Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mr. Devender kumar and Mr. Hari singh v. Granite Hill Properties Private Limited
Complaint No. NCR144/11/124703/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-08-03
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) आदेश अन्तर्गत ast सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारीः- श्री हरीश त्रिपाठी, न्यायनिर्णायक अधिकारी » प्रत्यायोजित अधिकारी शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण | यूनिट संख्या . कुल मूल्य | पटाराक्4/7727772024 |. देव कुमार चौहान. फाहटदाइक 33,9200- | पटारा4407%72390/2024 |. देव कुमार चौहान. फाशत्काइवब | 22,9.200- | | पटारा440/24703/2024 | देवेन्द्र कुमार एवं हरि... KG/I607——-2,87,200/- 7 सिंह | इलारा44/03/27992/2025 | साधना जगतनारायण... 6/270-& .. 54,70,000/- सिंह एवं जगतनारायण सिंह बनाम मैसर्स ग्रेनाइट हिल यू सम्पदा (विनिययन एवं विकास) निर्णण को आधार पर जारी कार्यालय ज्ञाप प्रॉपर्टीज प्रा. लि. अधिनियम 2076 की धारा-6 में प्रदत्त शक्तियों का योग करते हुए आधिकरण द्वार उत्यायोजन को सरबन्ध में लिये यये WET—-6304_/U.P.RERA/Admin/Del. /S-8/2026-27 दिनांक ॥906.2026 के grr प्र॒त्यायोजित शक्तियों का प्रयोग करते हुए wera थिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है।* शिकायतकर्ता देव कुमार चौहान के साथ 03 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी, मैसर्स ग्रेनाइट हिल प्रॉपर्टीज प्रा. लि. के विरुद्ध यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि के ब्याज सहित रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने तथा अतिरिक्त धनराशि की मांग को अवैध 22224 योजित की गयी हैं। हेतु प्रश्नगत शिकायतें Page l जमा धनराशि | 22,08,854/- | 22,08,854/- | 6,74,200/- | 33,97,000/- |
सभी शिकायतों के तथ्य एवं साक्ष्य एक समान हैं। सभी शिकायतें एक ही विपक्षी की एक ही परियोजना THE DOWNTOWN (पंजीयन संख्या- UPRERAPRIS8OS) से सम्बन्धित हैं। अतः तथ्यों एवं साक्ष्य की पुनरावृत्ति से बचने तथा सुगमता की दृष्टि से सभी शिकायतों का एक ही निर्णय के द्वारा एक साथ निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCRI44/07/2777/2024, देव कुमार चौहान अग्रणी शिकायत रहेगी। अग्रणी शिकायत में शिकायतकर्ता का कथन है कि उसके द्वारा दिनांक 09.07.204 को विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN के CiaX—Kapital Grand में i3° फ्लोर पर यूनिट Wem-i805 बुक करायी गयी थी। आवंटन पत्र / विक्रय अनुबन्ध दिनांक 25.09.204 के अनुसार यूनिट का कुल मूल्य 22.9.200/— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा विकय मूल्य के सापेक्ष 09 जुलाई, 204 से 70 फरवरी, 2024 तक विपक्षी को रु.22,08,854,/- का भुगतान किया गया। उभयपक्षों के मध्य निष्पादित विकय अनुबंध के अनुसार यूनिट का कब्जा सितम्बर, 2020 तक प्रदान किया जाना था। विपक्षी द्वारा आज तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। परियोजना का पूर्णता /अधिभोग प्रमाण-पत्र भी आज तक प्राप्त नहीं किया गया है। विकय मूल्य का t00 प्रतिशत भुगतान किये जाने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा रू. 6,85,338 /- की अतिरिक्त धनराशि की अवैध मांग की जा रही है। शिकायतकर्ता का यह भी कथन है कि उभयपक्षों के मध्य दिनांक 25.09.2044 को area fas पेमेन्ट प्लान (CLP) के अन्तर्गत विकय अनुबन्ध निष्पादित किया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा विकय अनुबंध में दी गयी भुगतान योजना के अनुसार निर्धारित समय के अन्दर लगभग समस्त किश्तों का भुगतान कर दिया गया।
उपरोक्त अभिकथनों के आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम की ast के अन्तर्गत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने तथा विपक्षी द्वारा की जा रही अतिरिक्त धनराशि की मांग को अवैध घोषित किये जाने के अनुतोष की प्रार्थना के साथ शिकायत प्रस्तुत किया है। अपने कथन के समर्थन में शिकायतकर्ता द्वारा आवेदन फॉर्म, आवंटन अनुबन्ध दिनांकित 25.09.2074, भुगतान की रसीदें द्वारा रू. 6.85.338 /- की धनराशि के सम्बन्ध में जारी मांग पत्र दिनांक 02.04.2024, अनुस्मारक पत्र दिनांक 49.07.2024 दाखिल किया गया है। दि शिकायत का उत्तर देने के लिए विपक्षी को नोटिस जारी किया गया। नोटिस तामील होने के पश्चात विपक्षी उपस्थित हुआ। लिखित उत्तर दाखिल करने हेतु कई तिथियां नियत की गई | पर्याप्त एवं युक्तियुक्त अवसर दिये जाने के बावजूद विपक्षी की ओर से कोई लिखित उत्तर दाखिल नहीं किया गया। RATT प्रकरणों को प्रथम सुनवाई हेतु दिनांक 23.04.2025 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें शिकायत्कर्तागण की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री प्रांजल मिश्रा उपस्थित हुए एवं विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री मालिनी उपस्थित हुईं | विपक्षी को निर्देशित किया गया कि वह आगामी 4 सप्ताह के अन्दर अपना लिखित उत्तर रेरा पोर्टल पर अपलोड करना तथा साथ ही साथ शिकायतकर्ता से प्राप्त धनराशि की पुष्टि भी अपने लिखित उत्तर में अंकित करना सुनिश्चित करें।
प्रश्नगत प्रकरणों को द्वितीय सुनवाई हेतु दिनांक 4.07.2025 को प्रस्तुत किया गया। जिसमें शिकायतकर्तागण की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री प्रांजल मिश्रा उपस्थित हुए एवं विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री पुनीत जैन उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से पूर्व आदेश दिनांक 23-04-2025 के अनुपालन में कोई लिखित उत्तर दाखिल नहीं किया गया। विपक्षी को अन्तिम अवसर देते हुए निर्देशित किया गया कि वह प्रश्नगत शिकायत के सम्बन्ध में आगामी 4 सप्ताह के अन्दर अपना लिखित उत्तर ter पोर्टल पर अपलोड करना सुनिश्चित करें। mead प्रकरणों को तृतीय सुनवाई हेतु दिनांक 04.44.2025 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें शिकायतकर्तागण की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री प्रांजल मिश्रा उपस्थित हुए एवं विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री पुनीत जैन उपस्थित हुए। अंतिम अवसर दिये जाने के बावजूद विपक्षी की ओर से लिखित उत्तर दाखिल नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा पर्याप्त अवसर दिये जाने के बावजूद लिखित उत्तर दाखिल न किये जाने के कारण लिखित उत्तर दाखिल करने का अवसर समाप्त किया गया। उभयपक्ष को आगामी 04 सप्ताह के अन्दर अपनी-अपनी लिखित बहस अपलोड एवं दाखिल करने हेतु निर्देशित किया गया, प्रश्नगत प्रकरणों को चतुर्थ सुनवाई हेतु दिनांक 8.032026 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें शिकायतकर्तागण के विद्वान अधिवक्ता श्री प्रांजल मिश्रा उपस्थित हुए एवं विपक्षी अनुपस्थित रहे। उभयपक्ष को आगामी 04 सप्ताह के अन्दर अपनी-अपनी लिखित बहस अपलोड एवं दाखिल करने हेतु निर्देशित किया गया, परन्तु विपक्षी द्वारा अपनी लिखित Ae ise, लोड एवं दाखिल नहीं किया गया।
प्रश्नगत प्रकरणों को अन्तिम सुनवाई हेतु दिनांक 75.07.2026 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें शिकायतकर्तागण की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री प्रांजल मिश्रा उपस्थित हुए एवं विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री विकास पांडेय उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से पीठ द्वारा पूर्व में लिखित कथन का अवसर समाप्त करने वाले आदेश दिनांक 04-74-2025 को रिकॉल करने हेतु दिनांक 43.07.2026 को रेरा कम्पलेन्ट पेज पर प्रार्थना-पत्र अपलोड किया गया। नियत तिथि पर अनुपस्थिति का उचित व aera कारण नहीं बताया गया, इसलिए रिकॉल प्रार्थना-पत्र पीठ द्वारा खारिज करते हुए उभयपक्ष को अपनी-अपनी लिखित बहस रेरा कम्पलेन्ट पेज पर अपलोड एवं दाखिल करने हेतु 04 सप्ताह का समय प्रदान किया गया, परन्तु विपक्षी की ओर से कोई लिखित बहस भी दाखिल नहीं की गयी। विपक्षी को प्रश्नगत शिकायतों के सम्बन्ध में अपना लिखित उत्तर दाखिल करने हेतु ward एवं युक्तियुक्त अवसर प्रदान किया गया, परन्तु विपक्षी की ओर से न तो कोई लिखित उत्तर दाखिल किया गया और न ही कोई लिखित बहस दाखिल की गयी। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं सामग्री का सम्यक परिशीलन किया। उभयपक्षों के अभिकथनों, प्रतिअभिकथनों, प्रस्तुत किये गये साक्ष्य एवं मौखिक बहस में प्रस्तुत किये गये तककों के आधार पर निम्नलिखित अवधार्य बिन्दु उत्पन्न होते हैं :- 4. क्या विपक्षी द्वारा कब्जा प्रदान करने में विलम्ब किया गया है, जिसके लिए शिकायतकर्ता विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा पाने का अधिकारी है ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? > क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से की जा रही अतिरिक्त धनराशि रु. 6,85,438/— की मांग अवैध है ? sae बिन्दु संख्या-04
अवधार्य बिन्दु Gwe, इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा कब्जा प्रदान करने में विलम्ब किया गया है, जिसके लिए शिकायतकर्ता विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा पाने का अधिकारी है ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? यह अवधार्य बिन्दु शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत में किये गये अभिकथनों के आधार पर उत्पन्न हुआ है। अतः: इसे साबित करने का प्रमाण भार शिकायतकर्ता पर है। (EE SY
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN, forter पंजीकरण Ge-(UPRERAPRIS805) के CioX-Kapital Grand में is” वें फ्लोर पर यूनिट eea—i805 बुक करायी गयी थी। उभयपक्षों के मध्य दिनांक 25.09.2074 को कस्ट्रक्शन लिंक्ड पेमेन्ट प्लान (CLP) के अन्तर्गत विक्रय अनुबन्ध निष्पादित किया गया था। विक्रय अनुबन्ध के निबन्धनों एवं शर्तों के अनुसार यूनिट का मूल विक्रय मूल्य रू. 22.90.200/— था। शिकायतकर्ता द्वारा sat यूनिट के सापेक्ष 09 जुलाई, 20i4 से 40 फरवरी, 2024 तक कुल रू. 22,08,854 /— की धनराशि का विपक्षी को भुगतान किया गया है, जो मूल विक्रय मूल्य का लगभग t00 प्रतिशत है। उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी द्वारा 25 सितम्बर, 2020 तक उक्त यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना ami विपक्षी द्वारा निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद भी आज तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा रू. 6.85.438,/- की अतिरिक्त धनराशि की अवैध मांग की जा रही है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं अनुबन्ध दिनांक 25.09.204 के अनुसार दिनांक 25.09.2020 से यूनिट का वास्तविक कब्जा प्रदान किये जाने की तिथि तक विलम्बित अवधि का ब्याज प्रदान किये जाने हेतु विपक्षी को निर्देशित किये जाने की प्रार्थना की गयी है। शिकायतकर्ता ने विपक्षी द्वारा की जा रही रू. 6,85.438 /-- की अतिरिक्त मांग को अवैध बताते हुए उसे निरस्त किये जाने की भी प्रार्थना किया है।
शिकायतकर्ता का यह भी कथन है कि विकय अनुबंध की शर्तों के अनुसार कब्जा दिनांक 25--09-2020 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा आज तक कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। इस प्रकार स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा कब्जा प्रदान करने में विलम्ब किया गया है। शिकायतकर्ता ने कब्जे में विलम्ब के लिए विलम्ब ब्याज सहित कब्जा दिलाये जाने की प्रार्थना किया है। कब्जे में विलम्ब के लिए विलम्ब ब्याज का प्राविधान रेशा अधिनियम, 2076 की धारा--48() में किया गया है। emer—i9e() के प्राविधानों के अनुसार यदि प्रोमोटर विकय करार के निबन्धनों के अनुसार निर्धारित समय के अन्दर aah, भूखण्ड या भवन का निर्माण कार्य पूर्ण करने में असफल रहता है या उसका कब्जा देने में असमर्थ रहने के आधार पर यदि आवंटी परियोजना से बाहर होना चाहता है, तो आवंटी द्वारा मांग किये जाने पर प्रोमोटर द्वारा प्राप्त की गई धनराशि ब्याज सहित वापस की जायेगी | ब्याज के साथ-साथ आवंटी प्रतिकर पाने का भी अधिकारी होगा। धारा-48(4) के परन्तुक के अनुसार निर्धारित समय के अन्दर कब्जा प्रदान करने में प्रोमोटर की असफलता एवं असमर्थता के बावजूद आवंटी यदि परियोजना से बाहर नहीं जाना चाहता तो वह wan yay किये जाने की “ Ta AR SS तिथि तक विलम्ब के प्रत्येक माह के लिए विहित दर पर मात्र ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी होगा। धारा-48(॥) के प्राविधान निम्नवत हैं: Section 8, Return of Amount and compensation:- (l) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building.- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project. without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. रेशा अधिनियम की ani4(4)o) के प्राविधानों के अनुसार निर्धारित समय के अन्दर परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर पूर्णता/अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त करना प्रोमोटर का सांविधिक दायित्व है। धारा-4(4)७) के प्राविधान निम्नवत हैं:-- Functions and duties of promoter:- Section व] = —_— laws for the time being in force and to make it available to the allottees individually or to the association of allottees, as the case may be; wr अधिनियम की or—s7(2) & प्राविधानों के अनुसार प्रोमोटर द्वारा सक्षम प्राधिकरण से पूर्णता /अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के उपरांत ही आवंटी के पक्ष में var एवं विधिपूर्ण भौतिक कब्जा हस्तांतरित किया जा सकता। IRI-77(2) & प्राविधान निम्नवत हैं:-- Transfer of title. Section 7
(2) After obtaining the occupancy certificate and handing over physical possession to the allottees in terms of sub-section (), it shall be the responsibility of the promoter to handover the necessary documents and plans, including common areas, to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, as per the local laws: इसी प्रकार उ.प्र. अपार्टमेंट एक्ट, 20I0 की धारा-4(5) के प्राविधानों के अनुसार रक्षम प्राधिकरण से पूर्णता/अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के उपरांत ही प्रोमोटर द्वारा फ्लैट का विधिपूर्ण कब्जा आवंटी को प्रदान किया जा सकता है। धारा-4(5) के प्राविधान निम्नवत हैं:-- Section 4 - General liabilities of promoter (5) An apartment may be transferred by the promoter to any person only after obtaining the completion certificate from the prescribed sanctioning authority concerned as per building byclaws... पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन अनुबन्ध पत्र दिनांक 25.09.204 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-09 के प्रस्तर-26 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा आवंटन अनुबन्ध निष्पादित किये जाने की तिथि से 5 वर्ष एवं & me की अनुग्रह अवधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को उनक्री a ' oe यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था। इस प्रकार दिनांक 25--03-2020. तक निर्माण कार्य पूर्ण कर सभी आवश्यक प्रमाण-पत्रों के साथ शिकायतकर्ता को कब्जा प्रदान करना, विपक्षी का दायित्व था। विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा प्रदान नहीं किया गया है।
प्रश्न उत्पन्न होता है कि शिकायतकर्ता किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है ? इस सम्बंध में सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल” (20i9) ॥7 SCC 68i (प्रस्तर-8) में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि पूर्णता/अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा प्रस्ताव प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। निर्णय का सुसंगत प्रस्तर--8 निम्नवत है 8. “the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint. wherein she has admitted that the Appellant - Builder had obtained the Completion Certificate as late as Apri! 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." विपक्षी द्वारा परियोजना को अनुबन्धानुसार पूर्ण नहीं किया गया है। रेरा पोर्टल के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि परियोजना का पूर्णता / अधिभोग प्रमाण-पत्र भी अभी तक प्राप्त नहीं किया गया है। उपरोक्त परिस्थितियों में शिकायतकर्ता को कब्जे की निर्धारित तिथि दिनांक 25.03.2020 से पूर्णता,/अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी होने अथवा कब्जा प्रस्ताव प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक विलम्ब ब्याज दिलाया जाना नन््यायोचित प्रतीत होता है।
उल्लेखनीय है कि मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” 20I7 SCC Online Bom 9302 की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय BE, र्णय के प्रस्तर-306 में निम्नवत अभिनिर्धारित किया गया है :- "Section 8(4)(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable."
उपरोक्त निर्णय एवं रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अनुसार प्रमोटर व आवंटी के मध्य किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब के लिए जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज देय होगा। विलम्ब ब्याज इस आधार पर दिया जाता है कि प्रमोटर द्वारा आवंटी से प्राप्त धनराशि का उपयोग कर लाभ प्राप्त किया गया है। रेरा अधिनियम की धारा-2(2७) में प्रावधान है किः- 2. (ca) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation. ~ For the purpose of this clause- (i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default. shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default: (7) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the 2222 it Ts\paid: Z
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20:6 की धारा--84 के अधीन नियम बनाने की शक्ति का प्रयोग करते हुए दिनांक ॥7.40.2048 को उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय,/पट्टा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी है। नियमावली के frass(t) में वर्णित अनुलग्नक विक्रय / पट्टा करार के मानक प्रपत्र के खण्ड-9 में प्रमोटर के व्यतिकम का प्रकरण (Events of default) परिभाषित है| प्रारूप के खण्ड-9.20) में प्रमोटर द्वारा व्यतिकम होने की स्थिति में आवंटी को उपलब्ध विकल्प के सम्बन्ध में प्रावधान है। खण्ड-9.2(9) के प्राविधान निम्नवत हैं:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" fea /पट्टा प्रारूप के खण्ड-9.306) में आवंटी के द्वारा व्यतिकम की स्थिति में भी Mcir+i प्रतिशत वार्षिक की यही ब्याज दर निर्धारित की गयी है। इस प्रकार स्पष्ट है कि यदि आवंटी द्वारा विपक्षी को देय किसी धनराशि के भुगतान में विलम्ब किया गया है, तो विपक्षी भी आवंटी से McLR+ प्रतिशत की दर से ही विलम्ब ब्याज प्राप्त सकता है।
उपरोक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+! प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस प्राविधान का परीक्षण करते हुए मा. उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर को उचित एवं युक्तियुक्त माना है। मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की खण्ड wets ने Re याचिका संख्या-सी-3289 / 2020 wal बिल्डवेल कस्ट्रक्सन्स wife. बनाम पूनम सूद निर्णत दिनांक 06-02-2020 के मामले में पारित निर्णय में '४ट॥+।% की
"Coming to the next ground of challenge to the impugned order by the petitioner's counsel that the interest awarded by respondent no.l (MCLR+]) is excessive, is also without any merit. It is an admitted fact to the petitioner that respondent no.| had booked a flat and till the filing of the writ petition, the possession of the flat has not been given to him. The interest had been awarded in terms of Clause 9.2(ii) of the form of agreement contained in the U.P. Real Estate (Regulation and Development) (Agreement for Sale/Lease) Rules, 208. The respondent no.2 has given cogent reasons in the impugned order. Respondent no.2 has rightly placed reliance on Clause 9 sub-clause(ii) of the Rules, 20I8 which provides that in the event of default on the part of the promotor, the allottee shall have the option of terminating the agreement in which case the promoter shall be liable to refund the entire money paid by the allottee under any head whatsoever, towards the purchase of the flat at the rate of MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India + % unless provided otherwise under the Rules within forty-five days of receiving the termination notice. Learned counsel for the petitioner has failed to bring to our notice any Rule in the Rules, 206, providing otherwise."
इसी प्रकार मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की एक अन्य खण्ड न्यायपीठ द्वारा Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors. 2020 SCC Online Ali 693 के मामले में पारित निर्णय में McLR+ प्रतिशत की दर को उचित एवं विधिपूर्ण माना गया है। "On [2.09.20!9 the respondent authority directed the petitioner to refund the entire amount alongwith interest @ MCLR+ % from the date of deposit till the date of order. Thereafter, recovery certificate and citation was issued on 07.02.2020....... and only on complaint under Section 8 authority proceeded to direct for the refund of the money alongwith payment of interest @ MCLR + I%, which was in view of Real Estate (Regulation & Development) (Agreement to Sale) Regulations, 208.......00.. Thus power of refund of amount along with interest which has been provided under Section 8, with the authority was rightly exercised by it in the कक ZA 7D interest of ius उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 208 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी ब्याज दर ॥४८०.७+7 प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से । प्रतिशत अधिक है, उचित एवं युक्तियुक्त है। विक्रय / पट्टा करार के मानक प्रारूप के खण्ड-7 में अपरिहार्य बाध्यता (force majeure) की परिस्थितियों को परिभाषित किया गया है। खण्ड--7 के प्राविधान निम्नवत हैं:- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"7] Schedule for possession of the — said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the {Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on ही ___ , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the Apartment/Plot]:"
विश्वव्यापी कोविड--49 (Corona Virus Disease) की महामारी के कारण विकास कार्य प्रभावित होने के आधार पर कोविड-49 को अपरिहार्य बाध्यता की परिस्थिति घोषित करते हुए मा. उ.प्र. रेरा प्राधिकरण द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कार्यालय ज्ञाप जारी कर सभी चल रही विकास परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि का समय-विस्तार दिया गया था। प्राधिकरण के कार्यालय ज्ञाप को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि को शून्य अवधि मानते हुए परियोजना को पूर्ण करने में होने वाले विलम्ब के लिए कोई भी ब्याज न तो प्रमोटर द्वारा आवंटी को और न ही आवंटी द्वारा प्रोमोटर को देय होगा। अवधार्य बिन्दु संख्या-4 RTA निस्तारित वि ee T OS है। aad बिन्दु संख्या-02 यह अवधार्य बिन्दु इस आशय का है कि क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से की जा रही अतिरिक्त धनराशि रु.6,85,438 /- की मांग अवैध है ? यह sed बिन्दु शिकायत में किये गये अभिकथनों के आधार पर उत्पन्न हुआ है, अतः: इसे साबित करने का प्रमाण-भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता का कथन है कि उसके द्वारा यूनिट विपक्षी की परियोजना में यूनिट बुक कराई गयी थी। आवंटन पत्र,/विकय अनुबंध के निबन्धनों के अनुसार यूनिट का मूल्य रु.22,08,854,/- तथा आई.एफ.एम.एस.चार्ज रु. 47,200/- था। इस प्रकार शिकायतकर्ता को कुल रु.22,9,200,//- का भुगतान करना था। शिकायतकर्ता द्वारा कुल रु.22,08,854,“- का भुगतान किया जा चुका है।
आवंटन पत्र,/विकय अनुबंध के निबन्धनों के अनुसार निर्माण कार्य पूर्ण कर कब्जा सितम्बर, 2020 तक दिया जाना था। आज तक निर्माण कार्य पूर्ण कर pia /अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता को कब्जा भी प्रदान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा बिना निर्माण कार्य पूर्ण किये तथा बिना wie /अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त किये कब्जा प्रस्ताव प्रेषित किया गया है, जिसमें रु. 6,85,438 /— अतिरिक्त धनराशि की अवैध मांग की जा रही है। आवंटन पत्र /विकय अनुबंध में लीज Se, फॉयर फाईटिंग चार्जेज, सी.आर. एफ., ए.एम.सी., se वेंटीलेशन एण्ड एयरकण्डीशनिंग, फार्मर कम्पेन्सेसन, ई.ई. सी. एवं लीगल प्रोसेसिंग चार्जेज के सम्बन्ध में NA (Not Applicable) अंकित किया गया है| जबकि उपरोक्त Fel में अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही है। उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबंध से बाहर जाकर कोई भी मांग नहीं की जा Wad | शिकायतकर्ता ने अपने कथन के समर्थन में कब्जा प्रस्ताव /मांगपत्र एवं पेमेंट प्लान /ब्रेकअप दाखिल किया है। उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन पत्र /विकय अनुबंध के अवलोकन से प्रकट होता है कि यूनिट का मूल कीमत रु.22,08,854 /— तथा आई.एफ.एम. एस.चार्ज रु.(4,200,/- था। इस प्रकार शिकायतकर्ता को कुल रु. 22,9,200/— का भुगतान करना था। यूनिट के मूल कीमत तथा आई.एफ.एम. एस. क॑ अतिरिक्त अन्य मदों में na (Not Applicable) की प्रविष्टि की गई है, —<z oe < जिसके आधार पर शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा की जा रही अतिरिक्त धनराशि की मांग अवैध है।
भुगतान का कुछ दायित्व संविदात्मक होता है तथा कुछ दायित्व सांविधिक होता है। सांविधिक दायित्व के सम्बन्ध में यदि संविदा में उल्लेख नहीं किया जाता तब भी उसका भुगतान करना आवश्यक है। यदि किसी भुगतान का सांविधिक दायित्व नहीं है तो उसका भुगतान तभी मांगा जा सकता है जबकि संविदा में उभयपक्षों द्वारा उस पर अपनी सहमति दी गयी हो। रेरा अधिनियम की धारा-49() के प्राविधानों के अनुसार आवंटी द्वारा रजिस्ट्रेशन चार्ज, नगर पालिका कर, जल एवं विद्युत प्रभारों अनुरक्षण प्रभारों, भूमि सम्बन्धित किराये एवं अन्य प्रभारों का भुगतान किया जायेगा। धारा-49(6) के प्राविधान निम्नवत हैं:- Sec. 9 Rights and duties of allottees. (6) Every allottee, who has entered into an agreement for sale to take an apartment, plot or building as the case may be, under section 3, shall be responsible to make necessary payments in the manner and within the time as specified in the said agreement for sale and shall pay at the proper time and place, the share of the registration charges, municipal taxes, water and electricity charges, maintenance charges, ground rent, and other charges, if any. उपरोक्त विधिक प्राविधानों के अतिरिक्त सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल" (20i9) 7 SCC 68i के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि जी.एस.टी., स्थानीय कर या अन्य कोई कर आवंटी द्वारा देय होगा।
विपक्षी द्वारा प्रेषित कब्जा प्रस्ताव, मांगपत्र में रु423650 /- मूल कीमत के मद में मांगा गया है। उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबंध में भुगतान के सम्बन्ध में ब्रेकअप ऑफ टोटल प्राइस एण्ड एडीशनल फेसिलिटीज़ / एमीनिटीज दर्शाया गया है, जिस पर उभयपक्षों के हस्ताक्षर हैं। इसमें यूनिट की मूल कीमत रु.22,08,854,//- दर्शाया गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को रु.22,08,854 /- का भुगतान किया जा चुका है। मूल कीमत का भुगतान किये जाने के बावजूद पुनः मूल कीमत की मद में रु. 23650,/- की मांग विधिपूर्ण प्रतीत नहीं होती है। उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबंध के आदेश इस प्रकार स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा की जा रही मांग विधिपूर्ण नहीं है। अवधार्य बिन्दु संख्या-2 उपरोकतानुसार निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त stag बिन्दुओं पर दिये गये निष्कर्ष के आधार पर निम्न पारित किया जाता है:- आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्तागण की यूनिट्स को आवंटन /अनुबन्ध पत्र के अनुसार समस्त सेवाओं एवं सुविधाओं को पूर्ण कराकर, अनुबंध में सहमत पेमेन्ट प्लान के अनुरूप संशोधित मांग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि, स्टाम्प शुल्क व विधिक रूप से देय अन्य प्रभारों को प्राप्त कर पूर्णता/अधिभोग प्रमाण-पत्र के साथ शिकायतकर्ता के पक्ष में रजिस्ट्रीकृत हस्तांतरण विलेख निष्पादित कर भौतिक कब्जा प्रदान करना सुनिश्चित करें।
विपक्षी, अग्रणी शिकायत के शिकायतकर्ता (देव कुमार चौहान) को दिनांक 25.03.2020 से win / अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त होने की तिथि अथवा विधिक कब्जा प्रस्ताव पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की तिथि तक जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्ब ब्याज भुगतान करना सुनिश्चित करें| कोविड-49 की अपरिहार्य sea (force majeure) की परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु प्रोमोटर अथवा आवंटी को कोई विलम्ब ब्याज देय नहीं होगा। अन्य शिकायतों में आवंटन/अनुबन्ध पत्र के निबंधनों के अनुरूप उपरोक््तानुसार विलम्ब ब्याज की गणना की जायेगी। यह स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा-2(०)() के अनुसार व्यतिकम की दशा में, प्रोमोटर द्वारा आवंटी से प्रभार्य ब्याज की दर ब्याज की दर उस दर के बराबर होगी, जो प्रमोटर, व्यक्तिकम की दशा में, आवंटी को संदत्त करने का दायी होगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी McLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी | 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह पूर्णता /अधिभोग प्रमाण पत्र सहित शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का भौतिक विधिक कब्जा प्रदान करते समय सभी ast आवंटन/अनुबन्ध पत्र में उललेखित पेमेन्ट प्लान / वर्णित शर्तों एवं नियमों के अनुसार ही प्राप्त करना सुनिश्चित करें।
5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप ही प्रत्येक मामले में धनराशि व ब्याज की गणना की जाएगी। 6. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-38, 40 एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 7... शिकायतकर्तागण को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण. "रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तदूनुसार पत्रावलियाँ दाखिल-दफ्तर हों। हरीश त्रिपाठी (न््यायनिर्णायक अधिकारी / प्रत्यायोजित अधि उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 6