Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Sanjeev Dhawan v. Rise Projects Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/11/124533/2024
- Decision date
- 2026-06-11
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
Source: UP RERA order
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Judgment text
| a का भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी :- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या :- NCR44/i4/24533/2024 संजीव धवन एवं श्रीमती इंदु धवन बनाम मैसर्स राइज प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना RISE GOLF VILLAS (पंजीयन WEII-UPRERAPRJ343832) 4 दिनांक 02.04.20:7 को यूनिट,विला संख्या-24 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 2,09,53,750 /- रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 5,00,000/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित बिक्री अनुबन्ध के प्रस्तर-9.4 के अनुसार विपक्षी द्वारा दिनांक 04 oe तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अपनी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है और न ही परियोजना से सम्बन्धित समस्त अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किये गये हैं तथा विपक्षी द्वारा ट्रांसफर चार्जेस /प्रशासनिक चार्जेस एवं अन्य चार्जेस के रूप में 300 /- रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से 4,02,500/- रुपये अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में धारा-34 के अन्तर्गत विस्तृत लिखित शिकायत प्रस्तुत करते हुए कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा आश्वासन दिया गया था कि बुकिंग के समय मात्र 5,00,000 / - रुपये की धनराशि का भुगतान करना होगा और शेष भुगतान केवल कब्जा Page Cb
ean किये जाने के समय ही करना होगा। बुकिंग धनराशि से सम्बन्धित सभी चेक प्राप्त होने के उपरान्त दिनांक 44.07.2047 को उभयपक्षों के मध्य बिक्री अनुबन्ध निष्पादित किया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी प्रस्तुत किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी को भुगतान की गयी 5i,00,000/— रुपये की धनराशि को दिनांक 43.09.2047 के Acknowledgement के माध्यम से स्वीकार किया गया है। विपक्षी द्वारा दिनांक 04.09.20i9 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा यूनिट /विला का dat wer ही पूर्ण किया गया है तथा अन्य समस्त सुविधाएँ जैसे-आवश्यक कार्य, जिसमें विला की आंतरिक फिनिशिंग, लैण्डस्केपिंग, गोल्फ कोर्स, बागवानी एवं अन्य सुविधाएँ शामिल हैं। विपक्षी द्वारा बिक्री अनुबन्ध में निर्धारित समय-सीमा के अनुसार कब्जा प्रदान किये जाने के 5 वर्ष बाद भी निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। इसके अत्तिरिक्त विपक्षी द्वारा निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने में हुए विलम्ब के लिए न तो किसी क्षतिपूर्ति अथवा समायोजन का प्रस्ताव दिया गया है और न ही परियोजना को पूर्ण करने में विफल रहने का कोई उचित कारण बताया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रकरण को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की गयी, जिसमें दिनांक 40.06.2024, 43.06.2024, 28.06.2024, 48.07.2024 व 23.0.2024 को भेजे गए औपचारिक ई-मेल शामिल हैं, परन्तु विपक्षी द्वारा ॥ ट्रांसफर दस्तावेज को मानने से इनकार कर दिया, जब तक कि गलत ट्रांसफर । चार्जेस का भुगतान न कर दिया जाए। शिकायतकर्ता, यूनिट /विला के कब्जे में | हुए विलम्ब एवं उसके स्वामित्व के ट्रांसफर को बिना किसी शुल्क के भुगतान के हकदार हैं। अतः शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना के विधिवत पूर्ण होने व पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के उपरान्त यूनिट/विला का कब्जा उपलब्ध कराये जाने व अन्य क्रेता निखिल जैन के नाम पर यूनिट /विला के हस्तांतरण के लिए ट्रांसफर चार्ज के मद में धनराशि की मांग न किये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा 300/- रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से ट्रांसफर चार्ज की मांग को रद्द किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित बहस दिनांक 24.04.2026 प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा ट्रांसफर चार्जेस / प्रशासनिक चार्जेस एवं अन्य चार्जेस के रूप में 300,/- रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से 4,02,500/— रुपये अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही है, जबकि मा. उ.प्र. रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी रेगुलेशन, 2049 (i0 वां संशोधन) दिनांक 24.03.2026 के रेगुलेशन 47(० के अन्तर्गत स्पष्ट रूप से अंकित है कि प्रमोटर, यदि आवंटन प्राप्तकर्ता अथवा उत्तराधिकारी आवंटन प्राप्तकर्ताओं के परिवार के सदस्य के अतिरिक्त कोई अन्य व्यक्ति है, तो ELEN Page 2 Dee ES 25,000/— रुपये (पच्चीस हजार रुपये मात्र) से अधिक ट्रांसफर शुल्क प्राप्त नहीं कर सकता है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में अन्तर्गत ars के अन्तर्गत विस्तृत लिखित शिकायत, ब्रोशर, बिक्री अनुबन्ध दिनांकित 44.07.20i7, पेमेन्ट प्लान, परियोजना के फोटोग्राफ, विपक्षी द्वारा दिनांक 43.09.2047 को जारी Acknowledgement, ई-मेल पत्राचार, लिखित बहस आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
प्रश्नगत प्रकरण को प्रथम सुनवाई हेतु दिनांक 23.2.2024 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री आयुष कुमार सिंह उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री मालिनी उपस्थित हुईं, जिसमें विपक्षी को निर्देशित किया गया कि वह आगामी 04 सप्ताह के अन्दर अपना लिखित उत्तर रेरा पोर्टल के कम्पलेन्ट पेज पर अपलोड करना सुनिश्चित करें, साथ ही शिकायतकर्ता से प्राप्त धनराशि की पुष्टि भी अपने लिखित उत्तर में अंकित करना सुनिश्चित करें| उसके पश्चात् प्रश्नगत प्रकरण को द्वितीय सुनवाई हेतु दिनांक 02.07.2025 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री आयुष कुमार सिंह उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री मालिनी की परॉक्सी अधिवक्ता सुश्री लीना उपस्थित हुईं, जिसमें विपक्षी को निर्देशित किया गया कि वह आगामी 04 सप्ताह के अन्दर अपना लिखित उत्तर रेरा पोर्टल के कम्पलेन्ट पेज पर अपलोड करना सुनिश्चित करें, साथ ही शिकायतकर्ता से प्राप्त धनराशि की पुष्टि भी अपने लिखित उत्तर में अंकित करना सुनिश्चित करें। उसके पश्चात् प्रश्नगत प्रकरण को तृतीय सुनवाई //अन्तिम सुनवाई हेतु दिनांक 09.04.2026 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें जिसमें शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री वैभव शाही उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री मालिनी की प्रॉक्सी अधिवक्ता सुश्री आरुषि उपस्थित हुईं, जिसमें उभयपक्ष को अपनी-अपनी लिखित बहस दाखिल करने हेतु 02 सप्ताह का समय प्रदान किया गया, परन्तु विपक्षी की ओर से कोई लिखित उत्तर/लिखित बहस दाखिल नहीं किया गया। प्रश्नगत शिकायत के सम्बन्ध में विपक्षी को अपना लिखित उत्तर दाखिल करने हेतु wala अवसर प्रदान किये गये, परन्तु विपक्षी की ओर से कोई लिखित उत्तर,/लिखित बहस दाखिल नहीं किया गया। ऐसे ey पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रश्नगत शिकायत का निस्तारण या जाना न्यायोचित होगा।
ae पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किया गया हैं :- Page 3 a माह एप क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या- 4 निस्तारण बिन्दु संख्या-4, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है।
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा आश्वासन दिया गया था कि बुकिंग के समय मात्र 5,00,000/—ead की धनराशि का भुगतान करना होगा और शेष भुगतान केवल कब्जा प्रदान किये जाने के समय ही करना होगा। बुकिंग धनराशि से सम्बन्धित सभी चेक प्राप्त होने के उपरान्त दिनांक 44.07.2047 को उभयपफक्षों के मध्य बिक्री अनुबन्ध निष्पादित किया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी प्रस्तुत किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी को भुगतान की गयी 5,00,000/— रुपये की धनराशि को दिनांक 43.09.2047 के Acknowledgement के माध्यम से स्वीकार किया गया है। विपक्षी द्वारा दिनांक 04.09.2049 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा यूनिट /विला का daa wear ही पूर्ण किया गया है तथा अन्य समस्त सुविधाएँ जैसे-आवश्यक कार्य, जिसमें विला की आंतरिक फिनिशिंग, लैण्डस्केपिंग, गोल्फ कोर्स, बागवानी एवं अन्य सुविधाएँ शामिल हैं। विपक्षी द्वारा बिक्री अनुबन्ध में निर्धारित समय-सीमा के अनुसार कब्ज़ा प्रदान किये जाने के 5 वर्ष बाद भी निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने में हुए विलम्ब के लिए न तो किसी क्षतिपूर्ति अथवा समायोजन का प्रस्ताव दिया गया है और न ही परियोजना को पूर्ण करने में विफल रहने का कोई उचित कारण बताया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रकरण को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की गयी, जिसमें दिनांक 40.06.2024, 43.06.2024, 28.06.2024, 48.07.2024 व 23.40.2024 को भेजे गए औपचारिक ई-मेल शामिल हैं, परन्तु विपक्षी द्वारा ट्रांसफर दस्तावेज को मानने से इनकार कर दिया, जब तक कि गलत ट्रांसफर चार्जेस का भुगतान न कर दिया जाए। शिकायतकर्ता, यूनिट/विला के कब्जे में हुए विलम्ब एवं उसके स्वामित्व के ट्रांसफर को बिना किसी शुल्क के भुगतान के हकदार हैं। अतः शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना के विधिवत पूर्ण होने व पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के उपरान्त यूनिट /विला का कब्जा उपलब्ध कराये जाने व अन्य क्रेता निखिल जैन के नाम पर यूनिट,विला के हस्तांतरण के लिए ट्रांसफर चार्ज के मद में धनराशि की मांग न किये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके
ae eae विपक्षी ert 300/- रुपये प्रति वर्ग we की दर से ट्रांसफर चार्ज की मांग को रद्द किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। रेरा एक्ट की धारा-48(॥) में प्राविधान है कि :- Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: | Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the | handing over of the possession, at such rate as may be prescribed.
इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग । सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। । भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 की aRI-22(4)(b) | हे में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि प्रमोटर का यह दायित्व होगा कि वह 9५ परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त कर, उसे आवंटी को उपलब्ध करायें। me pt उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय/पट्टा के लिए न करार /अनुबन्ध) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-7.2 में कब्जा ऑफर किये जाने के सम्बन्ध में यह उललेखित है कि परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने के i: ॥ | | ॥ Page 5 ००% ene ही प्रमोटर, शिकायतकर्ता (आवंटी) को लिखित में यूनिट का कब्जा ऑफर करेंगे। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा fren बिक्री अनुबन्ध दिनांक 44.07.2047 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य हस्ताक्षरित व निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-7 के wer-9. के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी प्रमोटर द्वारा दिनांक 04.09.209 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को var यूनिट /विला का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था। ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 04.09.209 तक अपनी यूनिट /विला का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में यूनिट /विला का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है।
जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बन्ध में सिविल अपील संख्या-6649-50 // 2048 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल” में मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20!6. The Respondent - Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार sie. wet होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना को अनुबन्धानुसार पूर्ण नहीं किया गया है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 02.09.2049 से ओ.सी. J सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। , औ सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल Raced सबअर्बन प्रा. लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में मा. उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्रावधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के मध्य किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा-2(298) में प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—For the purpose of this clause—
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid: Page 7 a oe | SESE तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर-9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर-9.26॥) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"'
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर-9.30) में निर्धारित है। उक्त प्रावधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी MciR+i प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है, जिसे मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या-सी: 9420 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित एवं विधिपूर्ण माना गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर ॥४८7/+7 प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 / 8--3-48-65 विविध, 46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
अल Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:"" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. Rr अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। dager बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है।
जहाँ शिकायतकर्ता का यह प्रश्न है कि विपक्षी द्वारा यूनिट /विला ट्रांसफर चार्जेस / प्रशासनिक चार्जेस एवं अन्य चार्जेस के रूप में 300/- रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से 34,02,500/— रुपये अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही है, तो इस सम्बन्ध में मा. उ.प्र. रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी द्वारा रेगुलेशन, 209 (40 वां संशोधन) दिनांक 24.03.2026 के रेगुलेशन-47(00॥) में स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया है कि :- 47(c)(iii) "The promoter shall not charge a processing fee of more than eo |,000/- (One thousand rupees only), if the successor-in-interest or assignee is a member of the family of the allottee(s). bi promoter cannot charge a processing fee of more than Rs.25,000/- (Twenty five thousand rupees only), if the assignee or successor-in-interest is someone other than a member of the family of the allottee(s)." Page 9 Ch |... उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह सष्ट है कि यदि आवंटी अपने परिवार के... विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि यदि आवंटी अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम पर अपनी यूनिट ट्रांसफर / हस्तांतरण कराना चाहता है तो प्रमोटर ट्रांसफर / हस्तांतरण शुल्क के रूप में i,000/— रुपये से अधिक धनराशि प्राप्त नहीं करेगा और यदि आवंटी के परिवार के सदस्य के अतिरिक्त कोई अन्य व्यक्ति है तो प्रमोटर यूनिट ट्रांसफर /हस्तांतरण शुल्क के रूप में 25,000/— रुपये से अधिक धनराशि प्राप्त नहीं करेगा।
ऐसे में उपरोक््तानुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से afte /faer | ट्रांसफर / हस्तांतरण शुल्क के रूप में की जा रही 300/- रुपये प्रति वर्ग फुट | | की दर से 4,02,500/— रुपये अतिरिक्त धनराशि की मांग अवैधानिक है, जिसे | निरस्त किया जाता है। उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश | 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड | होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता की यूनिट को । आवंटन /अनुबन्ध पत्र के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर, इस आदेश के अनुरूप माँग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त कर, ओ.सी./सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्तागण से देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्तागण के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित | कराना सुनिश्चित करें। 2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 02.09.2049 से ओ.सी./सी.सी. प्राप्त होने की तिथि अथवा विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। कोविड-49 के दृष्टिगत दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। |
3. विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(2४)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। | Page 0 | विन विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी MCLR+ अतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि यदि आवंटी अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम पर अपनी यूनिट ट्रांसफर / हस्तांतरण कराना चाहता है तो प्रमोटर ट्रांसफर / हस्तांतरण शुल्क के रूप में ,000/— रुपये से अधिक धनराशि प्राप्त नहीं करेंगे और यदि आवंटी अपने परिवार के सदस्य के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर यूनिट ट्रांसफर / हस्तांतरण कराना चाहता है तो प्रमोटर यूनिट ट्रांसफर / हस्तांतरण शुल्क के रूप में 25,000,/- रुपये से अधिक धनराशि प्राप्त नहीं करेंग | इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-38, 40 एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। शिकायतकर्ता को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता “ar पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तद्नुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो।
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