Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Atul Kumar Singh v. Gaursons Realtech Private Limited
Complaint No. NCR144/11/64332/2020
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2022-08-05
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04ए आदेश अन्तर्गत aRI-34 श्री राजीव कुमार, माननीय अध्यक्ष शिकायत संख्या — NCRI44//64332/2020 अतुल कुमार सिंह बनाम गौड़संस रियलटेक yo feo प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना 32nd Parkview में प्लॉट नं0-226 बुक कराया गया, जिसका कूल मूल्य 28,44,62,/- रूपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 23,97,247 /— रूपये की धनराशि का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उनके द्वारा पेमेन्ट प्लॉन के अनुसार विपक्षी को धनराशि का भुगतान किया गया। अंतिम भुगतान कब्जे के समय किया जाना था। विपक्षी द्वारा अभी तक कार्य पूर्ण नहीं किया गया है, जिसके कारण शिकायतकर्ता द्वारा अंतिम भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी ने अनुचित रूप से प्रश्नगत प्लॉट को निरस्त कर दिया। अतः शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत प्लॉट को पुर्नस्थापित करते हुए कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा लिखित अभिकथन /प्रत्युत्तर दिनांकित 08.02.2024 एवं दिनांकित 20.42.2024 दाखिल करते हुए विभिन्न तथ्यों का उल्लेख किया गया है और कहा गया है कि oe विपक्षी द्वारा अवगत कराया गया था कि आवंटन पत्र के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराते हुए दिनांक 30.04.2046 तक कब्जा दे दिया जायेगा, परन्तु विपक्षी द्वारा ऐसा नहीं किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पत्र में उल्लेखित tre प्लॉन का संदर्भ दिया गया और कहा गया कि विपक्षी द्वारा दिनांक 20.07.2046 को बिना ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये हुए yea प्लॉट का कब्जा ऑफर nN a éN N किया गया, जिसके उपरान्त वह कई बार विपक्षी के ऑफिस में गया, परन्तु विपक्षी द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता ने दिनांक i8.08.20I6 को पंरियोजना स्थल का निरीक्षण किया, तो पाया गया कि war परियोजना स्थल पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा रहा है। प्रश्नगत प्लॉट रोड लेवल से एकमीटर नीचे था, जबकि विपक्षी द्वारा प्लॉट की लेवलिंग के सम्बन्ध में पूर्व में ही धनराशि प्राप्त की जा चुकी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपनी शिकायत के सम्बन्ध में विभिन्न तथ्यों का उल्लेख कर प्रश्नगत प्लॉट को पुर्नस्थापित करते हुए कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने क। अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित अभिकथन;//प्रत्युत्तर दिनांकित 08.02.2024 एवं दिनांकित 20.42.2024 की प्रतियाँ, विधिक नोटिस, प्रार्थना पत्र दिनांकित 28.04.2022 की प्रति, पार्ट लेआऊट कम्पलीशन दिनांकित 07.05.2049 की प्रति, आर.टी.आई. दिनांकित 24.04.2022 की प्रति, कस्टमर लेजर की प्रति, गृह ऋण सम्बन्धी अभिलेख की प्रतियाँ, फोटोग्राफ्स, ई-मेल संवाद की प्रतियाँ, त्रिपक्षीय अनुबन्ध, आवंटन पत्र दिनांकित 23.02.2045 की प्रति, ऑफर ऑफ पोजेशन पत्र दिनांकित 20.07.2076 आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी।
विपक्षी द्वारा प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा तथ्यों को छिपाते हुए wera शिकायत योजित की है। इसलिए प्रश्नगत शिकायत खारिज किये जाने योग्य है। शिकायतकता द्वारा उनकी परियोजना "32nd Parkview" में प्लॉट 40-226 बुक कराया गया था, जिसके सम्बन्ध में उभय पक्ष के मध्य आवंटन पत्र दिनांक 23.02.2045 को निष्पादित हुआ, जिसके अनुसार प्रश्नगत प्लॉट का कब्जा 6 माह ग्रेस पीरियड सहित दिनांक 04.44.2046 तक दिया जाना था और शिकायतकर्ता के पक्ष में कब्जा ऑफर पत्र दिनांक 20.07.2046 को जारी किया जा चुका है। पक्षकारों के मध्य सब-लीज डीड के निष्पादन के बाद, शिकायतकर्ता को अनिवार्य रूप से 5 वर्ष की अवधि के भीतर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा। विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र के प्रस्तर-8, 9, 40 का उल्लेख किय है। शिकायतकर्ता के पक्ष में अंतिम माँग पत्र दिनांक 29.07.206 को जारी करते हुए धनराशि का भुगतान करने हेतु कहा गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा उक्त माँग पत्र के अनुसार भुगतान नहीं किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पत्र में सहमत नियमों और शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया है और प्रश्नगत प्लॉट का कब्जा प्राप्त नहीं किया गया। 3 वर्ष की अवधि व्यतीत हो जाने के बाद अनुस्मारक /माँग पत्र दिनांक 22.07.2049 को भेजा गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद विपक्षी द्वारा अंतिम अनुस्मारक/रद्दीकरण पत्र दिनांक 49.09.20I9 भेजा गया, परन्तु शिकायतकर्ता भुगतान करने में विफल रहा, जिस कारण विपक्षी द्वारा निरस्तीकरण 206 3
पत्र दिनांक 26.:4.20I9 को जारी करते हुए प्रश्नगत प्लॉट को निरस्त कर दिया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को सब-लीज़ डीड निष्पादित कराने हेतु कई अनुस्मारक पत्र भेजे गये। विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र के WRGR7 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वह Gag ER के अनुसार प्रश्नगत प्लॉट की कुल कीमत के i5 प्रतिशत धनराशि की कटौती करने के उपरान्त अवशेष धनराशि वापिस करने हेतु तैयार हैं। इन आधारों पर शिकायतकर्ता की शिकायत खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में ऑफर ऑफ पोजेशन पत्र दिनांकित 20.07.206 की प्रति, माँग पत्र दिनांकित 29.07.2046 की प्रति, रिमाईन्डर लेटर दिनांकित 22.07.2049 फी प्रति, फाईनल Rade o4 कैन्सिलेशन लेटर दिनांकित t9.09.20I9 की प्रति, कैन्सिलेशन लेटर दिनांकित 26.4.2049, सब-लीज़ डीड निष्पादित किये जाने के सम्बन्ध में शिकायतकर्ता को प्रेषित पत्र दिनांकित 47.04.2047 की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। प्रश्नगत प्रकरण में रेरा पोर्टल पर जाँच के उपरान्त पाया गया है कि प्रश्नगत परियोजना 32nd Parkview रेरा. में पंजीकृत है, जिसका पंजीकरण WeT-UPRERAPRIJI493 है और रेरा में परियोजना की प्रारम्भ तिथि 07.07.2045 और पूर्णता की तिथि 37.t0.20:9 अंकित की गयी है। इस प्रकार इस प्राधिकरण का प्रकरण के निस्तारण का क्षेत्राधिकार है। उभय पक्ष के cat को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये गये :- .. क्या शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लॉन के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या प्लॉट निरस्तीकरण की प्रकिया वैधानिक है ?
2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु dea बिन्दु संख्या-। इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लॉन के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या यूनिट निरस्तीकरण की प्रकिया वैधानिक है ? यह वाद बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। V4 ar
शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके द्वारा tre प्लॉन के अनुसार विपक्षी को धनराशि का भुगतान किया गया। अंतिम भुगतान कब्जे के समय किया जाना था। विपक्षी द्वारा अभी तक कार्य पूर्ण नहीं किया गया है, जिसके कारण शिकायतकर्ता द्वारा अंतिम भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी ने अनुचित रूप से प्रश्नगण प्लॉट को निरस्त कर दिया। अतः शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत प्लॉट को पुन॑स्थापित करते हुए कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित अभिकथन;//प्रत्युत्तर दिनांकित 08.02. 202 एवं दिनांकित 20.42.2024 दाखिल करते हुए विभिन्न तथ्यों का उल्लेख किया गया है और कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन ua में उल्लिखित पेमेन्ट प्लॉन का संदर्भ दिया गया। शिकायतकर्ता ने दिनांक 48.08.2046 को परियोजना स्थल का निरीक्षण किया, तो पाया गया कि उक्त परियोजना स्थल पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा रहा है। प्रश्नगत प्लॉट रोड लेवल से एकमीटर नीचे था, जबकि विपक्षी द्वारा प्लॉट की लेवलिंग के सम्बन्ध में पूर्व में ही धनराशि प्राप्त की जा चुकी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपनी शिकायत के सम्बन्ध में विभिन्न तथ्यों का उल्लेख कर werd प्लॉट को पुर्नस्थापित करते हुए कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता के पक्ष में अंतिम माँग पत्र दिनांक 29.07206 को जारी करते हुए धनराशि का भुगतान करने हेतु कहा गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा उक्त माँग पत्र के अनुसार भुगतान नहीं किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पत्र में सहमत नियमों और शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया है और प्रश्नगत प्लॉट का कब्जा प्राप्त नहीं किया गया। 3 वर्ष की अवधि व्यतीत हो जाने के बाद अनुस्मारक / माँग पत्र दिनांक 22.07.2049 को भेजा गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद विपक्षी द्वारा अंतिम अनुस्मारक /रद्दीकरण पत्र दिनांक 9.09.20I9 भेजा गया, परन्तु शिकायतकर्ता भुगतान करने में विफल रहा, जिस कारण विपक्षी द्वारा निरस्तीकरण पत्र दिनांक 26.44.209 को जारी करते हुए प्रश्नगत प्लॉट को निरस्त कर दिया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को सब-लीज़ Ss hues कराने हेतु कई अनुस्मारक पत्र भेजे गये। विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र के प्रस्तर-47 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वह उक्त प्रस्तर के अनुसार प्रश्नगत प्लॉट की कुल कीगत के 45 प्रतिशत धनराशि की कटौती करने के उपरान्त अवशेष धनराशि वापिस करने हेतु तैयार हैं। आवंटन पत्र के एनेग्ज़र में re प्लॉन अंकित किया गया है और आवंटन पत्र के पृष्ठ संख्या-5 पर अंकित प्रस्तर-4 निम्नलिखित उल्लेखित है :- dv
"That the total consideration and other charges has been finalized between the Developer and the Allottee (s). installments of payment will run as opted in the application form / mentioned in the payment plan annexed with this allotment letter , the payment of due installment first of all shall be adjusted towards the interest due thereafter the remaining amount shall be adjusted in the principal amount dues. Although timely payment is the main essence of the allotment, however there will be a grace period for the delay of fifteen days from the due date of payment and in case the delay exceeds for more than fifteen days there will be no grace period and interest @ 2 % per annum shall be charged from the due date . That the schedule of payment/installment has been duly explained to the allottee (s) who shall be the responsible for making payments on time , any separate demand letter for the installment falling due will not be required to be sent by the company and that cannot be claimed as a right or any duty /obligations towards the company .
उक्त आवंटन पत्र के नियम एवं शर्तों के अनुसार यह we है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष में धनराशि का भुगतान पेमेन्ट प्लॉन के अनुसार किया जाना था, जिसमें बुकिंग पर to प्रतिशत, प्रथम किश्त बुकिंग के 30 दिनों के अन्दर i0 प्रतिशत, नींव का विकास कार्य प्रारम्भ होने पर 40 प्रतिशत, लैवलिंग पर 40 प्रतिशत, डिमार्केशन पर १0 प्रतिशत, ड्रेनेज एवं सीवेज़ के निर्माण कार्य प्रारम्भ होने पर os प्रतिशत, रोड़ का कार्य प्रारम्भ किये जाने पर t0 प्रतिशत, कब्जे पर 5 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया जाना था। इसी के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान किया जाना था और विपक्षी द्वारा अपनी परियोजना को पूर्ण करते हुए समय-समय पर शिकायतकर्ता को माँग पत्र भेजा जाना था। इस प्रकरण में यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी द्वारा दिनांक 07.05.209 को “पार्ट कम्पलीशन” जारी किया गया | नियमतः कब्जे पर देय 45 प्रतिशत धनराशि sad बाद दी जानी थी। पिपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को Account issue सैटेल करने हेतु दिनांक 07.05.2049 के उपरान्त नोटिस भेजे गये, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा उक्त Account issue सैटेल किये जाने हेतु क्या प्रयास किये गये, यह स्पष्ट नहीं है। रेरा अधिनियम की धारा-47 निम्नवत् है :-
7. (J) The promoter shall execute a registered conveyance deed in favour of the allottee along with the undivided proportionate title in the common areas to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, and hand over the physical possession of the plot, apartment of building, as the casc may be, to the allottees and the common areas to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, in a real estate project, and the other title documents pertaining thereto within specified period as per sanctioned plans as provided under the local Jaws: Provided that, in the absence of any local law, conveyance deed in favour of the allottee or the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, under this section shall be carried out by the promoter within three months from date of issue of occupancy certificate. (2) After obtaining the occupancy certificate and handing over physical possession to the allottees in terms of sub-section (/), it shall be the responsibility of the promoter to handover the necessary documents and plans, including common areas, to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, as per the local laws:
Provided that, in the absence of any local law, the promoter shall handover the necessary documents and plans, including common areas, the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, within thirty days after obtaining the occupancy certificate. उपरोक्त प्राविधानों से यह we है कि रजिस्टर्ड लीज़ /सेल डीड एवं कब्जा दिये जाने से पूर्व बिल्डिंग /अपार्टमेन्ट /प्लॉट आदि का “ओक्यूपेन्सी सर्टिफिकेट” अपेक्षित है। बिना उक्त सर्टिफिकेट के “टाईटल ट्रान्सफर” किया जाना सम्भव नहीं के है। प्रकरण में विपक्षी को प्रश्नगत परियोजना से सम्बन्धित पार्ट कम्पलीशन दिनांक 07.05.2049 को प्राप्त हुआ, जिसकी पुष्टि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा अपने पत्र दिनांक 24.04.2022 से किया गया है।
यदि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, तो यह विपक्षी की जिम्मेदारी बनती है कि वह शिकायतकर्ता को समय-समय ug माँग पत्र भेजकर अवशेष धनराशि की माँग करते और शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष धनराशि का भुगतान न किये जाने की स्थिति में समुचित अवसर देकर उनके प्लॉट को निरस्त करतें हुए उसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि को उन्हें वापस कर देते। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को कैन्सिलेशन लेटर दिनांक 26..209 को प्रेषित किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता की जमा धनराशि विपक्षी द्वारा वापिस नहीं की गयी। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं अपने प्लॉट को सरेन्डर / निरस्त नहीं कराया गया है। ज्ञातव्य है कि अनुबन्ध के अनुसार प्लॉट का कब्जा दिनांक 3004206 तक दिया जाना था व पूर्व विवेचना से स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है। ऐसे में प्रकरण में आवंटन पत्र के प्रस्तर-47 के प्राविधान लागू नहीं होते। विपक्षी द्वारा ऐसा भी नहीं कहा गया है कि प्रश्नगत प्लॉट किसी अन्य dar को आवंटित किया जा चुका है और यह प्लॉट उपलब्ध नहीं है। वर्णित परिस्थिति में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा किये गये शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्तीकरण की प्रकिया अपूर्ण है। प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत प्लॉट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। अतः यदि प्लॉट उपलब्ध है, तो ऐसे में ww afar की oeris के अन्तर्गत शिकायतकर्ता सम्पूर्ण धनराशि मय ब्याज जमा कर कब्जा प्राप्त कर सकता है अन्यथा यदि प्लॉट उपलब्ध नहीं है एवं उसका अनुबन्ध किसी तीसरे पक्ष से हस्ताक्षरित किया जा चुका है, तो शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि ब्याज सहित बिना कटौती देय है। vege बिन्दु Wea निस्तारित किया जाता है।
निस्तारण बिन्दु संख्या-2 निस्तारण बिन्दु संख्या-2 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा अभी तक कार्य पूर्ण नहीं किया गया है, जिसके कारण शिकायतकर्ता द्वारा अंतिम भुगतान नहीं किया गया। अतः a शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत प्लॉट को पुर्नस्थापित करते हुए कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इस पर विपक्षी द्वारा प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए कहा गया कि उभय पक्ष के मध्य आवंटन पत्र दिनांक 23.0220i5 को निष्पादित हुआ, जिसके अनुसार प्रश्नगत प्लॉट का कब्जा 6 माह ग्रेस पीरियड सहित दिनांक o4.7.2006 तक दिया जाना था और शिकायतकर्ता के पक्ष में कब्जा ऑफर पत्र दिनांक 20.07.2046 को जारी किया जा चुका है। पक्षकारों के मध्य सब-लीज़ डीड के निष्पादन क॑ बाद, शिकायतकर्ता को अनिवार्य रूप से 5 वर्ष की अवधि के भीतर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा। इन आधारों पर शिकायतकर्ता की शिकायत खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। इस सम्बन्ध में रेरा एक्ट की धारा ia () में प्राविधान है कि :- Section 728 (7) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the praject, without prejudice ta any other remedy available, to return the amount received by him in respect of thal apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पत्र दिनांक 23.02.205 के पृष्ठ संख्या-4 के अवलोकन से यह विदित है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रश्नगत iS > 5 Ss प्लॉट का कब्जा दिनांक 30.04.20I6 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा उक्त निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। अतः प्रश्नगत प्लॉट की उपलब्धतता की स्थिति में विलम्ब अवधि का ब्याज देय होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील do 6649-50 /208 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल" में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent - Purchaser could not have any further grievance after April 20i6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./ सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 07.0520i6 से ओ.सी. JA. (दिनांक 07.05.2049) प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) RTI है, जिसमें प्रस्तर 9.20 में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the
Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under ‘s ९ 0 any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India + % unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(०७)0) में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। माननीय. उच्च न्यायालय. इलाहाबाद द्वारा रिट याचिका संख्या-सी-3289 / 2020 “wal बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन्स प्रा.लि. बनाम पूनम सूद एवं अन्य“ में दिनांक 06.02.2020 को पारित निर्णय में यह vera किया गया है किः-
Coming to the next ground of challenge to the impugned order by the petitioner's counsel that the interest awarded by respondent no.l (MCLR+I) is excessive, is also without any merit. It is an admitted fact to the petitioner that respondent no.| had booked a flat and till the filing of the writ petition, the possession of the flat has not been given to him. The interest had been awarded in terms of Clause 9.2(ii) of the form of agreement contained in the U.P. Real Estate (Regulation and Development) (Agreement for Sale/Lease) Rules, 208. The respondent no.2 has given cogent reasons in the impugned order. Respondent no.2 has rightly placed reliance on Clause 9 sub-clause(ii) of the Rules, 208 which provides that in the event of default on the part of the promotor, the allottee shall have the option of terminating the agreement in which case the promoter shall be liable to refund the entire money paid by the alluttee under any head whatsoever, towards the purchase of the flat at the rate of MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India + % unless provided otherwise under the Rules within forty-five days of receiving the termination notice. Learned counsel for the > i2 petitioner has failed to bring to our notice any Rule in the Rules, 206, providing otherwise. तत्पश्चात् Re याचिका dWet-vit-o220/2020 “हैबीटेक इंफास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाम BoM राज्य सरकार एवं अन्य“ में दिनांक 06.07.2020 को महत्वपूर्ण ऑब्जर्वेशन देते हुए यह उल्लेखित किया है कि:-
On 2.09.209 the respondent authority directed the petitioner to refund the entire amount alongwith interest @ MCLR + % from the date of deposit till the date of order. Thereafter, recovery certificate and citation was issued on 07.02.2020.........csseceeerrerersecseere and only on complaint under Section 8 authority proceeded to direct for the refund of the money alongwith payment of interest @ MCLR + %, which was in view of Real Estate (Regulation & Development) (Agreement to Sale) Regulations, 208.....sssseeeseseessreenens Thus power of refund of amount along with interest which has been provided under Section 8, with the authority was rightly exercised by it in the interest of justice. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी रेरा प्राधिकरण के पीठ द्वारा नियमावली के अन्तर्गत MCLE + ।% की वार्षिक ब्याज दर से दिये गये आदेश को उचित एवं सही माना है। अतः उपरोक्तानुसार माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय से यह अवधारित किया जा सकता है कि राज्य सरकार द्वारा नियमावली के अन्तर्गत निर्धारित की गयी aa दर उचित एवं सही है। ब्याज दर को स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया के MCLR+ प्रतिशत से सम्बद्ध करने के सिद्धान्त को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भी स्वीकारा गया है और न्यायोचित ठहराया है। ऐसे में उ0प्र0 राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विकय /पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर MCLRHI प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर a प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है।
समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) B प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। 2 इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-2 Prema किया जाता है। (क) उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि — यदि शिकायतकर्ता के प्लॉट पर अनुबन्ध द्वारा किसी तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित नहीं हुए हों, तो वह शिकायतकर्ता के प्रश्नगत प्लॉट को पुर्नस्थापित करते हुए, इस आदेश के अनुरूप संशोधित माँग पत्र जारी कराकर, शिकायतकर्ता से अनुबन्ध के अनुसार अवशेष धनराशि प्राप्त कर आगामी 2 माह में कब्जा देना सुनिश्चित करें । (ख) शिकायतकर्ता को भी आदेशित किया जाता है कि वह संशोधित माँग पत्र मिलने के तीस दिन के भीतर, विपक्षी को अवशेष धनराशि का भुगतान करना सुनिश्चित करें | (ग) विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.05.206 से ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किये
जाने की तिथि (07.05.209) तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में 'टा,.९+ प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाये फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 त्तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिंकायतकर्ता का कोई अतिदे५ (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। साथ ही पुनः कब्जा अफिर करने की तिथि तक कोई “होल्डिंग चार्जेज” या “अनुरक्षण व्यय” शिकायतकर्ता द्वारा देय न होगा। 33 (a) विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा Aa) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी।
2. यदि प्रश्नगत प्लॉट किसी तृतीय पक्ष को आवंटित हो चुका है तथा अनुबन्ध भी हस्ताक्षरित हो चुका है, तो ऐसी स्थिति में आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता द्वारा जमा सम्पूर्ण धनराशि (बैंक को दिये गये प्री-ई.एम.आई. सहित) जमा करने की तिथि से धनराशि लौटाने की तिथि तक, MCLR+I प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर सहित वापस अदा करना सुनिश्चित करें, क्योंकि प्लॉट पुनः बेचा जा चुका है, निश्चय ही बैंक ऋण को बिल्डर द्वारा सैटेल किया जा चुका होगा। 3. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। 4. off विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेंगें | दिनांक B Jo} / 2022 = J | 69. YY (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण