Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Kushal Bhatia v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/12/103566/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-03-01
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddha Nagar Bench-3 (Former Bench-2) Order passed under Section-31 of the Real Estate (Regulation and Development) Act 2046 Present:-- Dr. Deepak Swarup Saxena, Member | S.No. | Complaint No. | Complainants | Unit No. | Deposited Amount as per receipt available on record (Rs.) | Date of Allotment | Date of handing over possession as per agreement | Relief Sought | | 1. | पटर4%72705549/2022 | Himanshu Sharma | 4225 | Rs. 44,77,338/- | 04.08.205 | 42 months + 3 months grace period i.e. March 2049 | Request made for possession of unit and interest for delayed period. | | 2. | ॥८४44/2/03562/2022 | Parag Agarwal | 409 | Rs. 39,96,736/- | 27.05.20i5 | 42 months + 3 months grace period i.e. February 2049 | Request made for possession of unit and interest for delayed period. | | 3. | पटार]44/2/03566/2022 | Kushal Bhatia | 3475 | Rs. 40,32,497/- | 8.05.205 | 42 months + 3 months grace period i.e. February 2049 | Request made for possession of unit and interest for delayed period. | | 4. | रटार44/2/03568/2022 | Atul Marwah and Lalita Marwah | 3204 | Rs. 42,30,977/- | 45.09.2045 | 42 months + 3 months grace period i.e. 2009 | Request made for possession of unit and interest for delayed period. | Versus ATS Realty Pvt. Ltd.
Along with complainant Himanshu Sharma, complaints have been instituted by 3 other complainants against the respondent. The facts and evidence of all these complaints are identical. All these complaints are related to the same project ATS ALLURE. Therefore, they are being disposed of by a single decision. The file of Complaint No.- NCR44/2/03549/2022 Himanshu Sharma shall remain the lead complaint. These complaints have been instituted by the complainants against the respondent for grant of possession of the unit and interest for the delayed period. In brief, the lead complainant states that the unit mentioned in the above table was booked in the project ATS ALLURE operated by the respondent, against which the amount of Rs. 44,77,338/- mentioned in the table was paid to the respondent. The complainants state that the respondent was to complete the project and hand over possession of the unit by the date mentioned in the table, but it has not been given till date, due to which reason this complaint has been registered by the complainants against the respondent under Section 31 of the Real Estate Regulatory Authority Act. In support of their statements, copies of allotment letters and statements of account were filed by the complainants. The details of the amounts paid by the complainants to the respondent are as follows:-
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 (पूर्व पीठ-2) भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थितः-- डा०दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या शिकायतकर्तागणए | यूनिट पत्रावली पर आवंटन की अनुबंधानुसार वांछित अनुतोष हर उपलब्ध रसीद के तिथि कब्जा दिये जाने सं0 q न0 अनुसार जमा की तिथि धनराशि रु0 I. पटर4%72705549/2022 | हिमांशु शम 4225.._| रु० 4477,338 / | 04.08.205 42 माह + 3 | यूनिट का कब्जा माह अनुग्रह व विलम्बित अवधि अर्थात मार्च | अवधि का ब्याज 2049 * दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। 2. | ॥८४44/2/03562/2022 | पराग srraTa =| 409 | रु0 39,96,736/ | 27.05.20i5 | 42 माह +3 माह | यूनिट का कब्जा अनुग्रह अवधि व विलम्बित अर्थात फरवरी अवधि का ब्याज 2049 दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। 3. | पटार]44/2/03566/2022 | कुशल भाटिया | 3475 | BO 40,32,497/ | 8.05.205 | 42 माह +3 माह | यूनिट का कब्जा अनुग्रह अवधि व विलम्बित अर्थात फरवरी अवधि का ब्याज 2049 दिलाये जाने का अनुरोध किया | गया है। 4. | रटार44/2/03568/2022 | अतुल मेरवाह व | 3204... | Bo 42,30,977/7 | 45.09.2045 42 माह +3 माह ae ae का कब्जा अनुग्रह अवधि | व विलम्बित ललिता मारवाह अर्थात 2009 | अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया | गया है। बनाम एटीएस रिएलटी प्रा0 लि0 शिकायतकर्ता हिमांशु शर्मा के साथ 3 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के
विरुद्ध परिवाद योजित की गई है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतों एक ही परियोजना ATS ALLURE से सम्बन्धित है। अत: एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- 7८टा244/2/03549/2022 हिमांशु शर्मा की पत्रावली अग्रणी परिवाद रहेगी। शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित की गयी है। >अ्च्श्ड2- है। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE 4 saa तालिका में अंकित यूनिट बुक कराया गया था, जिसके सापेक्ष तालिका में अंकित धनराशि wo 44,77,338, विपक्षी को भुगतान की गई | शिकायतकर्तागण का कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण कर तालिका में अंकित तिथि तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक नहीं दिया गया, जिस कारण शिकायतकर्तागण द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्तागण द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र व स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम | विवरण दिनांक / अन्य साक्ष्य [भुगतान की गई धनराशि संख्या | (रु0) 4 शिकायतकर्ता-हिमांशु शम Weert 80 44,77,338 / स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट 2. |शिकायतकर्ता-पराग अग्रवाल WER BO 39,96,736 / Rete aie एकाउंट P| शिकायतकर्ता-कुशल भाटिया 04.44.2022 BO 40,32,496 / कस्टमर लेजर |] शिकायतकर्ता-अतुल मारवाह 26..2022 BO 42,30,974 / कस्टमर लेजर
विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (Contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस कारण वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील संख्या 6 /20i8 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग wo लि0 में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु दायर किया है। शिकायतकर्ता ने समय से धनराशि का भी —_ a 2 भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण के ft पीठों में वाद दायर किये जो निरस्त किये जा चुके है। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के अन्दर यूनिट का कब्जा दिये जाने के लिए बचनबद्ध था परन्तु फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता को धनराशि भुगतान किये जाने के लिए कई अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता ने धनराशि का भुगतान नही किया और न ही कब्जा लेने आया जिस कारण शिकायतकर्ता कोई अनुतोष पाने का अधिकारी नहीं है। अतः विपक्षी ने परिवाद को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में ऑफर ऑफ पजेशन, अंनुस्मारक पत्र, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट एवं अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 की छायाप्रति दाखिल की गयी है।
उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या i: प्रश्न संख्या-। इस आशय का विरचित किया गया है कि परियोजना फोर्स मैज्योर gece होने के कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह उल्लेख किया गया है कि एन.जी. &, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व कोविड-49 महामारी के कारण निर्माण कार्य बंद था। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029 / 4985 एम.सी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है। —S 3 उक्त के संदर्भ में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940,/ 2047 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य“ के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर 440 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया हैः- "Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature." उपरोक्त फोर्स मैज्योर की परिभाषा से यह we है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में कोविड-49 महामारी के अतिरिक्त अन्य ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है।
कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06. 2020 को alfas—i9 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनोक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर grey के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये विपक्षी wifas—i9 के अतिरिक्त अन्य किसी आधार पर फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। तद्नुसार प्रश्न Wea निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के —_ = 4 मध्य दिनांक 04.02.204 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 3 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात नवम्बर 2047 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है।
इसी क्रम में अनुबंधानुसार उपरोक्त तालिका में अंकित शिकायतकर्तागण क्रम संख्या 2 व 3 को फरवरी 2049 व शिकायतकर्ता क्रम संख्या 4 को जून 2049 में यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकाय॑तकर्तागण को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ। विपक्षी का कहना है कि फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। विपक्षी का यह भी कथन है कि शिकायतकर्ता ने भिन्न भिन्न पीठों में वाद दायर किये है जो निरस्त हो चुके हैं परन्तु विपक्षी द्वारा इस सम्बंध में पीठ द्वारा पारित ऐसे किसी आदेश की प्रति दाखिल नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी का यह भी तर्क है कि परियोजना पूर्ण है और विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण है और विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त हो चुका है और शिकायतकर्तागण को कब्जा लेने हेतु कई अनुस्मारक पत्र भेजे गये जिसकी प्रति पत्रावली पर उपलब्ध है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 5 वर्षो से अधिक का विलम्ब किया गया है। चूंकि शिकायतकर्तागण द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 // 208 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- ॥ "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as =
per the admission of the Respondent - Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ sara वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in ——=s 6
nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 7.0.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के we 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(7) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I feed की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता
Se 7 है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। WW की धारा-2(28)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश i. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को आवंटित यूनिट अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 30 अप्रैल 2024 तक ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें।
2. विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2049 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 44,77,338/ पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09. 2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। उक्त तालिका में अंकित क्रम संख्या 2 से 4 तक शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र,/अनुबन्ध के अनुरूप तालिका में अंकित कब्जा दिये जाने की तिथि के उपरांत से प्रत्येक शिकायतकर्ता के सम्मुख अंकित धनराशि पर उपरोक्तानुसार ब्याज की गणना की जायेगी। 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा 2(2४)()के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के 8... डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये।
इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। «नगद ieee Js. 5३-००२% (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर