Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Amit Kumar v. Regal Emporia Infratech Private Limited
Complaint No. NCR144/12/115681/2023
- Decision date
- 2026-05-05
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर _ पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या lagi यूनिट | जमा धनराशि vo | एलॉटमेंट अनुबंधानुसार वांछित io 0 लेटर कम कब्जा दिये जाने अनुतोष बायर एग्रीमेंट | की तिथि ॥ की तिथि | - |NCRI44/2/568/2023 | अमित 20i0 | रु0 38,3,99/ | 05.09.20i6 | 48 माह तथा | यूनिट का कुमार 480 दिन कब्जा व अनुग्रह अवधि | विलम्बित के साथ अर्थात | अवधि का मार्च 2024 ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया _| है। बनाम Sra इम्पोरिया इन्फ्राटेक प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा “विपक्षी के विरुद्ध-यूनिट wr कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने sae यह शिकायत संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता. का कथन है कि उसके द्वारा विपक्षी की परियोजना Boulevard Walk (Phase2)"4 Ye Gen 20i0° 9H करायी गयी थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि Go 38,34,9I9/— का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी की परियोजना विलम्बित है तथा विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा नहीं दिया जा रहा है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा एलॉटमेंट लेटर कम बायर White व रसीदों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण
निम्नवत् हैः- - क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि [संख्या (रु0) 4 विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 3579 43.09.2046 रु0 4,00,000 / रसीद संख्या 3582 43.09.2046 रु0 3,00,000 / रसीद संख्या 4072 43.04.2047 रु0 5,00,000 / रसीद संख्या 4295 06.03.2047 रु0 9,00,000 / रसीद संख्या 4324 2.0.20I7 रु0 33,950 / रसीद संख्या 4879 04.07.2047 BO 98,000 / रसीद संख्या 6494 34.05.2048 रु0 66,986 / रसीद संख्या 46957 43.40.2023 रु0 8,00,000 / रसीद संख्या 6493 34.05.2048 रु0 2,07,735 / रसीद संख्या 6492 34.05.2048 रु0 7,50,000 / रसीद संख्या 8803 25.04.2049 रु0 75,248 / कुल योग : रु0 38,34,99/ विपक्षी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है
कि शिकायतकर्ता द्वारा गलत तथ्यों के आधार पर शिकायत विपक्षी के विरूद्ध योजित की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु शिकायत दर्ज की गयी है। शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 44.04.2047 को बायर बिल्डर एग्रीमेंट निष्पादित हुआ जिसके अनुसार शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट की कुल कीमत wo 40,56,848,//. थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा रु० 383i99/e भुगतान किया गया है। विपक्षी की परियोजना में निर्माण कार्य>फोर्स मैज्योर के कारंण- बंद था। विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में wished) vate faa as, माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाये गये प्रतिबंध, किसान आन्दोलन व कोविड-49 महामारी के कारण लगाये गये प्रतिबंध का उल्लेख किया-गया-है |-विपक्षी-द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ फिट आउट भेजा जा चुका है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा परियोजना को पूर्ण करके वांछित अनापत्तति प्रमाण पत्र के साथ दिनांक 03.07.2023 को ओ.सी /सी.सी हेतु आवेदन किया जा चुका है। अतः विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार विलम्बित अवधि का ब्याज भुगतान किये जाने हेतु निर्देशित करने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्षों की बहस सुनी गयी। उभयपक्षों के. तर्कों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? ——_—_= 2
3. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न eH :- प्रश्न संख्या-4 इस तथ्य पर विरचित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? | इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 /202 “मैसर्स aa प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स oo fo बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :-
"54. From the scheme of the Act 20I6, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has:been granted are not under its fold and therefore,-vested or accrued rights, if any, inno, manner are*affected..At the.same time, it will apply after. getting the on-going projects and future projects registered’ under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206." उपरोक्त विधि व्यवस्था 'से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी aged हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्गगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRII7295 है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न We निस्तारित किया जाता है।
निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर seca होने के कारण विलम्बित हुई? फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के we 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- “ प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 /4985, M.C. Mehta Versus Union of India” 4 पारित आदेश, दिनांक 04-44-209 में निम्नलिखित निर्देश दिये हैः- “With respect to demolition and construction activities we direct that.no demolition and.construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, thé’ local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place. ” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029,/4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये हैः-
“in the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:- "42. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 uw 4 hours or more. 4 Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक o4-7:-20i9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-20॥9 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-44-2049 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन(6+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक Ua 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए«विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त Bfas—i9 महामारी के सम्बंध में wou रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को wifis—i9 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी aifts—i9 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 3-: प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विरचित किया गया हें
कि क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ फिट आउट भेजा जा चुका है तथा विपक्षी द्वारा दिनांक 03.07. 2023 को परियोजना को पूर्ण करके वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र के साथ MM /सी.सी हेतु आवेदन किया जा चुका है। पत्रावली के अवलोकन से विदित है कि उभयपक्षों के मध्य दिनांक 05.09. 2046 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार विपक्षी द्वारा 48 माह तथा i80 दिन अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात मार्च 2024 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता “को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी की ओर से पर्रियौंजना पूर्ण होने के! सम्बन्ध..में ओ.सी,/सी.सी की प्रति दाखिल नहीं की गयी है जबकि अनुबंधानुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा मार्च 202 में प्राप्त होना था। चूंकि शिकायतकर्ता ert यूनिंट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 /20I8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 20!6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20i6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay
in taking possession. " —> 6 उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation.imposed on the promoter to pay, interest till such*timevas the, apartment is handed over to him+is not unreasonable. "
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह we है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व् केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देंय होगा, क्योंकि Wales द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(॥) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- ‘Ss "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of a ——— India +!% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४८,२+प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि. यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी Mciet प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-3 Paka किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए.निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश \. विपक्षी को आदेशित«कियां sian’ fads आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन॑ के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र»अनुबंध के<अनुसार-समस्त-सुविधाओं को पूर्ण कराकर शिकायतकर्ता को ओ.सी/सी.सी के साथ यूनिट का कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं।
विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2024 से ओ.सी/सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 38,3,9i9/ पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार' शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029,//4985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक se 8 परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा.। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(2०४)0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी McCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों Horta दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश>का अनुपालन 45 fea में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता Regier के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। ॥
आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। SC yr a4, ->ुडप 95 ७० 5६५ 20528. 00 (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर