Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Gulamuddin Ansari v. La Residentia Developers Private Limited
Complaint No. NCR144/11/1281/2019
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- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | पीठ-॥ कार्यवाही अन्तर्गत धारा-63 उपस्थिति :- श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य शिकायत संख्या -— NCRI44/4/ /20i9 गुलामुद्दीन अंसारी बनाम मैसर्स ला रेजिडेंशिया डेवलपर्स wo feo यह पत्रावली पूर्व में पारित आदेश के उल्लंघन एवं अधिनियम की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत कार्यवाही किये जाने हेतु पेश की गयी है। शिकायतकर्ता की शिकायत में पीठ द्वारा दिनांक 28.40.2020 को निम्नवत् आदेश पारित किये गये थे :- ab विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण के फ्लैट को आवंटन पत्र /अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर एवं आदेश के प्रस्तर-2 के अनुसार समायोजन के उपरान्त डिमांड पत्र जारी कर ओ.सी. /सी.सी. सहित दिनांक 30.06.202 तक कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 09.03.2047 से ओ.सी.सी.सी. प्राप्त होने अथवा इलेक्ट्रिकल सेफ्टी सर्टिफिकेट, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट, लिफ्ट इंस्टालेशन सर्टिफिकेट सहित ओ.सी.,/सी.सी. के लिए आवेदन के 30 दिन बाद या उत्तर प्रदेश 'रेरा' के परिपत्र दिनांक 04.09.2049 के अनुसार अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता को MCLRH प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की आटा
जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09. 2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण. में अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी | विपक्षी का निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2(2४)0) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित ब्याज दर ]४८ा7९+] प्रतिशत है। विपक्षी, शिकायतकर्तागण को अनुतोष 4 व 2 देने में असफल रहता है, तो दिनांक 30.06.2024 के पश्चात् 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्तागण द्वारा समस्त जमा धनराशि MCLR+I प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर सहित वापस अदा करना सुनिश्चित करें | इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित fart के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा सकेगें। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। दिनांक 04.07.2024 को शिकायतकर्ता द्वारा प्रार्थना पत्र देते हुए सूचित किया गया कि प्रोमोटर »/ विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 28.40.2020 का अनुपालन नहीं किया गया, जिसके क्रम
में विपक्षी को दिनांक 43.07.2024 को पत्रांक संख्या-202/ रेरा / अनु0नोटिस / 2024-22 के माध्यम से नोटिस जारी करते हुए सूचित किया गया कि वे दिनांक 30.07.2024 तक अनुपालन Lf आख्या उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, परन्तु विपक्षी द्वारा कोई अनुपालन आख्या उपलब्ध नहीं करायी गयी। विपक्षी को पुनः दिनांक 76.08.202 को कारण दर्शाओ नोटिस (पत्रांक संख्या-2238 /यूपी.रेरा / 2020-24) के माध्यम से जारी करते हुए उन्हें सूचित किया गया कि वे आदेश दिनांक 28.40.2020 की अनुपालन आख्या दिनांक 0.09.2024 तक निश्चित रूप से उपलब्ध कराएं, परन्तु विपक्षी द्वारा कोई अनुपालन आख्या उपलब्ध नहीं करायी गयी | पत्रावली को धारा-63 के अन्तर्गत सुनवाई हेतु दिनांक 29.2.2024 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें उभयपक्ष उपस्थित हुए।
दिनांक 29.2.2024 को सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा अवगत कराया गया कि पीठ द्वारा पूर्व में पारित आदेश दिनांक 28.40.2020 का विपक्षी द्वारा अनुपालन नहीं किया गया है, ऐसे में वह अपनी जमा धनराशि ब्याज सहित वापस चाहते हैं। विपक्षी द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि उक्त परियोजना से सम्बन्धित माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 29.06.202 को आदेश पारित किया गया है, जिसके अनुसार माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिसीवर की नियुक्ति की गयी है, जिसे परियोजना से सम्बन्धित अग्रिम कार्यवाही किये जाने के दायित्व सौंपे गये हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि परियोजना को दिसम्बर, 2022 तक पूर्ण कर लिया जाएगा एवं जो शिकायतकर्तागण अपनी जमा धनराशि वापस चाहते हैं, उन शिकायतकर्तागण को दिसम्बर, 2022 के पश्चात जमा धनराशि वापस कर दी जाएगी। इस सम्बन्ध में भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 की धारा-40 के अन्तर्गत निम्न प्राविधान है :- 40. (l) If a promoter or an allottee or a real estate agent, as the case may be, fails to pay any interest or penalty or compensation imposed on him, by the adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate Authority, as the case may be, under this Act or the rules and regualtions made thereunder, it shall be recoverable from such promoter or allottee or real estate agent, in such manner as may be prescribed as an arrears of land revenue. (2) If any adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate Tribunal, as the case may be, issues any order or er 3
directs any person to do any act, or refrain from doing any act, which it is empowered to do under this Act or the rules or regulations made thereunder, then in case of failure by any person to comply with such order or direction, the same shall be enforced, in such manner as may be prescribed. SRI भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20:6 की धारा-40 में यह प्राविधान है कि यदि एक प्रमोटर या एक आवंटी या एक रियल एस्टेट एजेंट किसी भी ब्याज या जुर्माना या मुआवजे का भुगतान करने में विफल रहता है तो सहायक अधिकारी या नियामक प्राधिकारी या अपीलीय प्राधिकारी द्वारा इस अधिनियम या उसके तहत बनाए गए नियमों और विनियमों के तहत, यह ऐसे प्रमोटर या आवंटियों या रियल एस्टेट एजेंट से वसूली योग्य होगा, इस तरह से भूमि राजस्व के बकाया के रूप में निर्धारित किया जा सकता है। इसी क्रम में भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियम, 2046 में नियम-24 में अंकित है कि :-
