Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Arush v. Green Bay Infrastructure Private Limited
Complaint No. NCR144/12/103308/2022
- Decision date
- 2026-03-12
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 1 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, एच-469, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई पीठ-04 (पूर्व में पीठ--04-ए) निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी: श्री संजय आर. भूसरेड्डी, मा. अध्यक्ष | हु आवंटन-पत्र/ | | | ma | शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण आवंटन-पत्र/.| प्लॉट व टॉवर अनुबन्ध-पत्र ॥ प्लॉट्स का कुल शिकायतकर्तागण | mT , अनुबन्ध-पत्र संख्या के अनुसार कब्जा... मूल्य द्वारा | | | i .... दिये जाने की तिथि ,...... जमा धनराशि a) १२८॥२।44/06/। | 044 | /2023 साक्षी गदोदिया 04-2-202 P43 02-09-204 | %.37,09,000 / %.28,57,904 / 02. कलछाबकाआएउ3082022 | आरूष इ8ता-202 | ३-30 26-08-2044 | %30,0,000/— | रू20,85.450/- | | | संगीता खुराना एवं | | | 202 - | Be 04-2024 ®.4,24,50,000/— | रू.9,40,000/- | | 03. १२८॥२।44/04/] 06783/2023 रजनीश खुराना | 09-04-2024 | B-I8A | 09-04-202: | ft i बनाम ग्रीन बे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. | निर्णय | उपर्युक्त सारणी में अंकित तीनों शिकायतकर्तागण द्वारा प्रश्नगत प्लॉट्स का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने के अनुतोष की प्रार्थना के साथ विपक्षी के विरूद्ध भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2006 की धारा-34 के अन्तर्गत | शिकायतें योजित की गई हैं। | | उपर्युक्त सारणी में अंकित क्रमांक संख्या: 04 के शिकायतकर्ता की शिकायत में | | अन्तिम सुनवाई दिनांक 06-08-2025 को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से कराई गई | तथा पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री अदा खुर्शीद उपस्थित हुईं dar विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री राज सिंह उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा |
| उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के aot को विस्तार से सुनते हुए, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 06-08-2025 को ही सुरक्षित की गयी। उपर्युक्त सारणी में अंकित क्रमांक संख्या: 02 के शिकायतकर्ता की शिकायत में | अन्तिम सुनवाई दिनांक 03-09-2025 को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से कराई गई | तथा पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि श्री डी.एन. गुप्ता उपस्थित हुए | | तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री राज सिंह उपस्थित evi इस पर पीठ eC | Page | of 22 E-Court | उभय पक्षों के तर्कों को विस्तार से सुनते हुए, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 03-09-2025 | | को ही सुरक्षित की गयी। | | उपर्युक्त सारणी में अंकित क्रमांक संख्या: 03 के शिकायतकर्ता की शिकायत में अन्तिम सुनवाई दिनांक o3-0-2025 को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से कराई गई | | तथा पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री अदा खुर्शीद उपस्थित हुईं तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री राज सिंह उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा | | उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कों को विस्तार से सुनते हुए, पत्रावली आदेश हेतु | दिनांक 03-40-2025 को ही सुरक्षित की गयी। उपर्युक्त शिकायतें विपक्षी की “Greenbay Golf Village” परियोजना (पंजीयन संख्या: UPRERAPRJ9320), ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर से सम्बन्धित हैं। तीनों शिकायतों के तथ्य समरूप हैं एवं अनुतोष भी समान हैं। अतः पुनरावृत्ति से बचने तथा सुगमता की दृष्टि से तीनों शिकायतों का एक ही निर्णय द्वारा निस्तारण किया जा रहा है। क्रम संख्या: | 0-शिकायत संख्या: NCRI44/06/I044/2023, "Ae गदोदिया बनाम ग्रीन बे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि” अग्रणी परिवाद रहेगा।
संक्षेप में शिकायतकर्तागण का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना | “Greenbay Golf Village” में आवासीय प्लॉट्स के आवंटन हेतु आवेदन प्रस्तुत किये गये, | जिसके उपरान्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण के पक्ष में प्रश्नगत प्लॉट्स के सम्बन्ध में आवंटन-पत्र / अनुबन्ध-पत्र निष्पादित किये गये। विपक्षी द्वारा अनुबन्धानुसार प्रश्नगत प्लॉट्स का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया। अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा यह भी अवगत | कराया गया है कि अनुबन्ध » बी.बी.ए. के अनुसार विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा, | दिनांक 03--06-2044 को या इससे पूर्व दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक | | विधिक रूप से कोई कब्जा ऑफर नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना के | | सम्बन्ध में सक्षम प्राधिकरण से कोई ओ.सी. / सी.सी. तथा एन.ओ.सी. प्राप्त नहीं की गयी हैं तथा न ही आज तक परियोजना में कोई गोल्फ कोर्स एवं मूल सुविधायें विकसित की | गयी हैं। प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत &.32,09,000/— है, जिसमें ईडीसी ,/ आईडीसी, क्लब FRAG, आईएफएमडी, विद्युत सब-स्टेशन, लीज़ किराया तथा कनेक्टिंग शुल्क सम्मिलित है। विपक्षी द्वारा प्रचार के रूप में मुफ्त आजीवन क्लब हाउस एवं गोल्फ कोर्स की Farr का आश्वासन दिया गया था। विपक्षी की माँगों के अनुसार पेमेन्ट प्लॉन के |
%.28,5,90I/— की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है, परन्तु प्रश्नगत शिकायत योजित करने की तिथि तक प्लॉट रहने योग्य नहीं है। विपक्षी द्वारा अवैधानिक रूप से | लीज Ye रू.90,000 /- से बढ़ाकर रू.2,8,950,/- कर दिया गया है। विपक्षी द्वारा | | गोल्फकोर्स के मद में भी अवैधानिक रूप से धनराशि की माँग की जा रही है। प्रश्नगत | | प्लॉट क्रय करते समय शिकायतकर्ता से वादा किया गया था कि उक्त प्लॉट के पीछे की | किसानों की भूमि एक सप्ताह के अन्दर हटा दी जाएगी, लेकिन आज तक उन्हें नहीं हटाया | Page 2 of 22 आधार पर अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नतत यूनिट की कुल कीमत के सापेक्ष कुल | Ss E-Court | गया है। विपक्षी द्वारा अभी तक सम्पूर्ण ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है। प्रश्नगत | | परियोजना में मूल भूत सुविधायें उपलब्ध नहीं है। विपक्षी द्वारा किये गये कृत्यों के कारण | शिकायतकर्ता को मानसिक उत्पीड़न एवं कष्ट हुआ है। विपक्षी द्वारा 42 वर्ष से प्रश्नगत | | परियोजना में एक भी परिवर्तन एवं सुधार नहीं किया गया है। अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा | | अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख किया गया है। अतः | | इन आधारों पर अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को vera यूनिट का आवंटन निरस्त | न किये जाने तथा अवैधानिक माँग को हटाये / निरस्त किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने | | तथा अनुबन्धानुसार मूल भूत सुविधाओं सहित प्रश्नगत प्लॉट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि | का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त अग्रणी शिकायतकर्ता की ओर से विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र | के विरूद्ध अपना प्रत्युत्तर, दिनांक 25-05-2024 एवं दिनांक 02-08-2025 तथा लिखित बहस, दिनांक 24-09-2025 दाखिल करते हुए, विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र एवं प्रश्नगत शिकायत को खारिज किये जाने हेतु दाखिल प्रार्थना-पत्र, दिनांक 05--04-2024 | में अंकित किये गये समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों का पूर्ण रूप से खण्डन कर, अपने कथन | | के समर्थन विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख किया गया है और मूल शिकायत में किये गये तथ्यों की पुनरावृत्ति करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत | शिकायत दिनांक 28-06-2023 को योजित की गयी थी, जिसके क्रम में पीठ द्वारा अपने | आदेश, दिनांक 44-09-2023 के माध्यम से विपक्षी कम्पनी को प्रश्नगत शिकायत के | निस्तारण तक, प्रकरण में यथास्थिति बनाये रखने हेतु आदेशित किया गया था, परन्तु फिर (भी विपक्षी कम्पनी द्वारा प्रश्नगत प्लॉट निरस्त करने हेतु निरस्तीकरण-पत्र, दिनांक 25-44-2023 को प्रेषित किया गया, जो कि विपक्षी कम्पनी के दुर्भावनापूर्ण इरादों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। विपक्षी द्वारा कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित करते हुए, अवैधानिक रूप से रू.9,74,555,/- की धनराशि की माँग की गयी थी। विपक्षी कम्पनी ने शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि का लगभग to वर्षों से अधिक समय तक दुरूपयोग किया | और फिर बिना किसी वैध ओ.सी. / सी.सी. के एक अपूर्ण कब्जा ऑफर किया गया। विपक्षी द्वारा 08 वर्षो से अधिक के विलम्ब हेतु किसी भी विलम्ब ब्याज /क्षतिपूर्ति का भुगतान नहीं | किया गया। विपक्षी द्वारा पीठ के आदेश, दिनांक 44-09-2023 का पूर्णता उल्लंघन करते हुए, अवैधानिक रूप से प्रश्नगत प्लॉट निरस्त कर दिया गया और मनमाने ढंग से | (5) रू.7,54,904 /- की आंशिक धनराशि वापस करने हेतु क्रेडिट कर दी गयी है, जो कि | 9/7 पूर्णता अनुचित है। इसलिए विपक्षी कम्पनी के विरूद्ध नियम एवं विधिनुसार सख्त कार्यवाई | | की जानी चाहिए। इन आधारों पर शिकायतकर्तागण द्वारा प्रश्नगत मूल शिकायत में याचित | अनुतोष दिलाये तथा विपक्षी द्वारा अवैधानिक रूप से प्रेषित फाईनल कैन्सिलेशन | नोटिस / माँग-पत्र को उपर्युक्तानुसार खारिज किये जाने, विभिन्न मदों अवैधानिक माँगों को खारिज किये जाने तथा कन्वयेन्स डीड »रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने का अनुरोध
Al | किया गया है। | १.८4 be 7 Page 3 of 22 E-Court i अग्रणी शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में प्रार्थना-पत्र, दिनांक | 25-04-2024 की प्रति, यूनिट निरस्तीकरण-पत्र, दिनांक 25-44-2023 की प्रति, रिफण्ड | | सम्बन्धी पत्र, दिनांक 40-05-2024 की प्रति, आवंटन-पत्र, दिनांक 45--05-2044 की प्रति, | कन्फर्मेशन / अनुबन्ध, दिनांक 04-42-2042 की प्रति, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं।
अग्रणी शिकायतकर्ता के प्रकरण में विपक्षी द्वारा अपना आपत्ति-पत्र, दिनांक 47-04-2023 एवं प्रश्नगत शिकायत को खारिज किये जाने हेतु, लिखित प्रार्थना-पत्र, दिनांक 05-04-2024 तथा विस्तृत आपत्ति-पत्र, दिनांक 06-05-2025 दाखिल करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में ओ.सी., दिनांक 48-05--2022 को प्राप्त किया जा चुका है और शिकायतकर्ता के पक्ष में कब्जा ऑफर पत्र, दिनांक | 02-06-2022 को प्रेषित किया जा चुका है और अनुस्मारक-पत्र, दिनांक 05-07-2022 | को प्रेषित किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता अपने आवंटित प्लॉट का कब्जा प्राप्त करने हेतु | | आगे नहीं आ रहे हैं। शिकायतकर्ता को प्रश्नगत परियोजना “Greenbay Golf Village” में प्लॉट संख्या: ४-43, जिसका सुपर एरिया 500 वर्ग ars en, आवंटित किया गया। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत प्लॉट निरस्त करने से पूर्व शिकायतकर्ता को दिनांक 47-04-2023 को अंतिम नोटिस प्रेषित करते हुए, दिनांक 46-44-2023 तक पक्षकारों के मध्य निष्पादित एवं | हस्ताक्षरित अनुबन्ध के अनुसार अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान करने हेतु कहा गया, | परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा उपर्युक्त नोटिस के अनुपालन में अपनी अवशेष धनराशि का | भुगतान नहीं किया गया, जिस कारण विपक्षी द्वारा निरस्तीकरण-पत्र, दिनांक 25-44-2023 के माध्यम से प्रश्नगत प्लॉट को निरस्त कर दिया गया। विपक्षी द्वारा अपने पत्र, दिनांक 40-02-2024 के माध्यम से शिकायतकर्ता को सूचित किया गया कि कई अनुस्मारक एवं | नोटिस के बावजूद बकाया धनराशि भुगतान न करने के कारण, उनका प्लॉट निरस्त कर | दिया गया और शिकायतकर्ता से अनुरोध किया गया कि वह आगे आयें और wad प्लॉट | | के सम्बन्ध में कार्यालय से शेष धनराशि प्राप्त करें। |
| विपक्षी का यह भी कहना है कि किसानों द्वारा किये गये आन्दोलनों एवं दायर किये | गये विभिन्न मुकदमों के कारण परियोजना को पूर्ण करने में विलम्ब हुआ और फोर्स मैज्योर | | इवेन्ट्स के कारण प्राधिकरण से अपेक्षित स्वीकृतियाँ प्राप्त करने में विलम्ब हुआ। विपक्षी । के पक्ष में VEIDA ERI प्लॉट संख्या: TS-06, WEX—-Sector-22D, Yamuna Expressway Industrial Area, Gautambudh Nagar का आवंटन, दिनांक 47-02--2044 को किया गया। | | विपक्षी का यह भी कहना है कि YEIDA द्वारा लीज़ डीड, दिनांक 27-03-2042 को विपक्षी | | कम्पनी के साथ निष्पादित एवं पंजीकृत की गयी थी, जिसके उपरान्त दिनांक 28-03-2042 | को VEDA द्वारा कब्जा प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया गया, किन्तु भौतिक कब्जा नहीं दिया | गया। विपक्षी द्वारा पत्र, दिनांक 08-08-2042 के माध्यम से YeEiDA से भौतिक कब्जे हेतु | आग्रह किया गया तथा कब्जे की तिथि को शून्य अवधि घोषित करने की माँग की गई जिसके उपरान्त दिनांक o4—02—20:3 को VEIDA ERT विपक्षी को पत्र भेजा गया, जिसमें Page 4 of 22 Pe / E-Court
[ दिनांक 27-03-20:2 से दिनांक 29-0:-20:3 तक समय को शून्य अवधि माना गया, | | परन्तु इसके बाद भी वास्तविक कब्जा विपक्षी कम्पनी को नहीं दिया गया। इसके क्रम में | विपक्षी द्वारा YEA के समक्ष अपना प्रत्यावेदन, दिनांक 43-02-2043, दिनांक 44--06-2043 एवं दिनांक 24-07-20:3 को किया गया। मा. राष्ट्रीय हरित | अधिकरण द्वारा पारित आदेश, दिनांक 4:-0:-20:3 में गौतमबुद्धनगर, जिले में भू-जल | के प्रयोग पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया, जिसके कारण निर्माण कार्य विलम्ब हुआ। प्रत्यावेदन, | | दिनांक 24-07-20:3 में यह स्पष्ट रूप से अंकित किया गया है कि लगभग 84,277.9089 | वर्ग मीटर की भूमि मुकदमा सटे के अन्तर्गत है और वास्तविक कब्जा विपक्षी कम्पनी को | नहीं दिया गया है। यहाँ यह उल्लेख करना और भी महत्वपूर्ण है कि यद्यपि अधिकांश भूमि | पर कोई अंतरिम आदेश नहीं था, लेकिन इस तथ्य के कारण कि उपर्युक्त 84,277.9089 | वर्ग मीटर क्षेत्र विपक्षी कम्पनी के आवंटित भूखण्ड में सम्मिलित था, यह व्यावहारिक रूप | से सम्भव (Practically feasible) ग्रीन-बे के लिए वहाँ विकास कर सकना सम्भव नहीं था, | क्योंकि उक्त क्षेत्र आवंटित भूखण्ड के अलग-अलग हिस्से में स्थित था। विपक्षी द्वारा कथन | किया गया है कि vewa से विवाद होने के कारण आवंटियों को कब्जा देने में विलम्ब हुआ। प्रश्नगत परियोजना में कोविड-49 आदि फोर्स मैज्योर कारणों के चलते निर्माण कार्य अत्यधिक प्रभावित हुआ। विपक्षी द्वारा उपर्युक्त के सम्बन्ध में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों | का उल्लेख किया गया है। |
| विपक्षी का यह भी कहना है कि अग्रणी शिकायतकर्ता के प्रकरण में प्लॉट का आवंटन, | | दिनांक 25-44-2023 को निरस्त कर दिया गया और शिकायतकर्ता से प्राप्त धनराशि भी विपक्षी द्वारा दिनांक 40-05-2024 को वापस कर दी गयी तथा उक्त प्लॉट नये आवंटी को दिनांक 04-05-2024 को आवंटित कर दिया एवं नये आवंटी के पक्ष में दिनांक 44-09-2024 को रजिस्ट्रेशन,/सब-लीज़ Ste भी निष्पादित करायी जा चुकी है। इन | ' आधारों पर विपक्षी द्वारा प्रश्नगत शिकायत खारिज किये जाने तथा शिकायतकर्ता को मूल | | दस्तावेज वापस उपलब्ध कराते हुए, अपनी अवशेष जमा धनराशि प्राप्त करने हेतु निर्देशित | किये जाने का अनुरोध किया गया है। इसी प्रकार सारणी में अंकित दो अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में भी विपक्षी कम्पनी द्वारा समान तथ्यों,/अभिकथनों के आधार पर शिकायतों को खारिज किये जाने | | हेतु, लिखित प्रार्थना-पत्र / आपत्ति-पत्र तथा लिखित बहस दाखिल की गयी हैं। । अग्रणी शिकायत में विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में पार्ट ले-आउट कम्प्लीशन | सह-ले-आउट रिवीजन, दिनांक 48-05-2022 की प्रति, ऑफर ऑफ पोजेशन पत्र, दिनांक | 02-06-2022 की प्रति, स्टेटमेन्ट ऑफ अकाउन्ट, We Ragwe, दिनांक 05-07-2022 की प्रति, फाईनल नोटिस, दिनांक 47-40-2023 की प्रति, कैन्सिलेशन लेटर, | | दिनांक 25-44-2023 की प्रति, शिकायतकर्ता को जमा धनराशि प्राप्त करने हेतु प्रेषित | Page 5 of 22 ' E-Court | दिनांक 04-05-2024 की प्रति, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। मैंने पक्षकारों के विद्वान अधिवक्तागण के cet को विस्तार से सुना तथा पत्रावली | निम्न बिन्दुओं पर विचार किया:-
बावजूद बकाया धनराशि का भुगतान करने में असफल रहे हैं, जिसके आधार पर विपक्षी द्वारा किये गये प्लॉट्स निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है अथवा नहीं? | बुकिंग निरस्त कर, जमा धनराशि नियमानुसार वापस करने की अनुमति प्रदान करने भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? | के मध्य एग्रीमेन्ट फॉर सेल /अनुबन्ध निष्पादित कराया जाना अनिवार्य है? | निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 एवं 02 पुनरावृत्ति से बचने तथा सुविधा की दृष्टि से इनका निस्तारण एक साथ किया जा रहा el | निस्तारण बिन्दु संख्या: 04, इस आशय का है कि gar शिकायतकर्तागण, विपक्षी द्वारा कब्जा प्रस्ताव, माँग-पत्र प्रेषित किये जाने के बावजूद बकाया धनराशि का भुगतान करने में असफल रहे हैं, जिसके आधार पर विपक्षी द्वारा किये गये प्लॉट्स निरस्तीकरण | की प्रक्रिया वैधानिक है अथवा नहीं? शिकायतकर्तागण को प्रश्नगत प्लॉट्स का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज | दिलाया जाये ? प्रकरण में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि अनुबन्ध»बी.बी.ए. के अनुसार विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा, दिनांक 03-06-2044 को या इससे पूर्व दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक विधिक रूप से कोई कब्जा ऑफर नहीं किया गया है। | विपक्षी द्वारा use परियोजना के सम्बन्ध में सक्षम प्राधिकरण से कोई ओ.सी. सी.सी Page 6 of 22 | सूचना पत्र, दिनांक 40-05-2024 की प्रति, नये एलॉटी के पक्ष में जारी आवंटन-पत्र, | | पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं अभिलेखों का सम्यूक परिशीलन किया, जिसके आधार पर | 4. aa शिकायतकर्तागण, विपक्षी द्वारा कब्जा प्रस्ताव / माँग-पत्र प्रेषित किये जाने के | 2... क्या शिकायतकर्तागण के व्यतिक्रम के आधार पर विपक्षी को प्रश्नगत प्लॉट्स की
का समुचित आधार है? यदि नहीं तो क्या शिकायतकर्तागण को प्रश्नगत प्लॉट्स का | (3. क्या शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) के प्रकरण में विपक्षी द्वारा | रेरा अधिनियम, 20:6 की IRI—-73 का उल्लंघन किया गया है और क्या उभयपफक्षों | यह दोनों निस्तारण बिन्दु एक-दूसरे से सम्बन्धित हैं। अतः तथ्यों एवं साक्ष्यों की | निस्तारण बिन्दु संख्या: 02, इस आशय का है कि क्या शिकायतकर्तागण के व्यतिक्रम | के आधार पर विपक्षी को प्रश्नगत प्लॉट्स की बुकिंग निरस्त कर, जमा धनराशि नियमानुसार | वापस करने की अनुमति प्रदान करने का समुचित आधार है? यदि नहीं तो aa pee eS) zp & Fy E-Court | | कस एवं मूल सुविधायें विकसित की गयी हैं। yea यूनिट की कुल कीमत .37,09,000/— है, जिसमें ईडीसी,/ आईडीसी, क्लब मेम्बरशिप, आईएफएमडी, विद्युत | सब-स्टेशन, लीज़ किराया तथा कनेक्टिंग शुल्क सम्मिलित है। विपक्षी द्वारा प्रचार के रूप था। विपक्षी की माँगों के अनुसार tre प्लॉन के आधार पर अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा | किया जा चुका है, परन्तु vera शिकायत योजित करने की तिथि तक प्लॉट रहने योग्य (नहीं है। विपक्षी द्वारा अवैधानिक रूप से लीज we रू.90,000/- से बढ़ाकर | रू.2,8,950 /— कर दिया गया है। विपक्षी द्वारा गोल्फकोर्स के मद में भी अवैधानिक रूप | ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है। प्रश्नगत परियोजना में मूल भूत सुविधायें उपलब्ध नहीं है। विपक्षी द्वारा किये गये कृत्यों के कारण शिकायतकर्ता को मानसिक उत्पीड़न एवं कष्ट हुआ है। विपक्षी द्वारा 2 वर्ष से प्रश्नगत परियोजना में एक भी परिवर्तन एवं सुधार नहीं किया गया है। अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों | किया गया है।
के विरूद्ध अपना प्रत्युत्तर, दिनांक 25-05-2024 एवं दिनांक 02-08-2025 तथा लिखित बहस, दिनांक 24-09-2025 दाखिल करते हुए, विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र एवं में अंकित किये गये समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों का पूर्ण रूप से खण्डन कर, अपने कथन | निस्तारण तक, प्रकरण में यथास्थिति बनाये रखने हेतु आदेशित किया गया था, परन्तु फिर (भी विपक्षी कम्पनी द्वारा yen प्लॉट निरस्त करने हेतु निरस्तीकरण-पत्र दिनांक 25-44-2023 को प्रेषित किया गया, जो कि विपक्षी कम्पनी के दुर्भावनापूर्ण geet | में मुफ्त आजीवन क्लब हाउस एवं गोल्फ कोर्स की मेम्बरशिप का आश्वासन दिया गया | प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत के सापेक्ष कुल रू.28,5,904 //- की धनराशि का भुगतान से धनराशि की माँग की जा रही है। प्रश्नगत प्लॉट क्रय करते समय शिकायतकर्ता से | वादा किया गया था कि उक्त प्लॉट के पीछे की किसानों की भूमि एक सप्ताह के अन्दर | | हटा दी जाएगी, लेकिन आज तक we नहीं हटाया गया है। विपक्षी द्वारा अभी तक सम्पूर्ण | एवं अभिकथनों का उल्लेख किया गया है। अतः इन आधारों पर अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा | | विपक्षी को प्रश्ननत यूनिट का आवंटन निरस्त न किये जाने तथा अवैधानिक माँग को | हटाये / निरस्त किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने तथा अनुबन्धानुसार मूल भूत सुविधाओं | | सहित प्रश्नगत प्लॉट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध इसके अतिरिक्त अग्रणी शिकायतकर्ता की ओर से विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र | werd शिकायत को खारिज किये जाने हेतु दाखिल प्रार्थना-पत्र, दिनांक 05-04-2024 | के समर्थन विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का veers किया गया है और मूल शिकायत में |
आदेश, दिनांक 44-09-2023 के माध्यम से विपक्षी कम्पनी को प्रश्नगत शिकायत के | | को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। विपक्षी द्वारा कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित 2 हुए, अवैधानिक | Page 7 of 22 E-Court रूप से W.9,74,555 /— की धनराशि की माँग की गयी थी। विपक्षी कम्पनी ने शिकायतकर्ता | द्वारा भुगतान की गयी धनराशि का लगभग 40 वर्षों से अधिक समय तक दुरूपयोग किया | और फिर बिना किसी वैध ओ.सी. / सी.सी. के एक अपूर्ण कब्जा ऑफर किया गया। विपक्षी | | द्वारा 08 वर्षों से अधिक के विलम्ब हेतु किसी भी विलम्ब ब्याज / क्षतिपूर्ति का भुगतान नहीं | | किया गया। विपक्षी द्वारा पीठ के आदेश, दिनांक 44--09-2023 का पूर्णता उल्लंघन करते | | हुए, अवैधानिक रूप से प्रश्नगत प्लॉट निरस्त कर दिया गया और मनमाने ढंग से &.7,5,90i/— की आंशिक धनराशि वापस करने हेतु क्रेडिट कर दी गयी है, जो कि | पूर्णता अनुचित है। इसलिए विपक्षी कम्पनी के विरूद्ध नियम एवं विधिनुसार सख्त कार्यवाई | की जानी चाहिए। इन आधारों पर शिकायतकर्तागण द्वारा प्रश्नगत मूल शिकायत में याचित | अनुतोष दिलाये तथा विपक्षी द्वारा अवैधानिक रूप से प्रेषित फाईनल कैन्सिलेशन | | नोटिस / मॉग-पत्र को उपर्युक्तानुसार खारिज किये जाने, विभिन्न मदों अवैधानिक माँगों | को खारिज किये जाने तथा omar डीड रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी कम्पनी द्वारा अग्रणी शिकायतकर्ता (साक्षी गदोदिया) के प्रकरण में | | अपना आपत्त्ति-पत्र, दिनांक 47-04-2023 एवं प्रश्नगत शिकायत को खारिज किये जाने | हेतु, लिखित प्रार्थना-पत्र, दिनांक 05-04-2024 तथा विस्तृत आपत्ति-पत्र, दिनांक 06-05--2025 दाखिल करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा प्रश्नगत परियोजना | के सम्बन्ध में ओ.सी., दिनांक :8-05—2022 को प्राप्त किया जा चुका है और शिकायतकर्ता | के पक्ष में कब्जा ऑफर पत्र, दिनांक 02-06-2022 को प्रेषित किया जा चुका है और | अनुस्मारक-पत्र, दिनांक 05--07-2022 को प्रेषित किया गया। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत प्लॉट | निरस्त करने से पूर्व शिकायतकर्ता को दिनांक 47-04-2023 को अंतिम नोटिस प्रेषित | | करते हुए, दिनांक t6—-7:-2023 तक पक्षकारों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित अनुबन्ध | के अनुसार अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान करने हेतु कहा गया, परन्तु शिकायतकर्ता | | द्वारा उपर्युक्त नोटिस के अनुपालन में अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, | | जिस कारण विपक्षी द्वारा निरस्तीकरण-पत्र, दिनांक 25-44-2023 के माध्यम से प्रश्नगत | | प्लॉट को निरस्त कर दिया गया और शिकायतकर्ता से प्राप्त धनराशि भी विपक्षी द्वारा दिनांक 40-05-2024 को वापस कर दी गयी तथा उक्त प्लॉट नये आवंटी को | दिनांक 04-05-2024 को आवंटित कर दिया एवं नये आवंटी के पक्ष में दिनांक 44-09-2024 को रजिस्ट्रेशन // सब-लीज डीड भी निष्पादित करायी जा चुकी है। |
