Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Nitu Singh and Himanshu Shishodia v. Pavitra Conbuild Private limited
Complaint No. NCR145/03/117854/2024
- Decision date
- 2026-02-13
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य | क्रम शिकायत संख्या = यूनिट so | जमा धनराशि vo | अनुबंध पत्र | अनुबंधानुसार वांछित io की तिथि कब्जा दिये अनुतोष * जाने की तिथि ; . | प्टार45/03778542024 | “iq सिंह व | va—04 | रु0 42,73,893 / | 30.05.20:7 | 42 माह यूनिट का हिमांशु अर्थात कब्जा व सिशोदिया नवम्बर 2020 | विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया | | है। बनाम पवित्रा कॉनबिल्ड. प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विप्रक्षी के विरुद्ध-यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु*यह शिकायत/संस्थित की गयीं है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना The Sapphire में Qe Cen va-i04. gamer गयी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि Bo 4273,893,/-का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित कथन दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में यूनिट संख्या va-t04 बुक करायी गयी थी जिसके सम्बन्ध में फ्लैट बायर एग्रीमेंट निष्पादित हुआ था। विपक्षी की परियोजना रेरा में पंजीकृत है जिसका पंजीयन संख्या यूपीरेरापीआरजे5703 है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि प्रथम आवंटी श्री कुशलपाल सिंह का दिनांक 75.04.20i8 को निधन हो गया जिसके सम्बन्ध में सह आवंटी द्वारा बिल्डर व बैंक को सूचित किया गया था। तत्पश्चात बिल्डर द्वारा यूनिट सह आवंटी व उसके पुत्र के नाम स्थानान्तारित कर दिया गया। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष बैंक से रु० 30 लाख का लोन लिया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को आवंटित यूनिट की कुल कीमत रु० 50,44,900/ के सापेक्ष धनराशि so ४ ie
37,73,803/ का भुगतान किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा संवेंशन स्कीम के अन्तर्गत यूनिट बुक करायी गयी थी जिसका प्री एम आई विपक्षी द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन तक भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा दिनांक 03.02.20I8 तक प्री एम आई का भुगतान किया गया है। उसके उपरांत से विपक्षी द्वारा प्री एम आई का भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी की परियोजना 04 वर्ष से अधिक विलम्बित है। विपक्षी द्वारा दिनांक 20.05.2023 को यूनिट निरस्त किये जाने हेतु नोटिस भेजा गया जिसमें अवशेष देय धनराशि is दिन में भुगतान किये जाने का उल्लेख था। अतः शिकायतकर्ता द्वारा ओसी /सी.सी के साथ यूनिट का कब्जा, विलम्बित अवधि का ब्याज, शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष भुगतान की गयी प्री एम आई, मानसिक उत्पीडन हेतु क्षतिपूर्ति रु० 5 लाख तथा विधिक खर्च vo 55,000/ दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में लिखित कथन, लिखित बहस, त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र, ऑफर ऑफ पजेशन, अनुबंध oa a रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता-द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) | 4 विपक्ष द्वारा जारी रसीद संख्या 0:23 22.03.2046 रु0 5,00,000 / रसीद संख्या 0306 30.06.2047 BO 7,29,926 / बैंक से डिस्बसर्ड 44.4.2047 BO 5,24,590/ रसीद संख्या 4327 08.06.2023 रु0 44,98,484 / रसीद 44.09.2023 BO 4,93,448 / रसीद संख्या 4457 47.44.2023 रु0 5,00,000 / बैंक स्टेटमेंट 24.05.207 BO 3,30,775/ कुल योग : रु0 42,73,893 /
विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 22.03.20i6 को आवेदन फार्म के माध्यम से यूनिट संख्या va-04 बुक करायी गयी थी। आवंटित यूनिट की कुल कीमत vO 50,44,900 / थी। विपक्षी व शिकायतकर्ता के मध्य दिनांक 30.03.2046 को पएग्रीमेंट फॉर सेल निष्पादित हुआ। तत्पश्चात शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 30.05.2047 को प्रोविजनल एलॉटमेंट निष्पादित हुआ जिसके अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह और 2 aa
कोविड--49 महामारी के कारण 06 माह अतिरिक्त के साथ मार्च 2023 में दिया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा एचडीएफसी बैंक से हाउसिंग लोन wo 30,00,000 / लिया गया जिसमें से विपक्षी को 20,20,074/ प्राप्त हुआ है। शिकायतकर्ता द्वारा संवेंशन स्कीम के अन्तर्गत यूनिट बुक करायी गयी थी जिसमें विपक्षी द्वारा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक प्री एम आई धनराशि का भुगतान किया जाना था परन्तु शिकायतकर्ता पेमेंट करने में डिफाल्ड रहा है। विपक्षी द्वारा दिनांक 24.07.207 से 02.08.2024 तक प्री.एम.आई धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा कुल प्री एम आई bo 3,94,362,/ का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा क्रमशः दिनांक 48.08.2024, 03.44.2046, 04.04.2022, 30.05.2047 व 26.0.20i7 मांग पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी को दिनांक 47.03.2024 को डीम्ड ओसी »सी.सी प्राप्त हो चुका है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 26.03.2024 को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 20.05.2023 को शिकाय॑तकर्ता a यूनिटं*कैंसिलेशन नोटिस केवल धमकी देने के लिए भेजा गया था। विपक्षी को दिनांक 44.03.2024 को ओ.सी »सी. सी प्राप्त हो चुका है। विपक्षी..द्वारा डल्लिखित किया गया है कि विपक्षी की परियोजना फोर्स मैज्योर. के कारण विलम्बित हुई है। अतः विपक्षी द्वारा उपरोक्त तथ्यों के आधार पर वर्तमान शिकायत निरस्त किये जाने तथा शिकायतकर्ता को अवशेष देय धनराशि का भुगतान करके यूनिट का कब्जा लिये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा लिखित बहस दाखिल की गयी है जिसमें लिखित जवाब का पुनवित्ति के अतिरिक्त रेरा अधिनियम की धारा t9(6), 9(7) व माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मैसर्स न्यूटेक प्रमोटर्स व डेवलपर्स बनाम स्टेट ऑफ उत्त्तर प्रदेश का उल्लेख किया गया है। शिकायतककर्ता द्वारा लिखित बहस दाखिल की गयी जिसमें लिखित कथन की पुनवृत्ति की गयी है। उभयपफक्षों के तर्को को सुना गया। उभयपक्ष के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 3 — Sa i. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या Te He इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर gece होने के कारण विलम्बित हुई? फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- * प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में St) er fara की अवधि माना जाएगा |” माननीय सर्वोच्च न््यायालयः द्वारा - सिविल- अपील संख्या: 43029 /t985, “M.C. Mehta Versus 0॥/०-०/ India? में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:-
“With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court's order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 3029 / 4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये हैः- “In the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"22. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered Opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be 4 — SS imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed. ”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक o4-:-20I9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-209 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-4-2049 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन(66+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक Uta 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त, वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब>कै-लिए-विपक्षी. जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त Hifas—9 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर grey के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी ofas—i9 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तद्नुसर प्रश्नग सख्या 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 30.05.2047 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ। अनुबंध पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह में दिया जाना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब व बहस में उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 26.03.2024 को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया है तथा विपक्षी को परियोजना के सापेक्ष गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 28.44.2024 को जारी आंशिक पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त हो चुका है।
पत्रावली के अवलोकन से विदित है. कि उभयपक्षों के मध्य दिनांक 30.05. 20:7 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा 42 माह में अर्थात नवम्बर 2020 में दिया जाना था। विपक्षी को दिनांक 28.44.2024 को आंशिक पूर्णता प्रमाण पत्र- प्राप्त हुआ है। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना 04 वर्ष विलम्बित रही है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 // 2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल''में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " 6 —_—— उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय -के आलोक में यह we है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sah बीच fd aa अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, eae wares द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा
(विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +!% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination . ott notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLR+ infeed की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2०)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। TAR प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है।
शिकायतकर्ता द्वारा जो क्षतिपूर्ति (compensation) दिलाये जाने सम्बंधी याचना की गयी है। इस सम्बंध में क्षतिपूर्ति (compensation) के प्रकरण पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार ee अधिनियम की धारा 74 के अन्तर्गत न्यायानिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) को है। अतः पीठ द्वारा इस सम्बंध में आदेश पारित नहीं किया जा सकता. है| उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण” करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आंदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय REPT Yow प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2... विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.42.2020 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 42,73893/ पर |/८ा,२+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। ब्याज की 8 लाए ब्टा
धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 4 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029 /i985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा 2(2०)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारां डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी धटाए+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि.इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से faces cere spa विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन-भू-सम्पदा-.(विनियमन- और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। ——\yrr]en- —72-S2.ean2G (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 9