Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Vikas Kureel v. Suncity Hi-Tech Infrastructures Pvt. Ltd
Complaint No. NCR145/01/104465/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-03-28
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the complainant)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित —: डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या el यूनिट | जमा धनराशि vo | रेजिडेशि अनुबंधानुसार वांछित io संख्या फ्लोर यूनिट का अनुतोष एलॉटीज कब्जा दिये अरेन्जमेंट जाने की की तिथि तिथि ५ । » | टह45/0/704465:2025 | विकास कुरील | C-209 | ¥o 77,48,663/ | 04.0:.2076 | 03 वर्ष तथा यूनिट का | 06 माह कब्जा एवं अनुग्रह विलम्बित अवधि के | अवधि का साथ अर्थात | ब्याज 04 जुलाई | दिलाये जाने 2049 का अनुरोध किया गया _| है। बनाम wach eee इन्फ्रास्ट्रक्चर्स Wf. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु vere, dea की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना SHIPL-ROYAL CASTLE-PLOTS गाजियाबाद में शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट संख्या c-l09 बुक करायी गयी थी। आवंटित यूनिट की कुल कीमत Bo 38,00,000 » थी जिसके एवज में शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि Bo 47,48,663,/- का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। विपक्षी की परियोजना 94 माह विलम्बित है। जबकि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को समयानुसार देय धनराशि का भुगतान किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। — Ss
शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में रेजिडेन्शियल फ्लोर एलॉटीज Rue व रसीदों की छायाप्रतियां दाखिल की गई है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गईं धनराशि संख्या | (रु0) 4 विपक्षी द्वारा जारी कस्टमर स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट. [04.03.2046 रु0 7,48,663 / विपक्षी की ओर से लिखित जवाब दाखिल किया गया है जिसमें यह उल्लिखित है कि रेरा एक्ट पूरी तरह से दिनांक 07.05.20i7 से प्रभावी है जिसके अनुसार निर्माणधीन सभी परियोजना को दिनांक 34 जुलाई 20:7 तक पंजीकृत किया जाना था। .विपक्षी ने माननीय उच्चतम न्यायालय से सम्बन्धित प्रकरण सीआईटी बनाम वातिका टॉउनशिप प्रा.लि.स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल बनाम एससी बोस (।954एससीआर5787)व एक्पप्रेस न्यूजपेपर प्रालि. बनाम यूओआई (i959 एसएसीआर 42), का संदर्भ अंकित किया. गया है जिसके अनुसार रेरा अधिनियम के प्राविधान रेट्रोस्पेक्टिवली सभी निर्माणधीज्न-परियोजन्ना-पर -लागूँ है जिंस कारण जो परियोजनाएं रेरा एक्ट लागू होने से पूर्वी पूर्ण हो चुकी है उस पर रेरा अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होंगे। इसके ofa faut द्वारा मात्तत्तीय..उच्च न्यायालय द्वारा नील कमल रिएलटर्स सुब्राबन (पी) लि. बनाम यूओआई में पारित निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि रेरा के प्राविधान प्रोस्पेक्टिव है परन्तु रेश अधिनियम की धारा 4(2)0)(सी) के अनुसार वे कब्जा प्रादन किये जाने की एक नयी समय सीमा निर्धारित कर सकते है और यह रेरा अधिनियम के अन्तर्गत “पीनल कॉनसीक्वसिज” का भागी न होगा। इस प्रकार यूपी का एक्ट 0.08.20:7 से लागू होता है।
माननीय एनजीटी न्यायालय द्वारा वर्ष 20:7 से वर्ष 20I9 तक दिल्ली एनसीआर में बढ़े वायु प्रदूषण के नियत्रंण हेतु निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाया गया है जिस कारण परियोजना में निर्माण कार्य 09 माह तक बंद रहा है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट संख्या W-09 बुक करायी गयी थी। आवंटित यूनिट की सेलिंग प्राइस vo (=) dan TEE किया गया है। विपक्षी की परियोजना यूपीरेरा में पंजीकृत है जिसका पंजीयन संख्या यूपीरेरापीआरजएम7375 है। अतः विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा लिये जाने हेतु निर्देशित किये जाने अथवा जमा धनराशि मय ब्याज वापस लिये जाने हेतु तथा शिकायतकर्ता की शिकायत अर्थदण्ड के साथ निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपफक्षों के तर्कों को सुना गया। उभयपक्षो के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये है। 4. क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 3. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या.दर होगी 2 निस्तारण प्रश्न We RTA इंसं..तंथ्य soy विरचित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध Was दायरे#में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबच्ध, Penta किये जाने. पर. रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 /202 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स wo fo बनाम
उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :- "54. From the scheme of the Act 20I 6, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206." नगर _——— 3
उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRI2840I0 है। अत: वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न ea निस्तारित किया जाता है। . निस्तारण प्रश्न संख्या-2 «प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स ask केछकारण विलम्बित हुई? यह प्रश्न विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया. है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में यूपीरेरा द्वारा जारी एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- ह
” प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 /+985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029,/ 4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “in the affidavit dated 05.42.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"७42. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (2048) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6:00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially. lifted. by. permitting activities during day time (6.00.am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non- compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04-44-2049 से दिनांक 44-02—2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-20॥9 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-44-2049 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन(66«2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक dia 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी = तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त wfas—i9 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लियाष्जायेगा | ह
उपरोक्त तथ्यों व माननीय Sera Mae के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तद्नुसार>प्रश्न-संख्या-2 निस्तारित*किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-3 प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की gar दर होगी? पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अवलोकन से यह विदित है कि शिकायतकर्ता व विपक्षी के मध्य दिनांक 04.0:.20:6 को आवंटित यूनिट के सम्बंध में रेजिडेन्शियल फ्लोर एलॉटीज अरेन््जमेंट निष्पादित gen जिसके अनुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा 36 माह तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात 04 जुलाई 2009 4 प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी की ओर से परियोजना पूर्ण होने के सम्बन्ध में ओ.सी/सी.सी की प्रति दाखिल नहीं की गयी है। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना पूर्ण नहीं 6 ता कआच्त है। जबकि शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा जुलाई 20:9 4 प्राप्त होना था। इस प्रकार विपक्षी की परियोजना os वर्ष से अधिक विलम्बित है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। ऐसी स्थिति में ke अधिनियम की ae—t9a(t) में यह प्राविधानित है कि :- "Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building, (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be, prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided, that where’ an. allottee does not intend to withdraw ‘from the project, he: shall be. paid, by the promoter, interest’ for”every»month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed". इस प्रकार क्रेता को..यह:.अधिकोर..है fae उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस मांग सकते है अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 ,//2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः-
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 46) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in 7 — = handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी.,/सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section I 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw, from the project he shall be paid by the promoter interest;for every month's delay till handing ovenof the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty, as the._payment of interest is compensatory in nature inthe light of the:delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि vow रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व dat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा sad धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 206 के अधीन दिनांक 47.0.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o2(ii) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- _ OOS "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLR+HUfeRId की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+H प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता zl RT की धारा-2(2०)() में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं न्याय नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी*“है | Tea met gens निस्तारित किया जाता है। < |
उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए. निम्त-आदेश पारित किया जाता है। आदेश l. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अनुबंधानुसार अवशेष देय धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी/सी.सी सहित यूनिट का कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2. विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 05.07.2049 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि Bo 47,48,663,/ ( रु0 सत्तरह लाख अडतालिस हजार छ: सौ तिरसठ) पर शिकायतकर्ता को MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित (ey >» करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में
समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 3029 // 4985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(2०)0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक. दर से कोई-धनराशि"रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली wae) तो विलम्बितः अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी।. इस आदेश का उल्लघंन«भू-सम्पदा-(विनियमन*और*« विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा wart आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। न 2) NY cain 2%.903:202G (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 30