Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rajni Kant Upadhyay v. G S Promoters Private Limited
Complaint No. NCR144/11/102672/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-09-12
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 1 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority Regional Office, va-t69 [?], Gamma-2, Greater Noida, Gautam Buddh Nagar-204308. Hearing Bench-04 (formerly Bench-04-A) Judgment and Order under Section 34 read with Section 37 Presiding Officer: Shri Sanjay R. Bhusareddy, Hon'ble Chairperson Complaint No.: ]287244/] /]02672/2022 Rajni G.T. Upadhyay and Pooja Upadhyay Versus G S Promoters Pvt. Ltd. Judgment The complainant's complaint was presented for final arguments through video conferencing on 04-04-2025. When called, Shri Harpreet Singh Arora, learned advocate, appeared for the complainant, and Shri Manendra Kumar, learned advocate, appeared for the opposite party. After the Bench heard the arguments of the learned advocates of both sides at length, the file was reserved for orders on the same day, 04-04-2025. In the principal application, the complainant has filed a complaint against the opposite party under the Real Estate (Regulation and Development) Act, 20:6, under [?] of the Act, seeking execution of a registered sale deed in respect of the unit in question.
In brief, the complainant's submission is that on 30-04-2044 they booked Unit No. 502 A, Peace Tower, in the opposite party's project "Sikka Karmic Greens" (Registration No.: UPRERAPRJ4452), Gautam Buddh Nagar. The total price of the unit is Rs.68,47,850/-, and the complainant has paid Rs.72,28,849/-. The complainant further submits that, despite the payment of all amounts due in respect of the unit and the handing over of possession of the unit, the opposite party has made no attempt to register the sub-lease deed. The right of ownership is missing. For more than the last five years, the sub-lease deed has not been executed, with a malicious intent and a hidden ulterior motive. This is an unfair trade practice. The input credit or refund of the excess amount collected by the opposite party on the basis of GST is not being given, and the amount deposited as tax is not being disclosed to the complainant. The complainant had earlier filed a complaint before the learned Adjudicating Officer regarding this dispute. In that proceeding, the Adjudicating Officer awarded compensation on the ground that the opposite party had not got the sub-lease deed registered, which confirms the opposite party's default. On these grounds, the complainant has requested that a sub-lease deed be executed in respect of the unit in question and that the benefit of GST input credit be granted.
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, va-t69, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई पीठ-04 (पूर्व में पीठ--04-ए) निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी: श्री संजय आर. भूसरेड्डी, मा. अध्यक्ष शिकायत संख्या: ]२८७२44/] /]02672/2022 रजनी GT उपाध्याय एवं पूजा उपाध्याय बनाम जी एस प्रोमोटर्स प्रा. लि. निर्णय शिकायतकर्ता का परिवाद अन्तिम बहस हेतु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दिनांक 04-04-2025 को प्रस्तुत किया गया। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री हरप्रीत सिंह अरोड़ा उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री मनेन्द्र कुमार उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कों को विस्तार से सुनने के उपरान्त, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 04-04-2025 को ही सुरक्षित की गयी। प्रस्तुत मूल प्रार्थना-पत्र में शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में पंजीकृत सेल डीड निष्पादित कराये जाने के अनुतोष की प्रार्थना के साथ विपक्षी के विरूद्ध भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 की eat के अन्तर्गत शिकायत योजित की गई है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 30-04-2044 को विपक्षी की परियोजना "Sikka Karmic Greens, (पंजीयन संख्या: UPRERAPRJ4452) गौतमबुद्धनगर में यूनिट संख्या: 502 A Peace Tower में बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत रू.68,47,850,/- है और शिकायतकर्ता द्वारा रू72,28,849,/- की धनराशि का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष समस्त देय धनराशि का भुगतान करने एवं प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराये जाने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा सब-लीज़ Se के पंजीकरण का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। स्वामित्व का अधिकार गुम (Missing) है। विगत पाँच वर्षों से अधिक समय से, Page | of 6 E-Court दुर्भावनापूर्ण इरादे और गुप्त GELI (Ulterior Motive) से सब-लीज़ डीड निष्पादित नहीं करायी जा रही है। यह अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) है| विपक्षी द्वारा जीएसटी के आधार पर ली गयी अत्यधिक धनराशि का इनपुट क्रेडिट या रिफण्ड नहीं दिया जा रहा है और न ही टैक्स के रूप में जमा की गयी धनराशि शिकायतकर्ता को बताई जा रही है। शिकायतकर्ता द्वारा मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष उपर्युक्त विवाद के सम्बन्ध में शिकायत योजित की गयी थी, जिसके क्रम में विपक्षी द्वारा सब-लीज़ Sts का पंजीकरण न कराये जाने के आधार पर मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा क्षतिपूर्ति प्रदान की गयी थी, जिससे विपक्षी की चूक की पुष्टि होती है |इन आधारों पर शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में सब-लीज डीड निष्पादित कराये जाने तथा जीएसटी gaye क्रेडिट का लाभ दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा अपना प्रत्युत्तर, दिनांक 05--40-2024 एवं दिनांक 48-44-2024 दाखिल कर, मूल शिकायत में किये गये तथ्यों की पुनरावृत्ति की गयी है और कहा गया है कि उनके द्वारा पूर्व में मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष विपक्षी के विरूद्ध एक अन्य शिकायत संख्या: ADI/NCR44/09/60539/2020 “रजनी कान्त उपाध्याय बनाम जी एस ग्रोगोटर्स or. fer.” योजित की गयी थी, जिसमें मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 00-40-2022 को अंतिम आदेश पारित किया गया। विपक्षी द्वारा बिल्डर बायर एग्रीमेन्ट में वर्णित नियम एवं शर्तों का उल्लंघन कर, सर्विस टैक्स वसूलते हुए, उक्त मद में धनराशि का भुगतान करने का दवाब बनाया गया, जिसका भुगतान शिकायतकर्ता द्वारा किया गया। दिनांक 05-07-2046 को विधिक नोटिस प्रेषित किया गया था, परन्तु विपक्षी द्वारा कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गयी। विपक्षी द्वारा आज तक सोसायटी को AOA को हैण्डओवर नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा नोएडा प्राधिकरण की अनुमति एवं निवासियों की सहमति के बिना कॉमर्शियल एरिया का विस्तार किया जा रहा है। विपक्षी ने उन सभी निवासियों के पक्ष में रजिस्ट्री // पंजीकरण कर दिये जो उनके अवैध कार्यों के विरूद्ध आवाज उठाने की उनकी माँग से सहमत थे। पिछले 02 से 03 वर्षों में विक्रय किये गये फ्लैटों की रजिस्ट्री हो चुकी है, परन्तु मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा विपक्षी को आगामी 45 दिनों के अन्दर फ्लैट की रजिस्ट्री निष्पादित कराने के आदेश का विपक्षी द्वारा कोई अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया गया है। अब डिफॉल्ट भुगतान का बिन्दु उठाया गया है, जिसके लिए नोएडा प्राधिकरण द्वारा पंजीकरण में और विलम्ब करने का नोटिस जारी किया गया है। विपक्षी द्वारा विधिक ओ.सी. / सी.सी. के बिना प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया गया है, जो कि अमान्य है और शिकायतकर्ता पर बाध्यकारी नहीं है। शिकायतकर्ता को सूचित किया गया कथित फिट आऊट कब्जा, अधिनियम के प्राविधानों के अनुसार नहीं है। शिकायतकर्ता, स्टाम्प शुल्क का भुगतान करने के लिए तैयार है, बशर्ते बिक्री विलेख का पंजीकरण निर्धारित हो। विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र में किये गये समस्त तथ्यों ,/अभिकथनों का पूर्ण रूप से खण्डन करते हुए, अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों ,/ अभिकथनों का उल्लेख कर, विपक्षी द्वारा एकत्रित सर्विस टैक्स को ब्याज सहित वापस किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने, मा. न्यायनिर्णायक
Page 2 of 6 E-Court अधिकारी द्वारा पारित आदेश का विपक्षी को पूर्णता अनुपालन करने हेतु निर्देशित किये जाने, विपक्षी द्वारा रखरखाव शुल्क वसूलने के उद्देश्य से गठित सहायक कम्पनी का फोरेंसिक ऑडिट कराये जाने, सक्षम प्राधिकारी को परियोजना के सुपर wae का संरचनात्मक ऑडिट करने हेतु निर्देशित किये जाने आदि मदों में अनुतोष दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में फ्लैट एलॉटमेन्ट एग्रीमेन्ट की प्रति, रेरा स्थलीय निरीक्षण आख्या की प्रति, रेरा कार्यालय आदेश, दिनांक 46-09-20:9 एवं दिनांक 44-06-2024 की प्रतियाँ, मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा जारी वसूली प्रमाण-पत्र, दिनांक 44-05-2024 की प्रति, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। विपक्षी द्वारा दिनांक 20-44-2024 को आपत्ति-पत्र तिथि रहित एवं लिखित बहस, दिनांक 49-44-2024 दाखिल करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना Sikka Karmic Greens के टॉवर-7?७४०० में यूनिट संख्या: 502 & बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत रू.68,47,850,//- थी और पक्षकारों के मध्य बी.बी.ए., दिनांक 47-09-2045 को निष्पादित किया गया। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करते हुए, ओ.सी. हेतु आवेदन, दिनांक 23-70-20:7 को किया गया। शिकायतकर्ता के पक्ष में पोजेशन फॉर फिट आऊट अगस्त, 206 में प्रेषित किया गया और शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 08-40-2046 को प्रश्नगत यूनिट का शांतिपूर्ण कब्जा प्राप्त कर लिया गया।
विपक्षी का यह भी कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 07-09-2020 को मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष एक अन्य शिकायत संख्या: &07/0८टार44/09/60539/ 2020 “रजनी कान्त उपाध्याय बनाम जी एस ग्रोगोटर्स ar लि योजित की गयी थी, जिसमें मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा दिनांक 06-40-2022 को क्षतिपूर्ति सहित अंतिम आदेश पारित होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता के पक्ष में विक्रय विलेख / रजिस्ट्री Ponda कराये जाने हेतु आदेश पारित किया गया। विपक्षी द्वारा अपने उपर्युक्त कथन के समर्थन में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा AIR 98) SC 43 “ST विजयलक्ष्मी बनाम गुदा was शेखर urd में पारित निर्णय, दिनांक 43-03-4984 के पैरा-03 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा पूर्व संस्थित शिकायत में माँगे गये अनुतोष को ही प्रश्नगत शिकायत में माँगा गया है, जो कि विधिनुसार स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख करते हुए, प्रश्नगत शिकायत खारिज किये जाने तथा शिकायतकर्ता को स्टाम्प शुल्क का भुगतान करते हुए, सब-लीज Ss निष्पादित कराये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में कब्जा पत्र, दिनांक os—t0-206 की प्रति, शिकायतकर्ता द्वारा मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष संस्थित पूर्व शिकायत की प्रति, Page 3 of 6 PY 7 E-Court मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेश, दिनांक 06-40-2022 की प्रति, ओसी. / सी.सी. प्राप्त करने हेतु दिये गये आवेदन-पत्र, feaia 23-70-207 की प्रति, वांछित प्रमाण-पत्रों की प्रतियाँ, ओ.सी., दिनांक 2.-44-20i7 की प्रति दाखिल की गयी है।
मैंने उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कों को विस्तार से सुना तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं अभिलेखों का सम्यूक परिशीलन किया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु पर विचार किया:- क्या शिकायतकर्ता याचित अनुतोष प्राप्त करने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु: यह निस्तारण बिन्दु इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता याचित अनुतोष प्राप्त करने का अधिकारी है? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है? शिकायतकर्ता द्वारा yea शिकायत में मूल रूप से रजिस्ट्रेशन ऑफ सेल डीड /रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने का अनुरोध किया गया है, क्योंकि wea शिकायत में उभय पक्षों द्वारा प्रस्तुत लिखित अभिकथनों के आधार पर यह स्पष्ट है कि उभय पक्ष इस तथ्य से सहमत हैं कि शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक os—t0-20:6 को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा प्राप्त किया जा चुका है। प्रश्नगत यूनिट संख्या: 502 A Peace Tower के सम्बन्ध में शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 07-09-2020 को मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सर्वप्रथम एक अन्य शिकायत संख्या: ADJ/NCRI44/09/60539/2020 “रजनी कान्त उपाध्याय बनाम जी Ve wed प्रा लि” योजित की गयी थी, जिसमें मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा उभय पक्षों के vat को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्यों के अवलोकन के आधार पर गुण-दोष के अनुसार दिनांक 06-40-2022 को निम्न अंतिम आदेश पारित किये गये:- ” शिकायतकर्ता की थिकायत आंशिक रुप से स्वीकार की जाती है। थिकायतकर्ता विपक्षी से Req vat में प्रतिकर प्राप्त करेया। 7. अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन एवं अनुबन्ध के ग्रावधानों का उल्लंघन करने के आधार पर ग्रतिकरः-
शिकायतकर्ता विपक्षी से इस मद में प्रतिकर के रुप F 75,000/— रुपये की धनराशि IT BOT | 2. Warde ब्ुटियों के मद में प्रतिकर-- शिकायतकर्ता विपक्षी से इस यद में प्रतिकर के रूप में 50000,“- रूपये की धनराशि प्राप्त करेया। Page 4 of 6 E-Court 3. विपक्षी को यह आदेशित किया जाता है कि वह आदेश की तिथि से 45 fear को अन्दर शिकायतकर्ता को उपरोक्त मर्दों में Oder की धनराशि अदा करना सुनिश्चित करें। 4. विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह मा उच्चतम न्यायालय द्वारा अंतिम आदेश पारित करने के उपरान्त 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता के पक्ष में रजिस्ट्री निष्पादित कराना छुनिश्वित Bea | 5. यदि विपक्षी द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है. तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि वह TH थू-सम्पदा विनियागक प्राधिकरण में निष्पादन प्रक्रिया के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन करा TPT | 6. आदेश को पोर्टल पर अपलोड किया जाये। 7. पत्रावली अभिलेखायार में दाखिल की जाये/” अतः उपर्युक्त आदेश के बिन्दु संख्या: 04 के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा vend यूनिट के सम्बन्ध में विपक्षी कम्पनी को मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा अंतिम आदेश पारित करने के उपरान्त 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता के पक्ष में रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने हेतु आदेशित किया जा चुका है। अत: शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत शिकायत में माँगा गया रजिस्ट्रेशन ऑफ सेल डीड,/ HRA निष्पादित कराये जाने के अनुतोष को उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में पुनः निर्णीत किया जाना न्यायोचित न होगा।
अतः उपर्युक्त समस्त तथ्यों के आलोक में मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेश, दिनांक 06—t0—2022 के आदेश के बिन्दु संख्या: 04 का विपक्षी कम्पनी द्वारा यदि वर्तमान समय तक कोई अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया गया हो, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता, sat आदेश के बिन्दु संख्या: 04 का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित कराये जाने हेतु, धारा-40(2) सपठित नियम-24 के अन्तर्गत मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष लिखित प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करते हुए, उक्त आदेश का क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने हेतु स्वतन्त्र हैं। जहाँ तक शिकायतकर्ता द्वारा जीएसटी eye क्रेडिट का लाभ दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इस सम्बन्ध में विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह प्रश्नगत प्रकरण में यूनिट के सापेक्ष उनके द्वारा जी.एस.टी. के मद में किस दर से धनराशि प्राप्त की गयी है एवं “eye क्रेडिट” क्लेम लिया गया है अथवा नहीं तथा प्रो-रेटा के आधार पर शिकायतकर्ता का क्या अंश देय था, इन्हें “चार्टेड अकाउण्टेंट” से 45 दिनों में प्रमाणित कराकर शिकायतकर्ता को रेरा प्राधिकरण द्वारा समस्त रियल wee प्रमोटर्स एवं नियल एस्टेट एजेन्ट्स को निर्गत पत्र संख्या: 242 / FART / 2024-25, दिनांक 08--04-2025 के साथ संलग्न जी.एस.टी. दरों की सूची के अनुसार उपर्युक्तानुसार जी.एस.टी. की Page 5 of 6 E-Court कर, यदि कोई “Eye क्रेडिट” प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में क्लेम किया गया हो, तो तद्नुसार अपेक्षित धनराशि मय ब्याज शिकायतकर्ता को वापस करें। तदनुसार उक्त बिन्दु Peake किया जाता है। उपर्युक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है:- आदेश
\. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह प्रश्नगत प्रकरण में यूनिट के सापेक्ष उनके द्वारा जी.एस.टी के मद में किस दर धनराशि से प्राप्त की गयी है एवं “इन्पुट क्रेडिट” gen लिया गया है अथवा नहीं तथा प्रो-रेटा के आधार पर शिकायतकर्ता का क्या अंश देय था, इन्हें “चार्टेड अकाउण्टेंट” से 45 दिनों में प्रमाणित कराकर शिकायतकर्ता को उक्त स्थिति स्पष्ट करें व तद्नुसार यदि कोई “इनपुट क्रेडिट” प्रश्ननत यूनिट के सम्बन्ध में क्लेम किया गया हो, तो तद्नुसार अपेक्षित धनराशि मय ब्याज शिकायतकर्ता को वापस करें। 2. प्रश्नगत शिकायत में विपक्षी को जी.एस.टी. के सम्बन्ध में यह भी स्पष्ट रूप से निर्देशित किया जाता है कि रेरा पोर्टल पर अपलोडेड समस्त प्रमोटर्स (विकासकताओं) द्वारा आवंटियों से जमा कराई जाने वाली जी.एस.टी. के दरों के सम्बन्ध में जारी पत्र संख्या: 242 / यू पी. WI // 2024-25, दिनांक 08—-04—2025 के संलग्न जी.एस.टी. के तहत रियल एस्टेट कराधान में देय दर प्राविधानित/ निर्धारित है, के अनुसार ही जी.एस.टी. के मद में धनराशि प्राप्त करना सुनिश्चित करेंगें, अन्यथा विपक्षी के विरूद्ध विधिनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। 3, विपक्षी आदेश अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर आदेश का अनुपालन करना सुनिश्चित करें। 4... इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा।
5... शिकायतकर्ता को यह भी निर्देशित किया जाता है कि यदि 45 दिनों के अन्दर विपक्षी द्वारा उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन कराये जाने हेतु अनुरोध अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। TEAR पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। दिनांक: 4-09-2025. (संजय BR j अध्यक्ष, 3. RI Page 6 of 6