Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Jay Kumar Motwani v. Ar Landcraft LLP
Complaint No. NCR144/11/102541/2022
- Decision date
- 2026-01-20
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:-- slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य | क्रम शिकायत संख्या | | यूनिट न0 | जमा घनराशि Go Gite टू... कब्जा दिये | वांछित ष हु . हि सब-लीज की | जाने की तिथि तिथि | . | ४८२।44//0254॥/2022 | जय कुमार V5-036 | रु0 2,4,80,659 // | 37.04.208 | मार्च 20200 | यूनिट का मोटवानी कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम ए आर लैण्डक्राप्ट एलएलपी शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट ar कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने eq ae शिकायत संस्थित-की गयी है। - संक्षेप में शिकायतकर्ततोँ का wert है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना 0«# में यूनिट संख्या ४.5-036 बुक.-करायी.गयी..थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि bo 2,4,80,659,/-का भुगतान fea गया। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर ue उल्लिखित किंया गया है कि विपक्षी द्वारा सितम्बर 2024 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था जो अभी तक नहीं दिया गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना के सापेक्ष जुलाई 2024 में ओ.सी हेतु आवेदन किया गया है परन्तु अभी तक विपक्षी को ओ.सी प्राप्त नहीं हुआ है। अतः शिकायत॒कर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। . | शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में आवेदन फार्म, whic हूं सब-लीज व eee aie एकाउंट की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- —_s=: 4
क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि [संख्या (रु0) विपक्षी द्वारा जारी- स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट 25.0.2024 BO 2,44,80,659 / 3226 विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति दाखिल की गयी जिसमें विपक्षी द्वारा यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा तथ्यों को छिपाते हुए वर्तमान शिकायत दर्ज करायी गयी है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी की परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है।
इस . सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा न््यायनिर्णायक अधिकारी* द्वारा शिकायत संख्या एडीजे / vations 44 / 07 / 97084 / 2022 प्रिंयका शर्मा बनाम ए आर लैण्डक्राफ्ट एलएलपी में पारित आदेश जिसमें फोर्स मैज्योर को प्रभावी माना गया है। विपक्षी द्वारा ओसी हेतु आवेदन किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा आवेदन फार्म दिनांक t9.:220:6 के माध्यम से यूनिट बुक करायी गयी थी। विपक्षी द्वारा दिनांक 49.2.206 को विला संख्या वी5-036 शिकायतकर्ता के पक्ष में आवंटित की गयी। विपक्षी द्वारा आवंटित यूनिट के सापेक्ष दिनांक 30.0:.208 wt We टू सब-लीज शिकायतकर्ता के पक्ष में निष्पादित की -गयी। विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में एग्रीमेंट टू सब लीज-डीड में उल्लिखित aero 4.2 का उल्लेख किया गया है। अनुबंध के worst 4.2 के अनुसार शिकायतकर्ता को मार्च 2024 तक कब्जा fear जाना था परन्तु परियोजना पूर्ण करने तथा कब्जा प्रदान करने में जो विलम्ब हुआ है, वह अनिवार्य बाघ्यताओं (force majeure) की परिस्थितियों के कारण हुआ है। कोविड महामारी के कारण यूपी.रेरा प्राधिकरण द्वारा दिनांक 06.06.2020 को उन परियोजनाओं के लिए जिनकी पूर्णता'तिथि 25.03.2020 को या उसके बाद समाप्त हो गई थी, परियोजना पूर्णता तिथि 6 माह बढा दी गयी। विपक्षी की परियोजना पूर्ण किये जाने की तिथि 07.03.202i थी परन्तु 6 माह बढाये जाने के कारण परियोजना पूर्ण किये जाने की तिथि 22.09.2024 थी। विपक्षी का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा निर्माण कार्य पूर्ण करने तथा सभी आवश्यक अनुमोदन प्राप्त कर अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए अधिकृत प्राधिकरण. के समक्ष दिनांक १2.. 07.2024 को आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि मई 200: में कोरोना महामारी के द्वितीय aa के कारण प्राधिकरण द्वारा उन
2 — SS
परियोजनाओं को पुनः विस्तार की स्वीकृति प्रदान की गयी जिन परियोजना में निर्माण कार्य कोविड-49 के कारण बाधित हुआ था। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा ओसी जारी किये जाने में विलम्ब के चलते विपक्षी द्वारा परियोजना विस्तार समाप्त होने से पूर्व रेरा प्राधिकरण के समक्ष 7 माह के समय विस्तार के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया जिस समय अवधि में उनके द्वारा परियोजना में फिनिशिंग कार्य किया जाना है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि कोविड महामारी के चलते निर्माण सामग्री के बढ़े दामों तथा श्रमिकों की कमी के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया. ' गया है कि उनके द्वारा समय समय पर ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के सीईओ को ओ.सी जारी किये जाने हेतु पत्र लिखा गया तथा परियोजना में आवंटियों को कब्जा उपलब्ध कराये जाने की अनुमति चाही गयी परन्तु उनके द्वारा कोई जवाब प्रेषित नहीं किया गया जिस कारण उनके द्वारा पुनः दिनांक 6.06.2022 व 07.4. 2022 को भी ओ.सी जारी किये जाने के संम्बन्ध में पत्र प्रेषित किये गये। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि उन्हें परियोजना के सापेक्ष सभी वांछित अनापित्त प्रमाण पत्र प्राप्त है तथा उनके द्वारा समय अवधि में परियोजना पूर्ण कर ओ.सी हेतु आवेदन किया गया है परन्तु विपक्षी ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा ओ.सी प्रदान न किये जाने के कारण कब्जा दिये जाने में विलम्ब हुआ है। ओ.सी. : जारी न किये जाने में जो विलम्ब हुआ है वह विपक्षी के नियत्रंण से बाहर का है जिस कारण उक्त के लिए विपक्षी को दोषी नहीं है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा Bo 30545:5/ar भुगतान किया जाना शेष है। शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने में विलम्ब किया जा रहा है। विपक्षी द्वारा दिनांक 42.03.2024 को शिकायतकर्ता को प्री-टर्मिनेशन लेटर भेजा गया। विपक्षी द्वारा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता ori मैज्योर होने के कारण विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी नहीं है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि ओ-सी प्राप्त होते ही शिकायतकर्ता को कब्जा प्रस्ताव भेजा जाएगा। विपक्षी को वांछित अनापत्ति प्रमाण | पत्र प्राप्त हों चुके है तथा विपक्षी द्वारा ओसी हेतु आवेदन किया जा चुका है। ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा न तो ओ.सी हेतु आवेदन को निरस्त किया गया है
3 —_—_— और न ही प्राधिकरण द्वारा ओसी जारी किया गया है। अतः विपक्षी ने उपरोकतः तथ्यों के आधार पर शिकायत अर्थदंण्ड के साथ निरस्त किये जाने का अनुरोध किया है। विपक्षी ने लिखित आपत्ति के समर्थन में आवेदन फार्म की प्रति, आवंटन-पत्र की प्रति, एग्रमेंट टू सब-लिज Sts की प्रति, यू.पी.रेरा आदेश दिनांक "06.06.2020 व 48.08.2024 की प्रति, अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन दिनांक 72.07. 2024 व प्री-टर्मिनेशन लेटर, वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्रों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। उक्त के अतिरिक्त विपक्षी द्वारा लिखित बहस दाखिल की गयी है जिसमें लिखित जवाब की पुनवृत्ति के साथ फोर्स मैज्योर का उल्लेख किया गया है। उभयपक्षों के तर्को को सुना गया। . ह . उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्ता को Han vd विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? . यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ?. निस्तारण प्रश्न Wet प्रश्न संख्या-7 इस आशय-का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर seca होने के कारण विलम्बित हुई? यह. प्रश्न विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी : पर है। विपक्षी की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया है कि कोविड-49 महामारी व अन्य फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विंलम्बित हुई है। * फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि a, ह a
“ प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।” . माननीय सर्वोच्च न्यायालय ' द्वारा. सिविल अपील संख्या: 43029 /4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04--44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029/4985 में पारित आदेश दिनांक 09--42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “in the affidavit dated 05.42.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"2. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered Opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00: + pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.” ~ माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा, (दिनांक o4—-t-20I9 से दिनांक 44-02—2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-2049 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च +
न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-44-2049 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन(6652) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 74-02-2020 तक aa 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि var अवधि विपक्षी के. नियन्त्रण से बाहर थी. : तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। अधिकारी है। इसके अतिरिक्त कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्तः * अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के -काश्ण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। | उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-4 Peake किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2:- प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है
कि ga शिक्रायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि or ब्याज दिलाया जाये? . यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? - शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त vat यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य एग्रीमेंट टू सब-लीज दिनांक 32.0:.20:8 को निष्पादित हुआ। शिकायतकर्ता को एग्रीमेंट टू सब लीज के अनुसार यूनिट का कब्जा मार्च 2024 में प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। यहाँ यहं स्पष्ट किया जाता है कि प्रकरण में विपक्षी द्वारा दाखिल एग्रीमेंट टू सब लीज पर केवल विपक्षी बिल्डर व शिकायतकर्ता द्वारा हस्ताक्षर किये गये है तथा एग्रीमेंट टू सब लीज पर रजिस्ट्रार के कार्यालय में रजिस्ट्रर्ड होने का कोई. साक्ष्य अंकित नहीं है। | | विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण विपक्षी द्वारा दिनांक 2.03.2024 को प्री-टर्मिनेशन लेटर भेजा गया परन्तु विपक्षी द्वारा अंतिम रूप से यूनिट निरस्त किये जाने का कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में यह भी तर्क प्रस्तुत किया गया है कि सक्षम प्राधिकरण से ओ.सी प्राप्त होते ही शिकायतकर्ता को कब्जा प्रस्ताव भेजा जाएगा। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त नहीं की गयी है। ॥ . पत्रावली पर were प्रपत्रों से यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी को परियोजना के सापेक्ष दिनांक 46.07.2024 को ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण से ओससी प्राप्त हो चुका है।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में लगभग 03 से अधिक का विलम्ब किया गया है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। रेरा अधिनियम की धारा-48() में प्राविधान है कि :- in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (a (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the 7 SS case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed". उपरोक्त वर्णित प्राविधान में यह स्पष्ट है कि शिकातकर्ता को यह अधिकार
है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी. जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस मांग सकते है अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उपरोक्त विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा मार्च 202। में प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी ने लिखित आपत्ति में यह स्वीकार किया है कि परियोजना विलम्बित हुयी है। विपक्षी की ओर से ओ.सी प्राप्त होने का कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है। अतः शिकायत्तकर्ता को यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील vio 6649-50 /2048 "'सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the + admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession है
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. / सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- ' "Section | 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the : . r " apartment is handed over to him is not unreasonable. ",
अतः उपरोक्त निर्णय के sree में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2006 के अधीन दिनांक 47.020I8 को. भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पटटा के लिए करार) नियमावली 20:8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o.2(ii) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal » Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +\% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice यही दर आवंटियों के द्वारा 'डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ८,२+।प्रतिशत 9 चना जन्म.
की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता » है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि. यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी McLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का -अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश ।. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष' धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं ar पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय REPT शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2, विपक्षी द्वारा विलम्ब ब्याज 'शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04202i से aA /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि WO 2,44,80,659,// पर MCLR+I प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धन्तराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार प्रत्येक शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। Prat wer संख्या 4 के अनुसार फोर्स मैज्योर “पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 28.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की
जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा Aza\(is अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा 40 ह ह हि —— म्ल्डड-- डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी |४८,२+] प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। - इस आदेश का Voor भू-सम्प्रदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिनों में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता आदेश का क्रियान्वयन रेरा प्राधिकरण के माध्यम से करा सकेंगे | ह आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। _ ys 7 ०.० 20 2G (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा*विनियामक प्राधिकरण गौतमंबुद्धनगर ai