इसी प्रकार शिकायतकर्ता (आरूष) के प्रकरण में विपक्षी द्वारा प्रश्नगत शिकायत को | | खारिज किये जाने हेतु, लिखित प्रार्थना-पत्र, दिनांक 28-02-2024 तथा लिखित बहस, | दिनांक 42-09--2025 दाखिल करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा प्रश्नगत परियोजना | के सम्बन्ध में ओ.सी., दिनांक 48-05—2022 को प्राप्त किया जा चुका है और शिकायतकर्ता ॥ के पक्ष में कब्जा ऑफर पत्र, दिनांक 02-06-2022 को प्रेषित किया जा चुका है तथा | | अनुस्मारक-पत्र, दिनांक 05-07-2022 को प्रेषित किया गया। विपक्षी 7 प्रश्नगत प्लॉट | Page 8 of 22 E-Court निरस्त करने से पूर्व शिकायतकर्ता को दिनांक t6-08-2023 को अंतिम नोटिस प्रेषित | करते हुए, दिनांक 30-08-2023 तक पक्षकारों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित अनुबन्ध | के अनुसार अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान करने हेतु कहा गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा उपर्युक्त नोटिस के अनुपालन में अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिस कारण विपक्षी द्वारा निरस्तीकरण पत्र, दिनांक 46-08-2023 के माध्यम से प्रश्नगत | प्लॉट को निरस्त कर दिया गया और विपक्षी द्वारा पत्र, दिनांक 25-04-2024 के माध्यम | | प्रश्गगत प्लॉट अंतिम रूप से निरस्त कर, शिकायतकर्ता को जमा धनराशि वापस प्राप्त करेन हेतु कहा गया।
इसी प्रकार शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) के प्रकरण में विपक्षी द्वारा प्रश्गत शिकायत को खारिज किये जाने हेतु, लिखित प्रार्थना-पत्र, | दिनांक oi—-06—2024 तथा प्रार्थना-पत्र, दिनांक 47-06-2025 दाखिल करते हुए कहा | | गया है कि उनके द्वारा verre परियोजना के सम्बन्ध में ओ.सी.,, दिनांक :8-05-2022 | !को प्राप्त किया जा चुका है और शिकायतकर्ता के पक्ष में कब्जा ऑफर पत्र, | दिनांक 02-06-2022 को प्रेषित किया जा चुका है तथा अनुस्मारक-पत्र, दिनांक | 05-07-2022 एवं दिनांक 07-42-2022 को प्रेषित किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा उपर्युक्त पत्रों के अनुपालन में अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिस | कारण विपक्षी द्वारा निरस्तीकरण-पत्र, दिनांक 42-04-2023 एवं दिनांक 4:-07-2023 के माध्यम से प्रश्नगत प्लॉट को निरस्त कर दिया गया और शिकायतकर्ता से प्राप्त धनराशि भी विपक्षी द्वारा दिनांक 40-05-2024 को वापस कर दी गयी। | भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 | के प्रस्तर-9.2 एवं प्रस्तर-9.3 में निम्नलिखित उललेखित है:- | “9.2 In_case of Default_by Promoter under the conditions listed above 4 non listed above _a_non defaulting Allottee is entitled to the following: (i) Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the | Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest; or
(ii) The Allotice shall have the option of terminating the Agreement in which case the | Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of | India +7% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of | receiving the termination notice: | | | Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the a Page 9 of 22 E-Court possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due. 9.3 The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events: | (9 Incase the Allottee fails to make payments for 2 (two)-consecutive demands made by the Promoter as per the Payment Plan annexed hereto, despite having been issued notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7% unless provided otherwise under the Rules. The Promoter must not be in default to take this benefit;
(ii) In case of Default by Allottee under the condition listed above continues fora period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination.” | शिकायतकर्ता (साक्षी गदोदिया) के प्रकरण में उभय पक्षों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित कन्फर्मेशन /अनुबन्ध-पत्र, दिनांक 04-42-2042 के अवलोकन से यह विदित | है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत प्लॉट “organ fies पेमेन्ट प्लान” के अन्तर्गत | बुक कराया गया था, जिसके अनुसार प्रश्नगत परियोजना के निर्माण कार्य के साथ-साथ | धनराशि का भुगतान किया जाना था। उपर्युक्त अनुबन्ध-पत्र के अनुसार प्रश्नगत प्लॉट [ की कुल कीमत w3,09,000/— थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा लगभग 94 प्रतिशत धनराशि &.28,54,90i/— का भुगतान किया जा चुका है।
शिकायतकर्ता (आरूष) के प्रकरण में उभय पक्षों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित | कन्फर्मेशन / अनुबन्ध-पत्र, दिनांक 28-7-202 के अवलोकन से यह विदित है कि | शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत प्लॉट “ore ies पेमेन्ट प्लान” के अन्तर्गत बुक कराया | | गया था, जिसके अनुसार प्रश्नगत परियोजना के निर्माण कार्य के साथ-साथ धनराशि का | भुगतान किया जाना था। उपर्युक्त अनुबन्ध-पत्र के अनुसार प्रश्नगत प्लॉट की कुल कीमत | %.30,07,000/— थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा लगभग 89 प्रतिशत धनराशि | रू.26,85,450 /— का भुगतान किया जा चुका है। | शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं राजेश खुराना) के प्रकरण में आवंटन-पत्र, दिनांक | 09-04--2024 के साथ संलग्न पेमेन्ट प्लान के अवलोकन से यह विदित है कि शिकायतकर्ता द्वारा बुकिंग के समय १0 प्रतिशत, बुकिंग के 45 दिनों के अन्दर to प्रतिशत, बुकिंग के | t20 दिनों के अन्दर to प्रतिशत तथा अवशेष 70 प्रतिशत धनराशि का भुगतान कब्जा ऑफर के समय किया जाना था। उपर्युक्त आवंटन-पत्र के साथ संलग्न पेमेन्ट प्लान के Page 0 of 22 | द्वारा लगभग 30 प्रतिशत धनराशि रू.37,40,000,//- का भुगतान किया जा चुका है।
प्रकरणों में विपक्षी कम्पनी द्वारा कहा गया है कि उनके द्वारा शिकायतकर्तागण को | अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान करने हेतु माँग-पत्र / अनुस्मारक प्रेषित किये गये, परन्तु | शिकायतकर्तागण द्वारा अपने कर्तव्यों का निवर्हन करते हुए, अपनी अवशेष धनराशि का | | भुगतान कर, प्रश्नगत प्लॉट्स के कब्जे एवं रजिस्ट्री कार्यवाही नहीं की गयी, किन्तु विपक्षी द्वारा प्रश्नगत प्रकरणों अपने कथन के समर्थन में ऐसा कोई साक्ष्य, प्रमाण रेरा कम्प्लेन्ट | पेज पर अपलोड एवं दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके कि विपक्षी | | द्वारा शिकायतकर्तागण के पक्ष में अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान करते हुए, प्रश्नगत प्लॉट्स का भौतिक कब्जा प्राप्त करने हेतु, प्रेषित कब्जा प्रस्ताव/माँग-पत्र के अनुपालन | में शिकायतकर्तागण द्वारा अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान कर, रजिस्ट्री एवं कब्जे की | | कार्यवाही न किये जाने की स्थिति में, वर्तमान समय में विपक्षी द्वारा प्रश्नगत प्लॉट्स की बुकिंग को अंतिम रूप से निरस्त करते हुए, तृतीय पक्षों के हक में उ.प्र. शासन आवास एवं | शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या: 4740/8-3-78-65 fafaer/76, दिनांक 47-40-208 के प्रारूप पर Whe फॉर सेल बी.बी.ए. निष्पादित, हस्ताक्षरित | एवं पंजीकृत कराते हुए, प्रश्नगत प्लॉट्स के सापेक्ष किसी तृतीय पक्षों के अधिकार सृजित | करने के पश्चात् प्रश्नगत प्लॉट्स के सम्बन्ध में रजिस्ट्री व कब्जे की कार्यवाही पूर्ण की [जा चुकी हो। |
इसके अतिरिक्त प्रकरणों विपक्षी द्वारा ऐसा भी कोई साक्ष्य / प्रमाण रेरा कप्प्लेन्ट पेज पर अपलोड एवं दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को आवंटित प्लॉट्स की बुकिंग अंतिम रूप से निरस्त करने के उपरान्त, | शिकायतकर्तागण की जमा धनराशि मय ब्याज वापस की जा चुकी हो, जिसे वर्तमान में | | शिकायतकर्तागण द्वारा स्वीकार कर लिया गया हो। | विपक्षी द्वारा उपर्युक्त कब्जा प्रस्ताव माँग-पत्र एवं अनुस्मारक-पत्र प्रेषित किये जाने | | के उपरान्त, शिकायतकर्तागण द्वारा प्रश्नगत प्लॉट्स का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि | का ब्याज दिलाये जाने हेतु, प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी थीं, जिससे यह स्पष्ट है | कि विपक्षी कम्पनी द्वारा अनुबन्ध के अनुरूप विधि का अनुपालन न किये जाने के कारण, | शिकायतकर्तागण द्वारा व्यथित होकर, प्रश्नगत मूल शिकायतें योजित की गयी हैं। | | इसके अतिरिक्त सारणी a अंकित तीनों शिकायतकर्तागण द्वारा प्रश्नगत मूल | गे शिकायतों में माँगे गये अनुतोष के क्रम में पीठ द्वारा शिकायतकर्ता (साक्षी गदोदिया) के ॥ | प्रकरण में दिनांक 44-09-2023 तथा शिकायतकर्ता Gres) के प्रकरण में दिनांक । 20-40-2023 एवं शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) के प्रकरण में दिनांक | 20-40-2023 को विपक्षी को प्रश्नगत प्रकरण के निस्तारण तक, प्रकरण में यथास्थिति | बनाये रखने हेतु आदेश पारित किये गये। Page I] of 22
अतः वर्णित स्थिति में विपक्षी द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय ,/ पट्टा | के लिए करार) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-9.2 एवं प्रस्तर-9.3 में दिये गये प्राविधानों एवं पीठ द्वारा पारित यथास्थिति के आदेश के विरूद्ध शिकायतकर्ता (साक्षी गदोदिया) के पक्ष में प्रेषित फाईनल कैन्सिलेशन नोटिस, दिनांक 25-44-2023 एवं जमा धनराशि वापस किये | जाने हेतु प्रेषित पत्र, दिनांक 40-05-2024 तथा नये आवंटी के पक्ष में जारी आवंटन-पत्र, दिनांक 04-05-2024 तथा विपक्षी के कथनानुसार नये आवंटी के पक्ष में की गयी रजिस्ट्री, | दिनांक 44-09-2024, विधिनुसार न होने के कारण निरस्त किये जाते हैं और इस प्रकार | विपक्षी द्वारा किये गये प्लॉट निरस्तीकरण की प्रक्रिया अवैधानिक है।
॥ इसी प्रकार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता (आरूष) के पक्ष में फाईनल कैन्सिलेशन नोटिस, दिनांक 46-08-2023 को प्रेषित किया गया, परन्तु विपक्षी कम्पनी द्वारा ऐसा कोई | साक्ष्य / प्रमाण RT कप्प्लेन्ट पेज पर अपलोड एवं दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह | विदित हो सके कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता (आरूष) से प्रश्नगत प्लॉट के सापेक्ष लगभग | | 89 प्रतिशत धनराशि प्राप्त करने के बाद, प्रश्नगत प्लॉट की बुकिंग अंतिम रूप से निरस्त करते हुए, शिकायतकर्ता की जमा धनराशि मय ब्याज वापस की जा चुकी हो, जिसे वर्तमान | समय में शिकायतकर्ता द्वारा स्वीकार किया गया et) ऐसी स्थिति में पीठ द्वारा पारित | | यथास्थिति के आदेश के विरूद्ध विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में जमा धनराशि | | वापस / प्लॉट निरस्त किये जाने हेतु प्रेषित पत्र, दिनांक 25-04-2024 विधिनुसार न होने | | के कारण निरस्त किया जाता है तथा विपक्षी द्वारा की गयी निरस्तीकरण प्रक्रिया विधिपूर्ण | (न होने के कारण, फाईनल कैन्सिलेशन नोटिस, दिनांक 46-08-2023 एवं दिनांक | | 25-04--2024 स्वीकार किया जाना नियमानुसार सम्भव नहीं है। |
इसी प्रकार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) के पक्ष | में फाईनल कैन्सिलेशन नोटिस, दिनांक 42-04-2023 एवं दिनांक 44-07-2023 को प्रेषित | किया गया, परन्तु विपक्षी कम्पनी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य / प्रमाण रेरा कम्प्लेन्ट पेज पर | अपलोड एवं दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके कि विपक्षी द्वारा | शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) से प्रश्नगत प्लॉट के सापेक्ष लगभग | 30 प्रतिशत धनराशि प्राप्त करने के बाद, प्रश्नगत प्लॉट की बुकिंग अंतिम रूप से निरस्त | | करते हुए, शिकायतकर्ता की जमा धनराशि मय ब्याज वापस की जा चुकी हो, जिसे वर्तमान | | समय में शिकायतकर्ता द्वारा स्वीकार किया गया et) ऐसी स्थिति में पीठ द्वारा पारित | | यथास्थिति के आदेश के विरूद्ध विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में जमा धनराशि वापस | | किये जाने हेतु प्रेषित पत्र, दिनांक t0-05—-2024 विधिनुसार न होने के कारण निरस्त | किया जाता है तथा विपक्षी द्वारा की गयी निरस्तीकरण प्रक्रिया विधिपूर्ण न होने के कारण, | फाईनल कैन्सिलेशन नोटिस, दिनांक ॥2-04-2023 एवं दिनांक 44-07-2023 स्वीकार | किया जाना नियमानुसार सम्भव नहीं है। ee ( Page 2 of 22 4 E-Court अतः waged तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्तागण द्वारा अपनी | अवशेष धनराशि का भुगतान करते हुए, प्रश्नगत प्लॉट्स की रजिस्ट्री एवं कब्जे की कार्यवाही करने में कोई व्यतिक्रम नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में विपक्षी को प्रश्नगत प्लॉट्स की | बुकिंग निरस्त कर, जमा धनराशि नियमानुसार वापस करने की अनुमति प्रदान करने का कोई समुचित आधार नहीं है। | चूंकि शिकायतकर्तागण द्वारा wernt शिकायतों में आवंटित प्लॉट्स का कब्जा एवं |
| विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने तथा सब-लीज डीड /रजिस्ट्री निष्पादित कराये | जाने के अनुतोष के साथ अन्य मदों में अनुतोष दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। | अत: समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों के आलोक में यह उचित होगा कि | विपक्षी, शिकायतकर्तागण से आवंटन-पत्र / अनुबन्ध पत्रों में उल्लिखित wre प्लॉन के | अनुरूप अवशेष धनराशि प्राप्त कर, आवंटित प्लॉट्स को पुनर्स्थापित करते हुए, भौतिक कब्जा उपलब्ध करायें। | रेरा एक्ट की mei—i9(4) A प्राविधान है किः- "Section 48, Return of Amount and Compensation- | (2) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building: - | (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, | duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall | be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from | the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount | received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: | Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he
shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing | over of the possession, at such rate as may be prescribed." इस प्रकार आवंटी को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा | नही मिलता है, तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा | प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत | प्रकरणों में शिकायतकर्तागण द्वारा प्रश्नगत प्लॉट्स का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि or ब्याज तथा सब-लीज डीड रजिस्ट्री Ponta कराये जाने के दिलाये जाने का | अनुरोध किया गया है। Page 3 of 22 | जहाँ तक विपक्षी द्वारा कब्जा दिये जाने में हुए विलम्ब के आधार पर विलम्ब ब्याज | दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बन्ध में अग्रणी शिकायतकर्ता (साक्षी गदोदिया) के | | प्रकरण में पत्रावली पर उभय पक्षों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित अनुबन्ध-पत्र, दिनांक | | 04-42-2042 के प्रस्तर-4.4 में कब्जा दिये जाने के सम्बन्ध में निम्नलिखित उल्लिखित | है-- | | | | | 4.4. The Company shall make best efforts to deliver possession of the Said Unit to the Allottee within 78 months from the date of receipt of duly executed confirmation by the Company with a further grace period of 90 (ninety) days...”
अतः: उपर्युक्तानुसार विपक्षी द्वारा अग्रणी शिकायतकर्ता को प्रश्नगत प्लॉट का भौतिक | कब्जा, अनुबन्ध की तिथि 04-42--2042 से 48 माह + 90 दिन Ga पीरियड) अर्थात् | दिनांक 02—-09-2074 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अग्रणी शिकायतकर्ता को | | उक्त निर्धारित अवधि में एवं अभी तक प्रश्नगत प्लॉट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसी प्रकार विपक्षी द्वारा अन्य शिकायतकर्ता (आरूष) को अनुबन्धानुसार निर्धारित अवधि में एवं अभी तक प्रश्नगत प्लॉट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया | गया है। | इसके अतिरिक्त चूंकि शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) के प्रकरण | में विपक्षी कम्पनी द्वारा पक्षकारों के मध्य एग्रीमेन्ट फॉर सेल »/ अनुबन्ध निष्पादित नहीं कराया | गया है, जबकि पत्रावली पर विपक्षी कम्पनी द्वारा प्रश्नगत प्लॉट Wear Bsa के सम्बन्ध | | में जारी आवंटन-पत्र, दिनांक o9—o4—202 की प्रति उपलब्ध है, परन्तु Sat आवंटन-पत्र में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) को प्रश्नगत प्लॉट का | भौतिक कब्जा किस निर्धारित अवधि अथवा कब तक दिया जाना था, कहीं भी उल्लेखित नहीं है। ऐसे में यह कहना उचित नहीं होगा कि विपक्षी स्वेच्छानुसार कब्जा देगें और कब्जे | की तिथि अन्तहीन होगी । | इस सम्बन्ध में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 3533--3534 /20:7 “Heel फाच्यून FTA एवं अन्य बनाम ट्रेवर डेलिया एवं अन्य” | के प्रस्तर-45 में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि :- | "Moreover, a person cannot be made to wait indefinitely for the possession of the
Slats allotted to them and they are entitled to seck the refund of the amount paid by them, along with compensation. Although we are aware of the fact that when there was no delivery period stipulated in the agreement, a reasonable time has to be taken into consideration. In the facts and circumstances of this case, a time period of 3 years would have been reasonable for completion of the contract i.e. the possession was required to be given by last quarter of 2074, Further there is no dispute as to the fact that until now there is no redevelopment of the property | ____Hence, Hence, in view of the above discussion, which draw us to an irresistible conclusion pe | Page 4 of 22 E-Court that there is deficiency of service on the part of the appellants and accordingly the | issue Is answered | उपर्युक्त मा. सर्वोच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन एवं विधि व्यवस्था के अनुसार फ्लैट ' के कब्जे हेतु किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय तक प्रतीक्षा नहीं कराया जा सकता है, जहाँ अनुबन्ध / आवंटन-पत्र में कब्जे की तिथि नहीं दी गयी है, वहाँ तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए 03 वर्ष की समयावधि इस कार्य को पूर्ण कराये जाने हेतु उचित समय माना | है। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) के पक्ष में विपक्षी कम्पनी द्वारा आवंटन-पत्र, दिनांक 09-04-2024 को जारी किया गया है।
अतः समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों के आलोक में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता | | (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) को दिनांक 09-04-2024 से 03 वर्ष अर्थात् दिनांक | 09-04--2024 तक प्रश्नगत प्लॉट का कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा उक्त | निर्धारित समयावधि अथवा अब तक शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) | को प्रश्नगत प्लॉट का भौतिक कब्जा नहीं दिया गया है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है इस, सम्बन्ध में सिविल अपील संख्या: 6649-50 / 2048, “M/S. Supertech Ltd. Versus Rajni Goyal” में | मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- | | "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy | Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser | herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April | 2076, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपर्युक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा | | कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्तागण विलम्ब ब्याज | पाने के अधिकारीगण होगें |
अतः उपर्युक्त विधि व्यवस्था के अनुसार अग्रणी शिकायतकर्ता (साक्षी गदोदिया) को विपक्षी से दिनांक 03-09-2044 से ओ.सी.,/ सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा पुनः । विधिक कब्जा ऑफर-पत्र / अंतिम माँग-पत्र जारी किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो | तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। इसी प्रकार अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में विलम्ब ब्याज की गणना उपर्युक्तानुसार आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार कब्जा दिये जाने की तिथि तथा उनके | | द्वारा जमा की गयी धनराशि के अनुसार की जाएगी। | Page 5 of 22 E-Court जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय ENT “Neelkamal | Realtors Suburban Pvt. Ltd. Versus Union of India & Ors.” में अभिनिर्धारित किया गया है | "Section 76(7)(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to | give possession of an apartment due to discontinuance of his business as a | developer on account of suspension or revocation of the registration under the |
Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the | | allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf | including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession. The requirement to pay interest is not a penalty | as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of money." अतः: उपर्युक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम के प्राविधानों | के अन्तर्गत प्रमोटर एवं आवंटी के बीच किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल | धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया | है। |
| यहाँ पर यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य आवंटित प्लॉटस् के सम्बन्ध ॥ | में अनुबन्ध-पत्र हस्ताक्षरित व निष्पादित हुए हैं, जिससे यह विदित है कि उभयपक्ष को | उक्त अनुबन्ध-पत्रों में उल्लिखित शर्तें स्वीकार हैं। अनुबन्ध के प्रस्तर-4.2 के अनुसार | परियोजना के विलम्ब की अवधि में 45,/- रूपये प्रतिवर्ग as प्रतिमाह (54,/- रूपये प्रति वर्ग मीटर प्रतिमाह) की दर से विलम्ब ब्याज दिये जाने का प्राविधान है, जिसके | अनुसार शिकायतकर्तागण भी विलम्ब ब्याज की धनराशि पाने के अधिकारी हैं। रेरा के | प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है, उसी दर से | धनराशि देने का प्राविधान है। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की | | धारा-48, दिनाक 04-05-2047 को अधिसूचित हुई, जिसके सम्बन्ध में उ.प्र. आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-2 की अधिसूचना, दिनांक 03—-05-20:7 से उ.प्र. में रेगुलेटरी | | अथॉरिटी के रूप में कार्य करने की स्वीकृति राज्यपाल, महोदय ने दिनांक 04-05-2047 | से प्रदान की अर्थात् दिनांक 0-05-2047 से भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, | 2oi6 @ प्राविधान लागू हुए। इस अधिनियम का प्रवर्तन प्रोस्पेक्टिव है। अतः प्रश्नगत | प्रकरणों 4 feat o-05-20:7 8 पूर्व की अवधि के लिए विलम्ब ब्याज की गणना | | अनुबन्ध के प्राविधानों के अन्तर्गत की जायेगी और दिनांक 0:-05-20:7 से आगे की | | अवधि के लिए विलम्ब ब्याज की गणना अधिनियम के प्राविधानों के अधीन की जायेगी। | Page 6 of 22 E-Court
[ जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन | एवं विकास) अधिनियम, 206 के अधीन दिनांक .2-70-20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन | और विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 20:8 अधिसूचित की गयी हैं, | जिसमें देय ब्याज दर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा निर्धारित #८7#+7 प्रतिशत निर्धारित की | | गयी है, जिसे मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा रिट याचिका संख्या: सी: 9420 / 2020, | | “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित एवं विधिपूर्ण माना | | गया है। | ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय // पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर ,४८7४+7 प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से । प्रतिशत ज्यादा है, .उचित एवं सही है। | इसके अतिरिक्त विपक्षी / प्रमोटर को जो धनराशि शिकायतकर्तागण को अदा की जानी है, उसमें से आयकर अधिनियम का आधार लेकर टी.डी.एस. की कटौती नहीं कर सकता है, क्योंकि saa धनराशि को डिक्रिटल (ecreml) धनराशि के रूप में रेरा द्वारा | शिकायतकर्तागण के हक में प्रदान किया गया है। इस सम्बन्ध में मा. उच्च न्यायालय, । | हिमाचल प्रदेश द्वारा सीआईटी बनाम हिमाचल ग्रदेश आवास विकास परिषद 200/5८८ | OnLine HP 5204 के मामले में निम्नवत् आदेश पारित किये गये:- | “The following interesting questions arise for decision in the present case: 8
2. Whether, on the facts and in the circumstances of the case, the hon'ble Tribunal was right in holding that the interest paid or credited by the Housing Board to its allottees (payees) was of capital nature and thus not subject to deduction of tax at source when as per law it is the recipient (payee) who can decide एव particular receipt | (interest in this case) is of revenue or capital in nature?" | | 9. While taking this view we are relying upon the judgment of the apex court in | | Bikram Singh v. Land Acquisition Collector (7997 224 ITR 557 (SC). In the case । before the apex court, the question was whether the interest paid to the persons whose land had been compulsorily acquired under sections 28 and उस of the Land Acquisition Act was a revenue receipt or a capital receipt. The apex court held that though it was termed as interest on delayed payment, it was actually a revenue receipt and, therefore, the provisions of section 7944 of the Income tax Act would have no application. It would be pertinent to mention that the National Consumer Disputes Redressal Commission in Revision Petition No. 2244 of 7999 ##/शव as Ghaziabad Development Authority v. Dr. N. K.Gupta (2002) 258 ITR 337 (NCDRO) under | similar situation held that when the State Commission directed payment of interest to the allottees for delayed completion of flats the same did not fall within the purview of section 7944 of the Income-tax Act. Page 7 of 22 E-Court
| 40, In the present case, the allottees had not given the money to the Board by way of deposit nor had the Board borrowed the amount from the allottees. The amount was | | paid under a self-financing scheme for construction of the flat and the interest was | paid on account of damages suffered by the claimant for delay in completion of the flats. 4. In view of the above discussion, we answer both the questions in favour of the assessee and against the Revenue. The appeal is accordingly dismissed with no order | | | as to costs.” इसी प्रकार मा. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा भी एस्टेट ऑफीसर | | ग्रेटर merch क्षेत्रीय विकास ग्राधिकरण व अन्य बनाम गौरव YEA, 2020 SCC OnLine NCDRC 278 के मामले में समान न्यायिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है। उपर्युक्त वर्णित दोनों मामलों में प्रतिपादित न्यायिक सिद्धान्त को पुनः मा. उच्च न्यायालय, बम्बई द्वारा भी MSM राजकुमार सरोड़े व अन्य बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र व | अन्य 202/ SCC OnLine Bom 2/98 के मामले में दोहराया गया है। निर्णय के सुसंगत प्रस्तर | | निम्नवत् है:- 28. Coming to the admitted facts of the present case we hold that the amounts payable being in effect a refund of the amounts paid by the petitioners to Respondents 4 to 7,
along with compensatory interest thereon, such a relationship does not spell out a debtor-creditor relationship nor is the payment made by Respondents 4 to 7 to the petitioners one in discharge of any pre-existing obligation, so as to attract Section 2(28-A) of the IT Act. We are in respectful agreement with the judgment of the Kerala High Court in Beacon Projects (P) Ltd. ७. CIT [Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT, 2075 SCC OnLine Ker 7659/॥/ which takes the same view, in facts similar to those that we are dealing with in the present matter. 29. In view of the above, we hold that the compliance of Respondents 4 to 7 with the | schedule of payments under the consent terms dated 4-3-202] and our order dated 4- 32024, is to be made without making any deduction of tax at source. Respondents 4 | to 7 are directed to pay to the petitioners the balance sum of Rs 5,05,989 deducted | from the Sth instalment which became due on 20-7-2027, in compliance with the | consent terms, within a period of one week from today. qaqa बिन्दु संख्या: 04 एवं 02 उपर्युक्तानुसार निस्तारित किये जाते हैं। ॥ | निस्तारण बिन्दु संख्या: 03 | | | | निस्तारण बिन्दु संख्या: 03, इस आशय का है कि क्या शिकायतकर्ता (संगीता | खुराना एवं रजनीश खुराना) के प्रकरण में विपक्षी द्वारा रेर अधिनियम, 2046 की धारा-43 | (का उल्लंघन किया गया है और क्या उभयपक्षों के मध्य एग्रीमेन्ट फॉर सेल »अनुबन्ध | निष्पादित कराया जाना अनिवार्य है? Page 8 of 22
| शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) के प्रकरण में उभय पक्षों द्वारा । | अपने-अपने लिखित अभिकथनों में यह स्वीकार किया गया है कि प्रश्नगत यूनिट की कुल | कीमत रू.4,24,50,000,//- थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा रू.37,40,000/- की | | धनराशि का भुगतान किया गया, जो कि यूनिट की कुल कीमत के सापेक्ष 40 प्रतिशत से | | अधिक धनराशि है। | अतः ऐसी स्थिति में सर्वप्रथम उभय पक्षों के मध्य रेर अधिनियम, 2046 की धारा-43 | | के प्राविधानों के अनुसार एग्रीमेन्ट फॉर सेल, अनुबन्ध निष्पादित कराया जाना अनिवार्य है। | इस सम्बन्ध में रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-43 में स्पष्ट रूप से प्राविधानित है कि:- 33, No deposit or advance to be taken by Promoter without fiorst entering into agreement for sale. - | (7) A promoter shall not accept a sum more than ten per cent of the cost of the apartment, plot, or building as the case may be, as an advance payment or an application fee, from a person without first entering into a written agreement for sale with such person and register the said agreement for sale, under any | law for the time being in force. | (2) The agreement for sale referred to in sub-section (7) shall be in such formas | may be prescribed and shall specify the particulars of development of the project including the construction of building and apartments, along with | specifications and internal development works and external development works, | the dates and the manner by which payments towards the cost of the apartment,
plot or building, as the case may be, are to be made by the allottees and the date | on which the possession of the apartment, plot or building is to be handed over, | the rates of interest payable by the promoter to the allottee and the allottee to | the promoter in case of default, and such other particulars, as may be prescribed. उपर्युक्तानुसार यह wre है कि प्रोमोटर, यथास्थिति, अपार्टमेन्ट, भू-खण्ड या भवन | की लागत के 40 प्रतिशत से अधिक राशि अग्रिम संदाय अथवा आवेदन फीस के रुप में | गे | किसी व्यक्ति, उस व्यक्ति के साथ लिखित करार किये बिना, स्वीकार नहीं करेगा और aay var विक्रय करार को तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन पंजीकृत करेगा। ऐसे में यह = 2) विपक्षी का दायित्व है कि वह यदि यूनिट की कुल कीमत की 40 प्रतिशत से ज्यादा की | पा हक गेल धनराशि प्राप्त कर लेता है, तो निश्चित रूप से आवंटन-पत्र / बी.बी.ए., उ.प्र. शासन आवास | | एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या: 740 /8-3-78-65 विविध ,/ 46, | | दिनांक 47-40-2048 के प्रारूप पर निष्पादित करेगा और यदि नहीं कराता है, तो RT | अधिनियम के अन्तर्गत दण्डनीय होगा। यदि यह मान भी लिया जाये कि विपक्षी द्वारा | | शिकायतकर्ता को अनुबन्ध निष्पादित किये जाने हेतु कहा गया था, जो अभी शिकायतकर्ता | | (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) द्वारा हस्ताक्षर नहीं किया गया। फिर भी यह विपक्षी का उत्तरदायित्व था कि वह ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता से 40 प्रतिशत से RL Page 9 of 22 / E-Court [धनराशि न लेते। अतः यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत प्रकरण में एग्रीमेन्ट फॉर | | सेल/अनुबन्ध निष्पादित नहीं कराया गया है। |
| प्रश्नगत प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्यों के अवलोकन से यह विदित | | है कि विपक्षी द्वारा रेर अधिनियम की धारा-43 का उल्लंघन किया गया, क्योंकि पत्रावली | | उभय पक्षों के मध्य अहस्ताक्षरित अनुबन्ध-पत्र तिथि रहित की प्रति उपलब्ध है, जो कि न | तो उभय पक्षों के मध्य विधि एवं नियमानुसार निष्पादित एवं हस्ताक्षरित एवं पंजीकृत कराया | Tae ok न ही उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना | संख्या: 740 / 8-3-48-65 विविध // 46, दिनांक 7-40-2048 के प्रारूप पर है, जबकि | | विपक्षी द्वारा अपने लिखित अभिकथन/ प्रश्नगत शिकायत को खारिज किये जाने हेतु, प्रार्थना-पत्र, दिनांक 04-06-2024 में स्वयं स्वीकार किया गया है कि शिकायतकर्ता की | जमा धनराशि कुल रू.37,40,0000 /- है, जो कि यूनिट की कुल कीमत के 4१0 प्रतिशत | से अधिक धनराशि है। वर्णित स्थिति में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा रेश अधिनियम की | | धारा-43 का उल्लंघन किया गया है। तद्नुसार बिन्दु संख्या: 03 Paka किया जाता है। उपर्युक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैः- आदेश = . विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण के प्रश्नगत प्लॉट्स को पुनर्स्थापित करते हुए, सारणी में अंकित प्लॉट्स की समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र / अनुबन्ध-पत्रों के अनुसार पूर्ण कराते हुए, आवंटन-पत्र अनुबन्ध-पत्रों में | उल्लिखित पेमेन्ट प्लॉन के अनुरूप संशोधित माँग-पत्र जारी कर, शिकायतकर्तागण से | | अवशेष धनराशि प्राप्त करते हुए, ओ.सी. /सी.सी. सहित प्रश्नगत प्लॉट्स का भौतिक
| कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्तागण से देय स्टाम्पशुल्क प्राप्त कर, | शिकायतकर्तागण के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें | | 2. विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता (साक्षी गदोदिया) को दिनांक 03--09--2044 से दिनांक 30-04--2047 तक 45/— रूपये प्रतिवर्ग यार्ड प्रतिमाह (54,/- रूपये प्रति वर्ग मीटर | प्रतिमाह) की दर से एवं दिनांक 04-05-2047 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा पुनः विधिक कब्जा ऑफर-पत्र / अंतिम aoa जारी किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर #८7#+7 प्रतिशत |. ब्याज की धनराशि अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्तागण को वापस की जायेगी। इसी प्रकार अन्य शिकायतकर्ता Page 20 of 22 E-Court [| (आरूष) के प्रकरण में विलम्ब ब्याज की गणना उपर्युक्तानुसार आवंटन-पत्र / अनुबन्ध । के अनुसार कब्जा दिये जाने की तिथि तथा उनके द्वारा जमा की गयी धनराशि के | अनुसार की जाएगी। | | 3. विपक्षी, शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) को दिनांक 40-04--2024 से ओ.सी./ सी.सी. सहित पुनः विधिक कब्जा ऑफर-पत्र / अंतिम माँग-पत्र जारी किये | जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज की धनराशि अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर | | शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। | 4. कोविड-49 के कारण “फोर्स मैज्योर” पीरियड के दृष्टिगत, दिनांक 25-03-2020 से
दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज प्रोमोटर ERT शिकायतकर्तागण को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्तागण से कोई विलम्ब | ब्याज लिया जायेगा। 5. विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) | अधिनियम, 206 की धारा-2(2७)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज | दर आवंटीगण के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज | प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटीगण को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी #८7#+7 प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय | होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटीगण से | विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर | से गणना की जायेगी। | (6. विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को. ओ.सी. / सी.सी. सहित प्रश्नगत प्लॉट्स का भौतिक कब्जा दिये जाते समय सभी चार्जेज आवंटन-पत्र / अनुबन्ध में उल्लिखित tre प्लॉन अनुसार ही प्राप्त करना सुनिश्चित करेंगे। | xy (7. aera शिकायतों में किसान प्रतिकर की देयता मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा una | as \@) आदेश, दिनांक 49-05-2022 के अधीन होगी। 0) कै sy | 8. यदि प्रश्नगत शिकायतों में इस पीठ द्वारा यथास्थिति बनाये रखने का कोई आदेश या | |. कोई स्थगन आदेश पारित किये गये हैं, तो उन्हें तद्नुसार समाप्त किया जाता है। wo - विपक्षी आदेश अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर आदेश का अनुपालन करना | सुनिश्चित करें | |
to.facelt (प्रमोटर) द्वारा शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) के प्रकरण में रेरा अधिनियम की धारा-43 के प्राविधानों का उल्लंघन किया गया है, जिसके लिए.रेरा Page 2I of 22 Pay 4 Z | | | | | | E-Court afer, 20:6 की ater के अधीन शास्ति का प्राविधान किया गया है। अतः सचिव, उ.प्र. रेरा विपक्षी (प्रमोटर) के विरूद्ध शास्ति अधिरोपित करने की कार्यवाही हेतु, | शिकायतकर्ता (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) के प्रकरण को प्राधिकरण के समक्ष | प्रस्तुत करें। | 38 आदेश की प्रति सचिव, उ.प्र. tea को (संगीता खुराना एवं रजनीश खुराना) के. प्रकरण में अग्रेतर कार्यवाही हेतु प्रेषित की जाये। | I2.38 आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर संलग्न की जायें एवं इस आदेश | में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व विलम्ब ब्याज की अन्य मामले में गणना की जायेगी। 43. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की | धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। | 44.RrerrcHarr को यह भी निर्देशित किया जाता है कि यदि 45 दिनों के अन्दर | विपक्षी द्वारा उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में. शिकायतकर्तागण “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन कराये जाने हेतु । अनुरोध अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना | सुनिश्चित करेगें | | आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। तदूनुसार पत्रावलियाँ दाखिल-दफ्तर हों। दिनांक: 44-03--2026. HAA SH रेरा Page 22 of 22