Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rajeev Sharma v. Panchsheel Buildtech Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/11/102578/2022
- Decision date
- 2026-04-22
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | पीठ-3 रेक्टिफिकेशन आदेश अन्तर्गत धारा-39 शिकायत संख्या :- Sect-39/I/NCRI44/I4/02578/2022 राजीव शर्मा बनाम पंचशील fiesta प्राइवेट लिमिटेड, वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा धारा-39 के अन्तर्गत संशोधन प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा सुनवाई दिनांक 6.02.2026 को कथन किया गया कि वह अपने प्रार्थना पत्र में उल्लेखित बिंदु संख्या-। व 4 को नोट प्रेस कर रहे है तथा केवल बिंदु संख्या 2 व 3 पर बहस प्रस्तुत कर रहे है। शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल प्रार्थना पत्र के बिंदु संख्या 2 में उललेखित किया गया है कि पीठ द्वारा पारित मूल आदेश के बिंदु संख्या 2 के ऑपरेटिव पार्ट में दिनांक 07.06.20:6 से 03.04.20:7 तथा दिनांक 0१.05207 से विलम्बित अवधि के ब्याज की गणना किये जाने के आदेश पारित किये गये है जिस कारण से दिनांक 04,0420:7 से 30.04.2047 के ब्याज की अवधि बिना किसी कारण आदेश में अंकित नही हो पायी है जोकि क्लैरिकल feo है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा बिंदु संख्या 3 में यह उललेखित किया गया है कि पीठ द्वारा अपने आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विपक्षी अनुबंध के अनुसार वादा की गयी सुविधाएं शिकायतकर्ता को उपलब्ध करायें अन्यथा शिकायतकर्ता से प्राप्त अतिरिक्त धनराशि रू 8,67,523/- शिकायतकर्ता को वापस करें। अतः शिकायतकर्ता द्वारा पीठ द्वारा पारित मूल आदेश में उपरोक्त संशोधन किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल प्रार्थना पत्र पर आपत्ति दाखिल की गयी है जिसमें यह उल्लेखित है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रार्थना पत्र में चाहे गये संशोधन रेरा अधिनियम की धारा-39 की परिधि में नही है क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा चाहे गये संशोधन से आदेश के सारवान भाग में परिवर्तन हो जायेगा। विपक्षी द्वारा सुनवाई दिनांक t6.02.2026 को कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा केवल प्रार्थना पत्र के बिंदु संख्या 2 मे चाहा गया संशोधन स्वीकार किये जाने योग्य है। शिकायतकर्ता की ओर से संशोधन प्रार्थना पत्र रेश अधिनियम की धारा-39 के अन्तर्गत दिनांक 30. 09.2025 को योजित किया गया है। जबकि पीठ द्वारा INT-34 के अन्तर्गत आदेश दिनांक 09.09.2025 को पारित किया गया है। इस प्रकार शिकायतकर्ता की ओर से पस्तुत संशोधन प्रार्थना पत्र रेरा अधिनियम की धारा-39 में प्राविधानित 2 वर्ष की अवधि के भीतर है। न्यायालय द्वारा पारित अंतिम आदेश में त्रुटि परिशोधन,संशोधन हेतु भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 की धारा-39 में निम्नवत् प्रावधान किया गया है :- —
प्राधिकरण, अभिलेखों से प्रकट किसी गलती को सुधारने की दृष्टि से, इस अधिनियम की अधीन किये गये आदेश की तारीख से दो वर्ष की अवधि के भीतर किसी समय, उसके द्वारा पारित किसी आदेश को संशोधित कर सकेगा और यदि पक्षकारों द्वारा उसके ध्यान में गलती लायी जाती है तो ऐसा संशोधन करेगा | परन्तु ऐसा कोई संशोधन किसी आदेश के सम्बंध में, जिसके flee इस अधिनियम के अधीन अपील प्रस्तुत की गयी है, नहीं किया जायेगा। परन्तु यह कि प्राधिकरण अभिलेख से प्रकट किसी गलती का सुधार करते समय, इस अधिनियम के उपबन्ध के अधीन पारित उसके आदेश के सारवान् भाग का संशोधन नहीं करेगा। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों का अवलोकन किया गया जिससे यह विदित है कि पीठ द्वारा पारित मूल आदेश दिनांकित 09.09.2025 के विंदु संख्या 2 में पीठ द्वारा विपक्षी को दिनांक 07.06.20:6 से दिनांक 03.04.207 तक अनुबंधानुसार तथा दिनांक 07.05.207 से MCLR + % की दर से ब्याज का भुगतान शिकायतकर्ता को किये जाने के आदेश पारित किये गये है। यहाँ यह स्पष्ट किया जाता है कि पीठ द्वारा पारित मूल आदेश के बिंदु संख्या 2 में अंकित तिथि 30.04.20I7 के स्थान पर 03.04.20i7 अंकित हो गयी है जोकि रेरा अधिनियम की धारा-39 के अनुसार लिपिकीय त्रुटि होने के कारण संशोधित किये जाने योग्य है। ऐसे में पीठ द्वारा शिकायत संख्या NCRI44/74/02578/2022 में रेश अधिनियम की धारा 3 के अन्तर्गत दिनांक 09.09.2025 को पारित आदेश के बिंदु संख्या 2 में अंकित तिथि 03.04.20:7 के स्थान पर 30.04.2047 संशोधन किया जाना न्यायोचित होगा।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा प्रार्थना पत्र के माध्यम से जो अन्य संशोधन चाहा गया है वह WT अधिनियम की परिधि से बाहर है क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा चाहे गये अन्य संशोधन से आदेश के सारवान भाग में परिवर्तन हो जायेगा। अतः: शिकायतकर्ता का रेक्टिफिकेशन प्रार्थना पत्र धारा-39 की परिधि के अन्तर्गत तक स्वीकार करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है :- 4. पीठ द्वारा दिनांक 09.09.2025 को पारित आदेश के पृष्ठ-08 में उल्लेखित आदेश के बिंदु संख्या 02 में वर्णित अनुबंधानुसार विलम्बित अवधि के ब्याज की तिथि 07.06.2076 से 03.04.2047 के स्थान पर 04.06.2046 से 30.04.2047 पढ़ा VT | शेष आदेश यथावत् रहेगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये | पत्रावली दाखिल दफ्तर हो। 6S 5 Keo) sn की /8०.. मल कल 2 ere 5७2७ (डा० दीपक स्वरूप सकतेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण