Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Ameet Siingh v. Rise Projects Pvt Ltd
Complaint No. NCR145/02/117403/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-12-09
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Order under Section 34, Bench-2 (earlier Bench-4) Presiding Officer: Shri T. Venkatesh, Member Sr. No. | Complaint No. | Complainant(s) | Unit No. | Total Value | Amount Deposited 1. | [?]5/07[?]0687/2023 | Payal Garg | [?]6-603 | 30,04,280/- | 24,7,28l/- 2. | NCRI45/07/I0725/2023 | [?] | T2-20 | 57,85,500/- | 53,23,955/- 3. | [?]45/09/3608/2023 | Devendra Kumar Sachan | T2-I2A0I | 55,38,20 /- | 54,22,947/- 4. | [?]450277403/2024 | Amit Singh | T4-I40I | 42,66,098/- | 42,66,098/- Versus Rise Projects Private Limited ... Opposite Party The complaints in question have been filed against the opposite party by complainant Satyapal along with 03 other complainants. The facts of all these complaints are the same and the evidence is common. All these complaints relate to one and the same project, RISE ORGANIC HOMES PHASE-I. Therefore the complaints are being disposed of by one common order. Complaint [?]45/07/0725/2023, Satyapal, shall be the lead case. The complaints have been instituted by the complainants against the opposite party seeking possession of the unit in question and interest for the delayed period.
In brief, the lead complainant states that unit no. 603 in Tower-[?]6 of the opposite party's project RISE ORGANIC HOMES PHASE-I was booked by the complainant. The total value of the unit was Rs.30,04,280/-, against which the complainant paid Rs.24,7,28l/- to the opposite party from time to time in instalments. The complainant also states that the opposite party has delayed by 42 months the handing over of physical possession of the unit as per the flat buyer agreement, and so far the project has not been completed, nor has the O.C. (occupancy certificate) of the project been obtained from the competent development authority. For this reason the complainant has lodged this complaint against the opposite party under Section 34 of the RERA Act, seeking possession of the unit along with interest for the delayed period. In support of the statement, the complainant has filed photocopies of records, including the booking form dated 24.04.205, the allotment letter/flat buyer agreement dated 05.09.2045, the pre-cancellation letter dated 20.06.2023, the account statement, the rejoinder, etc.
= भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) पीठासीन अधिकारी :- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य क्रम सं. शिकायत संख्या | ला | शिकायतकर्तागण | यूनिट संख्या | कुल मूल्य | जमा धनराशि | | पटाराब5/07र0687/2023 पायल गर्ग प6-603 | 30,04,280/- | 24॥7,28 /- 2. | NCRI45/07/I0725/2023 po | T2-20 | 57,85,500/— | 53,23,955/— 3. | फ्टारा45/09/3608/2023 | देवेन्द्र कुमार सचान | T2-I2A0I | 55,38,20 /- | 54,22,947— 4. | एटारा450277403/2024 अमीत सिंह T4-I40I | 42,66,098/— | 42,66,098 /- बनाम ted राइज प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड शिकायतकर्ता सत्यपाल के साथ 03 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना RISE ORGANIC HOMES PHASE | से सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से mara शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत were इटार45/07/0725/2023 सत्यपाल अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किये गये हैं।
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना RISE ORGANIC HOMES PHASE । के टॉवर-प-6 में यूनिट संख्या-603 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य 30,04,280/— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 24,7,28l // - रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के अनुसार यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने में 42 माह का विलम्ब किया गया है और अभी तक 2988 | परियोजना पूर्ण नहीं की गयी है तथा न ही सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. प्राप्त किया गया है। जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में बुकिंग फॉर्म दिनांकित 24.04.205, आवंटन पत्र/फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 05.09.2045, प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 20.06.2023, खाता विवरण, प्रत्युत्तर. आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी की ओर से लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना "RISE ORGANIC HOMES PHASE-I" के टॉवर-6 में i6d फ्लोर पर यूनिट संख्या-603 बुक करायी गयी थी, जिसका कुल बिक्री मूल्य 3,22,280/- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 24,7,28। //- रुपये का भुगतान किया गया। फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 05.09.2045 के अनुसार अनुबन्ध निष्पादन की तिथि से 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ सितम्बर, 209 तक उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु अप्रत्याशित घटनाओं के कारण यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया जा सका। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि उनके द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 45.09.2023 को यूनिट का कब्जा हेतु प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया, weg शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। उसके पश्चात् शिकायतकर्ता को 7,42,902/— रुपये की अन्तिम मांग के साथ दिनांक 22.03.2023 को फिट-आउट के लिए प्रस्ताव भी जारी किया गया है, जिसकी आज तक मंजूदी नहीं दी गयी है। विपक्षी द्वारा पहले ही परियोजना से सम्बन्धित समस्त अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 45.03.2023 को उन टॉवर्स के ओ.सी. हेतु आवेदन किया जा चुका है, जिसमें शिकायतकर्तागण की उक्त यूनिट स्थित हैं। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि सक्षम विकास प्राधिकरण से दिनांक 49.08.2023 को परियोजना का अधिभोग प्रमाण-पत्र भी प्राप्त किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है शिकायतकर्ता द्वारा फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के अनुसार विस्तृत भुगतान योजना की शर्तों का पालन करने हेतु बाध्य था, परन्तु वर्ष 2024 के बाद से अपनी देय धनराशि की तीन किश्तों का भुगतान किये जाने में चूक की गयी है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी देय धनराशि की किश्तों का भुगतान किये जाने हेतु विभिन्न तिथियों को मांग पत्र व अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि की किश्तों का भुगतान नहीं किया गया, जिसके अनुक्रम में विपक्षी द्वारा दिनांक
oo 4 Page 2 20.06.2023 एवं 27.08.2023 को प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया गया, उसके पश्चात् विपक्षी द्वारा दिनांक 44.03.2024 को अंतिम निरस्तीकरण पत्र प्रेषित कर दिया गया, जिस कारण विपक्षी कुल बिक्री मूल्य का 0% धनराशि जब्त करने का अधिकारी है। शिकायतकर्ता द्वारा अंतिम भुगतान किये जाने के बाद से दो वर्ष बीत चुके हैं, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया तथा यूनिट के कुल बिक्री मूल्य के 25% धनराशि से अधिक का भुगतान न करके अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार अपने कर्तव्यों अनुपालन करने में विफल रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा रेरा, अधिनियम, 20I6 की धारा-96) का उल्लंघन किया गया है। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि पर्यावरण प्रदूषण के कारण माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दिल्ली एन.सी.आर. में किसी भी प्रकार की निर्माण गतिविधि पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगा दिया था, जिससे परियोजना की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। साथ ही यह भी कहा गया है कि भारत सरकार ने कोविड-49 वायरस के प्रसार को रोकने के लिंए विश्व में कुछ सबसे कठोर कार्यवाइयों का सहारा लिया और सम्पूर्ण देश में 24 मार्च, 2020 से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन घोषित किया गया, जिसे विभिन्न अधिसूचनाओं द्वारा बढ़ाया गया था, जिस कारण निर्माण की सामग्री उपलब्ध न होने के कारण निर्माण गतिविधियां पूर्ण रूप से बाधित रहीं, जिस कारण परियोजना को पूर्ण किये जाने में विलम्ब हुआ। उपर्युक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा प्रश्न्गत शिकायत को खारिज किये जाने तथा शिकायतकर्ता द्वारा जमा की गयी धनराशि में से अर्नेस्ट मनी जब्त करने के उपरान्त अपनी शेष धनराशि वापस प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में वकालतनामा, लिखित जवाब, परियोजना के टावर--2, 3, 4, 5, 6 एवं 9 (कुल 06 टावर) का अधिभोग प्रमाण-पत्र दिनांकित 49.08.2023, कब्जा हेतु प्रस्ताव पत्र दिनांकित 45.09.2023, फिट आउट पत्र दिनांकित 22.03.2023, मांग पत्र, अनुस्मारक पत्र, आवंटन पत्र/ फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 05.09.205, खाता विवरण, प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 20.06.2023 एवं 27.08.2023, निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 44.03.2024, परियोजना से सम्बन्धित सभी आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र, अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रत्युत्तर दाखिल करते हुए कहा गया कि उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 05.09.205 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया था, जिसके अनुसार अनुबन्ध की तिथि से 42 माह एवं 6 माह की aque अवधि के साथ सिम्बर, 20:9 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी, निर्धारित अवधि में परियोजना को पूर्ण करने में असफल रहा है और न ही आज तक यूनिट का Page 3 be
= प्रदान किया गया है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त कर दी गयी थी। विपक्षी द्वारा दो बार प्री-निरस्तीकरण पत्र और निरस्तीकंरण पत्र जारी किया गया, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा उक्त यूनिट के सापेक्ष विपक्षी को 24,7,28]/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने लिखित जवाब में कहा गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य aifas—t9 महामारी के कारण बाधित हुआ, जिस कारण परियोजना विलम्बित हुई। विपक्षी का यह तर्क गलत है, क्योंकि विपक्षी को अनुबन्ध में निर्धारित अवधि के अनुसार सितम्बर, 20i9 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण करना था, उसके उपरांत कोविड-49 अर्जित हुआ। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कथन किया गया है कि पक्षकारों के मध्य हुए अनुबन्ध पर रेरा अधिनियम, 2076 के सभी प्रावधान लागू होंगे और बिल्डर बायर एणग्रीमेन्ट में अंकित नियमों एवं शर्तों को हस्ताक्षरित करते हुए शिकायतकर्ता द्वारा स्वीकार कर लिया गया है, क्योंकि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध एकतरफा था। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को यूनिट Prefer को निरस्त करने तथा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा एवं रजिस्ट्री कराये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये गये हैं :- 4... क्या शिकायतकर्ता द्वारा We प्लान के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? 2 क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु aen—ot
बिन्दु संख्या-0॥ इस आशय से विचंरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? यह वाद बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र / फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के अनुसार यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने में 42 माह का विलम्ब किया गया है और अभी तक परियोजना पूर्ण नहीं की गयी है तथा न ही सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. प्राप्त Page 4 a गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को यूनिट निरस्तीकरण को निरस्त करने तथा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा एवं रजिस्ट्री कराये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु कस्ट्रक्शन fies पेमेंट प्लान का चयन किया गया था एवं विपक्षी द्वारा अनुबन्ध के अनुसार भेजे गए मांग पत्र के सापेक्ष अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान वर्तमान समय तक नहीं किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा रेरा अधिनियम की धारा i966) का उल्लंघन किया गया है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को मांग पत्र प्रेषित किये गये, परंतु शिकायतकर्ता द्वारा मांग पत्र के अनुसार अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 7,42,902,//- रुपये की धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, जिसमें अतिरिक्त चार्ज सम्मिलित नहीं है, जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 20.06.2023 एवं 27.08.2023 को प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया गया, जिसके पश्चात् भी शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके क्रम में विपक्षी द्वारा दिनांक 44.03.2024 को निरस्तीकरण पत्र प्रेषित कर यूनिट को निरस्त कर दिया गया तथा शिकायतकर्ता द्वारा जमा की गयी धनराशि में से अर्नेस्ट मनी जब्त करने के उपरान्त अपनी शेष धनराशि वापस प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे में विपक्षी द्वारा किया गया यूनिट निरस्तीकरण वैधानिक है। इसके अतिरिक्त विपक्षी का यह भी कहना है कि उनके द्वारा पहले ही परियोजना से सम्बन्धित समस्त अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 45.03.2023 को उन टॉवर्स के ओ.सी. हेतु आवेदन किया जा चुका है, जिसमें शिकायतकर्तागण की उक्त यूनिट स्थित हैं। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि सक्षम विकास प्राधिकरण से दिनांक 49.08.2023 को परियोजना का अधिभोग प्रमाण-पत्र भी प्राप्त किया जा चुका है। उपरोक्त तथ्यों के आधार शिकायतकर्ता द्वारा योजित वर्तमान शिकायत को विपक्षी द्वारा खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
£ प्रश्नगत प्रकरण में यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 30,04,280 /“- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 24,7,28। //- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया, जोकि लगभग 80 प्रतिशत से अधिक है और उभयपक्षों के मध्य निष्पादित फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 05.09.2045 के अनुसार विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर आवंटन पत्र /फ्लैट क्रेता अनुबन्ध की तिथि से 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 48 माह अर्थात दिनांक 05.09.2049 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, Page 5 s'= परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की मांग पर धनराशि का भुगतान समयानुसार किया गया, साथ ही यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 4.03.2024 को दिया गया था, जोकि अनुबन्धानुसार यूनिट का कब्जा दिये जाने की समयावधि के 4 वर्ष उपरान्त दिया गया है।
वर्णित परिस्थिति में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा किये गये शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया अवैधानिक /अपूर्ण है। चूंकि विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्तीकरण पत्र आवंटन पत्र/फ्लैट क्रेता अनुबन्ध पत्र के अनुसार परियोजना पूर्ण कर कब्जा दिये जाने की तिथि 05.09.2049 के बाद का है। wr अधिनियम की धारा-48 के अन्तर्गत पक्षकारों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार परियोजना पूर्ण किये जाने में हुए विलम्ब की स्थिति में शिकायतकर्ता जमा धनराशि मय ब्याज प्राप्त कर सकता है अथवा यदि शिकायतकर्ता अपनी यूनिट का कब्जा लेने के इच्छुक हैं, तो वह अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर कब्जा प्राप्त करें। dager बिन्दु Wet निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 = निस्तारण बिन्दु संख्या-2 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है।
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना में दिनांक 24.04.2045 को यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 05.09.20i5 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर फ्लैट क्रेता अनुबन्ध की तिथि से 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 48 माह अर्थात दिनांक 05.09.209 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है, जबकि यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 30,04,280,//- रुपये के सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा अब तक 24,7,28/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया जा चुका है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने एवं रजिस्ट्री कराये जाने का अनुरोध किया गया है। Page 6 रेरा एक्ट की धारा is (॥) में प्राविधान है कि :- Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पत्र/फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 05.09.2045 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-44 के कब्जे वाले प्रस्तर में उल्लेखित है कि फ्लैट क्रेता अनुबन्ध की तिथि से 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 48 माह में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर कब्जा प्रदान कर दिया जाएगा। ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 05.09.209 तक अपनी यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। | Page 7 Af a= [emer हे कि ah द्वार परिणोजता Ad जाने में बिल gat | स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण किये जाने में विलम्ब हुआ है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 06.09.2049 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि am विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील संख्या-6649--50 / 2048 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल” में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल र्यिलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि —
"Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest Page 8 अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable.” प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 2(29) में प्राविधान है कि :- जहा 2048 अधिसूचित (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—For the purpose of this clause—
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; | तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली घिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय // पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(i) Y प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of Page 9 | ८::-- the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +{% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of | receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wae 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLRt प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी McCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। ॥ इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 /8--3-48-65 विविध, 46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT: ap
"प,] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake ता any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड--49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की ?०९९१0 अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है।
हैं :- उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्तागण: की aca को. पुनर्स्थापित करते हुए, इस आदेश के अनुरूप माँग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी./सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। ह विपक्षी, शिकायतकर्ता (पायल गर्ग) को दिनांक 06.09.2049 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब की अवधि एवं विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी एवं न ही शिकायतकर्ता से किसी अतिदेय (overdues) धनराशि के लिए इस अवधि का ब्याज लिया जाएगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में आवंटन पत्र, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के अनुरूप wager विलम्ब ब्याज की गणना की जायेगी। विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-2(2४)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित अवधि के भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा।
इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी। इस आदेश का sooty भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-38, 40(2) एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। शिकायतकर्तागण को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 2