस्तर-04 के अनुसार प्रश्नगत प्लॉट के भौतिक कब्जे एवं रजिस्ट्री की कार्यवाही हेतु मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सुनवाई के लिए, दिनांक 47-09-2026 को संदर्भित की जाती है। जहाँ तक विपक्षी कम्पनी के कथनानुसार उनके द्वारा प्रश्नगत प्रकरण के सम्बन्ध में मा. अपीलीय अधिकरण, लखनऊ के समक्ष अपील संख्या: 400/2023 योजित की गयी थी, परन्तु sat अपील मा. अपीलीय अधिकरण, लखनऊ द्वारा अपने अंतिम आदेश, दिनांक 02--42--2024 के माध्यम से खारिज की जा चुकी है। अतः उपर्युक्त तथ्यों क आलोक में प्रश्नगत प्रकरण को वर्तमान में Abeyance में रखे जाने का कोई विधिक आधार एवं औचित्य नहीं है। अतः सचिव. उ प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 25--05-2022 के प्रस्तर-02 के stag ५७) अनुसार दिनांक 40-09-2026 Y पूर्व विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि @ ब्याज की (क) यदि मा. अपीलीय अधिकरण से उपर्युक्त अपील संख्या: 400/2023 के क्रम में रेरा प्राधिकरण के सम्बन्धित खाते में कोई धनराशि प्राप्त हुई है, तो उसे तत्काल प्रार्थी / शिकायतकर्ता के खाते में स्थानांतरित कर, पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश Page 5 of 6 EK -Court = & अनुसार विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि में घटाते हुए, अवशेष धनराशि की वसूली हेतु, नियमानुसार वसूली प्रमाण-पत्र जारी करायें |
(ख) यदि मा. अपीलीय अधिकरण से उपर्युक्त अपील संख्या: 400/2023 के क्रम में रेरा प्राधिकरण के सम्बन्धित खाते में कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई है, तो ऐसी स्थिति में पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश के प्रस्तर-02 के अनुसार विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की समस्त धनराशि की वसूली हेतु, नियमानुसार वसूली प्रमाण-पत्र जारी Hered | तदोपरान्त पत्रावली को सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। यदि मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी नियम-24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत धारा-34, दिनांक 25-05-2022 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये । दिनांक: 30--07-2026. Page 6 of 6