Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Arvind Vehicles Private Limited v. Nexgen Infracon Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/12/103105/2022
- Decision date
- 2026-03-12
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 /40 / 63 सपठित नियम-24 49—fSrprad संख्या:-.07८0२44/]2/]0305/2022 अरविंद व्हीकल्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम AR इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड (महागुन-मग्रुप) आदेश-पत्र दिनांक: 44.03.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री शशांक उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री संजना उपस्थित हुई | उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा अवगत कराया गया है कि विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है और न ही हस्तान्तरण विलेख निष्पादित एवं पंजीकृत कराया गया है। प्रश्तनगत शिकायत में माननीय de-o द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 49.06.2023 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.08.2023 तक ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें।
विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनाक t0.03.20:8 से ओ.सी/सी.सी प्राप्त किये जाने ec: PY अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर # हट कि तकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLRH प्रतिशत व्याज a er pe धनराशि अदा करना सुनिश्चित करें। व्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की देय में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। afs-9 के कारण फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनाक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही इस अवधि में शिकायतकर्ता द्वारा यदि अनुबन्धानुसार अथवा कोई अतिदेय (Over Dues) है. तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 3 EIEN (“4 [2 (ge 0 3... विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(७०)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4... इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा।
5... यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 49.06.2023 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-63 के अन्तर्गत vat आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-04 (पूर्व पीठ--0ए) द्वारा दिनांक 30.04.2025 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है किः- अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों के दृष्टिगत पत्रावली नियम-24 में निहित शक्तियों के अधीन पीठ द्वारा धारा-3 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 49.06. 2023 के प्रस्तर-04 के अनुसार प्रश्नगत प्लॉट के भौतिक कब्जे एवं रजिस्ट्री की कार्यवाही हेतु मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सुनवाई के लिए, दिनांक १0.03.2025 को संदर्भित की जाती है। सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 9.06.2023 के प्रस्तर-02 के अनुसार दिनांक 28.02.2025 से पूर्व विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि हेतु वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही कर, पत्रावली को सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। यदि मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी नियम 24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि व्रिपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत erst, दिनांक 49.06.2023 का समयबद्ध रूप री सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न्यायनिर्णायक गै प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को q सन्दर्भित कर सकते हैं।
तदोपरान्त अन्तर्गत धारा-38,/40,/63 के कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने एवं यूनिट की रजिस्ट्री न कराये जाने के कारण मा. पीठ-04 (पूर्व पीठ--04ए) द्वारा पारित आदेश दिनांक 30.0:.2025 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई | इस पीठ द्वारा विपक्षी को बार-बार आदेशित किये जाने के बावजूद भी ओ.सी. #सी.सी. सहित शिकायतकर्ता को कब्जा प्रस्ताव-पत्र नहीं भेजा गया है और न ही शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया गया और न ही यूनिट की रजिस्ट्री कराई गई है। यूनिट तैयार नहीं है और परियोजना का ओ.सी. JOR. भी प्राप्त नहीं है, जैसा कि विपक्षी द्वारा आज सुनवाई के दौरान कहा गया है। विपक्षी द्वारा माननीय रेरा पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 49.06.2023 का अनुपालन न करने के कारण विपक्षी के विरुद्ध धारा-63 के अन्तर्गत अर्थदण्ड / पेनल्टी अधिरोपित करने हेतु आदेश दिनांक 24.07.2025 पारित करते हुए प्राधिकरण को लिखा गया और आदेश की प्रति श्रीमान सचिव, रेरा को प्रेषित की गई | ऐसी स्थिति में कार्यालय आदेश पत्रांक संख्या-3839 / यू.पी. रेरा / FRM. / 2025-26 दिनांक 28.08.2025 के अनुसार यूनिट इकाई को कुर्क कर, रिसीवर नियुक्त कर, कब्जा दिलाये जाने हेतु अधिकृत किया गया है, लेकिन नियम-24 की कार्यवाही के अन्तर्गत आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा नहीं दिलाया जा सकता है, क्योंकि यूनिट, परियोजना तैयार नहीं है और विपक्षी के पास ओ.सी. / सी.सी. भी प्राप्त नहीं है।
अतः क्योंकि विपक्षी के पास उक्त परियोजना / यूनिट का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं है और बिना ओ.सी./ सी.सी. के शिकायतकर्ता को वैधानिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है और रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकती है और अब ऐसी स्थिति में विपक्षी के पास ओ.सी. / सी.सी. न होने के कारण शिकायतकर्ता को वैधानिक कब्जा नहीं दिलाया जा सकता है। आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अन्तर्गत विपक्षी को सिविल कारागार में निरुद्ध कर आदेश »डिक्री का निष्पादन कराये जाने का प्रावधान है, लेकिन इस सम्बन्ध में उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा सिविल अरेस्ट हेतु कोई अधिकारी /» कर्मचारी / ७५॥१ नियुक्त नहीं है, इसलिए विपक्षी को गिरफ्तार कर सिविल कारागार में भेजे जाने का आदेश भी पारित नहीं किया जा सकता है। अतः ऐसी स्थिति में इस पीठ द्वारा आदेश दिनांक 49.06.2023 का निष्पादन कराया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। अतः पत्रावली सम्बन्धित पीठ को वापस भेजी जाये। os EEN सम्बन्धित पीठ यदि चाहे, तो नियम-24 के प्रावधानों के अन्तर्गत अपने आदेश के यन हेतु पत्रावली प्रधान दीवानी न्यायालय को संदर्भित कर सकती है, ताकि विपक्षी 2 यरेक्टर को सिविल कारागार में निरुद्ध कराकर आदेश का क्रियान्वयन कराया जा पक । सम्बन्धित पीठ यदि ओ.सी./सी.सी. के सम्बन्ध में विपक्षी के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही कर, ओ.सी./ सी.सी. उपलब्ध करा देती है, तो सम्बन्धित पीठ पुनः यदि पत्रावली इस पीठ को नियम-24 के अन्तर्गत सन्दर्भित करती है, तो ऐसी दशा में इस पीठ द्वारा नियम-24 के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए कार्यालय आदेश पत्रांक संख्या-8839 / यूपी. Qe त Tapa es
जाने और यूनिट की रजिस्ट्री कराये जाने एवं आदेश दिनांक 9.06.2023 के हेतु अग्रिम कार्यवाही की जा सकेगी | अतः पत्रावली नियमानुसार सम्बन्धित पीठ को वापस भेजी जाये। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। आर. पी. सिंह ar (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण