Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Shikha Khanna v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/12/103400/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-01-21
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर . पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-3 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | | यूनिट: जमा धनराशि wo | एग्रीमेंट फॉर | अनुबंधानुसार वांछित ष tio न0 सेल की | कब्जा दिये जाने तिथि की तिथि |. एलशावकाओआए4002022 शिखा खन्ना a | 3023 | रु0 46,03,209/ | 22.07.20I5 | 42 माह तथा 03 | जमा धनराशि विवेक wt माह अनुग्रह वापस दिलाये ’ अवधि & साथ | जाने का अनुरोध | अर्थात अप्रैल किया गया है। fo 2049 बनाम एटीएस रिएलटी प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध जमा धनराशि वापस दिलाये जाने हेतु यह शिकायत संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है-कि-विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना' ATS ALLURE में यूनिट संख्या 30i3 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि wo 46,03,209 / का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा परियोजनां विलम्बित-होने के कारण जमा धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। ह शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में एग्रीमेंट oR सेल व स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट की छायप्रतियाँ दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- > क्रम ..... विवरण दिनांक / अन्य साक्ष्य [भुगतान की गई धनराशि संख्या . (60) 4 विपक्षी द्वारा जारी स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट WAGER SR- |W 46,03,209 / विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व
(Contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस कारण वाद को निरस्त किया जाए। Lier शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप॑ का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील संख्या 6/20i8 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग प्रा. लि. में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु दायर किया है। शिकायतकर्ता ने समय से धनराशि का भी भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण के भिन्न-भिन्न पीठों में वाद दायर किये जो निरस्त किये जा चुके है। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के अन्दर यूनिट का कब्जा दिये जाने के लिए बचनबद्ध था परन्तु फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में. माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029 // 4985 एम.सी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है। यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से -धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता को धनराशि-भुगतान किये जाने के लिए कई अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता ने धनराशि का भुगतान नही किया और न ही कब्जा लेने आया जिस कारण शिकायतकर्ता कोई अनुतोष पाने का अधिकारी नहीं है। अतः विपक्षी ने शिकायत को निरस्त-किये जाने का अनुरोध किया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03. 2022, इन्टीमेंशन ऑफ फाइनल STOR ऑफ पजेशन, फाइनल ऑफर ऑफ पजेशन व अनुस्मरण पत्र की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिउत्तर दाखिल करते हुए विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब के प्रत्येक प्रस्तर का ख़ण्डन करते हुए शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत में वांछित अनुतोष को स्वीकार किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा लिखित बहस दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी को. दिनांक 30.03.2022 को परियोजना के सापेक्ष ओसी प्राप्त हो चुका है। विपक्षी द्वारा दिनांक क्रमशः 30.03.2022, 7.04.2022, 26.05.2022, 44.06.2022, 02.08.2022, 07.0.2022 व 46.44.2022 को अवशेष देय धनराशि भुगतान किये जाने हेतु माँग पत्र भेजे गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा यह उल्लिखित किया गया है कि यदि 2 SS आवंटी द्वारा यूनिट निरस्त कराने /परियोजना से बाहर आने के लिए इच्छुक है तो विपक्षी आवंटन पत्र के क्लाज 5.5 के अनुसार 45 प्रतिशत धनराशि जब्त करने का अधिकारी है। इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा सतीश बत्रा बनाम सुधीर रावल (सिविल अपील संख्या 7588 /2042), श्रीहनुमान कॉटन few व अन्य बनाम टाटा एयरक्राफ्ट लिमिटेड व शिकायत संख्या एनसीआर(44 / 40 / 83450 / 2024 मीनाक्षी सिंह बनाम ए आर लैण्डक्राफ्ट में पारित आदेश का उल्लेख किया गया है। अतः विपक्षी द्वारा. अनुबंध के क्लाज 5.5 के अनुसार कटौती करते हुए अवशेष देय धनराशि शिकायतकर्ता को विपक्षी से प्राप्त किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपफक्षों द्वारा दाखिल प्रपत्रों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किया जाता
4. क्या शिकायतकर्ता को जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? निस्तारण प्रश्न We oe इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? ॥ शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया विपक्षी. द्वारा लिखित बहस -व लिखित जवाब -ें तर्क प्रस्तुत किया गया कि विपक्षी को दिनांक 30.03.2022 को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है तथा शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफर ऑफ पजेशन भेजा गया। विपक्षी अनुबंधानुसार 45 प्रतिशत धनराशि कटौती करते हुए अवशेष देय धनराशि भुगतान करने को तैयार पत्रावली के अवलोकन से यह विदित है कि शिकायतकर्ता व विपक्षी के मध्य दिनांक 22.0720i5 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार यूनिट का कब्जा आवंटन पत्र हस्ताक्षरित होने की तिथि से 42 माह तथा 03 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात अप्रैल 20r9 तक दिया जाना था परन्तु अभी तक. शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट or कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है | विपक्षी की ओर से अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022,ऑफर ऑफ aoe दिनांक 30.04.2023, इंटीमेशन ऑफर फाइनल ऑफर ऑफ पजेशन दिनांकित 30.03.2022 व अंतिम ऑफइ्ट ऑफ पजेशन दिनांक 44.04.2022 की छाया 3+ ee. प्रतियां दाखिल की गयी है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा दिनांक 74.06.2022, 02.08.2022, 07.0.2022 व 6.44.2022 को शिकायतकर्ता को अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अनुस्मरण -पत्र प्रेषित किये गये है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। |
जहाँ तक क्रेता द्वारा रिफण्ड के अनुरोध का प्रश्न है तो इस विषय में रेरा अधिनियम के प्राविधानों को समग्र रूप से पढ़ा जाना आवश्यक है ताकि सभी पक्षों के कथनों को दृष्टिगत रखते हुए एक संतुलित निर्णय लिया जा सकें। रेरा एक्ट की धारा t8 (॥) में प्राविधान है कि :- Section 8. Return of Amount and Compensation- () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building.- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale Or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the. registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on.demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay,: till the handing over of the: possession, at such rate as may be prescribed.
इस प्रकार केता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें whic के अनुरूप कब्जा नही मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें। रेरा अप्लिनियम की धारा 34 में रेरा के अन्य “way के साथ-साथ सब-क्लॉज (0) में "to ensure compliance of the obligations cast upon the promoters, ——— OO 4 the allottees and the real estate agents under this Act and the rules and regulations made thereunder" का भी उल्लेख है। इसी प्रकार धारा 32 में रियल gece सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्यों में निम्न भी सम्मिलित हैं :- “The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion of a healthy, transparent, efficient and competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be, on,— (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate agent,....... (@Jany other issue that the Authority may think necessary for the promotion of the real estate sector.” उक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट 8 fe “रियल एस्टेट सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके wih wo होल्डर्स के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस ऑथरिटी का है।
इसी कम में माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा Re याचिका संख्या- 2737 /20:7 “नीलकमल रियलटर्स ware wife. बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया”, जिसमें रेरा अधिनियम की वैद्यानिकता के सम्बंध में निर्णय दिया गया था, के प्रस्तर 424 में मा. उच्च न्यायालय द्वारा निम्न संवीक्षण किया गया :- “The entire scheme of the RERA is required to be kept in mind. It is already submitted during the course. of hearing that in many cases helpless allottees had approached consumer forum, High Courts, Apex Court in a given fact situation of the case. The courts have been passing orders by moulding reliefs by granting interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of project, transit accommodation during completion of project, so on and so forth. Under RERA now this function is assigned to the authority, tribunal. An appeal lies to the High Court. Under one umbrella, under one regulation and one law all the issues are tried to be resolved. Provisions of Section 77 refers to power to adjudicate. A District Judge is conferred with the power to adjudicate compensation under Sections 2, /4, 46 and 49. A promoter could very well put up his case before the adjudicator who deals with the issues in the light of the fact situation of each case. Therefore, there should not be any apprehension that mechanically compensation would be awarded against a promoter on failure to complete the development work.”
उक्त से स्पष्ट है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद, यद्यपि समय से इकाई न मिलने की दशा में आवंटी को अपनी धनराशि ब्याज सहित मांगने का अधिकार है, तथापि उक्त वर्णित संवीक्षा को देखते हुए अथॉरिटी, प्रकरण के समस्त तथ्यों, के आधार पर ‘by moulding reliefs by granting interest, compensition to the allottees, moulding reliefs by granting interest, compensation to the allottees and issuing directions for timely completion of project, transit_ transit_ accommodation and issuing directions for timely completion o, during completion of project, so on and so forth’ के अनुरूप आदेश पारित किए जा सकते हैं। . इसके अतिरिक्त रेरा के गठन के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 /20:7 “बिकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में दिनांक 23.07.2049 को परित आदेश के पृष्ठ संख्या-244 के प्रस्तर-420 में निम्नवत् उल्लेख किया हैः- "It is apparent that RERA intends protection of home- buyers and aims at completion of the buildings. The buildings have.to be completed, for that, we are ‘required to. pass orders. We have already assigned the task to NBCC for completion of buildings as the promoters/builders have failed to complete the building within the time fixed and the time which could have been extended. Now, more than 0 years have passed and buyers were given the assurances that they would get flats within three years period by .the promoter/builder. The maximum time fixed in RERA has also expired and extension could not have been beyond | year."
उक्तानुसार यह स्पष्ट किया गया है कि रेरा आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए है और उसका लक्ष्य यह है कि प्रोमोटर्स द्वारा बिल्डिंग के समस्त विकास कार्यों को पूर्ण कराते हुए गृहकेताओं को उनका आवास »फ्लैट मिल सके I तत्कमानुसार आदेश के पृष्ठ संख्या-255 के we 37 में निम्नवत् उल्लेख किया है:- "The provisions of RERA are beneficial to the home buyers and are intended to insulate them from fraudulent action, ensures completion of the building and it is the duty of the court to protect and ensure the home buyers’interest and at the same time to hold them responsible for the duties enjoined upon them under the 6 - — कम said statute. We are not absolving the home buyers from the discharge of their liability if any. At the same time, they have the right of enforcement of their right for compensation due to undue delay in completion of the project." * उक्त आब्जर्वेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि रेरा के प्राविधान गृहकेताओं के लिए लाभकारी हैं और किसी प्रकार के विश्वासघात होने से आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए हैं एवं बिल्डिंग को पूर्ण कराने हेतु निगरानी का कार्य रेरा का है और पक्षकारों के कर्तव्यों एवं उत्तरदायित्व अधिनियम में तय किये गये हैं। यह भी लाभ दिया गया है कि परियोजना विलम्बित होने पर गृहकेताओं का यह अधिकार होगा कि वह विलम्ब के लिए परियोजना पूर्ण होने तक नियमानुसार ब्याज पा सके। ह
इसी प्रकार रेरा के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल. अपील संख्या-43 /20i9 “पायनियर ada लैन्ड एंड इन्फास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में दिनांक 09.08.20:9 को आदेश के पृष्ठ संख्या-86 के प्रस्तर-29 में निम्नवत् उल्लेख किया है:- + "The object of RERA is to see that real estate projects come to fruition within the stated period and to see that allottees of such projects are not left in the lurch and are finally able to realise their dream of a home, or be paid compensation if such dream is shattered, or at least get back monies that they had advanced towards the project with interest. At the same time, recalcitrant allottees are not to be tolerated, as they must also perform their part of the bargain, namely, to pay instalments as and when they become due and payable." * उक्त आदेश में महत्वपूर्ण आब्जर्वेशन यह दिया गया है कि रेरा का लक्ष्य है कि वह अपनी निगरानी एवं देखरेख में प्रोमोटर्स द्वारा भू-सम्पदा परियोजना को एक निर्धारित अवधि में पूर्ण करा ली जाये, जिससे कि आवंटी अपने फ्लैटस् पाने से वंचित न हो जाये और उन्हें अपने सपनों का घर मिल सके, साथ ही साथ दुर्दम्य (Recalcitrant) आवंटियों को भी परियोजना पूर्ण कराने का सहयोग न करने में उत्तरदायित्व माना है। यह भी कहा गया है कि आवंटी अपने कर्तव्यों को सम्यक रूप से पूर्ण करें, मुख्य रूप से जैसे कि किश्तों का समय से भुगतान .करना सुनिश्चित कर लें, जिससे कि परियोजना को पूर्ण किया जा सके। 7 Ss" (=) 3-3 laa TGS
- ऐसे में उपरोक्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित की गयी विधि व्यवस्था के अनुसार यह स्पष्ट है कि रेरा का मुख्य उद्देश्य है, परियोजना को प्रोमोटर्स द्वारा पूर्ण कराना और आवंटियों द्वारा were रूप से अपनी किश्तों का भुगतान सुनिश्चित कर लिया जाना, जिससे कि परियोजना को निर्धारित अवधि में पूर्ण कराया जा सके। आवंटियों कु हितों को संरक्षित करने के लिए परियोजना विलम्बित होने पर ब्याज का लाभ भी आवंटियों को देय होगा, परन्तु इससे पूर्व + शिकायतकर्ता का यह भी उत्तरदायित्व होगा कि वह अपनी किश्तों का समय से भुगतान करें। मा. उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा var went में उद्धरत “ऑबजरवेशनस्” एवं WT एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबजेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन”, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य “wo होल्डर्स”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पज़ेशन डेट” के विषय में .“कन्सेन्सस्” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। | 4 कर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ” सिविल अपील नम्बर 5785 /20:9 ईरियो ग्रेस रियलटेक wo fo बनाम अभिषेक |r एवं आदि” में दिनांक t4.072024 को पारित आदेश में जहाँ परियोजना, का ओसी.सी.सी प्राप्त किया जा चुका है, उसके सम्बन्ध में निम्न आर्ब्जेवेशन दिया है कि :-
2l.l. The issue which now arises is whether the apartment buyers are bound to accept the offer of possession made by the Developer where the Occupation Certificate has been issued, along with the payment of + Delay Compensation, or are entitled to terminate the Agreement. (i) We are of the view that allottees at Serial Nos. 7 and 2 in Chart A are obligated to take possession of the apartments, since the construction was completed, and possession offered on 26.06.2079, afier the issuance of 8 SS Occupation Certificate on 37.05,20/9, The Developer is however obligated to pay Delay Compensation for the period of delay which has occurred from 27.77.2078 67 the date of offer of possession was made to the allottees. माननीय उच्चतम न्यायालय की sai नजीर के अनुसार परिवादी विपक्षी की परियोजना में अधिभोग प्रमाण पत्र (Occupancy Certificate) WT हो जाने के आधार पर कब्जा लेने के लिए Obligated है। पत्रावली के अवलोकन से यह विदित है कि विपक्षी को प्रश्नगत परियोजना में दिनांक 30.03.2022 को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका जो पत्रावली पर उपलब्ध है। a उक्त वर्णित तथ्यों एवं न्याय नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता को जमा धनराशि वापस दिलाया जाना न्यायोचित नहीं होगा। अतः प्रस्तुत शिकायत निरस्त किये जाने योग्य है। तदनुसार प्रश्न संख्या 4 निस्तारित किया जाता है। आदेश प्रस्तुत शिकायत निरस्त की जाती है।-आदेंश पोर्टल. पर अपलोड किया जाए | पत्रावली दाखिल दफ्तर BT | ’ (} ey. ie ६ A : 2sn: eS fea aa tree a (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 9