Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
ARUNA RANI and RAJEEV JINDAL v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/11/115147/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-04-19
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर भू-सम्पदा (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 206 की ast} अन्तर्गत पीठ-3 पारित आदेश उपस्थित:-डा०दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | | यूनिट | पत्रावली पर उपलब्ध | आवंटन की | कब्जा दिये वांछित अनुतोष - =o रसीद के अनुसार तिथि जाने की तिथि सं0 जमा धनराशि रु0 I. एटराबका 54772023 | अरुणा रानी | 2425 | BO 39,88,378/ | 3.02.204 | 42 माह तथा शिकायतकर्ता व राजीव 3 माह द्वारा यूनिट जिंदल अनुग्रह अवधि | का कब्जा व अर्थात नवम्बर | विलम्बित 2047 अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया | गया है। बनाम एटीएस रियलटी प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में यूनिट den 225 बुक करायी गयी थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि So 39,88,378 ,//-का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित कथन में यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी की परियोजना में दिनांक 07.77.20:3 को आवेदन फार्म के माध्यम से यूनिट संख्या 225 बुक करायी गयी थी, आवंटित यूनिट के सापेक्ष दिनांक 3.02.2074 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। शिकायतकर्ता द्वारा eager लिंक्ड पेमेंट प्लान के अन्तर्गत यूनिट बुक करायी गयी थी। आवंटित यूनिट की कंशीडेरेशन प्राइस रु0 39,88,378 / है जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 00 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा आवंटित यूनिट का कब्जा आवंटन पत्र दिनांकित
43,02.20I4 के क्लाज 7.2 के अनुसार 42 माह तथा 3 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात 43.44.20:7 मे दिया जाना प्रस्तावित था। विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्ब्जा दिये जाने की तिथि से 52 माह का विलम्ब किया गया है। विपक्षी द्वारा दिनांक 6 .अअ्य्ड-- 44.04.2022 को फाइनल ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया जो विधिक रूप से वैध नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा fee से शिकायत संख्या एनसीआर444 / 02 / 405426 /2023 डी सोनिका शर्मा व डी.वी रवि शंकर बनाम एटीएस रियलटी प्रा.लि. में पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूपी रेरा के अनुसार विलम्बित अवधि का ब्याज, यूनिट का भौतिक कब्जा व रजिस्ट्रेशन ऑफ सब लीज डीड कराये जाने तथा अन्य चार्जज हटाये जाने, व 2 लाख रुपया क्षतिपूर्ति व विधिक खर्च दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा परिवाद के समर्थन में लिखित कथन, बुकिंग फार्म, आवंटन पत्र, अंतिम ऑफर ऑफ पजेशन व स्टेटमेंट आफ एकाउंट की छायाप्रति दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- क्रम विवरण दिनांक /संलग्नक |भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) विपक्षी द्वारा जारी Rete aie एकाउंट Tar BO 34,0,444 / आईसीआईसीआई बैंक द्वारा जारी |37.40.2023 रु0 5,77,934/ स्टेटमेंट कुल योग : रु0 39,88,378 / विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति दाखिल की गयी जिसमें यह उल्लिखित है कि शिकायतकर्ता को दिनांक 4302204 को यूनिट संख्या 2425 organ लिंक
प्लान के अन्तर्गत आवंटित की गयी oft) आवंटन पत्र के क्लाज 7.2 के अनुसार 30 माह में यूनिट का कब्जा दिनांक 43.4.207 में दिया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की कीमत GO 39,88,378 / के सापेक्ष wo 34,40,444,/ का भुगतान किया गया है जिसके सम्बन्ध में एनेक्चर-ए की प्रति संलग्न है। विपक्षी को दिनांक 30.03.2022 को परियोजना के सापेक्ष ओ.सी प्राप्त हो चुका है, ओ.सी की प्रति एनेक्चर-बी संलग्न है। विपक्षी द्वारा दिनांक 44.04.2022 को शिकायतकर्ता के पक्ष में ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया जो एनेक्चर सी संलग्न है। विपक्षी द्वारा दिनांक 4.06.2022, 02.08.2022, 46.4.2022 व 09.08.2023 को आवंटित यूनिट के सापेंक्ष अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अनुस्मरण पत्र भेजे गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, अनुस्मरण पत्रों की =<_S=sS 2
प्रति एनेक््चर-डी संलग्न है। शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर विपक्षी द्वारा दिनांक 07.44.2023 को यूनिट निरस्तीकरण पत्र भेजा गया, जिसकी प्रति एनेक्चर-ई संलग्न है। बिल्डर बायर एग्रीमेंट के क्लाज 44.4 व 5.5 के अनुसार यदि शिकायततकर्ता द्वारा धनराशि भुगतान किये जाने में डिफाल्ट किया जाता है तो विपक्षी कम्पनी यूनिट निरस्त करके अर्नेस्ट मनी जब्त करने के उपरांत विपक्षी द्वारा आवंटी को अवशेष धनराशि बिना ब्याज के वापस किये जाने का है। इस प्रकार विपक्षी यूनिट निरस्त करके 45 प्रतिशत धनराशि जब्त करने का अधिकारी है। विपक्षी द्वारा अर्नेस्ट मनी जब्त करने के सम्बन्ध में यूपी रेरा ves 20i8 के नियम 9.3 का संदर्भ अंकित किया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी रेरा अधिनियम की धारा 445) का भी उल्लेख किया गया है। इसके समर्थन में विपक्षी द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सतीश gar बनाम सुधीर रावल सिविल अपील संख्या 7588,//2042 व श्री हनुमान कॉटन ce व अन्य बनाम टाटा एयरक्राफ्ट लिमिटेड में पारित आदेश तथा रेरा पीठ द्वारा शिकायत संख्या एनसीआर।44 / 0 /83450 / 2024 मीनाक्षी सिंह बनाम एआर लैण्डक्राफ्ट एलएलपी में पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है। अतः विपक्षी ने अर्थदण्ड के साथ शिकायत निरस्त किये जाने तथा अनुबंध के क्लाज t4.04 के अनुसार 45 प्रतिशत धनराशि कटौती किये जाने के उपरांत अवशेष देय धनराशि शिकायतकर्ता को प्राप्त किये जाने हेतु व शिकायतकर्ता को मूल अभिलेख वापस किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी की ओर से लिखित जवाब के समर्थन में कस्टमर लेजर, कम्पलीशन सर्टिफिकेट 30.03.2022, फाइनल ऑफर ऑफ पजेशन 74.04.2022, अनुस्मरण पत्र दिनांक 4.06.2022, 02.08.2022, 46.4.2022, 09.08.2023 व यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 07.44.2023 की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्षो के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का निरस्त किया जाना वैधानिक है? 2. क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? 3 —_—O निस्तारण प्रश्न संख्या 4 -: प्रश्न संख्या । इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा pera यूनिट का निरस्त किया जाना वैधानिक है। इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी को दिनांक 30.03.2022 को परियोजना के सापेक्ष ओ.सी प्राप्त हो चुका है। उसके उपरांत विपक्षी द्वारा दिनांक 4.04.2022 को शिकायतकर्ता के पक्ष में ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु दिनांक 24.06.2022, 02.08.2022, 6.77.2022 व 09.08.2023 को अनुस्मरण पत्र भेजे गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर विपक्षी द्वारा दिनांक 07.4.2023 को यूनिट निरस्त कर दी गयी। विपक्षी द्वारा यह भी उल्लिखित किया गया है कि बिल्डर बायर एग्रीमेंट के क्लाज 44.4 व 55 के अनुसार यदि शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि भुगतान किये जाने में डिफाल्ट किया जाता है तो विपक्षी कम्पनी यूनिट निरस्त करके अर्नेस्ट मनी जब्त करने के उपरांत विपक्षी द्वारा आवंटी को अवशेष धनराशि बिना ब्याज के वापस करने का है। इस प्रकार विपक्षी यूनिट निरस्त करके 45 प्रतिशत धनराशि जंब्त करने का अधिकारी है।
पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी को दिनांक 30032022 को ओस्ी प्राप्त होने के उपरांत विपक्षी द्वारा दिनांक 44.04 2022 शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया तथा विपक्षी द्वारा अवशेष देय धनराशि भुगतान किये जाने हेतु क्रमशः दिनांक 44.06.2022, 02.08.2022, 6.4.2022 व 09.08.2023 को अनुस्मरण पत्र प्रेषित किये Te | शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर दिनांक 20.40.2023 को यूनिट निरस्त किये जाने हेतु अंतिम नोटिस जारी किया गया। इसके उपरांत भी शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर विपक्षी द्वारा दिनांक 07.44.2023 को शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त कर दी गयी। उक्त के सम्बन्ध में भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय पद्टा के लिए करार) नियमावली, 20:8 की धारा 9.3(ii) में यह प्राविधानित है कि :- 4 लात लक. घारा 9.3 ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination.
उपरोक्त से स्पष्ट है कि यदि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के 3 नोटिसों का लगातार अनदेखी करते हुए धनराशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो विपक्षी आवंटित यूनिट को निरस्त करके शिकायतकर्ता को बुकिंग धनराशि की कटौती करते हुए अवशेष धनराशि वापस भुगतान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्त किये जाने से पूर्व शिकायतकर्ता को 30 दिन पूर्व सूचित भी किया जाएगा। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त किये जाने की तिथि 07.44.2023 से पूर्व शिकायंतकर्ता को 4 अनुस्मरण पत्र क्रमशः 44.06.2022, 02.08. 2022, 6.44.202, 09.08.2023 व 4 अंतिम नोटिस दिनांक 20.0.2023 भेजे जाने का साक्ष्य प्रस्तुत किये गये है। इसके उपरांत विपक्षी द्वारा दिनांक 07.4.2023 को यूनिट निरस्त कर दी गयी है। जबकि शिकायतकर्ता के कथानुसार यूनिट के सापेक्ष सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान किया जा चुकां है। पत्रावली के अवलोकन से यह भी विदित है कि शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा नवम्बर 20:7 F प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति में यह भी उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी को दिनांक 30.03.2022 को ओ.सी प्राप्त हो चुका है। जबकि शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा नवम्बर 2077 में प्राप्त होना था। इससे यह स्पष्ट होता है कि विपक्षी की परियोजना 5 वर्ष 5 —_——SS
विलम्बित रही। चूंकि विपक्षी द्वारा अनुबंधानुसार निर्धारित अवधि में शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया। इस कारण से यह स्पष्ट है कि विपक्षी के पक्ष पर समय से परियोजना पूर्ण न करने का डिफाल्ट है जिस कारण विपक्षी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2078 की धारा 9.3(ii) का लाभ नहीं ले WHA | इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा उपरोक्त वर्णित भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय ,//पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2078 की धारा 9.3( ii) के अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की जमा धनराशि शिकायतकर्ता को वापस नहीं की गयी है। जबकि विपक्षी का यह दाग्रित्व था कि यूनिट निरस्त करने के उपरांत शिकायतकर्ता को नियमानुसार धनराशि वापस करें जो विपक्षी द्वारा नहीं किया गया। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं यूनिट West /निरस्त नहीं करायी गयी है। जबकि शिकायतकर्ता द्वारा आवंटित यूनिट की कशीडेरेशन प्राइस रु0 39,88,378 / के सापेक्ष लगभग 400 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य भी दाखिल नहीं किया गया है कि प्रश्नगत यूनिट निरस्तीकरण के उपरांत किसी अन्य क्रेता को आवंटित करते हुए तृतीय पक्ष का अधिकार सृजित किया गया हो। उपरोक्त वर्णित परिस्थितियों से यह स्पष्ट होता है कि विपक्षी द्वारा किये गये शिकायतकर्ता के यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक नहीं है। तदनुसार प्रश्न संख्या 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-2 प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि
क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 73.02.2074 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा दिनांक 42 माह तथा 3 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात नवम्बर 2077 में प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण 6 ुइइ- ---ख होने. के सम्बन्ध में ओसी की प्रति दाखिल की गयी है। चूंकि शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है, जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील wo 6649-50,/2048 "'सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The
Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी.//सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स wards प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section I 8()(b) lays down that ifthe promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act.or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay 7 ——a interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as
the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 7.40.2078 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20r8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wee o2(i) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +!% unless provided otherwise under the Rules.
within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ Ife की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+I प्रतिशत की दर से ही ब्यांज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(28)(0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों व न्याय नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता को कब्जा के साथ विलम्बित 8 ना ललख्क- अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। शिकायतकर्ता द्वारा जो क्षतिपूर्ति (compensation) दिलाये जाने सम्बंधी याचना की गयी है। इस सम्बंध में क्षतिपूर्ति Compensation) के प्रकरण पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार रेर अधिनियम की धारा 74 के अन्तर्गत न्यायानिर्णायक अधिकारी (8०]|५०८४४४ Officer) को है। अतः पीठ द्वारा इस सम्बंध में आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश
i. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता की यूनिट को पुर्नस्थापित करते हुए शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी,//सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.42.2047 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 39,88,378/ पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्यांज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। otfas—i9 महामारी के कारण फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25. 03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2006 की धारा AHS अनुसार यदि WW लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा 9 Ss डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी।
इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियंम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा adh जिसके लिए शिकायतकर्ता ऑन लाइन प्रार्थना पत्र अपलोड करके उसकी प्रति रेरा कार्यालय में दाखिल करना सुनिश्चित करें | आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। By २-5१ \G. oF. (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर DS 20