Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Nupur Gupta v. Ansal Hi-Tech Townships Ltd
Complaint No. NCR144/12/115513/2023
- Decision date
- 2026-01-21
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामकं प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ- भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित - sto दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य त शिकायत सं शिकायतकर्तागण यूनिट न0. | जमा धनराशि रु | आवंटन की | वांछित अनुतोष क्रम शिकायत संख्या THT है af gel bal . ह की तिथि ह ह T | ४८४44/2/[55]3/2023 | नुपुर गुप्ता 0404 BO 45,5,679 // | 44.09.2044 | यूनिट का कब्जा व विलम्बित + अवधि का * ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया ॥ | गया है। 2. | NCRI44/2/II555/2023 | नुपुर गुप्ता 0402 रु0 75,5,679/ | 4.09.2044 | यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया ! j गया है। बनाम े . अंसल हाई--टेक टाउनशिप्स लिमिटेड शिकायतकर्ता नुपुर गुप्ता द्वारा 04 अन्य शिकायत विपक्षी के विरुद्ध शिकायत योजित की गई है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतों एक ही परियोजना PLOT ZONE Il (2A,2B) से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है | शिकायत संख्या- ८8 44/2/553/2023 FOX गुप्ता की पत्रावली अग्रणी शिकायत रहेगी। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना PLOT ZONE वा (2A 2B) में यूनिट संख्या 0404 बुक कराई गई थी जिसके एवज में शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि रु0 5,5,679 / का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी द्वारा सितम्बर 2044 में यूनिट का कब्जा दिया जाना प्रस्तावित था परन्तु अभी तक विपक्षी की. परियोजना पूर्ण नहीं है। —S 4 + | शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इसी क्रम में उक्त तालिका में वर्णित क्रम संख्या 2 के शिकायतकर्ता द्वारा भी यूनिट का कब्जा व.विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। | | शिकायतकर्तागण द्वारा शिकायत के समर्थन में अपार्टमेंट एलॉटीज atric व रसीदों की छायाप्रतियां दाखिल की गई है। शिकायतकर्तागण द्वारा .विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- ह क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) ह | शिकायतकर्ता-नुपुर गुप्ता विपक्षी द्वारा जारी . डिमांड लेटर 3.40.2023 BO 5,45,679 / 2 शिकायतकर्ता-नुपुर गुप्ता विपक्षी द्वारा जारी é डिमांड लेटर 34.0.2023 रु0 5,45,679 / पीठ द्वारा विपक्षी को उपस्थिति हेतु व लिखित जवाब दाखिल किये जाने हेतु पंजीकृत डाक से दिनांक 48.06.2025 व समाचार पत्र GER उजाला) में प्रकाशन के माध्यम से दिनांक 07.06.2025. को सूचित किया* गया इसके उपरांत भी विपक्षी नियत तिथि पर न तो उपस्थित हुए और न ही लिखित जवाब दाखिल किया गया। इस प्रकार विपक्षी पर तामींल पर्याप्त मानते हुए पीठ द्वारा दिनांक 24.07.2025 को विपक्षी का लिखित जवाब दाखिल करने का अवसर समाप्त करते हुए पत्रावली विपक्षी के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही हेतु अग्रसारित करते हुए शिकायतकर्तागण की एकपक्षीय बहस सुनी गयी। उपरोक्त वर्णित तथ्यों के कारण प्रकरण में एकपक्षीय निर्णय पारित किया जा रहा Bh ॥ पीठ-3 में कार्यरत् लॉ-रिसर्चर की आदेश पत्र पर अंकित आख्या दिनांक 49.04.2026 के अनुसार विपक्षी प्रमोटर के विरूद्ध एनसीएलटी से कोई आदेश पारित नहीं हुआ है और न ही ऐसा कोई साक्ष्य रेरा पोर्टल पर उपलब्ध है। शिकायतकर्तागण द्वारा दाखिल. प्रपत्रों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न विरचित किया जाता हैं :- 2
4. क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के. दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2... क्या शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज पाने के अधिकारी है? “निस्तारण प्रश्न संख्या-4 :- प्रश्न ea इस तथ्य पर विरचित है कि aw * आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 / 2024 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोंटर्स एंड डेवलपर्स wo fo बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :-. "54. From-the scheme of the Act 20I6, its application is'retroactive'in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested. or. accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future “projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 0I6." उपरोक्त विधि aan से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व
जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ. पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि ऑन eT’ परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। : उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका 3 ——— . पंजीकरण संख्या- UPRERAPRIII033 है | अतः: वर्णित तथ्यों: के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में . आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न We निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस, आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज पाने के अधिकारी है?? : शिकायतकर्तागण का कहना है कि विपक्षी द्वारा eerie परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी। उभयपक्षों के मध्य “दिनांक 44.09.204 को आवंटित यूनिट के सापेक्ष आवंटन पत्र निष्पादित हुआ परन्तु अभी तक यूनिट का 'कब्जा नहीं मिला है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि शिकायतकर्तागण
व विपक्षी के मध्य क्रमशः दिनांक 44,0920: व. 44.09.204 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ है परन्तु आवंटन पंत्र-में यूनिट or कब्जा दिये जाने की तिथि अंकित नहीं है। ऐसी स्थिति में माननीय उच्चतम न्यायालय के सिविल अपील संख्या 3533--3534 / 2047. M/s. Fortune. Infrastructure (now known as M/s. Hicon Infrastructure) & ANR. Vs. Trevor D'lima & Ors में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि- Moreover, a person cannot be made to wait indefinitely for the possession of the flats allotted to them and they are entitled to seek the refund of the amount paid by them, along with compensation. Although we are aware of the fact that when there was no delivery period stipulated in the agreement, a reasonable time has to be taken into consideration. In the facts and circumstances of this case, a time period of 3 years would have been reasonable for completion of the contract i.e., the possession was required to be given by last quarter of 204. Further there is no dispute १88 to the fact thdt until now there is no redevelopment of the property. Hence, in view of the above discussion, which draw us to an irresistible conclusion that . there is deficiency of service on the part of the appellants and accordingly the issue is answered.
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार फ्लैट के कब्जे हेतु किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय तक प्रतीक्षा नहीं करायी जा सकती है, जहाँ अनुबन्ध में कब्जे की तिथि नहीं दी गयी है वहाँ एक रीज़नेवल समयावधि 3 वर्ष कब्जे हेतु अवधारित की जानी होगी। प्रस्तुत शिकायतों में उभयपक्षों के मध्य क्रमशः दिनांक 44.09.2044 व 44.09.204 को आवंटन पत्र निष्पादित हुए परन्तुआवंटन पत्र में कब्जाँ दिये जाने की तिथि अंकित नहीं है। ऐसी स्थिति में उपरोक्त माननीय उच्चतम न्यायालय की न्याय TR के अनुसार कब्जा देने की अवधि 3 वर्ष मानी गयी है | इस प्रकार आवंटन पत्र की तिथि 44.09.204 व 44.09.2044 से 3 वर्ष अर्थात सितम्बर 2074 : में विपक्षी द्वारा आवंटित यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था परन्तु अभी तक विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। . उक्त के अतिरिक्त विपक्षी की ओर से न तो लिखित जवाब और न ही ओ. सी/सी.सी की प्रति उपलब्ध कराई गई है। इससे we है कि विपक्षी की परियोजना अभी पूर्ण नहीं है. और न ही.विपक्षीं को.ओ.सी ee प्राप्त हुआ है। . फिर भी शिकायतकर्तागण द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया.गया है। ऐसी स्थिति में परियोजना fread होने... के बावजूद भी यदि आवंटी परियोजना that रहना चाहता है तो उक्त के सम्बन्ध
में रेश अधिनियम a धारा is (()बी में यह प्रावधान दिया गया है कि परियोजना * fread होने के बावजूद भी यदि आवंटी परियोजना में बना रहना चाहता है तो वह कब्जा प्राप्त होने तक विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। oO मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में ग्रह प्राविधानित किया गया है कि :- | ! ” प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised 0००) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को .घटाते हुए) पूर्णता. प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर : ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।” S माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित ,आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” >
इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029,/4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “In the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:- ॥42., That it is respectfully: submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last: year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if _ Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 04-:-209 झे दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-2049 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक o4—t:-20I9 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन(6652) (दिनांक 0-42-20१9 से दिनांक 44-02-2020 तक ete 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन 6 & Sa तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी त्तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह | निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अंवधि में कुल-35 feat 33 दिन अर्थात् 68 दिन, निर्माण कार्य प्रभावित रहने के दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है.|
इसके अतिरिक्त aifts—i9 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 Wr अथॉरिटी द्वारा दिनांक . 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त ॥ अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक “परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंदियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। उपरोक्त तथ्यों व॑ माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त-विपक्षी कोविड:49-के-कारण-फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। जहाँ तक किस अवधि तक-का ब्याज ard जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 /20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी alsa" ह माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6., The Respondent — ‘Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in*handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allewed to reap the benefits of her own delay in taking possession >
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओसी.,सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाँद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आंदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि ;- | "Section I8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory * in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for,his apartment but has not received possession of ity The obligation imposed.on the promoter to pay. interest till such time as the apartment is handed ’ " over to him is not unreasonable
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के 'प्राविधानों के अन्तर्गत wey. a कंता के बीच किये गये-अनुबंध॑ के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। ह जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 77.0.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(li) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि-- । "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee 8 aS under any head whatsoever towards the purchase of — the apartment, along with jnterest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan: of State Bank of India +l% unless provided. otherwise under the Rules. within forty-five days of . receiving the termination notice!" . यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी we 9.30) में
| निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I5feet की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+I प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता . है। रेरा की धारा-2(28)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा “दी गयी है। अतः उक्त * . तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा व विलम्बित ह अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है.। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का*निस्तारण-करते हुए-निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश . विपक्षी को आदेशित किया जाता -है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने Dt तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्तागण से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 7 ओ.सी /सी.सी सहित प्लॉट का कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प ह शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2. विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को दिनांक 04.40.2044 से दिनांक sooo तक अनुबंध में अंकित देय ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज देय * होगा। उसके उपरांत दिनांक, 04.05.207 से ओ.सी/सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि क्रमशः: रु0. 45,45,679/ व रु0 45,45,679,/ पर MCLR+I प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| .ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की 9 All + —_—_—_—_—_—SS
धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार प्रत्येक शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 के अनुसार फोर्स मैज्योर : पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 3029,/4985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 » से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) ह है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। ह 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है किं रेरा अधिनियम, 2046 की धारा ह 2(2४)()के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर" आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान uy शिकायतकर्ता द्वारा भी ंटा॥ए+। प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है; तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी | ह 4. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास), अधिनियम, 206 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 5. विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रैंरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा . सकेंगें। | 6. आदेश की एक प्रति उक्त सम्बन्धित पत्रावली पर रखी जाए। 7. आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। - (=) $a eres ४४ ञं (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य : उ.प्र. भू-सम्पदा विंनियामक. प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर | 40