24- For the purpose of sub-section (2) of section 40, every order passed by the adjudicating officer, regulatory authority or Appellate Tribunal, as the case may be, under the Act or the rules and regulations made thereunder, shall be enforced by the adjudicating officer, regulatory authority or the Appellate Tribunal in the same manner as if it were a decree or order made by the principal civil court in a suit pending therein and it shall be lawful for the adjudicating officer, regulatory authority or Appellate Tribunal, as the case may be, in the event of its inability to execute the order, send such order to the principal civil court, to execute such order either within the local limits of whose jurisdiction the real estate project is located or in the principal civil court within the local limits of whose jurisdiction the person against whom the order is being issued, actually and voluntarily resides, or carries on business, or personally works for gain. उपरोक्तानुसार भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20i6 के नियम-24 में यह प्राविधान है कि भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-40 के ow
उप-खंड (2) के प्रयोजन के लिए यदि पक्षकार न्याय निर्णायक अधिकारी, नियामक प्राधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है तो सहायक अधिकारी, नियामक प्राधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए मामले को प्रिंसिपल सिविल कोर्ट को इस तरह के आदेश को निष्पादित करने के लिए, जिनके अधिकार क्षेत्र में अचल सम्पत्ति परियोजना स्थित है या स्थानीय सीमाएं स्थानीय नागरिक अदालत, जिसके दायरे में वह व्यक्ति होता है, जिसके खिलाफ आदेश जारी किया जा रहा है, वास्तव में और स्वेच्छा से रहता है या व्यापार पर किया जाता है या व्यक्तिगत रूप से लाभ के लिए काम करता है, भेजा जा सकता है। उक्त प्राविधानों को दृष्टिगत रखते हुए yeaa शिकायत में धन वापसी के सम्बन्ध में धारा-40 के अन्तर्गत वसूली प्रमाण-पत्र जारी किये जाने का प्राविधान है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940,/ 207 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में आई.ए. Fo—rest86/2078, आई.ए. नं0-09882 /2020, आई.ए. A0-774865/2020, आई.ए. नं0-453344 / 2049, आई.ए. नं0-420307 / 2020, आई.ए. नं०-23299 ,// 2220 एवं आई.ए. नं0-6397 / 2024 (ला रेजिडेंशिया डेवलपर्स के सम्बन्ध में) में दिनांक 29.06.2024 को पृष्ठ संख्या 44 में WAR 22 व 23 में निम्नलिखित अवधारणा दी गयी है :-
"22. Even if the entire project cannot be made over to the NBCC for the reasons stated above, another aspect of the matter that may require consideration is whether the component representing 632 flats could still be made over to the NBCC. However, that course would also not be feasible as those 632 unsold flats are spread over in various towers; some of them are in Phase one while the others are in Phase two and three. 23. An important aspect of the matter is that unlike all the other projects of the Amrapali Group which were made over to the NBCC, the development with respect to the instant project has always been an on-going process..." इसी आदेश के पृष्ठ संख्या 43 पर निम्न आदेश पारित किया गया है — iii. all the amounts received by way of such transactions of sale are credited to a separate account completely under the control of the Receiver and/or his nominee; 5 ee _ iv. the cost of the construction with respect to 632 flats, upon due certification by the Chartered accountants of the Company and to the satisfaction of the Receiver, shall be made over to the Company; and v. it shall however be open to the Receiver to give such advances towards the construction of these 632 flats from and out of the amounts deposited in the account as specified hereinabove, depending upon the stage and progress of construction.
उपरोक्त उलल्लेखित आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह पाया गया है कि परियोजना के 632 फ्लैट्स कई टावरों में स्थित हैं और यह fot एक टावर में एक साथ नहीं हैं। परियोजना में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोर्ट रिसीवर की नियुक्ति की गयी है, जिसके संरक्षण में परियोजना के 632 फ्लैट्स के निर्माण हेतु धनराशि प्राप्त की जा रही है। रेरा प्राधिकरण की पीठ द्वारा दिनांक 28.40.2020 को पारित आदेश के क्रम संख्या 4 व 2 का विपक्षी द्वारा अनुपालन नहीं किया गया है। अतः आदेश के क्रम संख्या 4 के अनुपालन हेतु वसूली प्रमाण-पत्र जारी किया जाए। सचिव, रेरा को निर्देशित किया जाता है कि वह वह प्रश्नगत प्रकरण में धारा-40 के अन्तर्गत वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने की कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। वसूली प्रमाण-पत्र में पारित आदेश पर जिलाधिकारी कार्यालय से आख्था प्राप्त होने के पश्चात् धारा-63 के अन्तर्गत अग्रिम कार्यवाही की जाएगी, तब तक के लिए पत्रावली स्थगन (पद) पर रखी जाती है। दिनांक:- 22/03 / 2022 हिल: ८ ‘ DAG कल्पना मिश्रा (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण