Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Nalinee Ranjan v. PATEL ADVANCE JV Registered Office
Complaint No. NCR144/11/85699/2021
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
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- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
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Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddha Nagar Hearing Bench - 02 Order under Section-34 Presence:- (Dr.) Deepak Swaroop Saxena, Member Presence:- T. Venkatesh, Member Complaint Number :- NCR44/I/85699/202] Nalini Ranjan Versus Patel Advance JV The present complaint application has been instituted by the complainant against the respondent for getting possession and delayed period interest. In brief, the complainant states that unit number- 7-4/50 in tower Neotown Phase- was booked by them in the respondent's project, whose total cost was Rs. 33,4,327/-, against which payment of Rs. 27,3,57i/- was made by the complainant from time to time on an installment basis. The complainant states that the project has not been completed by the respondent as promised and no response is being made available to the complainant. EMI and house rent are having to be paid by the complainant. Therefore, the complainant requested for grant of possession of the unit and delayed period interest. In support of her statement, copies of allotment letter dated 46.04.206, copy of home loan sanction letter, copy of MOU, account statement, etc. were filed by the complainant.
In the reply dated 05.05.2022 on behalf of the respondent, it was stated that in its project Neotown, unit number 50! in tower #-4 was allotted to the complainant, whose total cost was Rs. 33,62,827 /-, against which allotment letter dated t6.07.20I6 was executed between the parties. According to clause-24 of the agreement, possession of the unit was to be made available within 40 months with a grace period of 06 months. The Authority, sending letters dated 30.05.2044 and 29.07.200, stayed construction work due to dispute on the allotted land of the project. Permission had been obtained from the Authority on 04.03.200 for carrying out construction work of the project, which was valid only up to 05.08.2043. The Hon'ble Supreme Court, passing interim order in SLP-Civil No.27508 of 200, Crane Bell Vs. State of UP, ordered 37777 quo to be maintained in respect of the land, and in the final order granted permission for carrying out construction work. The Authority, sending letter dated 26.11.2045 to the complainant, had informed that order has been passed by the Hon'ble Supreme Court in respect of the land. Fresh permission was received by the respondent from the Authority on 24.44.2006 for carrying out construction work. Construction work in the respondent's project also remained disrupted due to Covid-19. Payment of pre-EMI of Rs. 3,74,852/- has also been made by the respondent as per the MOU. Possession of the unit will be made available to the complainant with necessary certificates by December 2023.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-02 आदेश अन्तर्गत धारा-34 उपस्थिति:- (डा०) दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य उपस्थिति:- टी० वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या :- NCR44/I/85699/202] नालिनी रंजन बनाम पटेल एंडवास जे.वी प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Neotown Phase- में यूनिट संख्या- 7-4/50 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 33,4,327/—- रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 27,3,57i/- रूपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा किये गये वादे के अनुसार परियोजना को पूर्ण नहीं किया गया है एवं शिकायतकर्ता को कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है शिकायतकर्ता द्वारा ई.एम.आई एवं मकान के किराये का भुगतान करना पड़ रहा है अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। 4 शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र दिनांकित 46.04.206 की प्रति, गृह ऋण स्वीकृति पत्र की प्रति, एम.ओ.यू की प्रति, खाता विवरण आदि की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है।
विपक्षी की ओर से जवाब दिनांकित 05.05.2022 में अंकित किया गया है कि उनकी परियोजना Neotown में शिकायतकर्ता को टावर #-4 में यूनिट संख्या- 50! को आवंटित की गयी थी, जिसकी कुल कीमत 33,62,827 /- रूपये थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों द्वारा आवंटन पत्र दिनांक t6.07.20I6 को निष्पादित हुआ। अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-24 के अनुसार यूनिट का कब्जा 40 माह एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के साथ उपलब्ध कराया जाना था। प्राधिकरण द्वारा दिनांक 30.05.2044 एवं दिनांक 29.07.200 को पत्र प्रेषित करते हुए परियोजना की आवंटित भूमि पर विवाद के चलते निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। परियोजना का निर्माण कार्य किये जाने हेतु दिनांक 04.03.200 को प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त की जा चुकी थी, rr” जो कि दिनांक 05.08.2043 तक ही मान्य था। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा SLP- Civil No.27508 of 200, Crane Bell Vs. State of UP में अंतरिम आदेश देते हुए भूमि के सम्बन्ध में ३७७७७ quo बनाये रखने हेतु आदेशित किया गया था एवं अंतिम आदेश में निर्माण कार्य किये जाने हेतु अनुमति प्रदान की गयी। प्राधिकरण द्वारा दिनांक 26.॥4. 2045 को शिकायतकर्ता को पत्र प्रेषित करते हुए अवगत कराया गया था कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भूमि के सम्बन्ध में आदेश पारित किया जा चुका है। विपक्षी को निर्माण कार्य किये जाने हेतु प्राधिकरण से दिनांक 24.44.2006 को पुनः अनुमति प्राप्त हुई। विपक्षी. की परियोजना में निर्माण कार्य aifis-t9 के कारण भी बाधित रहा है। विपक्षी द्वारा एम.ओ.यू के अनुसार 3,74,852/-रूपये की प्री--ई.एम. आई का भी भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता को जरूरी प्रमाण पत्रों के साथ यूनिट का कब्जा दिसम्बर 2023 तक उपलब्ध करा दिया जायेगा।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्राधिकरण द्वारा प्रेषित पत्र, खाता विवरण, न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेश की प्रति, पीठ--03 द्वारा पारित आदेश की प्रति, प्राधिकरण की बैठक एजेंडा की प्रति आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के cal को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये जाते हैं :- 4. क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव ? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु We बिन्दु dear इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई ? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि प्राधिकरण द्वारा आवंटित भूमि पर विवाद के चलते निर्माण कार्य पर प्रतिबंध एवं aifas—t9 के कारण परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित रहा- था। विपक्षी द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा SLP- Civil No.27508 of 200, Crane Bell Vs. State ० (९ में भूमि सम्बंधित विवाद के आदेश का भी उल्लेख किया गया है। इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या--940 / 2047 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में — ore निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर ti0 4 फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature.
उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो। उत्तर प्रदेश रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25. 03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा जो तर्क परियोजना के विलम्ब के सम्बन्ध में उठाये गये है वह फोर्स मैज्योर की परिधि में नहीं आते है। तद्नुसार बिन्दु wear- निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 बिन्दु tere इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा किये गये वादे के अनुसार परियोजना को पूर्ण नहीं किया गया है एवं शिकायतकर्ता को कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा ई.एम.आई एवं मकान के किराये का भुगतान करना पड़ रहा है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। दूसरी ओर विपक्षी द्वारा अपने जवाब में अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता को जरूरी प्रमाण पत्रों के साथ दिसम्बर 2023 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध करा दिया जायेगा |
पत्रावली पर उभयपफक्षों द्वारा हस्ताक्षरित आवंटन पत्र दिनांकित 46.04.206 के प्रस्तर-24 के अनुसार यूनिट का कब्जा अनुबन्ध निष्पादित किये जाने की तिथि से 40 माह एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 46 माह अर्थात् दिनांक 46.44.2049 — rn तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था, परच्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50 /20:8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी Wares माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint. wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent - Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि जाने की तिथि, जो अधिकारी होगा। व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 76.77.2079 से ओसी / सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है।
जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि — "Section 8(i)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20:8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+I प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(००)() में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। 7 ae 6 आदेश
l, विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट को अनुबन्ध पत्र के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.07.2023 तक ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 46.44.2049 से ओसी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि पर ४८,२१+] प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित wt) ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(2०)()के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये।
5. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा fh Rr प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। Og. aS 2S Slo दीपक स्वरूप सक्सेना (सदस्य) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण टी० वेंकटेश =p fos