Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Pradeep Kumar v. La Residentia Developers Private Limited
Complaint No. NCR144/12/103631/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-04-15
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
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Judgment text
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, एच-469, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई पीठ-04 (पूर्व में पीठ--0-ए) निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी: श्री संजय आर. भूसरेड्डी, मा. अध्यक्ष ला रेसीडेन्सिया डेवलपर्स प्रा. लि. निर्णय उपर्युक्त सारणी में अंकित दोनों शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने के अनुतोष की प्रार्थना के साथ विपक्षी के विरूद्ध भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत शिकायतें योजित की गईं हैं। उपर्युक्त सारणी में अंकित क्रमांक संख्या: 04 के शिकायतकर्ता की शिकायत में अन्तिम सुनवाई दिनांक 29-0-2025 को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से कराई गई तथा | पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री अतुल कुमार सिंह उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री are कुमार के प्रॉक्सी अधिवक्ता श्री पुनीत जैन उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कों को विस्तार से सुनते हुए, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 29-40-2025 को ही सुरक्षित की गयी। उपर्युक्त सारणी में अंकित क्रमांक संख्या: 02 के शिकायतकर्ता की शिकायत में अन्तिम सुनवाई दिनांक 40-72-2025 को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से कराई गई तथा पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री दिव्यांशु सारस्वत उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री wre कुमार के प्रॉक्सी अधिवक्ता श्री पुनीत जैन उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के ae को विस्तार से सुनते हुए, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 40-42-2025 को ही सुरक्षित की गयी।
Page I of 3 एलॉटमेन्ट एलॉटमेन्ट कम फ्लैट एलॉटमेन्ट कम | यूनिट व एग्रीमेन्ट ” शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण | फ्लैट बायर टॉवर eer sil Bel शिकायतकर्ता ware el दिये जाने की तिथि जमा धनराशि ot. | पटार44/2/0363/2022 ene 26-05-2043 !' ली 26-05-2077. | %.29,99,004//— | ¥.28,04,044 /- अरूण कुमार शम Tis 7 | १४८७२।44/09/8] 82/202] एवं शिवारानी 435-03-20॥4 Ml 04 43-03--2045 रू,9,9,800/- | रू.3,05,000 / — सिन्हा बनाम E-Court उपर्युक्त दोनों शिकायतें विपक्षी की “La Residentia” परियोजना (पंजीयन संख्या: UPRERAPRJ9357), गौतमबुद्धनगर से सम्बन्धित हैं। उपर्युक्त सारणी में अंकित दोनों शिकायतों के तथ्य समरूप हैं एवं अनुतोष भी समान हैं। अतः पुनरावृत्ति से बचने तथा सुगमता की दृष्टि से दोनों शिकायतों का एक ही निर्णय द्वारा निस्तारण किया जा रहा है। क्रम संख्या: 04-शिकायत संख्या: धटार44/2/0363/2022, “प्रदीप कुमार एवं शिवानी सिन्हा बनाम ला रेसीडेन्सिया डेवलपर्स प्रा. लि.” अग्रणी परिवाद रहेगा।
संक्षेप में शिकायतकर्तागण का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना “La Residentia” में आवासीय यूनिट्स के आवंटन हेतु आवेदन प्रस्तुत किये गये, जिसके उपरान्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण के पक्ष में प्रश्नगत यूनिट्स के सम्बन्ध में एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायर We निष्पादित किये गये। अग्रणी शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा आवंटन-पत्र के अनुसार प्रश्नगत यूनिट की बुकिंग से 36 माह + 06 माह ग्रेस पीरियड अर्थात् दिनांक 26-44-2046 तक प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा आज तक प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है, जो कि विधिविरूद्ध है। विपक्षी द्वारा परियोजना स्थल को निर्माण के प्रारम्भ होने के दौरान ही पूर्णता Bs (Abandoned एवं रोक दिया गया और विपक्षी की ओर से निर्माण की दिशा में आगे कोई कार्य नहीं किया जा रहा है तथा निकट भविष्य में प्रश्नगत यूनिट का कब्जा मिलने की कोई सम्भावना नहीं है। अतः शिकायतकर्तागण द्वारा अपनी-अपनी मूल शिकायतों में अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख करते हुए, जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त अग्रणी शिकायतकर्ता की ओर से विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र
के विरूद्ध भौतिक रूप से दिनांक 40-07—-2025 को तथा पोर्टल पर दिनांक 44-07-2025 को अपना प्रत्युत्तर तिथि रहित अपलोड एवं दाखिल करते हुए, मूल शिकायत में किये गये तथ्यों / अभिकथनों की पुनरावृत्ति की गयी है और कहा गया है कि विपक्षी द्वारा जानबूझकर 0 माह से अधिक समय का विलम्ब किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार 90 प्रतिशत से अधिक धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा Wr अधिनियम, 2046 की ARI-i8(i (a) का उल्लेख किया गया है। रेरा तकनीकी |. टीम द्वारा प्रस्तुत आख्या के अनुसार प्रश्नगत परियोजना में विभिन्न कार्य अपूर्ण हैं। विपक्षी द्वारा सक्षम प्राधिकरण से प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में कोई ओ.सी. / सी.सी. अथवा 04 एन.ओ.सी. प्राप्त नहीं की गयी है, जिससे यह स्पष्ट है कि प्रश्नगत परियोजना पूर्णता के चरण से काफी दूर है। विपक्षी द्वारा कभी भी भौतिक कब्जा ऑफर नहीं किया गया है। इसलिए शिकायतकर्ता, प्रश्नगत यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं करना चाहता है। विपक्षी द्वारा दाखिल आपत्ति-पत्र में अंकित समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों का शिकायतकर्तागण द्वारा पूर्ण रूप से खण्डन करते हुए, अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों Page 2 of 3 E-Court का उल्लेख कर, मूल शिकायतों में अंकित याचित अनुतोष को दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
अग्रणी शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में रेरा तकनीकी टीम द्वारा प्रस्तुत निरीक्षण आख्या, दिनांक 0:-0:-2024 की प्रति, पेमेन्ट क्लीरिफिकेशन प्रार्थना-पत्र, दिनांक 26-02-2025 की प्रति, स्टेटमेन्ट ऑफ अकाउन्न्ट की प्रति, लिखित बहस, एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट, दिनांक 26-05-2043 की प्रति, आदि अभिलेखों छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। अग्रणी शिकायतकर्ता के प्रकरण में विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 28-05-2023 दाखिल करते हुए कहा गया कि प्राधिकरण द्वारा प्लॉट संख्या: GH-06, क्षेत्रफल 97,226.62 वर्ग मीटर आवंटित किया गया, जिसको बाटते हुए मैसर्स ला रेसीडेन्सिया डेवलपर्स प्रा. लि. को प्लॉट संख्या: 6-06#, क्षेत्रफल 80026.62 वर्ग मीटर आवंटित किया गया। परियोजना दिनांक 46-03-2044 को लॉन्च की गयी थी। परियोजना में कुल-39 टावर हैं।
परियोजना के फेज-4 में GHet-t8 टावर (टॉवर- से 48 तक) हैं, जिसमें 4,408 यूनिट्स हैं। उक्त टावर्स में से 2 टावर्स का ओ.सी. प्राप्त किया जा चुका है और अवशेष टावर्स का ओसी. प्राप्त किये जाने हेतु ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा चुका है। जिन टावरों का ओ.सी. प्राप्त किया जा चुका है, उसमें यूनिटों का कब्जा दिया जा रहा है और वर्तमान में 4255 यूनिटों का कब्जा दिया जा चुका है। परियोजना के फेज-2 में Her-77 टावर (erax-t9 से 29 तक) हैं, जिसमें फिनिशिंग कार्य चल रहा है और जून, 2024 + 06 माह ग्रेस पीरियड में यूनिट का कब्जा दे दिया जायेगा। परियोजना के फेज-3 में कुल 40 टावर (टावर-30 से 39 तक) हैं, जिसमें फिनिशिंग कार्य चल रहा है और जून, 2025 + 06 माह ग्रेस पीरियड में यूनिट का कब्जा और सभी सुविधाओं सहित दिसम्बर, 2025 तक कब्जा दे दिया जायेगा। विपक्षी की परियोजना RI | पंजीकृत है। परियोजना विभिन्न न्यायालय के आदेशों के कारण विलम्बित हुई। दिनांक 49-07-2044 से दिनांक 24-08-202 तक निर्माण कार्य बन्द रहा। इस अवधि में मा. सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष किसानों द्वारा कई Re याचिकायें योजित की गयी। मार्च, 20:3 के बाद निर्माण कार्य धीमी गति से शुरू हुआ। मार्च, 204 से वर्ष, 20:3 तक निर्माण कार्य की गति बहुत धीमी रही। अन्ततः दिनांक 44-05-20:5 को मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भूमि अधिग्रहण को Re याचिका संख्या: 4506 /20:5 “सावित्री देवी बनाम उ.प्र. सरकार एवं आदि“ में स्वीकृति दी गयी। मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 23-07-2049 को 632 यूनिटों को आम्रपाली ग्रुप को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। विपक्षी कम्पनी ने Re याचिका संख्या: 940 // 207 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया, जिसमें मा. सर्वोच्च न्यायालय ने कम्पनी ला रेजिडेन्सिया को दिनांक 4-40-209 के आदेश के माध्यम से किसी भी
Page 3 03 E-Court सम्पत्ति को अलग करने से रोक दिया। अतः विगत 22 माह से इसकी पुनर्विक्रय पर रोक के कारण कम्पनी /परियोजना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और इसने कम्पनी को संकट में डाल दिया है, इस कारण कम्पनी का नकदी प्रवाह भी प्रभावित होता है। इस सुस्त कारोबारी माहौल के साथ कम्पनी /परियोजना को और अधिक प्रभावित किया है, फिर भी कंपनी निर्माण कार्य को प्रारम्भ करने का प्रबन्धन कर रही है, निषेधाज्ञा आदेश के कारण निर्माण धीमा हो गया है, अनुपालन बाधा आदेश में विपक्षी ने पहले ही एक हलफनामा दायर किया है। विपक्षी का यह भी कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना के टॉवर-ग-35 के 43वें तल पर फ्लैट संख्या: 303 बुक कराया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा werd यूनिट की कुल कीमत रू.29,99,004,/- के सापेक्ष स्वयं रू.8,54,724,/- एवं रू.9,48,640 /“- की धनराशि का भुगतान बैंक के माध्यम से किया गया। sag पक्षों के मध्य निष्पादित व हस्ताक्षरित एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट, दिनांक 26-05-2043 के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह + 06 माह ग्रेस पीरियड दिया जाना था। प्रश्नगत परियोजना में फिनिशिंग का कार्य तीव्र गति चल रहा है और जून, 2025 + 06 माह ग्रेस पीरियड में शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दे दिया जायेगा। रेरा प्राधिकरण द्वारा दिनांक 9-04-2023 को रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-6 सपठित धारा-8, धारा-37 तथा उ.प्र. RT नियमावली के नियम-7 के अन्तर्गत आदेश पारित करते हुए, प्रश्नगत परियोजना को पूर्ण करने हेतु जून, 2025 तक का समय प्रदान किया गया है। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा अग्रणी शिकायतकर्ता को जून, 2025 + 06 माह ग्रेस पीरियड सहित कब्जा दिये जाने हेतु समय प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है।
उपर्युक्तानुसार अन्य शिकायतकर्ता (अरूण कुमार शर्मा एवं शिवारानी सिन्हा) के प्रकरण में भी विपक्षी द्वारा समान तथ्यों एवं अभिकथनों के आधार पर अपना आपत्ति-पत्र, दिनांक 25-44-2024 तथा दिनांक 42-05-2023 रेरा कम्प्लेन्ट पेज पर अपलोड एवं दाखिल किये गये हैं और कहा गया है कि शिकायतकर्ता (अरूण कुमार शर्मा एवं शिवारानी सिन्हा) द्वारा उनकी परियोजना के टॉवर-गप-5 के wa तल पर फ्लैट संख्या: 204 बुक कराया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत &.29,97,800 /- के सापेक्ष रू.2,66,35 /— की धनराशि का भुगतान किया गया है, तदोपरान्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष धनराशि रू.7,25,665 /— (कर सहित) का भुगतान करने हेतु माँग-पत्र, दिनांक 27-08-2043, दिनांक 25-07-2047, दिनांक 42-42-2047 तथा दिनांक 44-07-2048 को प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा उपर्युक्त धनराशि का भुगतान नहीं किया गया और न ही कोई जवाब दिया गया, जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्री-कैन्सिलेशन लेटर, दिनांक 27-06-2049 को प्रेषित किया गया और यूनिट निरस्तीकरण पत्र, दिनांक 04-08-2049 को प्रेषित कर, प्रश्नगत यूनिट की बुकिंग निरस्त की जा चुकी है। विपक्षी, एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायश्र एग्रीमेन्ट की शर्तों के अनुसार SER मनी की कटौती करने के बाद अवशेष धनराशि G.20,66,955 /— वापस करने हेतु तैयार हैं, परन्तु शिकायतकर्ता न तो अवशेष धनराशि लेने आया है और न ही मूल दस्तावेज Page 4 03 E-Court
जमा किये गये हैं। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता (अरूण कुमार शर्मा एवं शिवारानी सिन्हा) के प्रकरण में शिकायतकर्ता को सभी मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद अपनी अवशेष धनराशि का चेक प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। अग्रणी शिकायतकर्ता की शिकायत में विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में रेरा प्राधिकरण द्वारा te अधिनियम, 20:6 की धारा-6 सपठित धारा-8, धारा-37 तथा उ.प्र. रेरा नियमावली के नियम-7 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 9-04-2023 की प्रति दाखिल की गयी हैं। मैंने पक्षकारों के विद्वान अधिवक्तागण के cpt को विस्तार से सुना तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं अभिलेखों का सम्यूक परिशीलन किया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दुओं पर विचार कियाः- . क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें और क्या विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना रेरा में पंजीकृत हैं ? 2... कया शिकायतकर्तागण की जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलायी जा सकती है? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी? निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 बिन्दु संख्या: 04, इस आशय से विचरित किया गया है कि gar रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं तथा कया पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें और gar विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना रेरा में पंजीकृत है ?
इस सम्बन्ध में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 6745--6749 / 202, “red न्यूटेक ग्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स ग्रा लि. बनाम oa राज्य व अन्य” में दिये गये निर्णय में स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि:- #54, From the scheme of the Act 2076, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 2046. ” उपर्युक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन Page 5 ०3 E-Court पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपर्युक्त मा. उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें।
विपक्षी द्वारा प्रश्ननत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका रेरा पंजीयन नं. UPRERAPRJ9357 हैं| अत: वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती हैं। ऐसी दशा में प्रश्नगत प्रकरणों में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तदनुसार बिन्दु संख्या: 04 Peake किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या: 02 बिन्दु संख्या: 02, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण की जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलायी जा सकती है? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्तागण के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्तागण पर है। अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा आवंटन-पत्र के अनुसार प्रश्नगत यूनिट की बुकिंग से 36 माह + 06 माह ग्रेस पीरियड अर्थात् दिनांक 26-7:-206 तक प्रश्नगनत यूनिट का भौतिक कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा आज तक प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है, जो कि विधिविरूद्ध है। विपक्षी द्वारा परियोजना स्थल को निर्माण के प्रारम्भ होने के दौरान ही पूर्णता छोड़ (Abandoned एवं रोक दिया गया और विपक्षी की ओर से निर्माण की दिशा में आगे कोई कार्य नहीं किया जा रहा है तथा निकट भविष्य में प्रश्नगत यूनिट का कब्जा मिलने की कोई सम्भावना नहीं है। अतः शिकायतकर्तागण द्वारा अपनी-अपनी मूल शिकायतों में अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख करते हुए, जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर अग्रणी शिकायतकर्ता के प्रकरण में विपक्षी की ओर से विपक्षी की ओर से अपना लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 28-05-2023 दाखिल करते हुए कहा गया कि प्राधिकरण द्वारा प्लॉट संख्या: 6-06, क्षेत्रफल 97,226.62 वर्ग मीटर आवंटित किया गया, जिसको बाटते हुए मैसर्स ला रेसीडेन्सिया डेवलपर्स प्रा. लि. को प्लॉट संख्या: GH-06A, aap 80026.62 वर्ग मीटर आवंटित किया गया। परियोजना दिनांक 46-03-2044 को लॉन्च की गयी थी। परियोजना में कुल-39 टावर हैं। परियोजना के फेज-4 में कुल-48 टावर (टॉवर-4 से 48 तक) हैं, जिसमें 4,408 यूनिट्स हैं। उक्त टावर्स में से 42 टावर्स का ओ.सी. प्राप्त किया जा चुका है और अवशेष टावर्स का ओ.सी. प्राप्त किये जाने हेतु Page 6 0[3
नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के ae आवेदन किया जा चुका है। जिन टावरों का ओ.सी. प्राप्त किया जा चुका है, उसमें यूनिटों का कब्जा दिया जा रहा है और वर्तमान में 4255 यूनिटों का कब्जा दिया जा चुका है। परियोजना के फेज-2 में |aI-0 टावर (टावर-49 से 29 तक) हैं, जिसमें फिनिशिंग कार्य चल रहा है और जून, 2024 + 06 माह ग्रेस पीरियड में यूनिट का कब्जा दे दिया जायेगा। परियोजना के फेज-3 में कुल 40 टावर (टावर-30 से 39 तक) हैं, जिसमें फिनिशिंग कार्य चल रहा है और जून, 2025 + 06 माह ग्रेस पीरियड में यूनिट का कब्जा और सभी सुविधाओं सहित दिसम्बर, 2025 तक कब्जा दे दिया जायेगा। विपक्षी की परियोजना रेरा में पंजीकृत है। विपक्षी का यह भी कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना के टॉवर-ग-35 के 43वें तल पर फ्लैट संख्या: 303 बुक कराया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा ward यूनिट की कुल कीमत रू.29,99,004 /- के सापेक्ष स्वयं रू.8,54,724 //- एवं G.i9,48,640/— की धनराशि का भुगतान बैंक के माध्यम से किया गया। उभय पक्षों के मध्य निष्पादित व हस्ताक्षरित एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट, दिनांक 26-05-2043 के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह + 06 माह ग्रेस पीरियड दिया जाना था। प्रश्नगत परियोजना में फिनिशिंग का कार्य तीव्र गति चल रहा है और जून, 2025 + 06 माह ग्रेस पीरियड में शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दे दिया जायेगा। रेरा प्राधिकरण द्वारा दिनांक 49-04-2023 को रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-6 सपठित धारा-8, धारा-37 तथा उ.प्र. रेरा नियमावली के नियम-7 के अन्तर्गत आदेश पारित करते हुए, प्रश्नगत परियोजना को पूर्ण करने हेतु जून, 2025 तक का समय प्रदान किया गया है। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा अग्रणी शिकायतकर्ता को जून, 2025 + 06 माह ग्रेस पीरियड सहित कब्जा दिये जाने हेतु समय प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है, परन्तु sad अवधि व्यतीत हो चुकी है।
उपर्युक्तानुसार अन्य शिकायतकर्ता (अरूण कुमार शर्मा एवं शिवारानी सिन्हा) के प्रकरण में भी विपक्षी द्वारा समान तथ्यों एवं अभिकथनों के आधार पर अपना आपत्ति-पत्र, दिनांक 25-44-2024 तथा दिनांक 42-05-2023 रेरा कप्प्लेन्ट पेज पर अपलोड एवं [दाखिल किये गये हैं और कहा गया है कि शिकायतकर्ता (अरूण कुमार शर्मा एवं शिवारानी सिन्हा) द्वारा उनकी परियोजना के cfax-T-5H 44वें तल पर फ्लैट संख्या: i004 बुक कराया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत रू.9,94,800/- के सापेक्ष &.2,66,435 /— की धनराशि का भुगतान किया गया है, तदोपरान्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष धनराशि रू.7,25,665 /— (कर सहित) का भुगतान करने हेतु माँग-पत्र, दिनांक 2-08--2043, दिनांक 25--07-2047, दिनांक 42-42-2047 तथा दिनांक 44-07-2048 को प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा उपर्युक्त धनराशि का भुगतान नहीं किया गया और न ही कोई जवाब दिया गया, जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्री-कैन्सिलेशन लेटर, दिनांक 27-06-2049 को प्रेषित किया गया और यूनिट निरस्तीकरण पत्र, दिनांक 0i-08-20:9 को प्रेषित कर, प्रश्नगत यूनिट की बुकिंग निरस्त की जा चुकी है। विपक्षी, एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायश्र एग्रीमेन्ट की शर्तों के अनुसार अरनेस्ट मनी की कटौती करने के बाद अवशेष धनराशि G.20,66,955 /— वापस करने हेतु Page 7 of 3 E-Court
= हैं, परन्तु शिकायतकर्ता न तो अवशेष धनराशि लेने आया है और aA मूल दस्तावेज जमा किये गये हैं। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता (अरूण कुमार शर्मा एवं शिवारानी सिन्हा) के प्रकरण में शिकायतकर्ता को सभी मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद अपनी अवशेष धनराशि का चेक प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा पत्रावली पर दाखिल एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायर wit, दिनांक 26-05—20:3 WER-i9(a) के अनुसार विपक्षी द्वारा अनुबन्ध निष्पादित किये जाने की तिथि से 42 माह + 06 माह ग्रेस पीरियड अर्थात् दिनांक 26--05-2047 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किये जाने का दायित्व था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक प्रश्नगत यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है। अत: उपर्युक्त तथ्यों से यह स्पष्ट है कि विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना विलम्बित हैं। प्रश्नगत प्रकरणों में विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य /प्रमाण रेरा कम्प्लेन्ट पेज़ पर अपलोड एवं दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके कि उनके द्वारा wee परियोजना » etal का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका हो और चारों वांछित प्रमाण-पत्र प्राप्त करते हुए, डीम्ड ओ.सी.,/सी.सी. अथवा सक्षम प्राधिकरण से विधिक ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किया जा चुका हो।
प्रकरणों में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को अभी तक प्रश्नगत यूनिट्स के भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराये गये हैं और न ही विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की जमा धनराशि मय ब्याज वापस की गयी है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण से प्राप्त धनराशि का उक्त अवधि में उपभोग किया गया है। ऐसी स्थिति में विपक्षी, शिकायतकर्तागण द्वारा समस्त जमा धनराशि में से किसी भी धनराशि,/अरनेस्ट मनी की कटौती करने का अधिकारी नहीं है। चूंकि शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस प्राप्त किये जाने हेतु, प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं, परन्तु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की जमा धनराशि वापिस नहीं की गयीं और दूसरी प्रश्नगत परियोजना उपर्युक्तानुसार अत्यधिक विलम्बित है। अत: समस्त तथ्यों वर्णित परिस्थितियों के आलोक में यह उचित होगा कि विपक्षी, शिकायतकर्तागण की जमा धनराशि मय ब्याज सहित वापिस करें। रेरा अधिनियम के धारा-48(0) में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि :- 36. (2) If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,— (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date Specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or Sor any other reason, Page 8 of 3 E-Court
= shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. उपर्युक्तानुसार यदि प्रोमोटर करार के निबन्धों के अनुसार उसमें दिये गये अवधि तक समय से किसी अपार्टमेन्ट, भू-खण्ड या भवन को पूरा करने में असफल रहता है या कब्जा देने में असमर्थ रहता है, तो वह उपलब्ध किसी अन्य उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना आवंटी की मांग पर यदि आवंटी परियोजना से बाहर होना चाहता है, तो प्रकरणों के अनुसार, उस अपार्टमेन्ट, भू-खण्ड या भवन के सम्बन्ध में उसके प्राप्त धनराशि ब्याज सहित लौटाने का दायी होगा।
यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को यूनिद्स का कब्जा अनुबन्धानुसार निर्धारित अवधि में दिया जाना था, जिसको विपक्षी द्वारा पूर्ण करने का दायित्व था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक शिकायतकर्तागण को प्रश्नगत यूनिट्स के भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराये गये हैं और प्रश्नगत परियोजना विलम्बित हैं तथा न ही विपक्षी द्वारा werd परियोजना के सम्बन्ध में कोई ओ.सी./ सी.सी. अथवा डीम्ड ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त की गयी है। अतः शिकायतकर्तागण, रेरा अधिनियम की धारा-48(4)(ए) के अन्तर्गत परियोजना से बाहर आने के अधिकारीगण हैं। इस सम्बन्ध में मा. उच्चतम न्यायालय के सिविल अपील संख्या: 3482 / 2049 “कोलकाता बेस्ट इंटरनेशनल सिटी ग्रालि बनाम देवाशीष war’ में स्पष्ट रूप ! से अभिनिर्धारित किया गया है कि :- x
"It would be manifestly unreasonable to construe the contract between the” parties as requiring the buyer to wait indefinitely for possession. By 2046, nearly seven years had elapsed from the date of the agreement. Even according to the developer, the completion certificate was received on 29 March 2046. This was nearly seven years after the extended date for the handing over of possession prescribed by the agreement. A buyer can be expected to wait for possession for a reasonable period. A period of seven years is beyond what is reasonable. Hence, it would have been manifestly unfair to non-suit the buyer merely on the basis of the first prayer in the reliefs sought before the SCDRC. There was in any event a prayer for refund. In the circumstances, we are of the view that the orders passed by the SCDRC and by the NCDRC for refund of moneys were justified." Page 9 of 3 4 E-Court साथ ही इसी क्रम में मा. सर्वोच्च न्यायालय के सिविल अपील संख्या: 42238 / 2048, “UPR अर्बन AS एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर fees बनाम गोविन्द राघवन में भी अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"9. We see no illegality in the Impugned Order dated 23. 70,.2078 passed by the National Commission. The Appellant — Builder failed to fulfill his contractual obligation of obtaining the Occupancy Certificate and offering possession of the flat to the Respondent — Purchaser within the time stipulated in the Agreement, or within a reasonable time thereafter. The Respondent - Flat Purchaser could not be compelled to take possession of the flat, even though it was offered almost 2 years after the grace period under the Agreement expired. During this period, the Respondent — Flat Purchaser had to service a loan that he had obtained for purchasing the flat, by paying Interest ७270% to the Bank. In the meanwhile, the Respondent — Flat Purchaser also located an alternate property in Gurugram. In these circumstances, the Respondent - Flat Purchaser was entitled to be granted the relief prayed for i.e. refund of the entire amount deposited by him with Interest." उपर्युक्तानुसार दी गयी विधि व्यवस्था में गृहक्रेताओं को एक उचित समय तक प्रतीक्षा कराया जा सकता है। पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त होने के उपरान्त भी शिकायतकर्तागण जमा धनराशि पाने का अधिकारीगण हैं। चूंकि विपक्षी द्वारा परियोजना समय से पूर्ण नहीं की गयी है। अतः ऐसी दशा में शिकायतकर्तागण जमा धनराशि मय ब्याज पाने के अधिकारीगण हैं | जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “Neelkamal Realtors Suburban Pvt. Ltd. Versus Union of India & Ors." के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है fe:—
"Section 78(7/ (0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अत: उपर्युक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर एवं आवंटी के बीच किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल Page 0 of 3 cA = पर ब्याज देय होगा, क्योंकि Wied ERT sat धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 के अधीन दिनांक 72-70-20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 अधिसूचित की गयी हैं, जिसमें देय ब्याज दर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा निर्धारित ,४८४+/ प्रतिशत निर्धारित की गयी है, जिसे मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या: सी: 920 // 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors" में भी उचित एवं विधिपूर्ण माना गया 8 | ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर ॥#८7/२+। प्रतिशत, जो कि we बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से ules ज्यादा है, उचित एवं सही है। तदनुसार बिन्दु संख्या: 02 Prana किया जाता है। इसके अतिरिक्त विपक्षी / प्रमोटर को जो धनराशि शिकायतकर्तागण को अदा की जानी है, उसमें से आयकर अधिनियम का आधार लेकर टी.डी.एस. की कटौती नहीं कर सकता है, क्योंकि sat धनराशि को डिक्रिटल (ecreral) धनराशि के रूप में WI द्वारा शिकायतकर्ता के हक में प्रदान किया गया है। इस सम्बन्ध में मा. उच्च न्यायालय, हिमाचल प्रदेश द्वारा स्रीआर्ई टी बनाम हिगाचल wer आवास विकास परिषद 2077 SCC OnLine HP 5204 के मामले में निम्नवत् आदेश पारित किये गये:- “The following interesting questions arise for decision in the present case:
2. Whether, on the facts and in the circumstances of the case, the hon'ble Tribunal was right in holding that the interest paid or credited by the Housing Board to its allottees (payees) was of capital nature and thus not subject to deduction of tax at source when as per law it is the recipient (payee) who can decide if a particular receipt (interest in this case) is of revenue or capital in nature 27 9. While taking this view we are relying upon the judgment of the apex court in Bikram Singh 0. Land Acquisition Collector (7997) 224 ITR 557 (SC). In the case before the apex court, the question was whether the interest paid to the persons whose land had been compulsorily acquired under sections 28 and 3 of the Land Acquisition Act was a revenue receipt or a capital receipt. The apex court held that though it was termed as interest on delayed payment, it was actually a revenue receipt and, therefore, the provisions of section 7944 of the Income tax Act would have no application. It would be pertinent to mention that the National Page I] of 3 E-Court Consumer Disputes Redressal Commission in Revision Petition No. 2244 of 7999 titled as Ghaziabad Development A uthority v. Dr. N. K.Gupta (2002) 258 ITR 337 (NCDRO©) under similar situation held that when the State Commission directed payment of interest to the allottees for delayed completion of flats the same did not fall within the purview of section 7944 of the Income-tax Act.
40. In the present case, the allottees had not given the money to the Board by way of deposit nor had the Board borrowed the amount from the allottees. The amount was paid under a self-financing scheme for construction of the flat and the interest was paid on account of damages suffered by the claimant for delay in completion of the flats. (4. In view of the above discussion, we answer both the questions in favour of the assessee and against the Revenue. The appeal is accordingly dismissed with no order as to costs.” इसी प्रकार मा. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा भी एस्टेट ऑफीसर ग्रेटर मोहाली क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण a अन्य बनाम गौरव जुटनेजा 2020 SCC OnLine NCDRC 278 के मामले में समान न्यायिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है। उपर्युक्त वर्णित दोनों मामलों में प्रतिपादित न्यायिक सिद्धान्त को पुनः मा. उच्च न्यायालय, बम्बई द्वारा भी सारईनाथ राजकुमार सरोड़े व अन्य बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र व HF, 2027 SCC OnLine Bom 2798 के मामले में दोहराया गया है। निर्णय के सुसंगत प्रस्तर निम्नवत् है-
28. Coming to the admitted facts of the present case we hold that the amounts payable being in effect a refund of the amounts paid by the petitioners to Respondents 4 to 7, along with compensatory interest thereon, such a relationship does not spell out a debtor-creditor relationship nor is the payment made by Respondents 4 to 7 to the petitioners one in discharge of any pre-existing obligation, so as to attract Section 2(28-A) of the IT Act. We are in respectful agreement with the judgment of the Kerala High Court in Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT [Beacon Projects (P) Ltd. y. CIT, 2075 SCC OnLine Ker 468597/ which takes the same view, in facts similar to those that we are dealing with in the present matter. 29. In view of the above, we hold that the compliance of Respondents 4 to 7 with the schedule of payments under the consent terms dated 4-3-2024 and our order dated 4-3-2027, is to be made without making any deduction of tax at source. Respondents 4 to 7 are directed to pay to the petitioners the balance sum of Rs 5,05,989 deducted from the 5th instalment which became due on 20-7-2024, in compliance with the consent terms, within a period of one week from today. जहाँ तक शिकायतकर्तागण को मानसिक उत्पीड़न व कष्ट तथा वित्तीय हानि आदि Hal में क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का प्रश्न है, तो उसका क्षेत्राधिकार रेरा प्राधिकरण की पीठ Page 2 of 3 E-Court
= प्राप्त नहीं है। अतः शिकायतकर्तागण क्षतिपूर्ति के लिए अपने वाद »परिवाद सक्षम प्राधिकारी / न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए was हैं। उपर्युक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है:- आदेश L. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्तागण की समस्त जमा धनराशि, जमा करने की तिथि से लेकर धनराशि की वास्तविक अदायगी की तिथि तक meres प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर सहित वापस अदा करना सुनिश्चित करें। 2. इस आदेश की एक प्रति सम्बन्धित पत्रावली पर संलग्न की जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की अन्य मामले में गणना की जायेगी। 3. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा । 4. शिकायतकर्तागण को यह भी निर्देशित किया जाता है कि यदि 45 दिनों के अन्दर विपक्षी द्वारा उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्तागण “er पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन कराये जाने हेतु अनुरोध अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगें | 5. पक्षकार अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। तद्नुसार पत्रावलियाँ दाखिल-दफ्तर हों। दिनांक: 43--04-2026. Page 3 of 3