Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Raj Kamal Singh v. D S D Homes Private Limited
Complaint No. NCR144/11/124731/2024
- Decision date
- 2026-02-27
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 206 की धारा-3॥ के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थितः- Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | | यूनिट न0 | जमा धनराशि रु० | आवंटन पत्र | अनुबंधानुसार वांछित सं० की तिथि | कब्जा दिये अनुतोष जाने की तिथि T. फिकाबका ए2क्रा42024 | भवानी शंकर सिंह | T2-2806 | Go 42,88,254 / | 05.07.2024 दिसम्बर 2024 | यूनिट व कृष्णा सिंह तथा 06 माह | पुर्नरथापित अनुग्रह अवधि | किये जाने का के साथ जून | अनुरोध किया 2022 गया है। 7 एिकाग्रागव्करबठठ्व | उदय त्रिपाठी व. | 74-2806 | रु0 9,39,264/ | 29.07.2024 | दिसम्बर 2024 यूनिट श्रीलता त्रिपाठी तथा 06 माह | पुर्नस्थापित अनुग्रह अवधि | किये जाने का के साथ जून | अनुरोध किया 2022 गया है। 5, फएिलकावकाए24क5॥2024 | राज कमल सिंह T| 72-706 | BO 9,45,354/ | 47.09.202 ee खुशबू सिंह पुर्नस्थापित BATE किये जाने का अनुरोध किया ‘ ; | ॥ | | गया है। बनाम डी.एस Sheree प्रा.लि. शिकायतकर्ता भवानी शंकर सिंह व कृष्णा सिंह के साथ 02 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध शिकायतें योजित की गई है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह शिकायतें परियोजना Noveena Green से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCRI44/II/2474/2024 भवानी शंकर सिंह व कृष्णा सिंह की पत्रावली अग्रणी शिकायत रहेगी।
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना Noveena Green 4 यूनिट संख्या 72-806 बुक करायी गयी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि wo 2,88,254 / का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर उल्लिखित किया गया है कि अनुबंध पत्र के अनुसार आवंटित यूनिट की कुल कीमत WO 25,5,976 / थी परन्तु विपक्षी द्वारा Go 32,44,833,/का मांग पत्र जारी किया गया है। विपक्षी से कई बार मांग Se पत्र के सम्बन्ध में सम्पर्क किया गया परन्तु विपक्षी द्वारा सही मांग पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट पुर्नस्थापित किये जाने तथा विपक्षी से अनुबंध पत्र के अनुसार सही मांग पत्र जारी किये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। इसी प्रकार क्रम संख्या 2 व 3 के शिकायतकर्तागण द्वारा भी यूनिट पुर्नस्थापित किये जाने तथा विपक्षी से अनुबंध पत्र के अनुसार सही मांग पत्र जारी किये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में बिल्डर बायर एग्रीमेंट, wile, यूनिट निरस्तीकरण पत्र की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है।
विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि आवंटित यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 05.07.2024 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार आवंटित यूनिट की कुल कीमत रु0 26,35,854 /तथा अन्य चार्जेज थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा रु0 42,88,254 / का भुगतान किया गया है।विपक्षी. द्वारा दिनांक 26.0.2024 को शिकायतकर्ता को मांग पत्र जारी “किया “गया परन्तु शिकायतकर्ता धनराशि का भुगतान करने में असफल Fel है ।.तत्पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 44.42.2023 व 07.02.2024 को अनुस्मरण पत्र-प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा दिनांक 42.08.2024 को अंतिम अनुस्मरण पत्र व प्री कैंसिलेशन पत्र जारी कर शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अनुरोध किया गया। लेकिन श्किायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर विपक्षी द्वारा दिनांक 44.0.2024 को शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त कर दी गयी। विपक्षी द्वारा रेरा अधिनियम की धारा i9() व रेरा नियमावली 9.3 (2) का उल्लेख किया गया है। उक्त के अतिरिक्त विपक्षी द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 7588 / 2042 सतीश बत्रा बनाम सुधीर रावल, हनुमान कॉटन few व अन्य बनाम टाटा एयरक्राफ्ट में पारित आदेश तथा रेरा प्राधिकरण द्वारा शिकायत संख्या wariene44 /0/83450 / 2024 में पारित आदेश का उल्लेख किया गया है। विपक्षी द्वारा यह भी उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा पेमेंट प्लान के अनुसार देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। अतः विपक्षी द्वारा 2 ———— विलवााा
शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने व प्रश्नगत यूनिट पर तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित हो जाने के कारण वर्तमान शिकायत में यूनिट पुर्नस्थापित न किये जाने तथा शिकायत निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है।
अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के जवाब पर प्रतिउत्तर दाखिल किया गया है जिसमें यह उल्लिखित है कि उनके द्वारा venta यूनिट कन्सट्रक्शन लिंक पेमेंट प्लान के तहत बुक करायी गयी थी। विपक्षी द्वारा रेरा प्रधिकरण द्वारा जारी ws अनुबंध पत्र हेतु जारी प्रारूप के अनुसार अनुबंध पत्र निष्पादित नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा व्याटस्प के माध्यम से दिनांक 26.0.2024 को अवैधानिक रूप से व गलत गणना के आधार पर मांग पत्र प्रेषित किया गया जिसे संशोधित किये जाने हेतु शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी से निरतंर अनुरोध किया गया परन्तु विपक्षी द्वारा संशोधित मांग पत्र जारी नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण किये जाने हेतु वित्तीय सहायता wre संस्था>से प्राप्त करने हेतु शिकायतकर्ता का अभिमत चाहा गया जो शिकायतकर्ता द्वारा -बिना किसी संकोच के विपक्षी को उपलब्ध कराया गया। शिकायतकर्ता -द्वारा उल्लिखित किया गया है कि उन्हें विपक्षी द्वारा प्रेषित कोई मांग पत्र ure ae हुआ है। लेकिन विपक्षी द्वारा अवैधानिक रूप से दिनांक 24.:0.2024 को यूनिट निरस्तीकरण पत्र स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायतकर्ता को प्रेषित किया गया है जिसके पश्चात शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी से सम्पर्क कर सूचित किया गया कि उन्हें कोई मांग पत्र प्राप्त नहीं हुआ है जिसके पश्चात शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 44.47.2024 को रेरा अधिनियम की धारा 446) के अन्तर्गत वर्तमान शिकायत यूनिट पुर्नस्थापित किये जाने हेतु योजित की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी को दिनांक 43. 442024 को ईमेल व रजिस्टर्ड नोटिस के माध्यम से सूचित किया गया कि उन्हें आज की तिथि तक कोई मांग पत्र प्रेषित नहीं हुआ है जिस कारण से विपक्षी द्वारा जारी यूनिट निरस्तीकरण पत्र रेरा अधिनियम की धारा 9.3 में उल्लिखित प्राविधानों के अनुरूप नही है। शिकायतकर्ता द्वारा माननीय अपीलीय अधिकरण द्वारा अपील संख्या 03/2023 अनीता सिंह बनाम एल्पाइन इन्फ्राप्रोजेक्टस प्रा.लि. में पारित
आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है जिसमें प्रश्नगत यूनिट में तृतीय पक्ष के 3 SS Ee अधिकार ga हो जाने के पश्चात भी शिकायतकर्ता यूनिट प्राप्त करने का अधिकारी है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा उचित आदेश पारित किये जाने का अनुरोध किया गया है। उक्त के अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा प्रकरण में लिखित बहस दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 4. 42.2023 व 07.02.2024 को मांग पत्र जारी किये जाने तथा दिनाक 42.08.2024 को प्री-कैंसिलेशन पत्र जारी किये जाने का तर्क दिया गया है परन्तु vat मांग पत्र व नोटिस प्रेषित किये जाने का कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा बिना कोई मांग पत्र जारी किये दिनांक 44.0.2024 को कैंसिलेशन पत्र जारी किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट पुर्नस्थापित किये जाने व यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराये जाने का अनुरोध किया गया है। इसी प्रकार क्रम संख्या 2 व 3 के शिकायतकर्तागण द्वारा प्रतिउत्तर व लिखित बहस दाखिल की गयी है जिसमें समान तथ्यों का उल्लेख किया गया है।
विपक्षी द्वारा प्रकरण में लिखित बहस दाखिल की गयी है जिसमें यह उल्लिखित है कि विपक्षी द्वारा दिनांक -26.0.2024, 44.2.2023, 07.02.2024, 09.09. 2024, 45.09.2024 व 24.09.2024 को माँग पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा जानबूझकर देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है जिसके पश्चात दिनांक 44.40.2024 को शिकायतकर्ता की यूनिट अनुबंध की शर्तों के अनुसार निरस्त की गयी है तथा प्रश्नगत यूनिट पुनः अन्य आवंटी को आवंटित कर दी गयी है तथा दिनांक 44.42.2024 को अन्य आवंटी के पक्ष में अनुबंध पत्र निष्पादित किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में ज्योति के नारंग व अन्य बनाम सीसीआई प्रोजेक्ट प्रा.लि. महारेरा, 209 का संदर्भ अंकित किया गया है जिसमें यह उल्लिखित है कि यदि शिकायतकर्ता का यूनिट निरस्तीकरण अनुबंध की शर्तों के अनुसार हुआ है तो उसकी यूनिट पुर्नस्थापित नहीं की जा सकती है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यूपी रेश अपीलीय अधिकरण द्वारा अनिल कुमार गर्ग बनाम राधे शेल्टर wife 203/202 व 58/2020 शिव कुमार बनाम एटीएस ८ 2 इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का संदर्भ अंकित किया गया है जिसके अनुसार तृतीय पक्ष के अधिकार wa हो जाने के पश्चात आवंटन पुर्नस्थापित किया जाना सम्भव नहीं 4 'जाएछछछ--: 5
है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान शिकायत निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा तर्क दिया गया है कि अपील संख्या 58/2020 व 293 /202 के अनुसार यदि आवंटी की यूनिट पर तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित हो जाते है तो आवंटी के पक्ष मे var यूनिट का आवंटन पुर्नस्थापित किया जाना सम्भव नहीं है। इस सम्बंध में स्पष्ट किया जाता है कि उपरोक्त अपील में माननीय अपीलीय अधिकरण द्वारा ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया गया है जिस प्रकार का संदर्भ विपक्षी द्वारा लिखित बहस में अंकित किया गया है तथा विपक्षी द्वारा उक्त अपील संख्या में पारित आदेश की प्रति भी पत्रावली पर उपलब्ध नहीं करायी गयी है। उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किया जाता हैः- 4. क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की आवंटित यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नही तो, क्या शिकायतकर्ता की यूनिट पुर्नस्थापित कराई जा सकती है? निस्तारण प्रश्न संख्या 4 -: प्रश्न संख्या 4 इस आशय का विरचित किया गया
है कि क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्त्रागण की आवंटित यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नही तो क्याशिकायतकर्तागण की यूनिट Genta करायी जा सकती है? इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा अनुबंध की शर्तों के अनुसार देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है जिस कारण से दिनांक 24.:0.2004 को शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त कर दी गयी है जिस कारण से वर्तमान शिकायत निरस्त किये जाने योग्य है। शिकायतकर्ता द्वारा तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा जिन मांग पत्रों का उल्लेख लिखित जवाब में किया गया है उनकी प्रति उन्हें आज की तिथि तक प्राप्त नहीं हुई है। उन्हें केवल दिनांक i4402024 को जारी यूनिट (=) निरस्तीकरण पत्र की प्रति प्राप्त हुई है जिस कारण से विपक्षी द्वारा की गयी यूनिट 223 és B( aes | निरस्तीकरण की प्रकिया रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अनुरूप नहीं है। दें AOE) &ु
पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों का अवलोकन किया। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबंध पत्र दिनांकित 05.07.2024 के अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दिसम्बर 2024 तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात जून 2022 में उपलब्ध कराया जाना था। शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट की कुल कीमत रु0 25,54,976,/ थी जिसके क्रम में शिकायतकर्ता द्वारा रु० 2,88,254/ का भुगतान. किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा आवंटित यूनिट के सापेक्ष भुगतान किये जाने हेतु कन्सट्रक्शन लिंक पेमेंट प्लान का चयन किया गया था जिसके अनुसार चरणबद्ध रूप से शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को देय धनराशि का भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु शिकायतकर्ता को दिनांक 26. 40.2024, 4.2.2023 व 07.02.2024 को प्रेषित किये गये मांग पत्रों की प्रति तथा दिनांक 4.08.2024 को प्रेषित प्री-कैंसिलेशन पत्र की प्रति पत्रावली पर दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा मांग पत्र व प्री-कैंसिलेशन पत्र के संदर्भ में यह तर्क अंकित किया गया है कि उन्हें उपरोक्त मांग पत्र व प्री-कैसिलेशन पत्र की प्रति प्राप्त नहीं हुई है केवल fei 44.40.2024 को प्रेषित यूनिट निरस्तीकरण पत्र की प्रति प्राप्त हुई है जिस कारण से.शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट निरस्त किया जाना रेरा अधिनियम में उल्लिखित प्राविधानों के विपरीत है। यहां यह स्पष्ट किया जाता है कि विपक्षी द्वारा प्रेषित मांग पत्र व प्री-निरस्तीकरण पत्र किस माध्यम से शिकायतकर्ता को प्रेषित किये गये है का कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल नहीं किया गया है। ह
इसके अतिरिक्त सामान्यतः यदि शिकायतकर्ता द्वारा समय से देय धनराशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो विपक्षी का यह उत्तरदायी है कि वह भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 20i8 की धारा धारा 9.3 में उल्लेखित प्राविधानों के अनुसार कार्यवाही कर सकता है। धारा 9.3 में यह प्राविधानित है कि :- धारा 9.3 The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events: i. In case the Allottee fails to make payments for 2 (two) - consecutive demands made by the Promoter as per the Payment Plan annexed hereto, despite having been issued notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. The Promoter must not be in default to take this benefit;
ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination. उक्त प्राविधानों के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष बकाया धनराशि का भुगतान न किये जाने पर मांग पत्र, अनुस्मरण पत्र तथा प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किये जाने का प्राविधान है। वर्तमान प्रकरण में विपक्षी द्वारा देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु. शिकायतकर्ता को दिनांक 26.0. 2024, 4.2.2023 व 07.02.2024 को.माँग पत्र प्रेषित कर देय धनराशि का भुगतान किये जाने का अनुरोध किया गया तथा शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण दिनांक, 47.08.2024 को प्री-कैंसिलेशन पत्र प्रेषित कर शिकायतकर्ता को देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु सूचित किया गया तथा शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण अंतिम रूप से दिनांक 4.40.2024 को शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त कर दी गयी।
वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की कुल कीमत रु0 25,54,976/ के सापेक्ष Go 42,68,25/ का भुगतान किया गया है जो कि यूनिट की कुल कीमत का लगभग 50 प्रतिशत है तथा शिकायतकर्ता द्वारा शेष देय धनराशि का भुगतान कन्सट्रक्सन पेमेंट लिंक प्लान के अनुसार किया जाना था। विपक्षी द्वारा देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु शिकायतकर्ता को मांग पत्र प्रेषित किये गये तथा प्री-निरस्तीकरण पत्र भेजकर सूचित किया गया तथा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण अंतिम रूप से शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त कर दी गयी। उपरोक्त उल्लिखित प्राविधानों के अनुसार यदि विपक्षी द्वारा वैधानिक रूप से शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त की गयी है तो विपक्षी का यह 7 a डा दायित्व है कि वह शिकायतकर्ता द्वारा जमा की गयी धनराशि वापस शिकायतकर्ता को उपलब्ध ad परन्तु वर्तमान प्रकरण में विपक्षी द्वारा यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता से प्राप्त धनराशि यूनिट निरस्त किये जाने के उपरांत शिकायतकर्ता को वापस नहीं की गयी है। इसके अतिरिक्त उपरोक्त प्राविधानों में यह स्पष्ट उल्लिखित है कि विपक्षी स्वयं दोषी होने की स्थिति में शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त नहीं कर सकता है। वर्तमान प्रकरण में यूनिट का कब्जा जून 2022 तक उपलब्ध कराया जाना था परन्तु विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल नहीं किया गया है कि उनके द्वारा निर्धारित समय अवधि में परियोजना पूर्ण कर ओ. सी /सी.सी प्राप्त कर लिया गया हो जिस कारण विपक्षी स्वयं के दोष का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है।
इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट पर तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित किये जाने का तर्क अंकित किया गया है परन्तु उक्त के सम्बन्ध में कोई साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध.नहीं कराया गया है। उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त किया जाना. अवैधानिक' है। इसलिए शिकायतकर्ता की यूनिट पुर्नस्थापित करायी जा सकती है.और शिकायतकर्तागण याचित अनुतोष प्राप्त करने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या rene किया जाता है। उपरोक्त प्रश्न का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्तागण की यूनिट को पुर्नस्थापित करना सुनिश्चित करें। 2. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 206 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 3. विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। 4. आदेश की एक-एक प्रति उक्त सम्बन्धित पत्रावालियों पर रखी जाए। 8 _—_— Ss vera शिकायतों में इस पीठ द्वारा यथास्थिति बनाये रखने हेतु पारित आदेश को तद्नुसार समाप्त किया जाता है। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। जल जजा (s) 4 ZA, S229 20 (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर