Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Abhinav Raaj v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/11/114694/2023
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- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 20r6 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:-डा०दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य शिकायत संख्या शिकायतकर्ता | यूनिट | पत्रावली पर उपलब्ध | आवंटन की | कब्जा दिये वांछित अनुतोष न0 रसीद के अनुसार | तिथि जाने की तिथि जमा धनराशि रु0 ८844//4694/2023 | अभिनव राज | 706 | BO 44,49,204/ | 26.05.2046 | 27 माह शिकायतकर्ता तथा 3 माह | द्वारा यूनिट अनुग्रह अवधि | का कब्जा व अर्थात नवम्बर | विलम्बित 2048 अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम एटीएस रियलटी प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित की गयी है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में यूनिट संख्या ए-706 बुक करायी गयी थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि Bo 4,49,204 ,//-का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित कथन में यह उल्लिखित किया गया है कि परिवादी ने दिनांक ॥4.03.2046 को एटीएस vee के टॉवर 7 में यूनिट संख्या 7064, 2 बीएचके बुक किया। इसका बेसिक मूल्य wo 37,64,500/ था जिसके विरूद्ध दिनांक 26.8.20i8 तक GO 39,25,269,/ का भुगतान कर दिया गया था। विपक्षी द्वारा कभी किसान कम्पनसेसन के नाम पर, कभी कलब हाउस के नाम पर और कभी अन्य सुविधाओं के नाम पर अतिरिक्त धन की मांग की गयी है। फ्लैट का कब्जा बिना सुविधा के दिया जाना। यह फ्लैट बैंक से लोन ले कर बुक किया था। विपक्षी द्वारा सभी फ्लैट के लिए स्वतंत्र बिजली मीटर नहीं लगवाया गया है जो बी.बी.ए का उल्लंघन है। पावर बैक अप में धोखा धडी (डीजल का प्रदूषण करने वाला तथा वर्जित जनरेटर लगाया) अब जनरेटर अपग्रेड करने के लिए OS
अतिरिक्त राशि की मांग कर रहे है। बिल्डर को पीने के पानी का कनेक्शन हर फ्लैट को देना था जो किसी भी फ्लैट में नहीं दिया गया। आवंटी को पीने के पानी के लिए अलग से आर.ओ. बोतल का पानी लेना पड रहा है। कब्जे के समय लिफ्ट की दयनीय व त्रुटिपूर्ण व्यवस्था थी, लिफ्ट में पावर बैक अप के लिए बैट्री नही थी। बिजली कट जाने पर लिफ्ट में फंसे रहना पडता था। क्लब हाउस की सदस्यता में धांधली है। क्लब हाउस अपार्टमेंट का after अंग है और उसके निर्माण के लिए शुरु में ही धन जमा होने के बावजूद अतिरिक्त सदस्यता शुल्क की बल पूर्वक वसूली। बैंक के लोन का दबाव और कब्जा विलम्बित होने के दबाव को देखकर परिवादी ने जब भी विपक्षी से विलंब के लिए हर्जा मांगा तो विपक्षी ने हर्जा देने से साफ मना कर दिया। विपक्षी द्वारा यह बोला गया कि जल्द से जल्द यथास्थिति कब्जा ले ले नही तो बाद में आपकी बुकिंग कैंसिल करके आपका फ्लैट किसी और को बेच दिया जाएगा और आपके अब तक के दिए हुए पैसे भी नहीं मिलेंगे। इस स्थिति में परिवादी ने पेशबंदी में फ्लैट का कब्जा ले लिया।
शिकायतकर्ता द्वारा यह भी उल्लिखित किया गया है कि कोई भी बिल्डर अपने बैंक खाते में मेंटिनेंस डिपाजिट नहीं ले सकता है। जबकि विपक्षीगण ऐसा ही कर रहे। विपक्षी द्वारा फ्लैट की बिक्री पर बिल्डर द्वारा भारी भरकम एन ओ सी चार्जेज की मांग 590/प्रतिवर्ग फीट की दर से की जा रही है। विपक्षी द्वारा १ईमानी पूर्वक एस्क्रो अकाउंट नहीं खोला apn है। शिकायतकर्ता द्वारा रेरा अधिनियम की धारा t2, 3, 44, 46, 7 व 79(6) का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त रेरा अधिनियम की धारा t व 2(जेडएफ) एवं यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2040 की धारा 78) व 46), रेरा अधिनियम की नियमावली 2046 के नियम 2(एच) का उल्लेख किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा वास्तविक कब्जा देने की तिथि तक 48 प्रतिशत विलम्ब ब्याज, क्लब हाउस की सदस्यता बिना किसी अतिरिक्त राशि के aga दिलाया जाए, विद्युत कनेक्शन लगाने का खर्च विपक्षी खुद उठाए, असल कब्जे की तिथि से पीने के पानी की सुविधा प्रदान करने की तिथि तक पीने के पानी का खर्च दिलाया जाए, वसूली गयी किसानों के बढ़े प्रतिकर की राशि उपरोक्त ब्याज दर वापस करने की तिथि तक वापस करायी जाए, सम्पत्ति हस्तांतरण के लिए परिवादी से बिक्री मूल्य का 0.5 प्रतिशत से अधिक धन मांगने से 2 च्ा रोका जाए, ओपन पाकिंग और परियोजना में स्थित अन्य साझी जगहों को बेचने व डिले पेनल्टी के बदले में देने से रोका जाए। मेंटिनेंस सिक्यूरिटी के नाम पर वसूली जाने वाली राशि एक अलग wel बैंक खाते में जमा करें ताकि यीडारेरा इसे सुपरवाइज कर सके और ए.ओ.ए/आरडब्ल्यर के गठन उपरांत इस खाते को उन्हें हस्तांतारित करा जा सके।
शिकायतकर्ता द्वारा परिवाद के समर्थन में लिखित कथन, आवंटन पत्र, ऑफर ऑफ पजेशन की सूचना पत्र, अंतिम ऑफर ऑफ पजेशन, स्टेटमेंट आफ एकाउंट, कस्टमर लेजर, त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र, जमा की गई धनराशि की रसीदों की छायाप्रति दाखिल की गयी है। विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति दाखिल की गयी जिसमें यह उल्लिखित है कि शिकायतकर्ता को दिनांक 26.06.2046 को यूनिट आवंटित की गयी थी। आवंटन पत्र के क्लाज 7.2 के अनुसार 30 माह में यूनिट का कब्जा दिनांक 26.4.208 तक दिया जाना था। विपक्षी को दिनांक 30.03.2022 को परियोजना के सापेक्ष ओ.सी प्राप्त हो चुका है। ओ.सी की प्रति एनेक्चर-ए संलगन है। शिकायतकर्ता को दिनांक 24.08.2022 में यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध कराया जा चुका है। कब्जा पत्र की प्रति एनेक्चर-बी संलग्न है। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 05.08.2022 को कब्जा पत्र के साथ अण्डरटेकिंग कम डिक्लेरेशन दिया गया कि विपक्षी सभी दायित्वों व जिम्मेदारियों से मुक्त है और अब से विपक्षी की किसी प्रकार की सेवा की कमी व नुकसान की जिम्मेदारी नहीं है। अण्डरटेकिंग की प्रति एनेक्चर-सी संलग्न है। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 26.08.2022 को फुल एण्ड फाइनल सेटलमेंट किया गया है। सेटलमेंट की प्रति एनेक्चर-डी संलग्न है। विपक्षी ने यह भी उल्लिखित किया है कि आवंटी द्वारा यूनिट का कब्जा प्राप्त किये जाने के उपरांत वह रेरा अधिनियम की धारा i8 के अन्तर्गत कोई अनुतोष पाने का अधिकारी नहीं है। इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा शिकायत ea varitene44 /09 /77095 /2022 में दिनांक 49.07. 2022 को पारित आदेश का संदर्भ दिया गया है। आदेश की प्रति एनेक्चर-ई संलग्न है। माननीय एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्माण कार्य पर समय समय पर लगाये गये 3 ्नााअ्यक
प्रतिबंधों के कारण भी परियोजना में निर्माण कार्य विलम्बित हुआ है। उक्त के सम्बन्ध में रेरा पीठ द्वारा शिकायत संख्या wefan / 09 /6244 / 2020 निखिल सिंघल बनाम मैसर्स गौरसन्स हाई-टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. का संदर्भ अंकित किया गया है। अतः विपक्षी ने अर्थदण्ड के साथ शिकायत निरस्त किये जाने का अनुरोध किया है। विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति के समर्थन में अधिभोग प्रमाण पत्र, Key Handover Letter दिनांक 24.08.2022, डिक्लेरेशन फार्म, सेटलमेंट लेटर, पीठ द्वारा पारित आदेश व रेरा कार्यालय आदेश की छाया प्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्षों के अभिकथनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किया जाता हैः- 4. क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जा सकता है? - निस्तारण प्रश्न संख्या (-: प्रश्न संख्या Se आशय का विरचित किया गया है कि an शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जा सकता है? पत्रावली का अवलोकन किया। पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि विपक्षी एवं शिकायतकर्ता के मध्य दिनांक 26.05. 2046 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार 27 माह तथा 3 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात नवम्बर 2048 तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था।
पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना के सापेक्ष ओ.सी दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त कर शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा लिये जाने हेतु ऑफर ऑर पजेशन दिनांक 44.04.2022 को प्रेषित किया गया जिसके क्रम में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 24.08.2022 को यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त किये जाने हेतु Key Handover Letter दिनांक 24.08.2022 को जारी किया गया जो पत्रावली पर एनेक्चर-बी के रूप में उपलब्ध है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्र के अवलोकन से विदित है कि Key Handover Letter दिनांक 24.08.2022 के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा यह पुष्टि की जानी थी कि उनकी यूनिट कब्जा लिये जाने हेतु तैयार है अथवा नहीं जिसके पश्चात ही शिकायतकर्ता 4 —_—_s द्वारा यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर कब्जा लिया जाना था। तत्पश्चात् शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट. का भौतिक कब्जा प्राप्त करते हुए दिनांक 26. 08.2022 को विपक्षी के साथ समझौतानामा हस्ताक्षारित किया गया जो पत्रावली पर एनेक्चर-सी के रूप में उपलब्ध है। शिकायतर्ता द्वारा यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त किये जाने की पुष्टि स्वयं दिनांक 2.44.2024 को सुनवाई के दौरान की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा प्राप्त किये जाने के सम्बन्ध में. Key Handover Letter दिनांक 24.08.2022 की प्रति एनेक्चर-बी व उभयपक्षों द्वारा अवशेष देय धनराशि के मद में हुए समझौतेनामे की हस्ताक्षारित प्रति एनेक्चर-सी पत्रावली पर उपलब्ध है।
चूंकि वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा एकाउंट सेटल करते हुए यूनिट का कब्जा दिनांक 24.08.2022 को प्राप्त किया जा चुका है, जिसके सापेक्ष विपक्षी द्वारा सेटलमेंट दिनांक 26.08.2022 की प्रति दाखिल की गयी है। सेटलमेंट दिनांक 26.08.2022 में यह उल्लिखित है कि ” I/we further state that nothing remains to be paid by the company/Developer towards any head of any payment and I/we acknowledge that no lis is either pending or will be raised in future for this transaction. I/we further state that I/we will pay full and final amount of Possession dues on or before already paid after that all payments between the parties hereby finally got settled and nothing remains dues between the parties " इससे we है कि उभयपक्षों के मध्य अब कोई लेन-दारी शेष नहीं है। यह भी उल्लेखनीय है कि उक्त हस्ताक्षारित समझौतेनामें we पर शिकायतकर्ता ने अपने स्वयं के हस्तलेख से फाइनल सेटलमेंट को स्वीकार किया है। इसके उपरांत शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त किये जाने व विपक्षी के साथ अवशेष देय धनराशि के सम्बन्ध में एकाउंट सेटल करते हुए समझौता किये जाने के पश्चात् दिनांक 03.:4.2023 को लगभग 5 माह बाद यह शिकायत कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने के लिए योजित की गयी है। उपरोक्त के सम्बन्ध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यूनियन ऑफ इण्डिया बनाम मास्टर कन्सट्रक्शन कम्पनी (200 ) 42 एससीसी 349 में यह उल्लिखित किया गया है कि —
"The Supreme Court observed that 3 selltement agreement has the force of law between the parties who have entered into it. The court emphasised that courts should discourage attempts to undo or challenge settlements unless there is evidence of fraud, coercion or undue influence in the formation of the agreement.” इसके अतिरिक्त माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा बूज़ एलेन हेमिल्टन आईएनसी बनाम एसबीआई होम फाइनेंस लिमिटेड (2077) 05 एससीसी 532 में यह उल्लिखित किया गया है कि :- "The Supreme Court reiterated that once parties have entered into a setellment, they cannot later dispute the terms of that settlement. The court stressed that allowing parties to go back on their settlements would defeat the purpose of dispute resolution mechanisms and would encourage frivolous litigation.” Sr न्याय नजीरों के सम्बन्ध में यह उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न न्याय नजीरों में यह माना है कि यदि कानूनी कार्यवाही लम्बित रहने के दौरान उभयपक्षों के मध्य उक्त वाद के सम्बन्ध में समझौतानामा हो जाता है तो न्यायालय उक्त वाद पर अग्रिम कार्यवाही नहीं कर सकता है। ऐसा किये जाने के पीछे का सिद्धान्त Multiplicity of proceedings को रोका जाना तथा उभयपफक्षों के . मध्य निष्पादित समझौते को महत्व दिया जाना है।...
यहाँ यह भी स्पष्ट किया जाना महत्वूपर्ण प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ता द्वारा अपने लिखित कथन में यह तर्क किया गया है कि उनके द्वारा दबाव में यूनिट का कब्जा लिया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा पत्रावली पर ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से var अभिलेख पर “Fraud, Coercion or undue influence’ के आधार पर 6 SS हस्ताक्षर कराये गये हो जिसके अभाव में शिकायतकर्ता द्वारा किया गया यह कथन कि उनके द्वारा दबाव में यूनिट का कब्जा लिया गया है व समझौतानामा पर हस्ताक्षर दबाव में किया गया है संधारणीय नहीं है। प्रश्नगत प्रकरण में -यह- उल्लेखनीय - है fe -शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत योजित किये जाने से लगभग is माह पूर्व ही यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त करते हुए विपक्षी के साथ एकांउट सेटल करते हुए समझौतानामा हस्ताक्षारित कर लिया गया है। उसके पश्चात शिकायतकर्ता द्वारा पुनः wel बिन्दुओं पर “यूनिट का भौतिक कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु शिकायत योजित की गयी है।” तब पुनः उक्त बिन्दुओं के आधार पर निर्णय पारित किये जाने का कोई औचित्य प्रतीत नहीं होता है। क्योंकि ऐसा किया जाना Multiplicity of proceedings को बढ़ावा दिया जाना होगा। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा एकाउंट सेटल करते हुए यूनिट का कब्जा प्राप्त किया जा चुका है। ऐसी स्थिति में रेरा अधिनियम की ois के अन्तर्गत कोई आदेश पारित करने का औचित्य नहीं रह जाता है। अतः शिकायतकर्ता वर्तमान शिकायत के माध्यम से कोई अनुतोष पाने का अधिकारी नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या । शिकायतकर्ता के विरूद्ध Pena किया जाता है।
अत: उपरोक्त वर्णित तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रस्तुत परिवाद निरस्त किये जाने योग्य है। आदेश प्रस्तुत शिकायत निरस्त की जाती है। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। पत्रावली दाखिल दफ्तर हो। \Q-.02-2925 (डा०दीपक स्वरूप WaT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर