Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Parvinder Awana v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/12/102952/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-03-01
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-3 (formerly Bench-2) Order passed under Section 34 of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2046 Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member Sr. No. | Complaint No. | Unit No. | Allotment date (as on file) | Possession as per agreement | Amount deposited as per receipt | Relief sought . | [?]7025562022 | Ami Bansal and Sachin Bansal | 5094 | Rs. 45,50,748/ | 24.02.2045 | 42 months +3 months grace period, i.e. November 2048 | Possession of the unit and interest for the delayed period 2, | Tar44/2/02952/2022 | Parvinder Awana | 3072 | Rs. 24,59,500/. | 04.02.2044 | 42 months +3 months grace period, i.e. November 2047 | Possession of the unit and interest for the delayed period Versus ATS Realty Pvt. Ltd. Along with the complainants Ami Bansal and Sachin Bansal, 4 other complainants have filed a complaint against the respondent. The facts and evidence of all these complaints are the same. All these complaints relate to one and the same project, ATS ALLURE. Therefore, they are being disposed of by a single order. The file of complaint no. ||72244//02356/2022, Ami Bansal and Sachin Bansal, will be the lead complaint. The complainants have instituted this complaint against the respondent for possession of the unit and interest for the delayed period.
In brief, the lead complainant states that a unit shown in the table above was booked in the project ATS ALLURE run by the respondent, and against it the amount shown in the table was paid to the respondent. The complainants state that the respondent was to complete the project and hand over possession of the unit by the date shown in the table, but it has not been given yet. Therefore the complainants have lodged this complaint against the respondent under Section 34 of the Real Estate Regulatory Authority Act. In support of their statement, the complainants have filed photocopies of the allotment letter and the statement of account. Details of the amounts paid by the complainants to the respondent are as follows: Sr. No. | Particulars, date / other evidence | Amount paid (Rs.) 4 | Complainant Ami Bansal, 03.44.2022, customer ledger | Rs. 45,50,778/- [?] | Complainant Parvinder [?], [?], statement of account | Rs. 2,59,500/ In its reply filed on behalf of the respondent, it is stated that the complainant has alleged that the respondent has violated its contractual obligation, and therefore jurisdiction to decide the matter lies with the civil court. On this basis, the case should be dismissed.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 (पूर्व पीठ-2) भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थितः- डा०दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य ‘| शिकायत संख्या —_ यूनिट पत्रावली पर आवंटन की अनुबंधानुसार वांछित घ हे न0 | उपलब्ध रसीद के तिथि कब्जा दिये जाने do अनुसार जमा की तिथि धनराशि रु0 | . फलराब॥ा[7025562022 | aft बंसल व 5094 | रु0 45,50,748/ | 24.02.2045 42 माह. +3 बन यूनिट का कब्जा | . अनुग्रह अव व विलम्बित | सचिन बंसल अर्थात नवम्बर | अवधि का ब्याज 2048 दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। 2, रटार44/2/02952/2022 | परविन्दर अवाना | 3072 | रु0 24,59,500/. | 04.02.2044 42 माह +3 माह | यूनिट का कब्जा अनुग्रह अवधि | व विलम्बित अर्थात नवम्बर | अवधि का ब्याज 2047 दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम एटीएस रिएलटी प्रा0 feo शिकायतकर्ता at बंसल व सचिन बंसल के साथ 4 अन्य शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध परिवाद योजित की गई है। इन सभी शिकायतों 'के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतों एक ही परियोजना ATS ALLURE से सम्बन्धित है। अत: एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- ॥72२44//02356/2022 अमी बंसल व सचिन बंसल की पत्रावली अग्रणी परिवाद रहेगी। शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित की गयी है। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में vad तालिका में अंकित यूनिट बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष तालिका में अंकित धनराशि विपक्षी को भुगतान की गई।
शिकायतकर्तागण का कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण कर तालिका में अंकित तिथि तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक नहीं 2, दिया गया, जिस कारण शिकायतकर्तागण द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्तागण द्वारा अपनी कथन के समर्थन में आवंटन पत्र व स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- क्रम विवरण दिनांक / अन्य साक्ष्य | भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) 4 शिकायतकर्ता-अमी बंसल 03.44.2022 BO 45,50,778 / कस्टमर लेजर | | शिकायतकर्ता-परविन्दर sar | We रु0 2,59,500 / स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट
विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस प्रकार वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील संख्या 6,/ 208 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग vio लिए में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु दायर किया है। शिकायतकर्ता द्वारा समय से धनराशि का भी भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण की भिन्न-भिन्न पीठों में वाद दायर किये जो निरस्त किये जा चुके है। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के अन्दर यूनिट का कब्जा दिये जाने के लिए बचनबद्ध था परन्तु फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। iene:
शिकायतकर्ता को धनराशि का भुगतान किये जाने के लिए कई अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता ने न तो धनराशि का भुगतान किया और न ही कब्जा लेने आया जिस कारण शिकायतकर्ता कोई अनुतोष पाने का अधिकारी नहीं है। अतः विपक्षी ने परिवाद को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया है। विपक्षी द्वारा अपनी कथन के समर्थन में ऑफर ऑफ पजेशन, अनुस्मारक पत्र, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट एवं अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 की छायाप्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या i: प्रश्न We इस आशय का विरचित किया गया है कि परियोजना फोर्स मैज्योर होने के कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह उल्लेख किया गया है कि एन.जी. टी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व कोविड-49 महामारी के कारण निर्माण कार्य बंद था। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029,//4985 एम.सी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है। उक्त के संदर्भ में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940,/2047 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य“ के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर 440 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- "Force majeure shall mean a case of war,
flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature." उपरोक्त फोर्स मैज्योर की परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदा ——sne- 3 आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में कोविड-49 महामारी के अतिरिक्त अन्य ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है। कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06. 2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये विपक्षी कोविड-49 के अतिरिक्त अन्य किसी आधार पर फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। तदनुसार प्रश्न de निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी?
अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य आवंटन पत्र दिनांक 22.02.20i5 को निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 3 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात नवम्बर 2048 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। इसी क्रम में अनुबंधानुसार उपरोक्त तालिका में अंकित शिकायतकर्ता क्रम संख्या 2 को नवम्बर 2077 Fo कब्जा प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ। विपक्षी का कहना है कि फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। विपक्षी का यह भी कथन है कि शिकायतकर्ता ने भिन्न भिन्न पीठों में वाद दायर =] 4 किये है जो निरस्त हो चुके हैं परन्तु विपक्षी द्वारा इस सम्बंध में पीठ द्वारा पारित ऐसे किसी आदेश की प्रति दाखिल नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी का यह भी तर्क है कि परियोजना पूर्ण है और विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण है और विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त हो चुका है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 6 वर्षों से अधिक का विलम्ब किया गया है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है।
जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील do 6649-50 // 2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could 7० have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा ‘Seana रियलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ gars वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If
the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा wat धनराशि का उपभोग किया गया है। > oat 6 जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20I6 के अधीन दिनांक 7.40.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o.2(ii) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to
MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ॥४८,२+]प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। — = आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को आवंटित यूनिट अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 30 अप्रैल 2024 तक ओसी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय, स्टाम्प Yow प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें।
विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.:2.208 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि wo 45,50,7i8/ (रु० पैतालिस लाख पचास हजार सात सौ HESS) पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायलकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड a दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। उक्त तालिका में अंकित क्रम संख्या 2 शिकायतकर्ता के प्रकरण में आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुरूप तालिका में अंकित कब्जा दिये जाने की तिथि के उपरांत से शिकायतकर्ता के सम्मुख अंकित धनराशि पर उपरोकतानुसार ब्याज की गणना की जायेगी। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(७०)0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी el 8 से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये।
इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा Get | आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। amas (परननकह We, 62-2024 (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर